प्रोलॉग - बस शुरुआत
बोर्ड पर लिखा था: Lucky’s।
बमुश्किल।
कभी यहाँ एक ढाबा हुआ करता था।
जो कहीं दूर, किसी पुराने बस अड्डे से जुड़ा था।
ट्रक ड्राइवरों, घर से भागे हुए लोगों और उन लड़कियों के लिए आखिरी ठिकाना, जिनके पास मदद के लिए कोई नहीं बचा था।
अब यह जगह वीरान पड़ी थी; खिड़कियाँ काली थीं, कांच कब के गायब हो चुके थे, और दरवाजे कब्जों से उखड़कर गिर चुके थे।
पास का बस अड्डा तो और भी बुरे हाल में था।
छत ढह चुकी थी।
टिकट खिड़की पूरी तरह तबाह हो चुकी थी।
दीवारों पर स्प्रे पेंट के निशान बिखरे हुए थे।
आस-पास का इलाका उखड़ा हुआ और भुला दिया गया था।
कंक्रीट के बीच से जंगली घास उग आई थी।
च्युइंग गम के पुराने रैपर और टूटी बोतलें किनारे पर ऐसे बिखरी थीं, मानो अतीत को दी गई कोई भेंट हो।
सोडे की एक जंग लगी मशीन दीवार के सहारे तिरछी खड़ी थी, जो आधी लताओं में दबी हुई थी।
'नो पार्किंग' का एक मुड़ा हुआ बोर्ड हवा में धीरे-धीरे हिल रहा था, उसके नट-बोल्ट पूरी तरह गल चुके थे।
एक टूटी हुई बेंच बुझे हुए लैंपपोस्ट के नीचे टेढ़ी पड़ी थी, उसकी पट्टियां बिखरी हुई थीं।
और उन सबके बीच में—
मोटरसाइकिलों का एक घेरा था।
काली क्रोम।
मैट स्टील।
रेगिस्तान की रात में खामोश इंजन धीरे-धीरे ठंडे हो रहे थे।
पीछे साये में से कोई बोला नहीं, लेकिन उसे उनकी मौजूदगी का अहसास हो रहा था।
नजरें उस पर थीं।
देखती हुई।
इंतज़ार करती हुई।
घिसटते हुए उसकी हथेलियां कंक्रीट से छिल रही थीं।
धूल उसके पसीने में चिपक गई थी।
उसकी ठुड्डी से खून धीरे-धीरे रिस रहा था, और हर सांस कांच की तरह चुभ रही थी।
उसकी गंदी टी-शर्ट पीठ से चिपकी थी, जो पसीने और मिट्टी से तर-बतर हो चुकी थी।
सस्ती जींस घुटनों पर फट गई थी, बेल्ट मुश्किल से बंधी हुई थी।
एक पैर बेजान सा पीछे घिसट रहा था, कंक्रीट से छिलकर खून निकल रहा था, जैसे वह खुद को उस टिमटिमाती लाल नियॉन लाइट की तरफ खींच रहा था जो सालों से खराब थी।
उसने खांसा।
रोया।
उसका दम घुटने लगा।
"प्लीज," वह लड़खड़ाते हुए बोला। "बस ये बता दो तुम्हें क्या चाहिए।"
आखरी शब्द पर उसकी आवाज भर्रा गई।
किसी ने जवाब नहीं दिया।
लेकिन एक बूट आगे बढ़ा।
और सबक शुरू हुआ।
सबसे छोटा साया आगे आया और कंक्रीट पर क्रोबार घसीटने लगा, जिसकी आवाज ऐसी थी जैसे धातु मौत की सांस ले रही हो।
खरोंच की वह आवाज खाली मैदान में गूंज उठी—धीमी और सोची-समझी।
उस आदमी ने ऊपर देखने की कोशिश की, उसकी आँखें खौफ से फटी थीं।
बहुत देर हो चुकी थी।
क्रोबार तेजी से ऊपर उठा और उसके जबड़े पर दे मारा—एक भयावह कड़क की आवाज के साथ।
वह चीख पड़ा, उसके मुंह से खून और दांत बाहर आ गिरे और वह करवट लेकर अपने चेहरे को पकड़ कर कराहने लगा।
उसने खून से सनी उंगलियों के बीच से कराहते हुए कहा, "प्लीज—प्लीज—"
अगला सबसे लंबा साया आगे बढ़ा।
भारी बूट। धीमी चाल।
आवाज शांत और नियंत्रित।
"कैमरा कहाँ है?"
