प्रस्तावना
छह साल पहले...
ब्रुकलिन की हवा में हमेशा कुछ न कुछ पकने की खुशबू घुली रहती थी।
सर्दियों में भी, जब हवा किसी धारदार चाकू की तरह गलियों को चीरती और फुटपाथ आधी जमी हुई बारिश से चमकते, तब भी हवा में एक गर्माहट होती थी—लहसुन, भुना हुआ मांस, मीठे केले, या किसी के किचन में धीमी आंच पर पकती कोई चीज़। यह घर की महक थी, एक के ऊपर एक चढ़ी ज़िंदगी की महक, और कामिला टेलर ने इसे एक दूसरी भाषा की तरह ही सांसों में बसाकर बड़ा होना सीखा था।
आज रात, उसकी माँ का किचन ही सबसे ज़्यादा सक्रिय था।
जर्क चिकन, चटपटा और धुएँदार। कॉर्नब्रेड, मक्खन जैसा नरम और गर्म। चूल्हे के पिछले बर्नर पर धीमी आंच पर पकती कोलार्ड ग्रीन्स, जो घर को उस खुशबू से भर रही थी जिसका मतलब था कि कोई आपसे इतना प्यार करता है कि उसने चूल्हे के सामने तीन घंटे खड़े होकर खाना बनाया है। लिविंग रूम से पुराने ज़माने का सोल म्यूजिक बज रहा था—मार्विन गे, धीमा और सुकून भरा—क्योंकि मैरिएटा टेलर का मानना था कि असली संगीत वही है जिसे पाने के लिए मेहनत की जाए।
कामिला ने अपनी कुर्सी पर पीछे की ओर झुककर वाइन के आखिरी घूँट का आनंद लिया और अपने माता-पिता को खुद को देखते हुए पाया।
उनके चेहरे के हाव-भाव एक जैसे थे। जब भी वे कुछ ऐसा कहने वाले होते थे जो उसे पसंद नहीं आता, उनके चेहरे पर हमेशा वही भाव होते थे—प्यार और दृढ़ संकल्प का एक अनोखा मेल, जो उसके पिता की भौंहों में दिखता था और उसकी माँ की मुस्कान की नपी-तुली मिठास में।
कामिला ने वाइन का एक धीरे से घूँट भरा।
और फिर एक आह भरी।
"ठीक है," उसने गिलास मेज पर रखते हुए कहा। "तुम दोनों में से कौन शुरू करना चाहता है?"
उसकी माँ ने एक पल की भी देरी नहीं की।
"तो," मैरिएटा ने मेज पर अपने हाथ जोड़ते हुए कहा, जैसे वह पूरी शाम इसी पल का इंतज़ार कर रही हो। "क्या तुम अभी किसी को डेट कर रही हो?"
कामिला ने पलकें झपकाईं।
"वाह," उसने कहा। "सीधे मुद्दे पर।"
कोल्टन अपनी प्लेट में हंसने लगे।
"तुम्हारी माँ यह बात एपेटाइज़र के समय से ही दबाए बैठी थी," उन्होंने कहा। "हैरान होने का नाटक मत करो।"
"मैंने जमाल के साथ तीन महीने पहले ही ब्रेकअप किया है," कामिला ने उन्हें याद दिलाया।
मैरिएटा ने हाथ लहराया।
"तीन महीने काफी समय होता है।"
"माँ।" कामिला ने उन्हें घूरा। "मेरे पास अभी भी उसका नेटफ्लिक्स पासवर्ड है।"
उसके पिता हंसते-हंसते लगभग दम घुटने लगे। मैरिएटा को यह मज़ाक नहीं लगा।
"तुम पच्चीस साल की हो," उन्होंने कहा। "एक खूबसूरत, सफल युवती। तुम्हें अपने भविष्य के बारे में सोचना चाहिए।"
"मैंने अभी-अभी अपनी ग्रेजुएशन खत्म की है।"
"बहुत बढ़िया।"
"मैं नई नौकरी शुरू कर रही हूँ।"
"और भी बेहतर।"
"मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे बच्चों की प्लानिंग करने से पहले मुझे अपनी ज़िंदगी जीने दो।"
मैरिएटा आगे की ओर झुकीं।
"कोई तुम्हारे बच्चों की प्लानिंग नहीं कर रहा है।"
कोल्टन ने गंभीरता से सिर हिलाया। "हम सिर्फ अनुरोध कर रहे हैं। दोनों बातों में फर्क है।"
