Prologue
"नहीं!" मैं चिल्लाई और मैंने दिल से दुआ की कि काश मैं इस वक्त कहीं और होती। मैं उस दर्दनाक पकड़ से छूटने के लिए संघर्ष कर रही थी, और मेरे बालों को खींचकर जबरदस्ती मेरा चेहरा ऊपर उठाया गया।
वहां वे आँखें थीं। वो आँखें जो मुझे हर पल नर्क में जीते हुए देखती थीं, जो मेरे दर्द और तकलीफ को देखकर मुस्कुराती थीं, वो उसी राक्षस की आँखें थीं जिससे मैं भागकर आई थी।
"बहुत दिन बाद दिखीं, लिटिल स्नो।"
मेरा दिल दहशत से डूब गया जब मैंने उस पहचाने हुए चेहरे को देखा जो मेरे बुरे सपनों में हमेशा आता था।