अध्याय १
काम से थका-मांदा घर लौटा तो थकान कंधों पर बोझ की तरह लदी हुई थी। फिर भी, थकावट के बावजूद मैंने अपना प्लान जारी रखा—बेंसन, मेरे बॉयफ्रेंड के लिए एक सरप्राइज।
मैंने सब कुछ बारीकी से प्लान किया था: उसके पसंदीदा रेस्टोरेंट में रिज़र्वेशन, उसकी पसंद की रेड वाइन की बोतल, और सबसे बड़ा सरप्राइज—एक कार।
महीनों से मैंने ओवरटाइम किया था, नींद और पर्सनल टाइम कुर्बान करके, बस इस पल को परफेक्ट बनाने के लिए। उसे महीनों पहले नौकरी से हाथ धोना पड़ा था, और हम दोनों का खर्चा उठाना मेरी ज़िम्मेदारी बन गया था।
लिफ्ट से उतरते ही मेरी हील्स संगमरमर की पॉलिश फर्श पर टक-टक करती हुई गूंजीं। सीने में उत्सुकता का एक झोंका-सा उठा। उसके लिए वक्त नहीं निकाल पाई थी, उम्मीद थी कि ये सब कुछ भरपाई कर देगा।
टेकअवे बैग्स को एक हाथ में संभालते हुए मैंने चाबी निकाली और अपार्टमेंट का दरवाज़ा खोला। डिफ्यूज़र से आती लैवेंडर की हल्की खुशबू ने स्वागत किया—वो सुकून देने वाली महक जो लंबे दिनों के बाद मेरी आदत बन चुकी थी।
मगर आज रात कोई और खुशबू भी हवा में तैर रही थी—मीठी, चिपचिपी, बिल्कुल बेमेल। पेट में एक हलचल-सी हुई। ये खुशबू मैंने पहले भी महसूस की थी, हल्की और फौरन गायब हो जाने वाली, मगर आज वो ज़्यादा तीखी थी और अनदेखा नहीं किया जा सकता था।
फिर हंसी की आवाज़ आई—तेज़, परिचित, चिढ़ाने वाली हंसी, जिसने मेरे खून को ठंडा कर दिया।
नहीं... ये नहीं हो सकता।
मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ी, हर कदम डर से भारी। जितना करीब पहुंची, उतना ही वो आवाज़ साफ़ होती गई। वेरोनिका ब्लिस—मेरी पुरानी कॉलेज की प्रतिद्वंद्वी, वो औरत जिसका अस्तित्व ही मुझे नीचा दिखाने के इर्द-गिर्द घूमता था।
बेडरूम का दरवाज़ा थोड़ा-सा खुला था। कानों में धड़कन गूंजने लगी जब मैंने उसे धकेला।
वो दोनों वहां थे। आधे नंगे वेरोनिका बेंसन के ऊपर लेटी हुई थी, वो सब कर रही थी जो मुझे देखना नहीं चाहिए था। उनकी कराहें कानों में ज़हर घोल रही थीं, एक गंदी गंध गले को दबोच रही थी।
विश्वासघात की वो भावना, जिसे मैं सबसे ज़्यादा नफरत करती थी, दिल के हर दर्द को पीछे छोड़ गई।
उन्हें पूरे एक मिनट लगा ये समझने में कि कमरे में अब सिर्फ़ वो दोनों नहीं हैं।
बेंसन बिस्तर से उछलकर खड़ा हुआ, उसका चेहरा पीला पड़ गया। "डायन—ये... ये वैसा नहीं है जैसा दिख रहा है!"
मैंने कड़वी, खोखली हंसी हंसते हुए कहा, “वैसा नहीं है जैसा दिख रहा है? मैं अंदर आती हूं और ये सब देखती हूं, क्या तुम सच में समझते हो कि इस सिचुएशन में कोई गलतफहमी हो सकती है?”
