1. द शैटर्ड क्राउन
|| लिलैक का दृष्टिकोण ||
"कृपया," मैंने फुसफुसाते हुए कहा, मेरी आवाज़ कांप रही थी, जो शायद ही एक सांस से ज़्यादा थी। "कृपया, उन्हें जाने दो।"
ये शब्द अजनबी और अप्राकृतिक लग रहे थे, जैसे कांच के टुकड़े मेरे गले को छील रहे हों। मैंने पहले कभी किसी के आगे गिड़गिड़ाना नहीं सीखा था, कभी किसी के लिए घुटनों पर नहीं आई थी। लेकिन उनके लिए—अपनी माँ के लिए, अपने पिता के लिए—मैं अपना मान-सम्मान सब त्याग सकती थी, अगर उन्हें बचाने का यही एक रास्ता होता, तो मैं अपना दिल भी छलनी करवा लेती।
काइल टस से मस नहीं हुआ।
मशाल की हिलती हुई रोशनी उसके चेहरे के सख्त कोनों और उसकी सुनहरी आँखों की तीक्ष्णता को उभार रही थी। एक समय था जब वे आँखें गर्म पिघले हुए सोने जैसी थीं, जो मुझ पर गहरे प्यार की तरह बरसती थीं। अब, वे खाली थीं, उनमें उदासीनता के सिवा कुछ नहीं बचा था।
मेरी उंगलियाँ मेरी हथेलियों में गड़ गईं, नाखून मांस में धंस रहे थे। मैं विश्वास करना चाहती थी कि वह हिचकिचा रहा है—कि उसकी उस ठंडी बाहरी परत के नीचे, वह इंसान अब भी जीवित है जिसे मैं कभी प्यार करती थी। वह व्यक्ति जिसने कसम खाई थी कि मैं हमेशा उसके लिए सबसे पहले रहूँगी।
झूठ। हर वादा, हर फुसफुसाहट, चांदनी में बिताया हर वो पल—सब एक बुना हुआ धोखा था, जो मेरी आँखों के सामने एक-एक धागा होकर उधड़ रहा था।
हवा में खून की गंध और धोखे की कड़वाहट घुली हुई थी। यह मेरी त्वचा से चिपक गई थी, मेरी हड्डियों तक उतर गई थी, जैसे यह पल मेरी आत्मा पर हमेशा के लिए अंकित हो जाए ताकि मैं इसे कभी न भूल सकूँ।
यह बड़ा हॉल, जो कभी खुशियों और रौनक से भरा होता था, अब किसी कब्र जैसा लग रहा था। शांत, दम घोटने वाला, और मेरे दुख का एक अपवित्र मंदिर। हमारे कबीले के इतिहास को दर्शाते संगमरमर के खंभे ऐसे झुक रहे थे जैसे वे भी इस हादसे का बोझ नहीं सह पा रहे हों। उसने उन सभी को मार डाला जो मेरे पिता के वफादार थे, जो अपनी रानी—यानी मेरे—वफादार थे।
मेरा दिल, जो कभी उम्मीद और भरोसे की धड़कन था, अब मेरे सीने में ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। हर धड़कन इस बात की दर्दनाक याद दिला रही थी कि मैं कितनी गहराई में गिर चुकी हूँ। दर्द शरीर के भीतर महसूस हो रहा था, जैसे पंजे मेरी पसलियों को खुरच रहे हों और अंदर गहराई तक धंस रहे हों।
यह सच नहीं हो सकता। ऐसा नहीं हो सकता। मेरा दिमाग दौड़ रहा था, किसी भी तरह इस बुरे सपने से जागने की कोशिश कर रहा था। लेकिन मेरे घुटनों के नीचे का ठंडा पत्थर, मुँह में खून का स्वाद और सीने का खालीपन—ये सब हकीकत थे।
मैंने नज़रें ऊपर उठाईं, और वहाँ वह खड़ा था—काइल रेवेनथॉर्न, अल्फा किंग। पाँच साल का मेरा पति। मेरा चुना हुआ साथी। वही इंसान जिसे मैं कभी अपनी आत्मा के हर हिस्से से प्यार करती थी।
मैंने उस पर विश्वास किया था। उसके लिए लड़ाई लड़ी थी। उसके लिए खून बहाया था। मैं उसके साथ खड़ी रही, उसे दुश्मनों, शक और नाकामी से बचाती रही। मैंने उसकी गलतियों को अपनी वफादारी के नीचे दबा दिया था, उसके धोखों को कड़वे घूँट की तरह पी लिया था, और खुद को यकीन दिलाया था कि प्यार का मतलब बलिदान होता है। कि वह इसके लायक है।
क्या वह वाकई लायक था?