कामिला खुद को रोक नहीं पाई और हंस पड़ी।
"तुम दोनों," उसने उनके बीच इशारा करते हुए कहा, "एक मुसीबत हो।"
"हम बस तुम्हें खुश देखना चाहते हैं," मैरिएटा ने कहा, और उनकी आवाज़ से मज़ाक खत्म हो गया, जिससे साफ़ था कि वह गंभीर थीं।
कामिला की मुस्कान नरम पड़ गई।
"मैं खुश हूँ।"
"तुम किसी ऐसे व्यक्ति की हकदार हो जो तुम्हारे साथ वैसा ही व्यवहार करे जैसा तुम्हारे पिता मेरे साथ करते हैं।"
कोल्टन ने अपनी प्लेट से नज़रें हटाए बिना हाथ बढ़ाया और मैरिएटा के हाथ पर अपना हाथ रख दिया। यह इशारा इतना स्वाभाविक था, बिना सोचे-समझे किया गया, और तीस सालों का गहरा था कि उसने कामिला के दिल में एक ऐसी जगह बनाई जिसके लिए उसके पास शब्द नहीं थे।
"जमाल भी मेरे साथ ठीक से ही पेश आता था," उसने कहा।
"ठीक होना काफी नहीं है," मैरिएटा ने तुरंत कहा। "ठीक होना तो बस एक मंगलवार जैसा है। तुम तो हर दिन की हकदार हो।"
कामिला ने अपने पिता की ओर देखा।
उन्होंने उसकी आँखों में देखा और कंधे उचकाए—एक ऐसे आदमी का अंदाज़ जो उस महिला से बहस करना बहुत पहले छोड़ चुका है जिससे वह पूरी तरह सहमत है।
"वह सही कह रही है," उन्होंने बस इतना ही कहा।
कामिला ने छत की ओर देखा।
"मुझे यकीन नहीं हो रहा कि मेरी अपनी खाने की मेज़ पर मुझे घेरा जा रहा है।"
"तुम घर से बाहर रहने लगी हो," कोल्टन ने याद दिलाया। "यह हमारी मेज़ है।"
"मेरे पास अभी भी चाबियाँ हैं।"
"हमने ताले बदल दिए हैं।"
"तुमने ऐसा नहीं किया—"
"हमने नहीं किया," मैरिएटा ने पुष्टि की। "लेकिन जब तुम सोफा ले गई थी, तब हमने इसके बारे में ज़रूर सोचा था।"
"वह तो अस्थायी था—"
"कामिला।" उसके पिता ने अपना कांटा नीचे रखा, और उनकी आवाज़ उस लहज़े में बदल गई जिसे वह कभी अनदेखा नहीं कर पाती थी—धीमी, पक्की और सच्ची। "हमें तुम पर गर्व है। तुमने जो बनाया है, जो तुम बना रही हो, उस पर। हम बस इतना जानते हैं कि तुमने हमेशा काम से ज़्यादा कुछ और चाहा है।"
उसने मेज़ की ओर नीचे देखा।
उसने चाहा था। वह अभी भी चाहती थी।
अपने सपनों का एक घर। साथ खाना खाने के लिए कोई ऐसा व्यक्ति जो उसे वैसे देखे जैसे उसके पिता उसकी माँ को देखते थे—जैसे वह कोई मामूली नहीं बल्कि अनमोल हो। बच्चे, शायद। कभी न कभी। वही शोर-शराबे वाली, गर्म, खाने की महक से भरी ज़िंदगी जिसमें वह पली-बढ़ी थी और जिसे छोड़ने तक उसने कभी पूरी तरह सराहा नहीं था।
"मैं सही इंसान ढूँढ लूँगी," उसने धीरे से कहा।
उसकी माँ ने मेज़ के पार हाथ बढ़ाया और उसका हाथ दबाया।
"मुझे पता है तुम ढूँढ लोगी।"
उसके पिता ने अपना गिलास उठाया।
"कामिला के नाम," उन्होंने कहा।
"ओह भगवान—"
"हमारी बेटी के नाम," उन्होंने बिना रुके आगे कहा, "जो एक दिन आधे मैनहट्टन पर राज करेगी।"
मैरिएटा ने भी अपना गिलास उठाया।
"और उम्मीद है कि इसी दौरान हमें पोते-पोतियाँ भी दे देगी।"
कामिला हंस पड़ी और उसने अपने गिलास उनके गिलासों से टकराए।
"बड़े सपने देखो, माँ।"