वेरोनिका आलसी अंदाज़ में उठी, चादर को अपने चारों ओर लपेटते हुए जैसे कोई रानी हो। “ओह, डायन,” वो मीठी आवाज़ में बोली, झूठी सहानुभूति टपकाते हुए। “इतनी हैरान मत हो। तुम सच में सोचती हो कि कोई तुम्हारे जैसे किसी के लिए वफादार रहेगा?”
मैंने मुट्ठियां भींच लीं, गुस्से से कांपते हुए। कितना मन कर रहा था कि उस घिनौनी मुस्कान को उसके चेहरे से मिटा दूं।
बेंसन ने गर्दन खुजलाई, अपराधबोध की जगह रक्षात्मक गुस्सा आ गया। “तुम कभी यहां नहीं होतीं, डायन। हमेशा काम में लगी रहती हो, थकी हुई—बात करना तो दूर, छूना तक नहीं! मैं क्या करता? एक कुत्ते की तरह इंतज़ार करता रहता?”
उसके शब्दों ने दिल में हज़ार सुइयां चुभो दीं।
मैंने तेज़ सांस ली, नाखून हथेलियों में गड़ गए। “तुमने धोखा दिया क्योंकि मैं काम कर रही थी ताकि हम दोनों का गुज़ारा हो सके? क्या तुम खुद को सुन रहे हो?”
उसकी जबड़े की मांसपेशियां तन गईं। “मैं एक मर्द हूं। मेरी ज़रूरतें हैं,” उसने रुककर कहा। “और देखो... तुम और वेरोनिका में यही फर्क है। तुम्हें काम करना पड़ता है रोटी कमाने के लिए, उसे ऐसा कुछ नहीं करना पड़ता। वो मुझे बिना उंगली उठाए सपोर्ट कर सकती है।” उसने मुझे चौंका दिया।
ये सिर्फ़ सेक्स की बात नहीं थी। उसे चाहिए था पैसा और पावर। मैं इतनी अंधी कैसे हो गई कि उसे इतना वक्त तक मुझे इस्तेमाल करने दिया?
“बेंसन, क्या तुम मर्द हो भी या नहीं?” मैंने चिल्लाकर कहा।
वेरोनिका ने तिरछी मुस्कान बिखेरी। “सच मानो, डायन। तुम कभी काफी नहीं थीं। बेंसन के लायक कोई और है... कोई मेरी तरह।”
गुस्सा रगों में उबलने लगा। मुझे एहसास भी नहीं हुआ और मेरा हाथ बेंसन के चेहरे पर एक जोरदार थप्पड़ मार चुका था।
उसकी आंखों में आग भड़क उठी, और एक डरावने पल के लिए उसका हाथ उठा जैसे वो मुझे मारने वाला हो। हैरानी की बात ये थी कि वेरोनिका बीच में आ गई, हमें अलग करते हुए एक काली, चेतावनी भरी नज़र से देखती हुई।
मैं पीछे हटी, सांस अटक गई। कमरा मानो ढह रहा हो।
“कल जब मैं वापस आऊं तो तुम यहां नहीं मिलना चाहिए।” मैंने कहा।
मैंने दरवाज़ा जोर से बंद किया और पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत नहीं की। हो सकता है ये कायरता लगे, मगर मैं तब तक इंतज़ार नहीं करने वाली थी जब तक वो अपना मन बदलकर मुझे सबक सिखाने का फैसला न कर ले।
खून में एड्रेनालाईन की कितनी भी मात्रा क्यों न हो, उससे मैं उसके खिलाफ़ कोई लड़ाई नहीं जीत सकती थी।
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थॉर्न बार में,
मद्धम रोशनी वाला बार मुझे एक सुरक्षात्मक कवच की तरह घेर लेता था। शांत, अंधेरा, और परिचित चेहरों से दूर—गुमनामी में डूबने के लिए एकदम सही जगह।
मैं काउंटर पर बैठी, गिलास में घूमते एम्बर रंग के तरल को घूरती रही। शराब की जलन से सीने का दर्द थोड़ा भी कम नहीं हुआ।
मैंने खुद को इतना गिरने कैसे दिया?
