एपिसोड 1
अलिता खो गई थी।
वैसे तो खोई नहीं थी। बस अपने समूह से बिछड़ गई थी।
उसे बेवकूफ जैसा महसूस हो रहा था। उसे अकेले अभयारण्य से बाहर जाने की इजाज़त मिलना बड़ी बात थी।
वह मरे हुओं की दुनिया में पली-बढ़ी थी। उसे बस यही दुनिया मालूम थी।
उसे पुरानी दुनिया की झलकियाँ दिखती थीं। कॉलोनी के बुज़ुर्ग सदस्यों से कहानियाँ सुनती थी। मगर सब कुछ सपना सा लगता था। क्योंकि उसकी दुनिया की तुलना में कुछ भी वैसा नहीं था।
सब कुछ—इमारतें, सड़कें, घर—सब खंडहर बन चुके थे। प्रकृति ने सब कुछ अपने कब्ज़े में ले लिया था।
लोग काम पर नहीं जाते थे। शॉपिंग नहीं करते थे। न फ़ोन थे, न इंटरनेट। कोई संचार का साधन नहीं था।
मगर सबसे बुरा तो मरे हुए थे।
इतने सालों बाद, उनमें से ज़्यादातर सड़ने लगे थे। उनकी तादाद कम हो गई थी। मगर वे कभी पूरी तरह गायब नहीं होंगे। क्योंकि जब भी कोई मरता—चाहे प्राकृतिक मौत हो या अस्वाभाविक—वह वापस आ जाता। हमेशा वापस आता।
अलिता का समूह युवाओं का था। उम्र 16 से 20 के बीच। सब अपने खतरनाक माहौल में खुद को साबित करने की कोशिश कर रहे थे।
इसलिए उन्हें एक काम सौंपा गया था।
और अलिता को लगा कि वह नाकाम हो गई है।
उन्हें अनजाने में मरे हुओं का एक बड़ा झुंड मिल गया। इतने सारे कैसे थे, अलिता को नहीं पता था। सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया, और वह किसी तरह अपनी जान बचाकर निकली।
अब वह अकेली थी। बिल्कुल अकेली। उसे नहीं पता था कि बाकी लोग कहाँ हैं। क्या वे ठीक हैं। उसका बॉयफ्रेंड भी उनमें से एक था। पोर्टर। वे साथ-साथ बड़े हुए थे। पहले दोस्त, फिर उनकी दोस्ती कुछ और बन गई।
इस काम के बाद वे रिश्ता पक्का करने वाले थे। वह सही वक्त का इंतज़ार कर रही थी, जब खुद को उसे सौंप सके। वह साबित करना चाहती थी कि वह समाज की एक काबिल सदस्य है। साबित करना चाहती थी कि अब वह वयस्क हो चुकी है।
उसे लगा कि दोनों के लिए यही सही वक्त होगा।
अब उसे यह भी नहीं पता था कि वह ज़िंदा है या नहीं।
भगवान करे वह ज़िंदा हो, उसने मन ही मन सोचा।
वह जंगल से गुज़र रही थी। उसके पैरों के नीचे पक्की सड़क थी। शायद कभी यहाँ सड़क हुआ करती थी। अब घास और झाड़ियों ने उसे ढक लिया था।
वह धातु के एक ढेर के पास से गुज़री। एक कार के अवशेष झाड़ियों में दबे हुए थे। अब उसे पहचानना मुश्किल था।
अपने सुनहरे बालों को पोनीटेल में बाँधे, पीठ पर बैग लटकाए, वह कम्पास की ओर देख रही थी। अगर वे बिछड़ जाते तो योजना थी कि वापस कैंप लौटना। उनका कैंप अभयारण्य से कुछ मील दूर बना हुआ था। वहीं वह पहुँचने की कोशिश कर रही थी।
मगर उस अफरा-तफरी में वह रास्ता भटक गई थी। क्या होगा अगर उसे वापस जाने का रास्ता न मिला? क्या होगा अगर उसे लगने लगा कि इस दुनिया में जीने की काबिलियत उसमें नहीं है?
क्या यह गलती थी?
