अध्याय 1: नियम
18+ इस कहानी में शोक, प्रियजनों को खोने का दुख, अवसाद और बेचैनी जैसे विषय शामिल हैं। परिपक्व विषय। सहमति वाले वयस्क।
जूलियन वेंस का एक नियम था।
आप व्यापार को शोक के साथ नहीं मिलाते।
आप व्यापार को किसी भी चीज़ के साथ नहीं मिलाते।
लिली के बाद से तो बिल्कुल नहीं।
उसने इसी नियम पर 'वेंस एंड एसोसिएट्स' की नींव रखी थी। मैनहट्टन में कांच और स्टील की चवालीस मंजिलें। दीवारों पर कोई तस्वीरें नहीं। शाम 6 बजे के बाद कोई व्यक्तिगत कॉल नहीं। जब तक भुगतान न किया जाए, कोई भी देर तक नहीं रुकता था।
सालगिरह पर तो बिल्कुल नहीं।
और इस सालगिरह पर तो बिल्कुल भी नहीं।
जूलियन ने अपने फोन की तारीख देखी। 12 अक्टूबर। पंद्रह साल।
उसे कुछ महसूस नहीं हुआ। यही तो मकसद था।
उसने फोन को अपने डेस्क पर औंधा रख दिया। महोगनी। महंगी। खाली।
उसके ऑफिस के बाहर, 44वीं मंजिल खामोश थी। शाम के 7:03 बज रहे थे। बाकी सब घर जा चुके थे। वे हमेशा चले जाते थे। वही चेक पर हस्ताक्षर करता था। वही नियम बनाता था।
12 अक्टूबर को कोई ओवरटाइम नहीं। तीसरे साल के बाद से तो बिल्कुल नहीं।
तो फिर मार्केटिंग विभाग की लाइट क्यों जल रही थी?
जूलियन उठा। आज उसके घुटने में दर्द नहीं हुआ। छोटी-छोटी राहतें। वह पैंतालीस का था। इतना छोटा नहीं कि बूढ़ा महसूस करे, और इतना बड़ा नहीं कि यह दिखावा करे कि तारीख से कोई फर्क नहीं पड़ता।
वह खाली केबिनों के बीच से गुजरा। उसके कदमों की आवाज गूंज रही थी। उसे यह पसंद था। लोगों को पता चल जाता था कि वह आ रहा है। उनके पास व्यस्त दिखने का समय मिल जाता था।
मार्केटिंग पॉड पीछे के कोने में था। एक टेबल लैंप। एक व्यक्ति।
लियो चेन।
सत्ताइस साल का। कंपनी में तीन साल से। जूनियर कॉपीराइटर। अपने काम में माहिर। शांत। कभी छुट्टी नहीं ली।
वह कीबोर्ड पर झुका हुआ था। उसके कंधे कांप रहे थे।
वह टाइप नहीं कर रहा था। कांप रहा था।
जूलियन पांच फीट की दूरी पर रुक गया। वह सांत्वना नहीं देता था। वह व्यक्तिगत नहीं होता था। वह सिर्फ पेरोल का काम करता था।
"तुम यहाँ देर तक हो," जूलियन ने कहा।
लियो चौंक गया। उसने सिर ऊपर उठाया। उसकी आंखें लाल थीं। स्क्रीन की वजह से नहीं। रोने की वजह से।
उसने अपने स्वेटर की आस्तीन से चेहरा पोंछा। वह स्लेटी रंग का था। बहुत बड़ा। ऑफिस ड्रेस कोड के हिसाब से नहीं। जूलियन को ड्रेस कोड की परवाह नहीं थी। उसे कांपने की परवाह थी।
"मिस्टर वेंस।" लियो की आवाज भारी थी। "मुझे माफ करें। मैं नहीं... मैं चला जाऊंगा। मुझे बस इसे खत्म करना था..."
