Chapter 1 — एक नई शुरुआत
रात बहुत शांत थी।
आसमान में चमकता हुआ चाँद था और खिड़की से आती ठंडी हवा पर्दों को धीरे-धीरे हिला रही थी।
यून हा-रिन खिड़की के पास बैठी चाँद को देख रही थी। उसके हाथ में एक छोटा-सा आधे चाँद का लॉकेट था।
यह लॉकेट उसे उसकी माँ ने दिया था।
माँ के जाने के बाद हा-रिन ने उसे हमेशा अपने गले में पहना था।
उसने धीरे से लॉकेट को छुआ।
अचानक लॉकेट हल्का-सा गर्म हो गया।
हा-रिन चौंक गई।
“ये… अचानक गर्म कैसे हो गया?”
उसने लॉकेट को ध्यान से देखा। कुछ पल बाद वह फिर बिल्कुल सामान्य हो गया।
हा-रिन ने धीरे से चाँद की तरफ देखा।
“क्या तुम मुझे कुछ बताना चाहते हो?”
उसे खुद नहीं पता था कि उसने ऐसा क्यों कहा।
लेकिन उसके दिल में एक अजीब-सी बेचैनी थी।
जैसे कोई उसे ढूँढ रहा हो।
अगली सुबह हा-रिन जल्दी उठ गई।
छोटे-से कमरे में उसकी सबसे अच्छी दोस्त सू-जी अभी सो रही थी।
हा-रिन ने चुपचाप अपना बैग तैयार किया। टेबल पर उसके पिता की दवाइयाँ रखी थीं।
उसने उन्हें देखते हुए लंबी साँस ली।
उसके पिता कैंसर से लड़ रहे थे।
और उसकी माँ अब इस दुनिया में नहीं थीं।
इसलिए घर की सारी जिम्मेदारियाँ धीरे-धीरे हा-रिन के कंधों पर आ गई थीं।
सू-जी की नींद खुली।
“हा-रिन, तुम फिर नौकरी ढूँढने जा रही हो?”
हा-रिन ने हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाया।
“हाँ। इस बार मुझे नौकरी मिल जाएगी।”
सू-जी ने उसे ध्यान से देखा।
“तुम अकेले सब कुछ संभालने की कोशिश मत किया करो।”
हा-रिन कुछ नहीं बोली।
उसने बस अपने गले में पहने लॉकेट को ठीक किया।
“मुझे करना ही होगा।”
शहर के दूसरे हिस्से में एक शानदार ऊँची इमारत थी।
वह शहर की सबसे बड़ी और सबसे लोकप्रिय गेमिंग कंपनी का मुख्यालय था।
उस कंपनी का CEO था—कांग जी-हो।
बहुत अमीर, शांत और बेहद प्रभावशाली।
कंपनी की नींव उसके दादाजी ने रखी थी और आज वह देश की सबसे सफल गेमिंग कंपनियों में से एक थी।
जी-हो अपने ऑफिस की बड़ी खिड़की के सामने खड़ा शहर को देख रहा था।
तभी दरवाज़ा खुला।
“जी-हो, आज तुम्हारी तीन मीटिंग्स हैं।”
यह उसका assistant और सबसे अच्छा दोस्त डो-ह्यून था।
जी-हो ने बिना पीछे देखे पूछा,
“पहली मीटिंग कितने बजे है?”
“दस बजे।”
“ठीक है।”
डो-ह्यून ने उसे ध्यान से देखा।
“तुम फिर रात भर नहीं सोए?”
जी-हो ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसकी उंगलियाँ अपने गले में पहने लॉकेट पर थीं।
एक आधे चाँद का लॉकेट।
वह लॉकेट उसे उसके दादाजी ने कई साल पहले दिया था।
जी-हो को कभी समझ नहीं आया कि उसके दादाजी इस छोटे-से लॉकेट को लेकर इतने गंभीर क्यों थे।
लेकिन आज…
उसे भी वह लॉकेट कुछ अलग महसूस हो रहा था।
अचानक लॉकेट हल्का-सा गर्म हो गया।
जी-हो ने भौंहें सिकोड़ लीं।
“ये क्या…”
डो-ह्यून ने पूछा,
“क्या हुआ?”
जी-हो ने लॉकेट को अपनी मुट्ठी में छिपा लिया।
“कुछ नहीं।”
दोपहर तक हा-रिन कई जगह नौकरी के लिए आवेदन कर चुकी थी।
लेकिन कहीं से भी सकारात्मक जवाब नहीं आया।
थकी हुई वह सड़क के किनारे बैठ गई।
तभी उसकी नज़र सामने लगी एक बड़ी स्क्रीन पर पड़ी।
उस पर उसी गेमिंग कंपनी का विज्ञापन चल रहा था।
“हमारी टीम में शामिल हों।”
हा-रिन की आँखों में उम्मीद चमक उठी।
उसने तुरंत अपने फोन में कंपनी का नाम सेव किया।
“शायद… यही मेरा मौका है।”
एक तरफ हा-रिन अपने छोटे-से कमरे में नौकरी के लिए अपना रिज़्यूमे तैयार कर रही थी।
दूसरी तरफ जी-हो अपनी विशाल कंपनी के ऑफिस में अकेला बैठा था।
दोनों अपने-अपने काम में व्यस्त थे।
लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनके बीच एक चीज़ बिल्कुल समान थी।
वही आधे चाँद का लॉकेट।
उसी रात…
हा-रिन का लॉकेट फिर से गर्म हुआ।
उसी समय जी-हो ने भी अपने लॉकेट को महसूस किया।
दोनों ने एक साथ चाँद की तरफ देखा।
हा-रिन ने धीरे से कहा—
“ये इतना अजीब क्यों लग रहा है?”
और उसी पल जी-हो के मन में एक अनजाना सवाल आया—
“क्या मैं किसी चीज़ को भूल गया हूँ?”
आसमान में चाँद पहले से ज्यादा चमक रहा था।
जैसे वह दोनों को एक-दूसरे की तरफ खींच रहा हो।
लेकिन क्यों?
इस सवाल का जवाब अभी किसी के पास नहीं था।
कहानी अभी शुरू हुई थी|