उसने एक लंबी साँस छोड़ी और हाथ नीचे कर लिया। सिर हिलाया। उसे मज़बूत रहना था। उसने इसके लिए ट्रेनिंग ली थी। उसे पता था क्या करना है। और उसे रास्ता भी मिल जाएगा।
वह ठीक रहेगी।
बाकी सब भी ठीक होंगे।
वह जल्द ही उनसे मिलेगी।
उसे पता था कि कैंप दक्षिण-पूर्व में है, इसलिए उसी दिशा में जाएगी। उसकी कमर पर एक छोटी पिस्तौल थी। बैग में माचेटे था। उसे दोनों चलाना आता था। उसके पास कुछ दिनों तक चलने वाला खाना था। कोई भी समस्या आने पर काम आने वाले औज़ार थे।
वह तैयार थी।
वह यह कर सकती थी।
गहरी साँस छोड़ते हुए वह आगे बढ़ी। सतर्क थी। उम्मीद कर रही थी कि शायद बाकियों के निशान मिल जाएँ। मगर कुछ नहीं था। सिर्फ प्रकृति की आवाज़ें।
कम से कम वह मरे हुओं के झुंड से तो दूर निकल आई थी।
चलते-चलते उसे हैरानी हो रही थी कि इतने सारे मरे हुए कैसे थे। क्या किसी बड़े समूह में किसी की मौत हुई होगी, और फिर सब बदल गए होंगे? या उन्हें मारा गया होगा? किसी दूसरे समूह ने मारा होगा?
अलिता जिस दुनिया में पली-बढ़ी थी, वहाँ लोग उतने ही खतरनाक थे जितने मरे हुए। पड़ोसी की मदद करने के दिन लद चुके थे। सभ्यता के खत्म होते ही लोग ठंडे और स्वार्थी हो गए थे। कोई क़ानून नहीं था जो सबको काबू में रखता। लोग जो चाहे कर सकते थे। चोरी कर सकते थे, मार सकते थे, और कोई सज़ा नहीं होती थी।
यह पूरी तरह मुमकिन था कि किसी दूसरे समूह ने उन लोगों को मारा हो। यही वजह थी कि उसे सतर्क रहना था। वे लोग अभी भी बाहर हो सकते थे। और वह अकेली और बेसहारा थी।
वह घंटों चलती रही। अँधेरा होने लगा था, फिर भी किसी का कोई निशान नहीं था। अँधेरे में चलना मुमकिन नहीं था। उसे अकेले ही रात बितानी पड़ेगी।
रुककर उसने अपने आसपास देखा। सिर्फ पेड़ और झाड़ियाँ। उसे कोई आश्रय मिल जाए तो गनीमत थी। नहीं तो तंबू ही लगाना पड़ेगा।
कुछ देर और चलने के बाद उसे एक उपयुक्त जगह मिली। एक खुला मैदान था। पास में किसी पुरानी मशीन के अवशेष पड़े थे। उसके आसपास एक ढाँचे के निशान थे। शायद कभी यहाँ अस्तबल रहा होगा। अब वह इतना जर्जर हो चुका था कि ज़्यादातर हिस्सा गिर चुका था।
उसने अपना बैग उतारा और तंबू निकालने लगी। उसे लगाने में ज़्यादा वक्त नहीं लगा। उसने एक छोटी सी आग जलाई और रात को सोने से पहले आग के पास बैठकर गर्माहट महसूस की। अभी तो पतझड़ की शुरुआत थी, मगर हवा में ठंडक बढ़ने लगी थी।
कल उसे उम्मीद थी कि वह कैंप वापस पहुँच जाएगी। और उसे उम्मीद थी कि उसका बॉयफ्रेंड ज़िंदा होगा। अगर उसके साथ कुछ हुआ तो…
उसने सिर हिलाया।
उसे ऐसे ख्यालों को दिमाग से निकाल देना चाहिए।
सब ठीक था।
सब ठीक हो जाएगा।
उसने आग बुझाई और तंबू के अंदर घुस गई। एक तरफ़ उसका गन था, दूसरी तरफ़ माचेटे। वह मोटे कपड़े में सिमट गई और आँखें बंद कर लीं।
पता नहीं कितनी देर सोई थी जब किसी सरसराहट ने उसे जगा दिया। लगता था जैसे कदमों की आवाज़ हो। कई कदम। उसके तंबू के बाहर लोग थे। उनके पास रोशनी थी। उसे तंबू के कपड़े के पार परछाइयाँ दिख रही थीं, जो उसकी ओर बढ़ रही थीं।
“यहाँ क्या मिला है, लड़कों?”
“लगता है कोई यहाँ तंबू लगाकर बैठा है।”
“वाकई।”
“मगर यहाँ तंबू लगाने की जगह तो अच्छी नहीं है।”
“आग जलाना भी समझदारी नहीं है। कोई भी देख सकता है।”
“हाँ, जैसे हमने देखी।”
अलिता का हाथ धीरे-धीरे स्लीपिंग बैग से बाहर निकला और उसने पिस्तौल की हैंडल पकड़ ली।
“जो भी तंबू के अंदर है, आराम से बाहर आ जाओ। हमने तुम्हें घेर लिया है। और हम खेलने के मूड में नहीं हैं, समझ रहे हो न?”
