LETTER #421
14 जून
नन्ही चिड़िया,
लोग कहते हैं कि ऐसी जगह पर वक्त ठहर जाता है, पर ऐसा नहीं है। यह तुम्हारी यादों को धीरे-धीरे कुतरता रहता है जब तक कि सब कुछ धुंधला न हो जाए। पर तुम नहीं। सिर्फ तुम ही हो जिसने मेरे दिमाग में रंग भर कर रखे। मैं घर आ रहा हूँ। मैंने अपनी सज़ा काट ली है, और अब मैं यहाँ से बाहर निकलने के काबिल हो गया हूँ। मैं जल्द ही वहाँ पहुँच जाऊँगा।
मैं तुम्हारे पास आ रहा हूँ।
— अंकल Cade









damnnn i was hoping real uncle
I think I am going to like this very much . It has a good plot ❤️
well if that isn’t a good start to this book. 🥵