THE MAN-EATING WEREWOLF (HINDI)

सारांश

"Aadamkhor Bhediya" ek horror-thriller kahani hai jo Surya Nagar naam ke gaon ke paanch doston — Abhi, Sahil, Karan, Surya aur Suyash — ke ird-gird ghoomti hai. Bachpan se ve ek aadamkhor bhediye ki kahani sunte hue bade hote hain jo gaon ke paas ke jungle mein rehta hai. Jab Sahil ki maa ki maut jungle ke band raste ki wajah se samay par ilaaj na milne ke karan ho jati hai, to doston ka vishwas toot jata hai. Ve sach jaanne aur gaon walon ke darr ko khatam karne ke liye jungle mein ek raat bitane ka faisla karte hain. Lekin jungle ke andar unka saamna asli aadamkhor bhediyon se hota hai. Ek bhayanak raat mein dosti, himmat aur balidan ki pariksha hoti hai. Aakhir mein sirf do dost bach paate hain aur gaon laut kar sachchai sabko bata dete hain.

शैली
Horror
लेखक
Saurav Kumar
स्थिति
Complete
अध्याय
1
रेटिंग
n/a
आयु रेटिंग
13+

THE MAN-EATING WEREWOLF

एक समय की बात है, सूर्या नगर नाम के एक गाँव में पाँच दोस्त रहते थे। बचपन से ही वे एक डरावनी कहानी सुनते हुए बड़े हुए थे कि गाँव के पास वाले जंगल में एक आदमखोर भेड़िया रहता है। गाँव वाले अक्सर उसकी बातें करते थे और उसी डर के साथ अपना जीवन बिताते थे।

लेकिन उन पाँचों दोस्तों ने कभी उस भेड़िये को अपनी आँखों से नहीं देखा था। उन्होंने सिर्फ उसकी कहानियाँ ही सुनी थीं।

समय बीतता गया और गाँव वालों का डर बढ़ता गया। आखिरकार उन्होंने पूरे जंगल के चारों ओर ऊँची बाड़ लगवा दी, ताकि न जंगल से कोई बाहर आ सके और न ही कोई अंदर जा सके।

कुछ साल बाद वे पाँचों दोस्त पढ़ाई के लिए शहर चले गए। कई वर्षों बाद जब वे वापस अपने गाँव लौटे, तो सभी दोस्त फिर से मिले।

एक दिन वे कहीं घूमने जाने की योजना बना रहे थे। सबने अलग-अलग जगहों के नाम सुझाए, लेकिन किसी को भी कोई जगह खास पसंद नहीं आई।

तभी आभी बोला,

"क्यों न हम उस जंगल में चलें? वहाँ तो कोई भी नहीं जाता।”

यह सुनकर सभी दोस्त चौंक गए। जंगल का नाम सुनकर ही उनके मन में डर बैठ जाता था।

आभी ने फिर कहा,

"सोचो, हम सिर्फ एक रात वहाँ रुकेंगे और वापस आ जाएँगे। शायद इसके बाद गाँव वालों का डर भी खत्म हो जाए। आखिर कब तक लोग इस डर में जीते रहेंगे?”

करण ने उसकी बात का समर्थन किया।

"यार, बात तो तेरी सही है।”

हालाँकि शुरू में सभी ने मना कर दिया।

लेकिन कुछ दिनों बाद एक ऐसी घटना हुई जिसने सब कुछ बदल दिया।

उनके दोस्त साहिल की माँ अचानक बहुत बीमार पड़ गईं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना था। अस्पताल पहुँचने का सबसे छोटा रास्ता जंगल के पास से होकर जाता था, लेकिन गाँव वालों ने उसे बंद कर रखा था।

मजबूरन उन्हें लंबा रास्ता लेना पड़ा।

जब तक वे अस्पताल पहुँचे, डॉक्टर ने दुखद खबर दे दी।

"अब ये इस दुनिया में नहीं रहीं।”

यह सुनकर साहिल फूट-फूटकर रोने लगा। वह करण के गले लगकर बिखर गया। पास खड़ा आभी भी आँसू बहा रहा था।

थोड़ी देर बाद सूर्या और सुयश भी वहाँ पहुँचे। अपने दोस्त को इस हालत में देखकर उनकी आँखें भी भर आईं।

अगले दिन साहिल की माँ का अंतिम संस्कार किया गया।

सफेद कपड़ों में गाँव वाले उनके घर के सामने इकट्ठा हुए।

"राम नाम सत्य है...”