अलिता के दिल की धड़कन उसके सिर में गूँज रही थी। उसे क्या करना चाहिए? उसे नहीं पता था कि बाहर कितने लोग हैं, मगर आवाज़ से कम से कम चार-पाँच तो लग रहे थे। तंबू के पतले कपड़े के पार उसे उनकी परछाइयाँ दिख रही थीं। वह सबको नहीं संभाल सकती थी। शायद एक-दो को गोली मार दे, मगर बस यही होगा। वे उसे ज़रूर मार देंगे।
“तुम… तुम क्या चाहते हो?” उसने डरी हुई आवाज़ में कहा, उँगलियाँ पिस्तौल को कसकर पकड़े हुए।
“वाह, हमने तो लॉटरी मार दी, लड़कों! यह तो लड़की है!”
“साला, हमने बहुत दिनों से कोई लड़की नहीं देखी।”
“बहुत दिनों से।”
“बाहर आ जाओ, लड़की। हम तुम्हें कुछ नहीं करेंगे।”
अलिता के पेट में एक डरावना अहसास हुआ। वह उन पर यकीन नहीं कर सकती थी। उसे अच्छी तरह पता था। अजनबियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। और जिस तरह से ये लोग बात कर रहे थे, उससे साफ़ था कि इनका इरादा कुछ गड़बड़ है।
“म-मुझे गन है! बस मुझे अकेला छोड़ दो,” उसने कहा। वह सख्त और गंभीर दिखने की कोशिश कर रही थी, मगर उसकी आवाज़ में डर साफ़ झलक रहा था। वह डरी हुई थी और नहीं जानती थी कि इस मुसीबत से कैसे निकले।
“हाँ? हमारे पास भी गन हैं। ढेर सारी। तो सोचो, तुम्हारी क्या संभावना है?”
अलिता ने काँपती साँस छोड़ी। सोच, अलिता, सोच।
“मेरा ग्रुप दूर नहीं है। अगर मेरे साथ कुछ हुआ तो वे ढूँढ़ने आएँगे। और वे माफ़ करने वाले नहीं हैं। मेरा… मेरा बाप लीडर्स में से एक है। वह तुम्हें इसका मोल चुकाएगा।”
उनमें से एक आदमी हँसा। बाकी भी हँसने लगे। वे उसके ब्लफ़ पर यकीन नहीं कर रहे थे। या उन्हें परवाह नहीं थी। शिट।
“अगर तुम्हारे पास ग्रुप है, तो तुम यहाँ अकेली क्यों हो?”
अलिता के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। वह इन लोगों को सच नहीं बता सकती थी।
“मैं अकेली नहीं हूँ। बाकी लोग कभी भी यहाँ आ सकते हैं।”
“हाँ?” उस आदमी ने कहा। “तो उन्हें दिखाओ। मैं इंतज़ार कर सकता हूँ। तुम लोग तैयार हो?”
“मेरे पास तो सारी दुनिया का वक्त है, रैंड।”
“हाँ, मेरा भी। मैं सारी रात यहाँ बैठ सकता हूँ।”
अलिता के माथे से ठंडा पसीना टपकने लगा। कुछ काम नहीं आ रहा था। वे उस पर यकीन नहीं कर रहे थे। उसे गोली चलाकर ही बाहर निकलना होगा, और इस तरह ज़िंदा बचना नामुमकिन था। वह मरने वाली थी।
“बस मुझे जाने दो। अगर तुम चले गए तो कोई घायल नहीं होगा। मगर अगर तुम मुझे ज़बरदस्ती तंबू से बाहर निकालने की कोशिश करोगे, तो जान लो, मैं गोली चला दूँगी। कम से कम एक को तो ले ही जाऊँगी। मैं कसम खाती हूँ,” उसने आखिरी कोशिश की।
“मेरे पास आदमी कम नहीं पड़ते,” रैंड ने कहा। उसकी आवाज़ गहरी और भारी थी।
“क्या साला, रैंड?” दूसरे आदमी ने कहा। उसकी आवाज़ पतली थी।
“यह कुछ नहीं करने वाली, ह्यू। शायद इसके पास गन भी नहीं है,” तीसरे आदमी ने कहा।
“अगर इसके पास गन है तो मैं इसे बाहर नहीं खींचने वाला,” ह्यू ने कहा।
“कोई इसे बाहर नहीं खींचेगा। यह खुद बाहर आएगी, है न, लड़की? क्योंकि अगर नहीं आई, तो यहाँ से ज़िंदा निकलने का कोई चांस नहीं है,” रैंड ने कहा।
“शायद नहीं। मगर अगर मैं कम से कम एक को अपने साथ ले गई, तो बेकार नहीं मरूँगी,” उसने हिम्मत नहीं हारी।
“मगर अगर तुम शांतिपूर्वक बाहर आ जाओ, तो तुम्हें मरना भी नहीं पड़ेगा। इतनी शत्रुता क्यों? हममें से किसी ने कहा भी नहीं कि हम तुम्हें नुकसान पहुँचाएँगे।”
“क्या तुम समझते हो मैं बेवकूफ हूँ?” उसने कहा।
इस पर सब हँस पड़े।
“ठीक है, लड़कों, यह बेवकूफ नहीं है। तो इसे बाहर कैसे लाएँ?”