मैंने इतना कुछ कुर्बान किया, बेंसन के लिए हर संभव कोशिश की... और बदले में? पीठ में छुरा घोंप दिया गया।
“कितनी बेवकूफ हूं,” मैंने बुदबुदाया, आवाज़ में कड़वाहट घुल गई थी।
मैंने एक और लंबा घूंट लिया, नशे की अस्थायी सुन्नता का मज़ा लेते हुए। मगर शराब के नशे के बावजूद, किसी की नज़र मुझ पर गड़ी हुई होने का अजीब-सा अहसास नहीं छूट रहा था।
मैंने बार के चारों ओर सतर्क नज़र दौड़ाई। वहां कुछ ही लोग थे—कुछ अंधेरे बूथों में बैठे हुए। कुछ भी असामान्य नहीं था।
“बुरी रात है?” बगल से एक आवाज़ आई, जिससे मैं चौंक गई।
मैंने घूमकर देखा—गंदे सुनहरे बालों के बीच से नीली आंखें चमक रही थीं। वो खुरदुरा मगर खूबसूरत था। उसकी आवाज़ में हल्का-सा विदेशी लहजा था।
“साफ़ दिख रहा है क्या?” मैंने आह भरते हुए कहा।
उसने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम शराब पानी की तरह पी रही हो और लग रहा है कि या तो रोने वाली हो या किसी को मारने वाली।”
मेरे मुंह से अनिच्छा से एक हंसी फूट पड़ी। “इतना बुरा हाल है?”
“मैंने और भी बुरे हालात देखे हैं।” उसने अपना गिलास उठाया, मज़ाक में टोस्ट करते हुए। “बुरी रातों से बच निकलने के नाम।”
मैंने अपना गिलास उसके गिलास से टकराया। “मैंने अपने बॉयफ्रेंड को... किसी और औरत के साथ पकड़ लिया।”
उसने मुंह बनाया। “यार, ये तो बहुत बुरा हुआ। माफ़ करना कि तुम्हें ये सब सहना पड़ा।”
मैंने कंधे उचकाए, एक और जलता हुआ घूंट निगलते हुए। “अब तो कुछ भी नहीं रहा।”
उसने अपनी घड़ी पर नज़र डाली, फिर मेरी तरफ देखा। “तुम इससे उबर जाओगी। यकीन करो। मैं और बातें करना चाहता था, मगर मुझे जाना पड़ेगा।”
जाने से पहले उसने काउंटर पर एक छोटा-सा कार्ड सरकाया। “अगर कभी किसी की पिटाई करानी हो तो याद करना।”
कार्ड पर मोटे अक्षरों में लिखा था: एथन ग्रेव्स, उसके नीचे एक फोन नंबर।
मैंने कार्ड को अपने बैग में डाल लिया, उसे रात के अंधेरे में गायब होते हुए देखा।
फिर से वो अजीब-सा अहसास हुआ—किसी की नज़र मेरी पीठ पर गड़ी हुई थी। मैंने ऊपर देखा—मद्धम रोशनी वाले दूसरे फ्लोर के बालकनी पर।
मेरी नज़र एक काली परछाई पर पड़ी। मैं उसके चेहरे की बारीकियां तो नहीं देख पाई, मगर उसकी काली आंखें शत्रुता से मेरी तरफ घूर रही थीं।
रीढ़ की हड्डी में एक सिहरन दौड़ गई।
मैंने सोचा कि अब नशा काफी हो चुका है, तो उठकर चलने लगी। हर कदम के साथ चक्कर ज़्यादा आने लगे। पेट में ऐसा दर्द हो रहा था मानो किसी ने बार-बार घूंसे मारे हों।
बाहर निकलने ही वाली थी कि अचानक मेरे पैर जवाब दे गए और आखिरी चीज़ जो मैंने महसूस की, वो थी एक गर्म आगोश—फिर सब कुछ अंधेरा हो गया।
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