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तुम सिर्फ मेरी हो

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सारांश

उसकी आवाज़ एक धीमी, मखमली सरसराहट जैसी थी, जिसमें एक खतरनाक तीव्रता घुली थी। वह और करीब झुका, उसकी चुभती नज़रें सीधे उसकी आँखों में गड़ी थीं। "तुम समझ नहीं रही हो, है ना?" उसने कहना शुरू किया, उसकी आवाज़ में धमकी और तड़प का अजीब सा मेल था। "मेरे लिए तुम सिर्फ एक औरत नहीं हो, रोज़। तुम वो औरत हो—इकलौती, जो मेरे लिए कभी मायने रखती है। मैं तुम्हारे हर हिस्से पर अपना हक़ जताना चाहता हूँ, जिस्म और रूह से। तुम्हें इतनी गहराई से, इतनी शिद्दत से प्यार करना चाहता हूँ कि इस दुनिया में किसी और के लिए कोई जगह ही न बचे।" उसने धीरे से आह भरी, उसके होंठ एक काली मुस्कान में सिमट गए। "तुम मेरी खूबसूरती हो, रोज़। वो रोशनी जिसे मैं अपने अंधेरे से बचाकर रखूँगा। और अगर तुम्हें पाने के लिए मुझे दरिंदा भी बनना पड़े, तो मंज़ूर है। मैं हर उस तरीके से तुम्हें अपना बनाऊँगा जो मायने रखता है, क्योंकि तुम्हें खोना? वह विकल्प ही नहीं है। न अब, न कभी।" ट्रिगर वार्निंग: टॉक्सिक, फोर्स, मैडनेस, मैनिपुलेशन, कंट्रोलिंग

शैली
Thriller/Romance
लेखक
petalrose
स्थिति
पूरी
अध्याय
62
रेटिंग
4.8 10 समीक्षाएँ
आयु रेटिंग
18+

Prologue

"गाड़ी रोको!" उसने गिड़गिड़ाते हुए कहा, डर से उसकी आवाज़ कांप रही थी और बाहर की दुनिया रोशनी की लकीरों में धुंधली हो गई थी।


वह टस से मस भी नहीं हुआ, उसके हाथ स्टीयरिंग व्हील पर पूरी दृढ़ता से जमे हुए थे। इंजन की तेज़ गड़गड़ाहट में उसकी मिन्नतें दब गईं।

"प्लीज़!" वह चिल्लाई, उसकी आवाज़ भर्रा गई थी। "रुको! इतनी तेज़ रफ़्तार में हम ठुक जाएंगे!"

उसकी नज़रें उस पर पड़ीं, ठंडी और अडिग। "बोलो कि तुम मुझसे प्यार करती हो।"

उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कह रहा है। "क्या?" वह हकलाते हुए बोली, और उसका डर और बढ़ गया।

"मैंने कहा," उसने दोहराया, उसकी आवाज़ धीमी और धमकी भरी थी, "बोलो कि तुम मुझसे प्यार करती हो, तभी मैं रुकूंगा। वरना..." उसने एक्सीलेटर पर पैर और ज़ोर से दबाया, और गाड़ी खतरनाक रफ़्तार से आगे बढ़ गई।

उसकी आंखों में आंसू आ गए और उसने सीट को कसकर पकड़ लिया, उसके नाखून फैब्रिक में धंस गए। "तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? प्लीज, बस गाड़ी रोक दो!"

"बोलो!" वह दहाड़ा, उसकी आवाज़ तीखी और सख्त थी।

उसने बड़ी मुश्किल से थूक निगला, उसकी सांसें अटकी हुई थीं जब उसने कांपते होंठों से ये शब्द निकाले। "मैं तुमसे प्यार करती हूँ।"

उसके चेहरे पर एक धीमी, रूह कंपा देने वाली मुस्कान आ गई, उसकी आंखों में संतुष्टि चमक रही थी। बिना कुछ कहे, उसने एक्सीलेटर से पैर हटा लिया, और गाड़ी धीरे-धीरे धीमी होकर रुक गई।

उसके बाद छाई खामोशी कानफोड़ू थी, जिसे सिर्फ उसकी तेज़ और टूटी-फूटी सांसों ने तोड़ा। वह उसके और करीब झुका, और उसकी फुसफुसाहट से उसकी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई। "इतना भी मुश्किल नहीं था, है ना?"

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अच्छा लेखन

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रोचक कथानक

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शानदार चरित्र

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सशक्त संवाद

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