“मेरे पास एक आइडिया है,” एक ऐसे आदमी ने कहा जिसकी आवाज़ उसने पहले नहीं सुनी थी। उसकी आवाज़ शांत और संयत थी।
अलिता ने पिस्तौल सामने कर ली, तैयार थी कि कोई तंबू का फ्लैप खोलने की कोशिश करे तो गोली चला दे। मगर किसी ने फ्लैप नहीं खोला। तंबू के कपड़े के पार उसे एक लौ दिखी। किसी ने मशाल जलाई थी। फिर उसे तंबू पर फेंक दिया।
अलिता चीख पड़ी जब उसका तंबू अचानक आग पकड़ गया। अब उसके पास कोई चारा नहीं था, उसे बाहर निकलना ही पड़ा। उसने जल्दी से माचेटे को पकड़ा, एक हाथ में ब्लेड और दूसरे में पिस्तौल लेकर वह धीरे-धीरे तंबू से बाहर निकली।
उन आदमियों ने झूठ नहीं बोला था जब उन्होंने कहा कि वे उसे घेर चुके हैं। कम से कम पाँच लोग थे। सब उम्रदराज, उसके बाप की उम्र के आसपास। उसे देखते ही उनकी आँखें फैल गईं।
“साला…”
“यकीन नहीं हो रहा।”
“यह तो बहुत छोटी है!”
अलिता ने घबराकर अपनी पिस्तौल उन पर तान दी, जबकि माचेटे को मज़बूती से पकड़े हुए थी। “पीछे हटो!”
“अरे, शांत हो जाओ। मेरे आदमियों को माफ़ कर दो। बात बस इतनी है कि… हमने इतने लंबे वक्त से इतनी छोटी लड़की नहीं देखी। तुम कितनी उम्र की हो?” रैंड ने पूछा।
“19। और सिर्फ इसलिए कि मैं छोटी हूँ, इसका मतलब यह नहीं कि मैं अपनी रक्षा नहीं कर सकती!” उसने जल्दी से कहा। उसका चेहरा सख्त था, मगर अंदर से वह घबरा रही थी।
रैंड हँसा। वह लंबा आदमी था। अलिता से कहीं ज़्यादा। उसका शरीर भी भारी-भरकम था। न तो मोटा, मगर चौड़ा। उसकी दाढ़ी से उसकी डरावनी शक्ल और भी भयानक लग रही थी।
“मुझे यकीन है तुम कर सकती हो। मगर क्यों नहीं पिस्तौल नीचे कर लेती हो, ताकि हम बात कर सकें?” रैंड ने कहा।
“किस बात की?! बस मुझे जाने दो!” अलिता ने कहा, और घबराहट बढ़ती जा रही थी। उसे महसूस हो रहा था कि वे लोग उसे घेर रहे हैं। वह घूमी और जल्दी से अपने दाहिनी ओर के आदमी पर पिस्तौल तान दी।
“आराम से, आराम से,” रैंड ने कहा। “ऐसा करने से कुछ हासिल नहीं होगा।”
“अच्छा?” अलिता ने कहा। एक झटके में उसने अपने बाएँ ओर के आदमी पर माचेटे से वार किया। “मैं मज़ाक नहीं कर रही! मुझे जाने दो!”
