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अधूरा ख्वाब ❤️

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Summary

“उसने जाते-जाते सिर्फ इतना कहा था—‘अगर किस्मत ने चाहा, तो हम फिर मिलेंगे।’” “लेकिन मुझे क्या पता था कि उसका जाना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द और सबसे खूबसूरत इंतजार बन जाएगा…”

Status
Complete
Chapters
1
Rating
n/a
Age Rating
16+

Chapter 1

“उसने जाते-जाते सिर्फ इतना कहा था—’अगर किस्मत ने चाहा, तो हम फिर मिलेंगे।’” “लेकिन मुझे क्या पता था कि उसका जाना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द और सबसे खूबसूरत इंतजार बन जाएगा…”


अध्याय 1: पहली नज़र का जादू

उत्तराखंड की हसीन वादियों में बसा एक छोटा सा शहर था—नैनीताल।

वहीं रहता था कबीर

कबीर एक साधारण लड़का था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। उसे कहानियां लिखना पसंद था। उसकी डायरी में अधूरी कहानियों का ढेर लगा रहता था।

एक दिन शहर की सबसे पुरानी लाइब्रेरी में उसकी मुलाकात सान्वी से हुई।

सान्वी खिड़की के पास बैठी कोई उपन्यास पढ़ रही थी।

उसके खुले बाल हवा में लहरा रहे थे।

कबीर पहली बार किसी को देखकर अपनी किताब का पन्ना पलटना भूल गया।

जब सान्वी ने उसकी तरफ देखा, तो वो मुस्कुरा दी।

और शायद उसी पल कबीर का दिल हार गया।


अध्याय 2: दोस्ती जो प्यार बन गई

अगले कुछ हफ्तों में दोनों अक्सर लाइब्रेरी में मिलने लगे।

धीरे-धीरे किताबों की बातें जिंदगी की बातों में बदल गईं।

कभी झील किनारे कॉफी...

कभी पहाड़ों पर सूर्योदय देखना...

कभी घंटों फोन पर बातें...

दोनों एक-दूसरे की दुनिया बनते जा रहे थे।

एक दिन सान्वी ने पूछा—

"कबीर, तुम्हारा सबसे बड़ा सपना क्या है?”

कबीर मुस्कुराया।

"एक ऐसी कहानी लिखना, जिसे लोग कभी भूल न सकें।"

"और अगर तुम्हारी जिंदगी ही सबसे खूबसूरत कहानी बन जाए तो?”

कबीर उसकी आंखों में देखने लगा।

उस दिन पहली बार दोनों की खामोशी ने प्यार का इज़हार किया।


अध्याय 3: वो बारिश वाली शाम

जुलाई की एक शाम तेज बारिश हो रही थी।

दोनों झील किनारे एक छोटे से कैफे में बैठे थे।

बाहर बारिश की बूंदें पानी पर छोटे-छोटे घेरे बना रही थीं।

सान्वी ने अचानक अपना हाथ कबीर के हाथ पर रख दिया।

"अगर मैं एक दिन अचानक चली जाऊं तो?”

कबीर हंस पड़ा।

"तुम फिल्मों की तरह बातें क्यों करती हो?”

लेकिन सान्वी नहीं हंसी।

उसकी आंखों में अजीब सी उदासी थी।

"बस वादा करो कि मुझे भूलोगे नहीं।"

कबीर ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।

"तुम्हें भूलना मेरी जिंदगी की सबसे मुश्किल चीज होगी।"


अध्याय 4: एक खत जिसने सब बदल दिया

कुछ दिनों बाद कबीर अपने घर पहुंचा तो दरवाजे के नीचे एक लिफाफा पड़ा था।

वो सान्वी की लिखावट थी।

कांपते हाथों से उसने खत खोला।

उसमें लिखा था—

"कबीर, मुझे जाना होगा। शायद हमेशा के लिए। मुझे मत ढूंढना। अगर किस्मत में हुआ, तो हम फिर मिलेंगे।"

कबीर के पैरों तले जमीन खिसक गई।

उसने तुरंत फोन किया।

फोन बंद।

घर गया।

घर खाली।

पड़ोसियों ने बताया कि सान्वी और उसका परिवार रातों-रात शहर छोड़कर चले गए।

उस दिन कबीर की जिंदगी का सबसे खूबसूरत सपना अधूरा रह गया।


अध्याय 5: अधूरी मोहब्बत

समय गुजरता गया।

एक साल...

दो साल...

तीन साल...