उन्होंने धीरे-धीरे खाना खत्म किया, जैसा कि एक अच्छे डिनर का अंत होना चाहिए—बातचीत आसान रास्तों पर मुड़ गई, पहले की पूछताछ का दबाव पारिवारिक गपशप और उसके पिता की पड़ोसी के साथ अखबार चोरी करने को लेकर चल रही गहरी निजी लड़ाई में घुल गया। जब कामिला बाहर निकली, तो ठंडी ब्रुकलिन की हवा उसके चेहरे पर पानी के छींटे की तरह लगी।
वह एक पल के लिए बाहर की सीढ़ियों पर खड़ी रही और उसने लंबी सांस ली।
सब कुछ के बावजूद—वह दखलंदाज़ी, शादी की बातें, पोते-पोतियों का एजेंडा—आज की रात अच्छी थी। उसके माता-पिता का प्यार निरंतर, ज़ोरदार और कभी-कभी थका देने वाला था, और वह इसे एक पल के लिए भी नहीं बदलती।
वह अपनी कार की तरफ चली, अंदर बैठी और इंजन चालू किया।
रेडियो अपने आप चल पड़ा—कुछ धीमा, देर रात का और गर्म संगीत उसके चारों ओर भर गया। उसने फुटपाथ से गाड़ी बढ़ाई और शांत गलियों से गुज़री, उंगलियाँ स्टीयरिंग व्हील पर थपथपा रही थीं, डिनर का तनाव हलका हो रहा था।
उसे इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी कि उसकी माँ उसके लिए क्या चाहती थी।
उसे बस कोई जल्दी नहीं थी।
ज़िंदगी अच्छी थी। उसकी नई नौकरी इंतज़ार कर रही थी। उसका अपार्टमेंट आखिरकार उसे अपना-सा लगने लगा था। और सिंगल रहना—सच कहूँ तो—उसकी अपनी खास आज़ादियाँ थीं जिन्हें वह छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थी।
वह इसी बारे में सोच रही थी, एकदम बेफिक्र, तभी आगे का ट्रैफिक धीमा हो गया।
ब्लॉक के अंत में लाल और सफेद निर्माण लाइटें चमक रही थीं। हाथ से बना एक डायवर्जन का निशान एक ऐसी गली की ओर इशारा कर रहा था जिसे वह नहीं जानती थी।
कामिला ने उसे देखा। फिर कोन के पीछे लगे जाम को देखा।
"ठीक है," उसने बड़बड़ाते हुए कहा, और बाईं ओर मुड़ गई।
सड़क संकरी और कम रोशनी वाली थी, ब्रुकलिन का वह हिस्सा जो उन मोहल्लों के बीच पड़ता था जिन्हें वह जानती थी—न कहीं का, न कहीं का। उसकी हेडलाइट्स ने वहां खड़ी कारों, बंद पड़े एक गोदाम और एक जालीदार बाड़ पर रोशनी डाली जिस पर हाथ से लिखा एक बोर्ड लगा था, जिसे पढ़ने का उसके पास समय नहीं था।
संगीत धीमी आवाज़ में बज रहा था।
वह अपनी माँ के चेहरे के बारे में सोच रही थी जब उन्होंने कहा था, ठीक होना काफी नहीं है। वह सोच रही थी कि कैसे उसके पिता ने बिना देखे ही अपनी माँ के हाथ पर अपना हाथ रखा था। वह सोच रही थी कि शायद—शायद—वह बहुत लंबे समय से ठीक है का इस्तेमाल काफी है के पर्याय के तौर पर कर रही थी, जिसे वह खुद भी कबूल नहीं करना चाहती थी, और उसकी माँ, जो कभी-कभी परेशान करती थी लेकिन हमेशा सही होती थी, शायद यह बात जानती थी।
उस डायवर्जन पर जाना उसे तुरंत ही बुरा ख्याल लगने लगा।
सड़क पर एक अजीब सी खामोशी थी—शांति वाली नहीं, बल्कि ऐसी जैसे शहर किसी चीज़ का इंतज़ार कर रहा हो। दुकानें बंद थीं, काली खिड़कियों पर धातु की जाली गिरी हुई थी। स्ट्रीट लाइट्स एक-दूसरे से इतनी दूर थीं कि पीली रोशनी के घेरों के बीच लंबी परछाइयाँ बनी हुई थीं।
कामिला ने अपने GPS पर नज़र डाली।