रैंड ने मुँह बनाया। “मैंने कोशिश की। इसे पकड़ लो।”
अलिता की आँखें फैल गईं। उसने माचेटे से फिर वार किया और पिस्तौल घुमाई, सब पर निशाना साधा। अगले ही पल उसे लगा कि कोई उसके पीछे आ गया है। हाथों ने उसकी बाँह पकड़ ली, जिसमें पिस्तौल थी। वह संघर्ष करने लगी और ट्रिगर खींच दिया। गोली हवा में चली गई। उसने फिर माचेटे से वार किया और इस बार निशाना लगा।
“शिट!” एक आदमी चिल्लाया। उसके बाँह से खून बहने लगा।
वह फिर वार करने की कोशिश कर रही थी, इस बार गर्दन पर निशाना साधा, मगर दूसरे हाथ ने उसकी दूसरी बाँह पकड़ ली, और अगले ही पल उसे ज़मीन पर पटक दिया गया।
पिस्तौल उसके हाथ से छीन ली गई और दूर फेंक दी गई। माचेटे को भी उससे छीन लिया गया। पीछे से आग पर पानी डालने की आवाज़ आ रही थी। मगर वह उस पर ध्यान नहीं दे पा रही थी क्योंकि वह उन आदमियों से लड़ने में लगी थी। लड़ने की कोशिश कर रही थी, और हार रही थी। वे उससे कहीं बड़े और मज़बूत थे।
“मुझे जाने दो!!” वह चीखी।
“ऐसा नहीं होने वाला,” रैंड ने कहा। “मैंने तुम्हें आसान रास्ता दिया था। तुमने नहीं लिया।”
“तुम मुझे कभी जाने नहीं देते!” वह चीखी, उन लोगों से संघर्ष करती हुई।
रैंड हँसा। “शायद नहीं। मगर अब मेरे एक आदमी का खून बह रहा है। इसका मोल तुम्हें चुकाना पड़ेगा।”
“साली को ठीक कर दो! उसने तो मेरा हाथ ही काट दिया!”
अलिता ने घायल आदमी की ओर देखा। उसका पूरा हाथ खून से लथपथ था। घाव पर हाथ रखने के बावजूद खून बह रहा था। उसे संतोष होना चाहिए था, मगर हुआ उल्टा। वे उसके साथ क्या करने वाले थे?!
“नहीं, मैं इसे ठीक नहीं करूँगा, फिल। कम से कम उस तरह तो नहीं,” रैंड ने कहा। वह उसके पास आया जहाँ वे उसे दबाए हुए थे और उसके सामने झुका। “लड़कों, यहाँ तो चमत्कार हो गया है। एक 19 साल की लड़की। तुम लोगों ने आखिरी बार इतनी छोटी लड़की कब देखी थी? साला, मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि इस नर्क में कोई बच्चा भी बड़ा हो सकता है। मगर किसी तरह यह बच गई, और मैं इस तरह के इनाम को जाने नहीं दूँगा।”
अलिता ने उस बूढ़े आदमी की ओर देखा और उसकी रूह काँप गई। जिस तरह से वह उसे देख रहा था, जो शब्द कह रहा था… उसे लग रहा था जैसे वह कोई मांस का लोथड़ा हो। या शायद वह सोने का अंडा हो, जैसा उसने बचपन में किसी कविता में पढ़ा था। वह उसे इंसान की तरह नहीं देख रहा था। वह एक इनाम थी। उसका इनाम। और यह उसे डरा रहा था।
“प्लीज़, बस मुझे जाने दो। मेरा ग्रुप ज़रूर मुझे ढूँढ़ने आएगा। वे तब तक नहीं रुकेंगे जब तक मुझे नहीं ढूँढ़ लेते,” उसने आखिरी बार गिड़गिड़ाई।
“आने दो उन्हें। क्योंकि मैं तुम्हें बता रहा हूँ, स्वीट चीक्स, तुम कहीं नहीं जा रही हो…” रैंड ने उसके चेहरे की ओर हाथ बढ़ाया और उसने जल्दी से मुँह फेर लिया। उसने ज़बरदस्ती उसके गाल पकड़कर उसे अपनी ओर देखने पर मजबूर किया। “अब तुम मेरी हो, समझी? बेहतर है इसे अभी स्वीकार कर लो, बाद में नहीं। इसके कपड़े उतार दो।”
अलिता की आँखें फट गईं। “क्या?! नहीं!”
वह छटपटाई और संघर्ष करने लगी जब तीनों आदमी उसे दबाए हुए उसके कपड़े उतारने लगे। एक बार उसने एक हाथ छुड़ा लिया। चश्मे वाले आदमी की नाक पर सीधा घूँसा मारा। वह कराहा और उसकी नाक से खून बहने लगा। कुछ खून उस पर भी गिरा। इस वार के बदले उसे एक थप्पड़ मारा गया, जिससे वह कुछ पल के लिए हक्की-बक्की रह गई। उसके बाद कपड़े उतारना आसान हो गया।
उसे ठंडी ज़मीन अपनी नंगी पीठ पर महसूस हो रही थी। उसकी नंगी छातियाँ तेज़ साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। सबकी नज़रें उसके नंगे शरीर पर थीं। वह किसी की ओर देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। उसे जाग जाना चाहिए था। यह सब एक बुरा सपना होता। या फिर उसे उम्मीद थी कि पोर्टर आ जाए। इन हरामज़ादों के सिर में गोली मार दे।
ऐसा कुछ नहीं हुआ।
“साला, देखो तो इसकी बॉडी कितनी टाइट है। हमारे घर की ढीली औरतों से कहीं बेहतर है,” एक आदमी ने कहा।
“बताओ तो,” दूसरे ने कहा। ह्यू था। “इसके शरीर पर एक दाग तक नहीं। इसकी स्किन तो एकदम बेदाग है!”