"7 बज चुके हैं," जूलियन ने कहा। "हम बारह तारीख को ओवरटाइम नहीं करते।"
लियो जम गया। उसके हाथ अभी भी कीबोर्ड पर थे। वह टाइप नहीं कर रहा था। वह हिल नहीं रहा था।
"आप तारीख जानते हैं," लियो ने कहा। यह कोई सवाल नहीं था।
जूलियन ने कोई जवाब नहीं दिया। उसे यह पता नहीं होना चाहिए था कि लियो चेन कौन है। उसके पास दो सौ कर्मचारी थे। वह उनका प्रदर्शन जानता था। उनके जन्मदिन नहीं। उनका दुख नहीं।
"मैं ठीक हूँ," लियो ने कहा। वह झूठ बोल रहा था। उसकी आंखें अभी भी नम थीं। "मैं आमतौर पर काम करता हूँ। यह आसान है। घर पर... घर पर बहुत खामोशी होती है।"
जूलियन खामोशी के बारे में जानता था। खामोशी सबसे बुरी होती है।
उसने लियो की डेस्क देखी। एक फ्रेम की हुई फोटो, नीचे की तरफ मुड़ी हुई। एक कॉफी मग। 'वर्ल्ड्स ओकेएस्ट एम्प्लॉई'। वह टूटा हुआ था। एक नीली फाइल, कागजों से भरी हुई।
मार्केटिंग रिपोर्ट। कुछ भी जरूरी नहीं। ऐसा कुछ नहीं जो सोमवार तक इंतजार न कर सके।
"घर जाओ, मिस्टर चेन," जूलियन ने कहा। उसकी आवाज उसकी मंशा से ज्यादा सख्त हो गई थी। वह अभ्यास से बाहर था। वह शाम 6 बजे के बाद लोगों से बात नहीं करता था।
"मैं नहीं जा सकता।" लियो की आवाज भर्रा गई। उसने अपने हाथों की ओर देखा। "आज मेरे लिए भी पंद्रह साल पूरे हो गए।"
जूलियन के ऑफिस की हवा जैसे गायब हो गई। भले ही वह अपने ऑफिस में नहीं था।
पंद्रह साल।
वही संख्या। वही दिन।
जूलियन इत्तफाक में यकीन नहीं रखता था। वह डेटा में यकीन रखता था। अनुबंधों में। नियमों में।
यह एंप्लॉयी हैंडबुक में कहीं नहीं था।
लियो ने अपनी कुर्सी पीछे धकेली। खामोशी में पहियों की आवाज तेज थी। वह बहुत तेजी से खड़ा हुआ। उसका संतुलन बिगड़ा।
जूलियन बिना सोचे आगे बढ़ा। वह दो कदम में पॉड के पार पहुंच गया। उसे महसूस होने से पहले ही उसका हाथ लियो की बांह पर था।
कर्मचारियों को मत छुओ। यह नियम नंबर चार था।
लियो ने खुद को पीछे नहीं खींचा। वह बस वहां खड़ा रहा। कांपते हुए। सत्ताइस साल का, और ऐसे कांप रहा था जैसे दुनिया खत्म हो रही हो।
क्योंकि शायद उसके लिए, यह खत्म ही हो रही थी। फिर से।
"कब," जूलियन ने कहा। उसकी आवाज धीमी थी। "आज। यह कब हुआ था?"
लियो ने उसकी तरफ देखा। सच में देखा। तीन साल में पहली बार। मिस्टर वेंस को नहीं। सीईओ को नहीं। बस उस आदमी को जिसने पूछा था।
"कार दुर्घटना," लियो फुसफुसाया। "शाम 6:17 बजे। मेरे माता-पिता। वे मुझे सॉकर प्रैक्टिस से लेने आ रहे थे। मैं बारह साल का था।"
शाम 6:17। जूलियन ने अपनी घड़ी देखी। 7:09 बज रहे थे।
वह चूक गया था। बावन मिनट की देरी हो गई थी।
लिली का हादसा शाम 6:03 पर हुआ था। आग। अपार्टमेंट। वह ऑफिस में था। उसने खुद से कहा था कि वह वापस कॉल करेगा।
उसने वापस कॉल नहीं किया।
जूलियन ने लियो की बांह छोड़ दी। उसकी उंगलियां जैसे जल गई थीं।
वह पीछे हट गया। उसे उनके बीच वह डेस्क चाहिए थी। उसे वे चवालीस मंजिलें चाहिए थीं। उसे वह नियम चाहिए था।
"तुम्हारे नुकसान के लिए मुझे खेद है," जूलियन ने कहा। कॉर्पोरेट। खाली। सुरक्षित।
लियो ऐसे चौंक गया जैसे जूलियन ने उसे मारा हो।
"नहीं," लियो ने कहा। "ऐसा मत करो। तुम तो नहीं। आज के दिन तो नहीं।"
तुम तो नहीं।
इसका क्या मतलब था? लियो चेन उसके बारे में क्या जानता था?
"मिस्टर चेन, देर हो रही है। तुम्हें..."