दो मोड़ और।
वह गाड़ी चलाती रही।
वह ब्लॉक के आधे रास्ते पर ही थी कि उसे वह महसूस हुआ—गर्दन के पीछे की वह जानी-पहचानी सिहरन, जिसे दिमाग से पहले शरीर भांप लेता है। सड़क के आखिरी छोर पर ऊँची आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। एक खड़ी कार के पास कुछ आदमियों का झुंड था। बहस का वह खास अंदाज़, जिसने पहले ही तय कर लिया था कि बात कहाँ तक जाएगी।
तुम्हारा इससे कोई लेना-देना नहीं, उसने खुद से कहा। आगे बढ़ती रहो।
उसने एक्सीलरेटर से पैर हटा लिया।
पहली गोली की आवाज़ ने रात को किसी चीज़ के टूटने की तरह चीर दिया।
कामिला इतनी ज़ोर से सिटकी कि उसका कंधा दरवाज़े से जा टकराया। फिर एक और गोली चली। फिर तीन गोलियां और लगातार चलीं, और सड़क के अंत में चल रही बहस पूरी तरह से बदल गई—आदमी इधर-उधर भागने लगे, चिल्लाने लगे, और गोलियों के धातु से टकराने की तीखी आवाज़ें गूंजने लगीं, जो दीवारों और ईंटों में धंस रही थीं।
उसने एक्सीलरेटर पर पैर दबा दिया।
उसके टायरों के नीचे कुछ आया—तेल या पानी, वह कभी नहीं जान पाएगी—और कार ने उसके काबू में रहना बंद कर दिया। स्टियरिंग व्हील उसके हाथों में झटके देने लगा। उसने कार को संभालने की कोशिश की, पर गाड़ी अनियंत्रित हो गई। कार का पिछला हिस्सा घूम गया और उसे खुद की ही आवाज़ सुनाई दी जो उसकी नहीं लग रही थी—नहीं, नहीं, नहीं। फिर सामने खड़ी SUV से उसकी टक्कर हो गई और वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकी।
टकराव का एहसास होने से पहले उसकी आवाज़ सुनाई दी।
धातु। कांच। सीटबेल्ट का उसकी छाती पर किसी मुक्के की तरह लगना। एयरबैग का उसके चेहरे पर फटना, धूल भरा और तेज़, और फिर सब कुछ—सफेद। कानों में तेज़ झनझनाहट। उसके कान यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि अभी-अभी क्या हुआ।
उसने धुंधली नज़रों से पलकें झपकाईं।
उसे सब कुछ दर्द दे रहा था।
फिर उसने कुछ सूंघा।
पेट्रोल। और उसके नीचे—धीमी, लेकिन बढ़ती हुई—धुएं की गंध।
नहीं।
उसने ऊपर देखा। टूटी हुई, धूल से पटी विंडशील्ड के पार, एक छोटी सी आग बोनट पर चढ़ रही थी, एक शांत और पक्की तयशुदा रफ़्तार के साथ।
कामिला के हाथ सीटबेल्ट के बकल तक पहुँचे।
वह खुल नहीं रहा था।
उसने दोबारा कोशिश की। उसकी उंगलियां सुन्न और धीमी थीं, जैसे उसकी न हों। बकल फिसला। उसने फिर उसे पकड़ा। आग फैल रही थी। गर्मी अब कांच पर दबाव डाल रही थी, धुआं घना हो रहा था, और कहीं दूर सड़क पर एक और गोली चली। वह अभी भी उस कार में फंसी थी और बकल नहीं—
दुनिया झुक गई।
उसका सिर बहुत भारी लग रहा था।
नारंगी रोशनी विंडशील्ड में भर गई, और कामिला टेलर ने—वक्त खत्म होते हुए उस अजीब सी स्पष्टता के साथ सोचा—कि आज रात घर से निकलते समय उसने अपने माता-पिता से यह नहीं कहा था कि वह उनसे कितना प्यार करती है।
फिर अंधेरा छा गया और सब कुछ अपने साथ ले गया।
उसे सबसे पहली बात जो महसूस हुई, वह यह थी कि वह कार में नहीं थी।