“यह तो परफेक्ट है,” रैंड ने कहा। वह उसके पास फिर झुका। उसका हाथ उसकी नंगी छाती पर गया और उसे दबाया। अलिता ने दाँत भींच लिए और आँखें कसकर बंद कर लीं। “इसके पास अच्छी छातियाँ हैं। कमर भी कर्वी है। और इतनी छोटी होने के बावजूद, शर्त लगाता हूँ इसकी पussy ने ज़्यादा एक्शन नहीं देखा होगा। अगर देखा भी होगा तो बहुत कम, है न स्वीट चीक्स?”
अलिता ने उसका जवाब नहीं दिया। वह यह नहीं मानने वाली थी कि वह वर्जिन है। वह कुछ भी नहीं करने वाली थी जिससे ये लोग उसे और ललचाएँ। उसे अब अफसोस हो रहा था कि तंबू में रहते हुए उसने कुछ गोली क्यों नहीं चला दीं। वह मरना पसंद करती, बजाय इसके कि ये लोग उसके साथ जो करने वाले थे, वह सहना पड़े।
“अब बोलती क्यों नहीं, हाँ?” रैंड ने पूछा। उसकी उंगलियाँ उसकी छाती से हटकर पेट पर फिसलने लगीं। उंगलियों की नोक उसकी त्वचा पर खेलती हुई नीचे की ओर बढ़ने लगीं। अलीता ने अपने पैर बंद करने की कोशिश की, लेकिन खुरदुरे हाथों ने उसे जबरदस्ती फैला दिया। जब अनचाही उंगलियाँ उसके जघन बालों में घुसीं, तो वह बेचैनी से कराह उठी।
“लगता नहीं ये इसके लिए तैयार है, रैंड,” ह्यूई हँसते हुए बोला।
“नहीं?” रैंड ने कहा। “शर्त लगाता हूँ, इसे मना लूँगा।”
“हम सब इसे मना लेंगे,” दूसरे आदमी ने ललचाते हुए कहा।
“मुझे ही इसे फँकने दो!” टूटे नाक वाले आदमी ने कहा। उसकी आवाज़ तनाव से भरी थी और आँखें सिकोड़ी हुई थीं। “इसने मेरी नाक तोड़ दी! इसे सबक सिखाना होगा!”
“तुम? इसने… इसने मेरा हाथ काट दिया…” फिल बोला। खून बहने से उसकी त्वचा पीली पड़ गई थी।
“चुप कर, हरामजादे!” रैंड ने अचानक चिल्लाकर कहा। अलीता चौंक गई। “सब चुप रहो। अभी इसे कोई नहीं छुएगा सिवाय मेरे। और जब मैं इसे खत्म कर लूँगा, तो ये मेरे लंड के लिए गिड़गिड़ाएगी।”
ह्यूई ने नाक सिकोड़ी। “रैंड, इतना मीठा माल तू अकेला नहीं रख सकता। तू नियम जानता है। हम माल बाँटते हैं।”
इन शब्दों के साथ अलीता ने महसूस किया कि एक नया हाथ उसकी छाती पर आ गया। इसने रैंड से कहीं ज़्यादा ज़ोर से उसे दबोचा और उसकी चूची को इतनी ज़ोर से मरोड़ा कि उसे दर्द हुआ। वह फिर से कराह उठी और उसे धक्का देने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ ज़मीन से मजबूती से दबाए हुए थे।
“और ये नियम किसने बनाए?” रैंड ने झटके से कहा। उसने ह्यूई का हाथ झटक दिया। “मैंने। तो अगर तुम्हें इसका मौका चाहिए, तो अपनी बारी का इंतज़ार कर।”
“आह, यार,” ह्यूई बुदबुदाया। उसने अपनी बाँह रगड़ी जहाँ रैंड ने मारा था। “ठीक है। देखते हैं। इस हरामी को अपने लंड के लिए चिल्ला।”
“मुझे कोई ऐतराज़ नहीं,” रैंड ने घमंड से कहा।
अलीता इस सब से शर्मिंदा थी। वह कोई रास्ता सोचने की कोशिश कर रही थी जिससे ये लोग रुक जाएँ। कोई भी तरीका जिससे वह यहाँ से निकल सके। लेकिन वह फँसी हुई थी। उन्होंने उसे ज़मीन पर दबोच रखा था। वह नंगी और बेबस थी। उसके पास कोई हथियार नहीं था। कोई उसे बचाने नहीं आया था। और अब ये सैडिस्ट हरामी कह रहा था कि वह उसे अपने लंड के लिए गिड़गिड़ाने पर मजबूर कर देगा। ऐसा कभी नहीं होने वाला था।
सामान्य हालात में भी वह ऐसा नहीं करती, और अपने बॉयफ्रेंड के साथ गद्दारी करना तो दूर की बात थी।
नहीं, यह सपना देख रहा था। कुछ भी करने से वह उसके लिए गिड़गिड़ाने वाली नहीं थी। उसे उसका गंदा लंड अपने पास नहीं चाहिए था!