क्या यह वही इंसान था जिसने कभी मेरी त्वचा पर वादे फुसफुसाए थे, मेरी रक्षा करने और ताउम्र प्यार करने की कसम खाई थी? या मैं ही शुरू से अंधी थी?
गले में उठ रहे दर्द को दबाते हुए मेरी सांसें अटक गईं। मेरा दिल चिल्लाने और जवाब माँगने को कह रहा था, उस इंसान को पुकारने को जिसे मैं जानती थी—पर मैं नहीं कर सकी। जब पूरे साम्राज्य ने मेरी बर्बादी देखी हो, तो मैं क्या करती? जब मेरा सम्मान मेरे पैरों में धूल बन चुका हो।
और वह वहीं खड़ा रहा। ठंडा। बेगाना। स्थिर।
जैसे मैं कुछ भी नहीं थी।
जैसे मेरा कोई अस्तित्व ही न हो।
उसकी बाहों में, किसी नाज़ुक चीज़ की तरह संजोकर रखी हुई थी कोको। वह रेशम में लिपटी थी, उसके काले बाल झरने की तरह उसके कंधों पर गिर रहे थे। वह बेहद खूबसूरत थी, पर मेरे लिए वह सिर्फ एक ज़हरीली नागिन थी जो रेशम और रहस्यों में लिपटी थी। उसके होंठों पर एक मुस्कान थी—जीत, क्रूरता और उस तबाही की मुस्कान जो उसने सिर्फ एक नज़र से ला दी थी। उसने मेरी ज़िंदगी के नाज़ुक धागों को बिना किसी मेहनत के तोड़ दिया था, और वह देख रही थी कि कैसे सब कुछ उसके पैरों में धूल बन रहा है।
उनके पीछे, कबीले के योद्धा बुत बने खड़े थे, उनके चेहरों पर कोई भाव नहीं थे। उनकी तलवारें मेरे माता-पिता की ओर तनी थीं। रॉयल बीटा परिवार के गर्वित योद्धा, मेरे माता-पिता घुटनों पर थे, हार से उनके सिर झुके थे। चांदी की जंजीरें उनके हाथों और पैरों में बंधी थीं, जादुई धातु उनकी त्वचा को जला रही थी और लाल निशान छोड़ रही थी।
उन्हें इस तरह टूटा हुआ और अपमानित देखकर मेरे दिल पर छुरा सा चल रहा था। मेरे पिता, जो कभी जंग के मैदान में भी अडिग खड़े रहते थे, अब अपनी शर्म के बोझ तले दबे थे। मेरी माँ की आँखें, जो हमेशा चमक और साहस से भरी होती थीं, अब खाली और उम्मीदहीन थीं। जिस महिला ने मुझे सिर उठाकर जीना सिखाया था, वह अब उस साम्राज्य में कैदी बनकर रह गई थी जिसे उसने अपनी जान देकर बचाया था।
मेरा गला रुंध गया, एक सिसकी बाहर आने को बेताब थी, पर मैंने उसे अंदर ही दबा लिया। मैं अभी नहीं टूट सकती थी।
"काइल," मैंने रुंधे गले से कहा, मेरा संयम अब टूटने लगा था। "कृपया... अगर तुमने कभी मुझे थोड़ा सा भी प्यार किया है, तो उन्हें छोड़ दो।"
कोको की हंसी खामोशी को चीरती हुई आई, तीखी और तंज भरी। "ओह, डार्लिंग," उसने मेरी तरफ देखते हुए सिर झुकाया। "प्यार का इससे कोई लेना-देना नहीं है।"
वह आगे बढ़ी, उसकी चाल में एक शिकारी की फुर्ती थी। उसके हाथ में एक खंजर था, जिसकी नोक धुंधली रोशनी में चमक रही थी। उसने उसे मेरी तरफ इशारा किया, उसकी आँखों में नफरत चमक रही थी।
"मैं उन्हें जाने दूंगी," उसने बनावटी मिठास के साथ कहा, "अगर तुम उनकी जगह मर जाओ।"
ये शब्द किसी ज़ोरदार प्रहार की तरह लगे, जिससे मेरी सांसें थम गईं। मैं उसे घूर रही थी, मेरा दिमाग उसकी नफरत की गहराई को समझने की कोशिश कर रहा था। इससे पहले कि मैं कुछ कह पाती, उसने सिर झुकाया और मुस्कान और चौड़ी हो गई।
"बहुत देर हो गई," वह धीरे से बोली। "मैंने अपना इरादा बदल लिया है।"