दूसरी बात थी गर्माहट—आग की तपिश नहीं, बल्कि कुछ और। कुछ स्थिर। उसके गाल के नीचे एक सीना था, और भुजाएं उसे बड़ी सावधानी से थामे हुए थीं, जैसे वे जानती हों कि उसे चोट लगी है और उसी का ख्याल रख रही हों।
वह अपने पीछे आग की आवाज़ सुन सकती थी। वह उसकी दूर की तपिश महसूस कर सकती थी। उसे टुकड़ों में समझ आया कि किसी ने उसे वहां से दूर हटा दिया था।
उसने अपना सिर घुमाया।
एक आदमी उसके ऊपर झुका हुआ था, उसका चेहरा देख रहा था। आग की रोशनी उस पर पड़ रही थी लेकिन वह अपनी नज़रों को स्थिर नहीं रख पा रही थी ताकि उसे साफ देख सके—बस उसकी मौजूदगी का एहसास था, करीब और शांत, एक ऐसी शांति जो उस स्थिति के हिसाब से अजीब थी।
“आराम से,” उसने कहा।
उसकी आवाज़ धीमी थी। बिना किसी हड़बड़ाहट के। जैसे उसके पास दुनिया का सारा वक्त हो, जैसे पीछे जलती हुई कार कोई जलती हुई कार न हो।
“तुम सुरक्षित हो।”
उसने बोलने की कोशिश की। उसका गला सूखा हुआ था। “मैं यहाँ कैसे—”
“मैं तुम्हें बाहर ले आया।”
सादा। एकदम सपाट। जैसे यही एकमात्र विकल्प था और उसने बस वही किया।
सायरन। ब्लॉक के अंत में लाल और नीली बत्तियाँ, जो करीब आ रही थीं।
उसके सिर के पीछे उसका हाथ थोड़ा सा हिला—संभालते हुए, सावधानी से—और उसे उस हाथ की स्थिरता महसूस हुई। उसने दूर कहीं सोचा कि शायद उसे जितना डरना चाहिए था, वह उतनी डरी हुई नहीं थी। वह ब्रुकलिन की किसी अनजान सड़क पर ठंडी डामर पर लेटी थी, एक अजनबी की बाहों में, और तीस फीट दूर उसकी कार जल रही थी।
वह डरी हुई नहीं थी।
“तुम रुके रहे,” उसने कहा।
उसने आती हुई बत्तियों की ओर देखा।
“बिल्कुल,” उसने कहा।
अस्पताल के कमरे में एंटीसेप्टिक और ठंडी हवा की गंध थी। कामिला तकिए के सहारे बैठी थी, उसकी गोद में एक पतली चादर थी। रिपोर्ट उम्मीद से बेहतर थी—पसलियों में चोट, हल्का सा सिर में झटका, और भौंहों के ऊपर एक कट, जिसमें चार टांके लगे थे। नर्स ने भरोसा दिलाया था कि ये निशान पूरी तरह मिट जाएंगे।
उसे राहत महसूस होनी चाहिए थी।
उसे राहत महसूस हो भी रही थी। साथ ही उसे उस खालीपन का एहसास था जो एड्रेनालाईन का असर खत्म होने के बाद महसूस होता है।
कमरे के दूसरी तरफ, एक प्लास्टिक की कुर्सी पर, जो बिल्कुल भी आरामदायक नहीं थी, सड़क वाला वह आदमी बैठा था। उसके हाथ ढीले बंधे थे और कंधे थोड़े झुके हुए—जैसे वह कम से कम जगह घेरने की कोशिश कर रहा हो।
वह अभी भी यहाँ था।
वह पूरे समय वहीं रहा था।
कामिला ने उसे कुछ पल देखा। उसने अभी तक गौर नहीं किया था कि वह जाग गई है। वह फर्श की ओर देख रहा था, जैसे कोई ऐसी खबर का इंतज़ार कर रहा हो जिसके लिए तकनीकी रूप से उसे इंतज़ार करने का कोई हक न हो। उस बात में—उसके उस अंदाज़ में, उस चुनाव में—कुछ ऐसा था जिसने उसके सीने में एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी, जिसके लिए उसके पास शब्द नहीं थे।
तुम किसी ऐसे इंसान के हकदार हो जो तुम्हारे साथ वैसा ही बर्ताव करे जैसा तुम्हारे पिता मेरे साथ करते हैं।
उसने ऊपर देखा।
उसके चेहरे पर तुरंत चिंता के भाव आ गए। “क्या तुम ठीक हो?”