आदमीयों से बात करते हुए रैंड ने अपना हाथ उसकी जाँघों के बीच से हटा लिया था, लेकिन उसके घमंडी शब्दों के बाद उसने उसके संवेदनशील हिस्से को थाम लिया। वह हिलने लगी। ऐसा नहीं कि अच्छा लग रहा था, बल्कि असहजता हो रही थी। उसे सिर्फ़ अपने बॉयफ्रेंड का हाथ ही अपने पैरों के बीच महसूस हुआ था। उसे यह गंदा बूढ़ा आदमी नहीं छूना था!
लेकिन उसकी चाहत का कोई मतलब नहीं था। वह उसे रोक नहीं सकती थी। उसे बस वहीं लेटे रहना था जबकि वह उसे छेड़ रहा था। पहले उसने सिर्फ़ उसके योनि को थामा, अपनी उंगलियों को उसकी नाज़ुक परतों पर रगड़ा। फिर वह और हिम्मत जुटाने लगा। उसकी उंगलियाँ उसके योनि के होंठों से खेलने लगीं। उन्हें फैलाने लगा, एक मोटी उंगली उसके गर्म छिद्र को छूने लगी।
अलीता ने सिर हिलाया और बेचैनी से कराह उठी। किसी अजनबी का छूना उसे बहुत गंदा लग रहा था। वह चाहती थी कि वह रुक जाए!
“रुको! मुझे मत छुओ!” उसने ज़मीन से सिर उठाकर उसे देखा। उसकी नज़र उस हरामी से मिली। उसकी आँखों में नफ़रत भरी थी। उसे कई तरह के जज़्बात महसूस हो रहे थे। लेकिन अभी उसे अचानक गुस्सा आ गया। वह इस आदमी को मारना चाहती थी। उसे कभी किसी को मारने की इतनी इच्छा नहीं हुई थी जितनी अभी इसको मारने की थी!
“क्या कह रहा था तू, रैंड? ये तेरे लिए गिड़गिड़ाएगी?” ह्यूई हँसा।
रैंड ने उसे घूरकर देखा। “मैं अभी खत्म नहीं हुआ हूँ, क्या?”
रैंड ने अपना हाथ हटा लिया और ज़मीन पर झुक गया। अलीता को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करने वाला है। जब उसने अपना सिर उसके पैरों के बीच किया, तो बात साफ़ हो गई।
“नहीं, मत करो!” उसने जल्दी से कहा। उसे पहले उंगलियों से छेड़ा गया था, लेकिन पोर्टर ने सिर्फ़ एक बार उसे मुँह से छुआ था। वह… अच्छा नहीं लगा था। उसे पसंद नहीं आया था। और यह हरामी उसे छुए, यह तो और भी बुरा था!
“तुमने कहा मत छुओ, स्वीट चीक्स। लेकिन चाटने के बारे में कुछ नहीं कहा…” इन शब्दों के साथ रैंड की गर्म जीभ उसकी मुलायम परतों पर फिसली, और यह हरकत उसके पूरे शरीर में गर्म सनसनी दौड़ा गई।
अलीता की साँस रुक गई। उसके हाथ मुट्ठी में बँध गए। उसने फिर सिर हिलाया। “मैं सच कह रही हूँ! रुको!”
लेकिन रैंड को रुकने का कोई इरादा नहीं था। उसकी जीभ की हरकत धीमी और ललचाने वाली थी। जैसे कोई चित्रकार अपनी कूची से रंग भरता है, वैसे ही रैंड की जीभ उसकी कूची थी। हर स्ट्रोक सटीक था। वह उसकी संवेदनशील योनि को गीला कर रहा था, उसके पूरे हिस्से को अपनी गर्म लार से ढक रहा था। और वह गर्म सनसनी उसके शरीर में और गर्म होती जा रही थी…
और और गर्म…
अलीता उलझन में थी। क्योंकि जितनी देर रैंड उसकी योनि को चाटता रहा, उतना ही उसे… अच्छा लगने लगा। उसे अच्छा लगने लगा। लेकिन ऐसा क्यों? जब उसे अपने बॉयफ्रेंड के साथ अच्छा नहीं लगा था? उसे तो उसके साथ ही अच्छा लगना चाहिए था, न कि इस बीमार हरामी के साथ?!