वह आदमी गिड़गिड़ाया।
"किसने कहा था तुम्हें फोटो लेने के लिए?"
उस आदमी ने अपना सिर हिलाया, डर से उसकी आँखें फैली हुई थीं, और उंगलियों के बीच से खून बह रहा था।
सबसे छोटा साया फिर आगे बढ़ा।
"प्लीज... नहीं," वह बहुत धीमी आवाज में बुदबुदाया।
क्रोबार फिर चला—इस बार नीचे की तरफ, पसलियों पर।
वह चीख उठा।
सबसे लंबे साये ने गुर्राते हुए कहा, उसकी आवाज माहौल को चीरती हुई निकली। "जवाब दे।"
उस आदमी ने जोर से खांसा, ठुड्डी से खून टपक रहा था।
"मैं—मैं नहीं बता सकता," वह हकलाते हुए बोला। "अगर मैंने तुम्हें बता दिया... तो वे मुझे मार डालेंगे।"
उसके चारों ओर साये हरकत में आ गए।
रात की खामोशी में ठंडी और बेरहम हंसी गूंजने लगी।
सबसे लंबा साया उसके बगल में बैठ गया और दस्ताने पहने हाथ से उसके टूटे जबड़े को जकड़ लिया।
वह आदमी तड़प उठा, उसने छूटने की कोशिश की, पर नाकाम रहा।
वही आवाज फिर आई, शांत लेकिन क्रूर।
"फ्रैंक।"
नाम पहले धीरे से लिया गया।
फिर दोबारा।
और फिर।
"फ्रैंक," उस शख्स ने दोहराया। "तुम्हारे दोस्त शायद तुम्हें मार डालें। जल्दी, सफाई से, शायद बिना किसी शोर के।"
वह और करीब झुक गया, इतना करीब कि उसकी सांसों की गर्मी महसूस कर वह आदमी सिहर उठा।
"लेकिन मैं?"
एक ठहराव।
"मेरे आदमी?"
एक और ठहराव।
"हम सिर्फ मारते नहीं हैं। हम तुम्हें मौत के लिए भीख मांगने पर मजबूर करेंगे। हम तुम्हें पहले तड़पाएंगे।"
सबसे लंबा साया धीरे से खड़ा हुआ और एक बार सिर हिलाया।
सबसे छोटा साया बिना झिझके आगे बढ़ा।
मोटरसाइकिलों की रोशनी में उसके चेहरे का एक हिस्सा दिखा—एक टूटे हुए चीनी मिट्टी के नकाब पर चमकती हुई।
फ्रैंक गिड़गिड़ाया।
"प्लीज—नहीं—"
सबसे लंबे साये की आवाज फिर आई, धीमी और ठंडी।
"आज रात तुम एक नया सबक सिखाने में हमारी मदद करने वाले हो, फ्रैंक।"
वह धीरे-धीरे उसके पीछे घूम गया।
ठहरकर।
"तुम एक संदेश बनोगे। हर चोट, हर हड्डी का टूटना, खून की हर बूंद—वे इसे किसी धर्मग्रंथ की तरह पढ़ेंगे।"
वह रुका, ठीक फ्रैंक के कान के पास।
"इसमें कितना समय लगता है... कितना दर्द होता है... यह इस बात पर निर्भर करता है कि तुम झूठ बोलना कितनी जल्दी बंद करते हो।"
क्रोबार फिर चला।
फ्रैंक चीख पड़ा, उसकी आवाज रात के सन्नाटे को चीर गई।
उसका शरीर मरोड़ खाने लगा, उसके पैर कमजोर तरीके से कंक्रीट पर मार रहे थे, जैसे ही लोहे ने उसके कंधे और रीढ़ पर वार किया।
सबसे लंबा साया पहले नहीं हिला।
फिर वह आगे बढ़ा, उसकी आवाज अब और भी ठंडी थी।
"लगता है तुम्हें रास्ता कठिन चाहिए, फ्रैंक।"
एक और चीख अंधेरे में गूंज गई।
और फिर एक और।
हर चीख के बाद, धातु के हड्डी से टकराने की वह धीमी, भयावह गूँज सुनाई देती रही।
फ्रैंक की चीखें उस भूली-बिसरी जगह में गूंजती रहीं।
फिर धीमी पड़ गईं।
और जब खामोशी लौटी—तो वह छा गई।
Lucky’s की नियॉन लाइट एक बार टिमटिमाई।
फिर स्थिर हो गई।
जैसे वह सब देख रही हो।
Simply glorious!