“बेहतर।” उसने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा। “तुम्हारी वजह से।”
वह कुर्सी पर थोड़ा हिला। “यह कुछ भी नहीं था।”
“तुमने मुझे जलती हुई कार से बाहर निकाला।”
“मैं वहां था।” एक छोटा सा कंधा उचकाना, थोड़ा झेंपते हुए। “वह सही काम था जो करना चाहिए था।”
कामिला ने उसे देखा।
सही काम। जैसे वह उसकी लिस्ट का बस अगला काम रहा हो। जैसे अस्पताल के बाद, प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठना, एक ऐसी महिला के लिए जिसका नाम तक वह नहीं जानता था, बस एक और 'सही काम' हो।
“तुम्हारा नाम क्या है?” उसने पूछा।
“डेमन।”
एक पल का सन्नाटा।
“कामिला,” उसने अपना नाम बताया।
“मुझे पता है।” फिर जल्दी से बोला: “पैरामेडिक्स। तुमने उन्हें बताया था।”
“सही।” उसने अपने हाथ गोद में रख लिए। “तो, डेमन। इस तरह की चीज़ के लिए कोई तुम्हें कैसे शुक्रिया अदा करे?”
वह लगभग हंस पड़ा, एक आह जैसी, जो उससे अनजाने में निकली। “तुम्हें इसकी ज़रूरत नहीं है—”
“बिल्कुल है।”
वह कुछ पल शांत रहा। फिर, बड़ी सावधानी से बोला, जैसे वह इसके बारे में सोच रहा हो और उसे यह न पता हो कि इसका कैसा जवाब मिलेगा, “फ्लैटबश पर एक जगह है। ब्रुकलिन की सबसे बेहतरीन वाफल्स—कम से कम मुझे तो ऐसा ही लगता है। जब तुम बेहतर महसूस करो।” एक विराम। “हम जा सकते हैं। जश्न मनाने के लिए। कि तुम ठीक हो।”
कामिला ने उसे गौर से देखा।
दयालु। ईमानदार। उस तरह का इंसान जो अजनबियों को जलती हुई कारों से खींचकर निकालता है और फिर असुविधाजनक अस्पताल की कुर्सियों पर बैठकर इंतज़ार करता है, और नाश्ते पर ले जाने के अलावा और कुछ नहीं मांगता।
उसने सोचा, उसकी मां उसे बहुत पसंद करेंगी।
“ठीक है,” उसने कहा।
उसके चेहरे के भाव बदल गए—पहले हैरानी, फिर कुछ और गर्मजोशी।
“सच में?”
“हाँ।”
वह उस रात के बारे में लंबे समय तक सोचती रही।
वह रास्ता जो उसने लगभग नहीं लिया था। वह आग। वह आदमी जो रुका रहा।
उसने उस रात की नींव पर कुछ बनाया—वफादारी, आभार, छह साल का जीवन जो स्थिर और गर्म और ठीक था।
वह कर्ज असली लगता था।
वह कर्ज असली था।
बस उसे अभी यह नहीं पता था कि वास्तव में वह कर्ज किस चीज़ के लिए चुकाया गया था।
Very good start as always. I loved the banter at the dinner table. Family at its best and worst in the warmest of ways. Mothers are something else, they are the CEOs of the family and we can’t help loving them, dads just follow the lead and years of unsaid rules. I can feel we’re going to have fun.
Ok this had me on the edge of my bed, so great start to first chapter and I know it have more drama and bacchanal coming...I started this book first, but stopped because I had to read Noah and Hazel's story then Joshua's story.
wait till my girl finds out he was the reason it all happened 😭 my mind and heart are spinning for her already. excited to see where this goesssss