कबीर अब एक सफल लेखक बन चुका था।

उसकी किताबें बिकने लगी थीं।

लेकिन हर किताब में एक किरदार जरूर होता था—

सान्वी जैसा।

उसकी हर कहानी में एक अधूरा प्यार होता था।

लोग उसकी कहानियों की तारीफ करते।

लेकिन कोई नहीं जानता था कि उन कहानियों के पीछे कितना दर्द छुपा है।


अध्याय 6: Suspense Begins...

एक रात कबीर को एक ईमेल मिला।

Subject में सिर्फ दो शब्द लिखे थे—

"अधूरा ख्वाब"

उसका दिल जोर से धड़कने लगा।

मेल में एक फोटो थी।

झील किनारे वही पुराना कैफे।

और फोटो के कोने में खड़ी एक लड़की...

जो बिल्कुल सान्वी जैसी दिख रही थी।

नीचे सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

"कुछ कहानियां खत्म नहीं होतीं...”


अध्याय 7: तलाश

अगले ही दिन कबीर उस शहर पहुंच गया जहां से मेल भेजा गया था।

वहां उसने हर जगह सान्वी को ढूंढा।

लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

फिर एक बुजुर्ग किताबों की दुकान वाले ने उसे एक डायरी दी।

"ये लड़की तुम्हारे लिए छोड़ गई थी।"

कबीर के हाथ कांप गए।

डायरी के पहले पन्ने पर लिखा था—

"अगर तुम ये पढ़ रहे हो, तो इसका मतलब है कि तुमने मेरा इंतजार नहीं छोड़ा।"

उसकी आंखें नम हो गईं।


अध्याय 8: सबसे बड़ा सच

डायरी में सान्वी की पूरी कहानी लिखी थी।

दरअसल, उसके पिता एक गंभीर कानूनी मामले में फंस गए थे।

परिवार को अचानक शहर छोड़ना पड़ा।

उनकी जिंदगी खतरे में थी।

सान्वी चाहती थी कि कबीर सुरक्षित रहे।

इसलिए उसने बिना कुछ बताए दूरी बना ली।

लेकिन वो कभी उसे भूल नहीं पाई।

हर साल उसके जन्मदिन पर वो उसकी किताब खरीदती थी।

हर इंटरव्यू देखती थी।

और हर नई कहानी पढ़ती थी।


अध्याय 9: आखिरी मुलाकात

डायरी के आखिरी पन्ने पर एक पता लिखा था।

कबीर वहां पहुंचा।

वो एक पहाड़ी घर था।

सामने फूलों का छोटा सा बगीचा।

और बरामदे में खड़ी एक लड़की।

कबीर की सांसें थम गईं।

वो सान्वी थी।

सालों बाद भी उसकी मुस्कान वैसी ही थी।

दोनों कुछ सेकंड तक बस एक-दूसरे को देखते रहे।

फिर सान्वी की आंखों से आंसू बह निकले।

"तुम सच में आ गए...”

कबीर मुस्कुराया।

"कुछ अधूरे ख्वाब पूरे करने पड़ते हैं।"


अध्याय 10: मोहब्बत की जीत

सान्वी दौड़कर उसके गले लग गई।

सालों का इंतजार...

सालों का दर्द...

सालों की अधूरी बातें...

सब आंसुओं में बह गया।

उस शाम दोनों उसी पहाड़ी पर बैठे जहां से पूरा शहर दिखाई देता था।

सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था।

सान्वी ने पूछा—

"अगर मैं फिर से खो गई तो?”

कबीर हंस पड़ा।

"इस बार पूरी दुनिया ढूंढ लूंगा।"


Epilogue ❤️

एक साल बाद...

कबीर की नई किताब प्रकाशित हुई।

उसका नाम था—

"अधूरा ख्वाब"

बुक लॉन्च के मंच पर कबीर ने कहा—

"ये कहानी उस लड़की के नाम है, जिसने मुझे सिखाया कि सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता। वो बस सही वक्त का इंतजार करता है।"

पहली पंक्ति में बैठी सान्वी मुस्कुरा रही थी।

उसकी आंखों में वही चमक थी...

जो सालों पहले लाइब्रेरी की खिड़की के पास थी।

कबीर मंच से नीचे उतरा।

उसने सान्वी का हाथ थामा।

और इस बार...

उसने उसे जाने नहीं दिया।

क्योंकि कुछ ख्वाब अधूरे रहकर खूबसूरत लगते हैं...

लेकिन जब वो पूरे हो जाते हैं, तो जिंदगी बन जाते हैं। ❤️✨

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