एक तेज़ झटके में, उसने कमरे के पार खंजर फेंक दिया। वक्त जैसे थम सा गया था, जैसे खंजर हवा में तैर रहा हो। मेरे पिता की नज़रें मुझसे मिलीं—वही मजबूत, स्थिर आँखें जिन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया था। लेकिन अब, उनमें दुख था, एक माफी थी जो वह कभी नहीं कह पाते। खंजर सीधे उनके दिल में जा लगा और एक भयावह धप की आवाज़ गूँजी।
उनके होंठों से एक दम घुटती हुई चीख निकली, चांदी के जलने से उनका शरीर ज़ोर से कांपने लगा। उनकी उंगलियाँ कुछ ढूंढ रही थीं—शायद मुझे—लेकिन उनकी ताकत खत्म हो गई और वह ज़मीन पर गिर पड़े। वे तड़प रहे थे, उनका शरीर मौत से लड़ रहा था, लेकिन चांदी की जलन निर्दयी थी, जो हवा में जलती मोमबत्ती की तरह उनकी ज़िंदगी बुझा रही थी।
"नहीं!" मेरे गले से एक कच्ची और भयानक चीख निकली, एक ऐसी आवाज़ जिसे मैं खुद भी नहीं पहचान पा रही थी। दर्द ने मुझे अंदर से चीर दिया, मैं बेतहाशा उनकी तरफ लपकी—
लेकिन इससे पहले कि मैं उन तक पहुँच पाती, या उन्हें एक आखिरी बार छू पाती, कोको ने एक और खंजर फेंक दिया।
यह खंजर मेरी माँ के सीने में जा लगा।
सन्नाटे को चीरती हुई एक तेज़ आह निकली, और खंजर लगने से उनका शरीर पीछे की ओर झटके से गिरा। उनकी कांपती उंगलियों ने खंजर को कसकर पकड़ लिया, जैसे वे उसे बाहर निकाल सकें, जैसे वे उस हादसे को बदल सकें। उनके गाउन पर गहरे लाल रंग का एक खून का धब्बा फैल गया, जो उस सफेद रेशम पर बहुत क्रूर लग रहा था।
उनकी नज़रें मेरी आँखों में थीं, वही गर्म, साहसी आँखें जिन्होंने पूरी ज़िंदगी मेरी रक्षा की थी। आँखें जो प्यार और गर्व से चमकती थीं। लेकिन अब, उनमें कुछ और था। पछतावा। खुद के लिए नहीं, मेरे लिए। उस दर्द के लिए जिसे वह रोक नहीं सकीं, उस तकदीर के लिए जिससे वह मुझे नहीं बचा सकीं। उनके होंठ खुले, जैसे कुछ कहना चाहती हों, जैसे मुझे आखिरी बार दिलासा देना चाहती हों—पर कोई शब्द नहीं निकले। सिर्फ एक आखिरी कांपती हुई सांस, एक आखिरी हिचकी, और उनकी ताकत ने जवाब दे दिया।
वे मेरे पिता के पास गिर गईं, उनका शरीर बेजान हो गया।
मेरे सीने से एक दर्दभरी चीख निकली, ऐसा दुख जो रूह को झकझोर दे। मेरे माता-पिता—मेरा घर, मेरा सहारा, मेरा सब कुछ—चले गए थे। बस पल भर में। पलक झपकते ही मुझसे छीन लिए गए, उनकी ज़िंदगी का अंत ठंडे, बेरहम पत्थर पर खून के दागों के रूप में हुआ।
मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा, दुख और गुस्से ने मुझे घेर लिया था। मेरी अंदरूनी भेड़िये की रूह बाहर आने को बेताब थी, उसकी दहाड़ पूरे हॉल में गूँज उठी। मेरे नाखून बड़े हो गए, दांत बाहर निकल आए, मैं कोको की तरफ मुड़ी, मेरा शरीर उसे फाड़ देने की प्यास में कांप रहा था।
लेकिन काइल उसके सामने आ खड़ा हुआ, उसने उसे मेरे गुस्से से बचा लिया। उसकी सुनहरी आँखें मेरी आँखों में गड़ी थीं, ठंडी और अडिग, और उस पल मुझे सच समझ में आ गया। मैं उसके लिए कुछ भी नहीं थी। कुछ भी नहीं। हमारा बंधन, वह प्यार जिस पर मैंने भरोसा किया था, सब एक भ्रम था, जो उसकी असली साथी के आने से चकनाचूर हो गया था।










