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Shatani Mohobbat

सर्वाधिकार सुरक्षित ©

सारांश

शैतानी मोहब्बत एक अनजानी रात, एक अनजाना स्थान, और एक अनजाना दिल। यह कहानी है एक ऐसे प्यार की, जो शैतानी ताकतों से जुड़ा हुआ है। तन्वी और कार्तिक, दो युवा और आकर्षक दिल, जो एक दूसरे से प्यार करते थे। उनके दोस्त किरण, स्वप्निल, श्रुति, अनु, दिनेश, वैभव, अनिकेत, और शक्षी भी उनके साथ थे, जो उनके प्यार को साथ देने के लिए तैयार थे। लेकिन तन्वी के पीछे एक रहस्य था, एक ऐसा रहस्य जो कार्तिक को उसके प्यार में फंसा देगा। तन्वी एक शैतानी ताकत के साथ जुड़ी हुई थी, जो उसे अपने प्यार को पाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए मजबूर करती थी। कार्तिक और तन्वी का प्यार बढ़ता गया, लेकिन साथ ही साथ शैतानी ताकतें भी मजबूत होती गईं। कार्तिक को नहीं पता था कि वह एक शैतानी मोहब्बत में फंस गया है, जो उसकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देगी। उनके दोस्तों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन शैतानी ताकतें बहुत मजबूत थीं। कार्तिक और तन्वी को अपने प्यार को बचाने के लिए एक खतरनाक लड़ाई लड़नी पड़ेगी। क्या वे अपने प्यार को बचा पाएंगे? या शैतानी ताकतें उन्हें अलग कर देंगी? यह कहानी है एक ऐसे प्यार की, जो शैतानी ताकतों से जुड़ा हुआ है। यह कहानी एक रोमांस और हॉरर का मिश्रण है, जो दर्शकों को रोमांच और डर के बीच झूलता है।

शैली
Horror
लेखक
GSiddharth11
स्थिति
२ महीने पहले
अध्याय
3
रेटिंग
n/a
आयु रेटिंग
18+

Intro

रात का समय था. चारों ओर घुप अंधेरा, पेडों के बीच से आती ठंडी हवा, और दूर कहीं किसी उल्लू की डरावनी आवाज. एक आदमी, जिसकी उम्र करीब छब्बीस साल थी, बदन पर सिर्फ एक पुराना शोल ओढे हुए, हाथ में लालटेन थामे, जंगल के कच्चे और ऊबड- खाबड रास्तों से होते हुए हवेली की ओर बढ रहा था. उसकी हर कदम की चरमराहट सूखी पत्तियों और टूटी टहनियों पर साफ सुनाई दे रही थी.

वो खुद से बडबडाते हुए कह रहा था—

आज तो मैं गांववालों का ये डर हमेशा के लिए दूर कर दूंगा. क्या भूत, क्या काला जादू. सब बकवास है।

लेकिन उसके आसपास का माहौल जैसे उसकी बातों का मजाक उडा रहा था. लालटेन की लौ अचानक काँपने लगी, जैसे हवा में कोई अदृश्य हाथ उसे हिला रहा हो. पेडों की परछाइयाँ जमीन पर अजीब- अजीब आकार बना रही थीं—कभी इंसानी, कभी जानवरों जैसी, और कभी कुछ ऐसा. जिसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता.

जैसे ही वो हवेली के गेट के पास पहुँचा, पुराना लोहे का दरवाजा खुद- ब- खुद चीं. ईं. की आवाज करते हुए खुल गया. ठंडी हवा का एक झोंका उसके चेहरे से टकराया, और वो एक पल को ठिठक गया.

अंदर घुसते ही उसकी नजर टूटी खिडकियों से आती हल्की- सी रोशनी पर पडी, जो हवेली के अंदर कहीं गहराई में टिमटिमा रही थी. अचानक ऊपर की मंजिल से लकडी के फर्श के चरमराने की आवाज आई, जैसे कोई नंगे पैर धीरे- धीरे चल रहा हो.

उसने हिम्मत करके पुकारा—

कौन है वहां?

कोई जवाब नहीं आया. लेकिन अगले ही पल, सीढियों के ऊपर से एक हल्की- सी हंसी की आवाज आई—एक औरत की, जो धीरे- धीरे तेज होती चली गई. और फिर अचानक थम गई.

उसकी रूह कांप गई, लेकिन कदम पीछे खींचने के बजाय वो सीढियों की तरफ बढा.

हर कदम के साथ लकडी की सीढियां डरावनी आवाज कर रही थीं, जैसे किसी ने बरसों से उन पर पैर न रखा हो. दीवारों पर लटके पुराने, धूल से ढके चित्र अंधेरे में उसे घूरते से लग रहे थे. सीढियों के ऊपर से आती ठंडी हवा, उसके माथे पर पसीने की बूंदों को जमा रही थी.

अचानक, ऊपर से किसी के घसीटे जाने की आवाज आई — चर्रर. चर्रर. — जैसे कोई भारी चीज फर्श पर रेंग रही हो. उसकी लालटेन की लौ हल्के- हल्के कांपने लगी, मानो खुद भी डर गई हो. उसने गला साफ किया, कौन है वहाँ? लेकिन जवाब में सिर्फ गहरी खामोशी थी. और फिर, दूर से किसी महिला के रोने की धीमी आवाज.

वो ऊपर पहुंचा, तो देखा लंबा, अंधेरा गलियारा — जहां दीवारों पर मकडी के जाले लटक रहे थे, और हवा में सडी हुई लकडी और कुछ अजीब- सी सडांध की मिली- जुली गंध थी. रोने की आवाज अब तेज हो गई थी, लेकिन ये आवाज किसी एक दिशा से नहीं आ रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे वो चारों तरफ से उसके कानों में घुस रही हो.

उसने हिम्मत जुटाकर गलियारे में कदम रखा. अचानक पीछे से दरवाजा जोर से बंद हो गया — धडाम! — लालटेन का शीशा फट गया और आधा अंधेरा छा गया. टिमटिमाती लौ की रोशनी में, उसने देखा. गलियारे के आखिर में एक सफेद साडी में लिपटी औरत खडी थी, जिसके बाल इतने लंबे थे कि जमीन पर घिसट रहे थे. उसका चेहरा ढका हुआ था, लेकिन होंठों से खून टपक रहा था.

वो चीखने वाली थी. तभी औरत ने अचानक गर्दन एक अजीब कोण पर मोडी — टक- टक- टक — और चारों हाथ- पैरों के बल उसी की तरफ दौडने लगी. उसकी चीख गले में ही दब गई.

लेकिन कदम पीछे खींचने की बजाय. वो सीधा उसकी तरफ बढा, जैसे किसी अदृश्य ताकत ने उसके पैरों को पकड लिया हो. दोनों के बीच बस कुछ कदम का फासला था. और फिर हवा में एक ठंडी फुसफुसाहट गूंजी —

अब तू भी यहीं रहेगा.

बाहर हवेली की टूटी खिडकी से चाँद की रोशनी अंदर आई, लेकिन वो आदमी कहीं नजर नहीं आया. सिर्फ लालटेन का टूटा शीशा और दीवार पर एक ताजा, खून से लिखा हुआ वाक्य —

नया शिकार”

क्या वो इन अफवाहों को गलत साबित करेगा. या.

वो भी बन जाएगा. हवेली का हिस्सा?

अध्याय
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गहन

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दिल छू लेने वाला

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चौंकाने वाला

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अच्छा लेखन

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रोचक कथानक

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शानदार चरित्र

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सशक्त संवाद

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