के नारों के बीच साहिल आगे चल रहा था। उसके हाथ में रस्सी से लटका मिट्टी का घड़ा था, जिसके ऊपर जलता हुआ उपला रखा था।

उसके पीछे करण, सूर्या, सुयश और आभी उसकी माँ की अर्थी को कंधा देकर चल रहे थे।

अंतिम संस्कार के बाद भी साहिल का दुःख कम नहीं हुआ।

तेरहवीं के दिन उसने कुछ लोगों को यह कहते हुए सुना,

"अगर जंगल के बीच वो दीवार न होती, तो शायद उसकी माँ बच जाती।”

यह बात साहिल के दिल और दिमाग में बैठ गई।

उसने यह बात अपने दोस्तों को बताई।

आभी तुरंत बोला,

"मैं पहले से कह रहा हूँ कि ये सब सिर्फ कहानियाँ हैं। और अगर सच में कोई भेड़िया है भी, तो सिर्फ एक ही होगा। हम पाँच लोग मिलकर उसे खत्म कर देंगे।”

फिर उसने कहा,

"और कब तक हम इस डर और इस दीवार की वजह से नुकसान उठाते रहेंगे?”

उनकी बातें एक गाँव वाले ने सुन लीं और पूरे गाँव में बता दीं।

गाँव वालों ने उन्हें बहुत समझाया, रोका, मना किया, लेकिन पाँचों दोस्त नहीं माने।

आखिर एक सुबह लगभग चार बजे, सूरज निकलने से पहले, वे जंगल में प्रवेश कर गए।

पूरा दिन घूमने के बाद उन्हें नदी के किनारे एक सुंदर जगह मिली, जहाँ एक झरना भी था।

उन्होंने दो टेंट लगाए और आग जला ली।

रात हो गई।

सब कुछ सामान्य लग रहा था।

दोस्त हँस रहे थे और मजाक कर रहे थे।

"देखा, गाँव वाले बेकार में डरते हैं।”

लेकिन आधी रात होते ही सब कुछ बदल गया।

आभी को पेशाब लगी, इसलिए वह टेंट से बाहर निकला। सुरक्षा के लिए उसने एक मशाल भी साथ ले ली।

जब वह झरने के पास पहुँचा तो उसने ऊपर आसमान में चमकता हुआ पूर्णिमा का चाँद देखा।

तभी उसकी नज़र झरने के ऊपर खड़े एक विशाल भेड़िये पर पड़ी।

भेड़िये ने सिर उठाकर एक भयानक हुआँक भरी।

उसकी चमकती आँखें सीधे आभी को घूर रही थीं।

आभी डर से काँप उठा और भागकर कैंप की तरफ दौड़ा।

लेकिन रास्ते में एक दूसरा भेड़िया उसके सामने आ गया।

किसी तरह जान बचाकर वह अपने दोस्तों तक पहुँचा।

सभी ने तुरंत आग को चारों ओर फैला दिया।

आभी घबराकर बोला,

"एक था ना? फिर दो कैसे हो गए?”

सूर्या बोला,

"मतलब गाँव वालों की बातें सच थीं?”

