Hridyansh Maharishi द्वारा हवेली की रात्रि:और कई पुकार - Inkitt पर
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हवेली की रात्रि:और कई पुकार

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सारांश

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शैली
Thriller
लेखक
Hridyansh Maharishi
स्थिति
पूरी
अध्याय
1
रेटिंग
n/a
आयु रेटिंग
16+

हवेली की रात्रि:और कई पुकार


एक घने जंगल में एक हवेली थी,जहाँ पर एक पति रघुवीर सिंह अपनी दो पत्नियों रमा और संजना के साथ रहते थे,उस हवेली में बहुत सारा कीमती सामान होता हैं,हवेली दिखने में बहुत ही सुंदर है।

एक दिन हवेली के मालिक को कुछ काम आ जाता हैं,तो वो चिंतित होके अपनी पत्नी रमा को पूछता हैं ,की क्या तुम कुछ दिन यहाँ अकेली रह सकती हो,मुझे और संजना को कही बाहर जाना होगा,ये शब्द बोलते हुए पति चिंतित था,तभी रमा ने उनके चेहरे की तरफ अपनी सागर समान सूंदर नयनो को मोड़ा ,मानो वो कह रही हो कि मैं स्वयं ही शक्ति स्वरूपा हु,तुम मेरी चिंता क्यों करते हो।

सवेरे के दूसरे पहर में पति और संजना गाड़ी लेकर निकल गये,अब रमा उस बड़ी हवेली में अकेली थी,और सोच रही थी अपने शुरुआती जीवन के बारे में,जब उसके पिता उसे कहते थे कि जीवन आसान नही है फिर भी तुम शांत रूप में इस जीवन को जीना,पिता की ये बात याद करते ही उसमे नई ऊर्जा आयी और वो जंगल की शेरनी की तरह उठी और अपना खाना बनाने लगी, तभी उसने महसूस किया की एक विष के समान वायु का झोंका उड़ता हुआ आया और उसके केश को झटका के चला गया, जैसे कि वो कह रहा हो की सचेत हो जाओ,अब आंधी आने को हैं, रमा भी थोड़ी संभली और खाना खाने के लिए टेबल पर बैठी,तभी उसे महसूस हुआ कि हवेली के किसी भाग में तो हलचल हो रही है,उसे लगा चूहा होगा,लेकिन वो चूहे खुद को शेर समझ के हवेली में आ तो गए थे लेकिन उन्हें नही पता था,की अंदर बैठी एक महिला अबला नही बल्कि वो शेरनी हैं जो, बिना हरकत किये भी गीदड़ों को कच्चा चबा सकती हैं,वो चोरो की टोली जो शायद 8 या 9 थे पीछे के दरवाजे से सहमे सहमे अंदर घुसे और,वहाँ बैठी एक महिला को देख के सचमे गीदड़ की तरह हँसने लगे,सचेत हुई रमा भी मानो अपने शिकार को टोमेटो सॉस के साथ खाने को तैयार ही थी, चोरो की टोली को उसने देखा और बोली ,अबे नासपीटो भग लो यहाँ से वरना गुर्दे फोड़ दूंगी,और इतना सुनते ही चोर गिरोह एक साथ उस पर टूटे,रमा ने टेबलपर पड़े फोर्क को उठाया को एक चोर की आँखों दे मारा,और गुस्से में उसकी दायीं आंख को फोर्क से चिर डाला और पूरी eyeball को घी की तरह बाहर निकाल लिया,और फोर्क से ही उसके नथुनों पर वार किया और उसकी नाक को कागज की तरह फाड़ दिया,फिर भी वह चोर बाज ना और उसने रमा को छूने की कोशिश की तो उसी फोर्क को उसकी हथेली में घुसा दिया और फोर्क तोड़ दी,ये देख दूसरा चोर उसकी तरफ़ बढ़ रहा था तभी उसने उसके टांग और पर वार किया और उसकी टाँगो को पकड़ कर उल्टी दिशा में मोड़ दिया और ओर जब वह चिल्लाया तो उसके होठो को पकड़ पर उसपे फोर्क से वार किया तो मानो होटो को सील दिया हो ऐसा प्रतीत हुआ,और उसी फोर्क से उसके होटो को चीर दिया और उसका जबड़ा खोल के उसके दांतो पर अपनी कोहनी से वार किया और उसकी जीभ खिचके उसके ही दांतो के बीच पीस दी,और मु से खून बहने लगा,फिर उसके बाल पकड़ कर उसे चेहरे को दीवार से रगड़ते हुए जोरसे लोहे के खम्बे पर दे मारा,और उसे जमीन पर पटक के अपनी लात से **** पर एक जोरसे फ़टका मारा तभी वो चीख उठा फिर गुस्से में आयी वह महिला ने उसे कमर से पकड़ और रीढ़ की हड्डी को पीछे की तरफ मोड़ डाला और उसकी रीढ़ तोड़ दी,वह पूरी तरह खत्म हो चुका था और बाकी चोर ये सब देख के तब तक मूत चुके थे,फ़ीर भी बाकी चोरो के पास गई और दोनों के सर भिड़ा डाले, दोनों के जबड़ो को हाथों से फाड़ डाला जिस से उनके 16 दांत चेहरे पर 16 दांत जमीन और गिर चुके थे दोनों जबड़े अलग हो गए वे कुछ और न कर सके ,टूटे हुए जबड़े को उसने उठाया और उसपर नींबू छिड़का और सभी चोरो के घावों पर नमक मिर्च और नींबू लगाके उन्हें तड़पने को छोड़ दिया,एक शांत अंधेरे साये में जो चंद्रमा की रोशनी से खिड़की के घर पर मंडरा रहा था,अब हवेली के एक अनजाने कोने में रमा बैठी थी,खुले हुए केश और हाथों में रक्तरंजित फोर्क लिए,थकी हुई मुस्कान को लिये हुए सोच रही इसी हवेली के अनेक रहस्यो के बारे में जो कई जन्मान्तरों से सबकी नजरों से ओझल थे तथा हवेली दहक रही थी, तथा समय के साथ निरन्तर नए रहष्यो को हक़ीक़त में लाने के लिए....उसी रात जंगल ने फिर पुकारे लगानी शुरू की,जो पुकार कम बल्कि जंगल और उस हवेली के मध्य रहष्यो की बुदबुदाहट थी,क्या राज हैं,जंगल बताने ही वाला था कि हवेली शशशशशशशशशशशशशशशश!!!!! करके फिर एक बार जंगल की पुकार को रोक दिया, कुछ छुपाने के लिए...हवेली कुछ तो बताने वाली हैं.....


लेखक- हृदयांश"हृदय"

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