"मेरा भाई भी मर गया था," लियो ने कहा। वह अब जूलियन की तरफ नहीं देख रहा था। वह उस मुड़ी हुई फोटो को देख रहा था। "पिछले साल। इसी दिन। अलग साल। लगता है मेरे परिवार को 12 अक्टूबर पसंद है।"
वह हंसा। वह एक टूटी हुई आवाज थी। वह ऑफिस के लायक नहीं थी। वह कहीं के भी लायक नहीं थी।
जूलियन की छाती में दर्द हुआ। वह पैंतालीस का था। उसे छाती में दर्द नहीं होता था। उसका साल में दो बार मेडिकल चेकअप होता था। वह रोज सुबह छह मील दौड़ता था।
उसे छाती में दर्द नहीं होता था।
"घर जाओ," जूलियन ने फिर कहा। बस यही उसके पास था।
"मेरा कोई घर नहीं है," लियो ने कहा। "आज तो नहीं। मेरे अपार्टमेंट में... उनका सामान है। मेरे भाई का सामान। मैं... मैं वहां नहीं रह सकता जब इतनी खामोशी हो।"
जूलियन समझ गया। भगवान, वह पूरी तरह समझ गया। उसने लिली के बाद अपना अपार्टमेंट बेच दिया था। सफेद दीवारों वाला पेंटहाउस खरीदा। कोई इतिहास नहीं। कोई खामोशी नहीं।
वह अभी भी आधे समय होटल में सोता था।
"तो किसी होटल में चले जाओ," जूलियन ने कहा। "कंपनी कार्ड ले लो। मैं अनुमति दे दूंगा।"
लियो ने आखिरकार ऊपर देखा। उसकी आंखें गहरी थीं। भूरी। लाल किनारों वाली। सत्ताइस साल का लड़का सत्तर का लग रहा था।
"आप नहीं समझ रहे," लियो ने कहा। "मुझे होटल नहीं चाहिए। मुझे कार्ड नहीं चाहिए। मुझे बस..."
वह रुक गया। उसने अपने होंठ भींचे। उसने दूसरी तरफ देख लिया।
जूलियन ने इंतजार किया। वह इंतजार करने में माहिर था। उसने पंद्रह साल इंतजार किया था।
"मैं चाहता हूँ कि यह कल होता," लियो ने अपनी बात पूरी की। उसकी आवाज इतनी धीमी थी कि जूलियन लगभग चूक ही गया था। "या आने वाला कल। मैं बस यह नहीं चाहता कि यह आज का दिन हो।"
जूलियन उस अहसास को जानता था। वह उसी अहसास में जीता था। साल के तीन सौ चौंसठ दिन, वह ठीक था। काम कर रहा था। खाली था।
एक दिन, वह नहीं होता था।
उसने लियो को देखा। सच में देखा। कोई परफॉरमेंस रिव्यू नहीं। कोई पेरोल नंबर नहीं। बस एक बच्चा। कांपता हुआ। दुखी। एक ही दिन पर।
नियम टूट गया।
"मेरे साथ चलो," जूलियन ने कहा।
लियो ने पलकें झपकाईं। "क्या?"
"तुम अकेले नहीं रह सकते," जूलियन ने कहा। ये शब्द उसके मुंह से अजीब लग रहे थे। वह ऐसी बातें नहीं करता था। "और मुझे... मुझे भी खामोशी के साथ रहना नहीं आता।"
यह पंद्रह साल में कही गई उसकी सबसे ईमानदार बात थी।
लियो उसे घूरता रहा। मार्केटिंग फ्लोर शांत था। शहर चवालीस मंजिल नीचे था। बेखबर।
"मिस्टर वेंस, मैं नहीं—"
"जूलियन," उसने कहा। उसने दस साल से किसी कर्मचारी के सामने अपना नाम नहीं लिया था। "कम से कम आज रात के लिए। बस जूलियन।"
लियो का मुंह खुला। बंद हुआ। उसके हाथ मुट्ठी बनकर उसके बगल में थे।
टेबल लैंप भिनभिनाया। नीली फाइल वहीं पड़ी थी। फोटो औंधी ही रही।
"मुझे समझ नहीं आ रहा," लियो फुसफुसाया।
जूलियन को भी नहीं आ रहा था।
लेकिन वह पहले ही अपनी जैकेट की ओर बढ़ चुका था। नियम नंबर एक पहले ही तोड़ चुका था।
आप व्यापार को शोक के साथ नहीं मिलाते।
वह उसे फिर भी मिला रहा था।
Hello, great start, vivid feelings. Thorougly described. well done.
Nice start to first chapter ❤️