तभी सुयश को एक पुरानी बात याद आई।

"कहते हैं, जिसे भी वो भेड़िया मारता है, वह भी भेड़िया बन जाता है।”

यह सुनकर सभी के होश उड़ गए।

वे तुरंत पेड़ों पर चढ़ गए।

साहिल, सूर्या, करण और सुयश तो ऊपर चढ़ गए, लेकिन आभी बीच में ही फँस गया।

उसी समय उसने देखा कि आग बुझने लगी है।

घबराकर वह दूसरे पेड़ की ओर भागा, लेकिन तब तक दूसरा भेड़िया वहाँ पहुँच चुका था।

भेड़िये ने छलाँग लगाकर उस पर हमला कर दिया और उसे बेरहमी से मार डाला।

अब केवल चार दोस्त बचे थे।

साहिल और सूर्या एक पेड़ पर थे, जबकि करण और सुयश दूसरे पेड़ पर।

जैसे-जैसे आग बुझती गई, दोनों भेड़िये अंदर आने लगे।

दोस्तों को लगा था कि भेड़िये पेड़ पर नहीं चढ़ पाएँगे।

लेकिन वे गलत थे।

उन भेड़ियों में अलौकिक शक्तियाँ थीं।

वे पेड़ों पर चढ़ने लगे।

साहिल और सूर्या डर के मारे काँप रहे थे।

तभी साहिल ने कहा,

"मेरे लिए अब कुछ नहीं बचा। मेरी माँ मेरा इंतज़ार कर रही है।”

उसने जानबूझकर एक भेड़िये का ध्यान अपनी ओर खींचा।

और फिर उसे पकड़कर आग में कूद गया।

दोनों आग की लपटों में समा गए।

सूर्या की आँखों से आँसू बहने लगे।

लेकिन अगले ही पल उसका डर गुस्से में बदल गया।

उसने एक बड़ी टहनी उठाई और ऊपर से दूसरे भेड़िये पर छलाँग लगा दी।

भेड़िया बेहद शक्तिशाली था।

वह लगातार सूर्या पर हमला कर रहा था।

करण उसकी मदद करने आया, लेकिन वह भी बुरी तरह घायल हो गया।

तभी सुयश एक चाकू लेकर आया।

उसने भेड़िये पर वार किया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।

भेड़िया जंगल की ओर भाग गया।

लेकिन तब तक सुयश भी मौत के करीब पहुँच चुका था।

सुबह होने तक सिर्फ करण और सूर्या ही जीवित बचे थे।

उन्होंने अपने तीनों दोस्तों के शवों को जला दिया ताकि वे भेड़िया बनकर वापस न लौटें।

फिर दोनों जितनी तेज़ दौड़ सकते थे, गाँव की ओर भागे।

दोपहर तक वे सूर्या नगर पहुँच गए और उन्होंने पूरी घटना गाँव वालों को बता दी।

उस दिन के बाद जंगल के चारों ओर और कड़ी सुरक्षा लगा दी गई।

किसी को भी जंगल में जाने की अनुमति नहीं थी।

लेकिन जंगल की गहराइयों में...

आदमखोर भेड़िये की कहानी आज भी ज़िंदा है।

लेखक: सौरव कुमार

Saurav Kumar को बताएँ कि आपको यह चैप्टर कैसा लगा!
बहुत पसंद आया

0

बहुत पसंद आया

मज़ेदार

0

मज़ेदार

तीखा

0

तीखा

रहस्यमय

0

रहस्यमय

भावनात्मक

0

भावनात्मक

गहन

0

गहन

दिल छू लेने वाला

0

दिल छू लेने वाला

चौंकाने वाला

0

चौंकाने वाला

अच्छा लेखन

0

अच्छा लेखन

रोचक कथानक

0

रोचक कथानक

शानदार चरित्र

0

शानदार चरित्र

सशक्त संवाद

0

सशक्त संवाद

author

आपने बहुत सुंदर कहानी बनाई मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता भगवान आपको बहुत बड़ा स्टोरी ट्रेलर बनाएं। आपकी अद्भुत क्रिएटिविटी को दिल से 🙏 ।#खूब बड़ा वला आदमी#ढेर सारी खुशियां आपकी जिंदगी में आए #दिल मेरा खुश हो गया

४ महीने