Prologue
"गाड़ी रोको!" उसने गिड़गिड़ाते हुए कहा, डर से उसकी आवाज़ कांप रही थी और बाहर की दुनिया रोशनी की लकीरों में धुंधली हो गई थी।
वह टस से मस भी नहीं हुआ, उसके हाथ स्टीयरिंग व्हील पर पूरी दृढ़ता से जमे हुए थे। इंजन की तेज़ गड़गड़ाहट में उसकी मिन्नतें दब गईं।
"प्लीज़!" वह चिल्लाई, उसकी आवाज़ भर्रा गई थी। "रुको! इतनी तेज़ रफ़्तार में हम ठुक जाएंगे!"
उसकी नज़रें उस पर पड़ीं, ठंडी और अडिग। "बोलो कि तुम मुझसे प्यार करती हो।"
उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कह रहा है। "क्या?" वह हकलाते हुए बोली, और उसका डर और बढ़ गया।
"मैंने कहा," उसने दोहराया, उसकी आवाज़ धीमी और धमकी भरी थी, "बोलो कि तुम मुझसे प्यार करती हो, तभी मैं रुकूंगा। वरना..." उसने एक्सीलेटर पर पैर और ज़ोर से दबाया, और गाड़ी खतरनाक रफ़्तार से आगे बढ़ गई।
उसकी आंखों में आंसू आ गए और उसने सीट को कसकर पकड़ लिया, उसके नाखून फैब्रिक में धंस गए। "तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? प्लीज, बस गाड़ी रोक दो!"
"बोलो!" वह दहाड़ा, उसकी आवाज़ तीखी और सख्त थी।
उसने बड़ी मुश्किल से थूक निगला, उसकी सांसें अटकी हुई थीं जब उसने कांपते होंठों से ये शब्द निकाले। "मैं तुमसे प्यार करती हूँ।"
उसके चेहरे पर एक धीमी, रूह कंपा देने वाली मुस्कान आ गई, उसकी आंखों में संतुष्टि चमक रही थी। बिना कुछ कहे, उसने एक्सीलेटर से पैर हटा लिया, और गाड़ी धीरे-धीरे धीमी होकर रुक गई।
उसके बाद छाई खामोशी कानफोड़ू थी, जिसे सिर्फ उसकी तेज़ और टूटी-फूटी सांसों ने तोड़ा। वह उसके और करीब झुका, और उसकी फुसफुसाहट से उसकी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई। "इतना भी मुश्किल नहीं था, है ना?"