“मैंने कहा रुको!” वह चिल्लाई, उलझन महसूस करते हुए।
रैंड ने उसकी बात नहीं मानी। उल्टा, उसने और ज़ोर से चाटना शुरू कर दिया। वे धीमे स्ट्रोक अब ज़ोरदार और दृढ़ हो गए थे। वह अब छेड़ने या मालिश करने की बजाय उसकी योनि के अंदर अपनी जीभ घुसा रहा था। जब उसने जीभ बाहर निकाली, तो उसकी नोक उसके सबसे संवेदनशील हिस्से पर फटकारने लगी।
बस, इतना ही था।
अलीता रुक नहीं पाई।
“ओह…” वह बहुत धीरे से साँस छोड़ते हुए बोली, जब आनंद की लहर ने उसके दिमाग़ पर कब्ज़ा कर लिया। यह इतना अच्छा क्यों लग रहा था?! यह आदमी उसके साथ क्या कर रहा था?!
“शिट, यार,” ह्यूई बोला। “इसने कर दिखाया! तुमने सुना? रैंड, इसे और ज़ोर से कराहने दे! अब तो ये तैयार है!”
अलीता के चेहरे पर गर्मी दौड़ गई। उसे शर्म आ रही थी। वह तो यह कराहना भी नहीं चाहती थी! बस हो गया! वह इसे रोक भी नहीं पाई!
“क्या कहा था मैंने, लड़कों?” रैंड बोला, जैसे उसने साँस ली। “स्वीट चीक्स तो रुक नहीं सकती, है न, बच्ची? ठीक है। मैंने महामारी से पहले इतनी ताज़ा योनि नहीं चखी थी।”
रैंड ने अपना मुँह फिर से उसकी योनि पर लगा लिया और वहीं से शुरू किया जहाँ उसने छोड़ा था। वह उसके छिद्र को ज़ोर से चाटने लगा, अपनी जीभ उसके मीठे गुहा में घुसाता और फिर बाहर निकालकर उसके क्लिट को कई बार ज़ोर से फटकारता। इतना कि अलीता पागल हो उठी। लेकिन वह फिर से कराहना नहीं चाहती थी। वह इन आदमियों को संतुष्टि नहीं देना चाहती थी!
उसने अपने होंठ काट लिए। इतनी ज़ोर से काटा कि खून निकलने लगा। लेकिन चाहे जितनी कोशिश कर ले, वह अपने शरीर की प्रतिक्रिया को रोक नहीं पा रही थी। अपनी योनि की प्रतिक्रिया को रोक नहीं पा रही थी। प्राकृतिक चिकनाहट उसके अंदर भरने लगी। उसकी परतें उत्तेजना से फूलने लगीं। उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
इतनी छोटी और अनुभवहीन होने के कारण वह बहुत संवेदनशील थी। उसे पहले कभी किसी आदमी से इस तरह का ध्यान नहीं मिला था। उसका अनुभवहीन बॉयफ्रेंड पहली बार उसे मुँह से छूने की कोशिश कर रहा था, लेकिन यह परिपक्व आदमी, जो जानता था कि वह क्या कर रहा है, उसके सामने कुछ भी नहीं था।
यह… बहुत ज़्यादा था।
एक कुंवारी किशोरी के लिए बहुत ज़्यादा।
वह जितनी कोशिश कर रही थी, कुछ नहीं हो रहा था। रैंड उसे सबसे सुखद तरीके से उत्तेजित कर रहा था। उसे आनंद की स्थिति में धकेल रहा था। उसे एक बहुत शक्तिशाली ऑर्गेज़्म की ओर ले जा रहा था।
जब वह आया, तो उसका मुँह खुल गया और एक कराह के साथ एक बेचैन और उलझन भरी आवाज़ निकली। फिर और भी सुखद आवाज़ें आने लगीं। जब तक वह हाँफने और कराहने नहीं लगी, जबकि उसका मासूम शरीर बेहद सुखद सनसनी से झकझोर रहा था।
तालियाँ बजने लगीं। साथ में शाबाशी भी।
“शिट, इसे देखो!”
“ये तो मज़ा ले रही है!”
“यार, ये तो बहुत हॉट लग रही है!”
“कर दिया तूने, रैंड! इसने चरम सुख पाया!”
अलीता अभी भी यह समझने की कोशिश कर रही थी कि उसके साथ क्या हुआ, जब रैंड ने अपना मुँह हटाया। उसने अपना चेहरा बाँह से पोंछा और घुटनों के बल बैठ गया। उसके चेहरे पर घमंडी मुस्कान थी।
“क्या कहा था मैंने? अब ये मेरे लंड के लिए तैयार है, है न स्वीट चीक्स?” उसने उसे जीत की तरह देखते हुए कहा।
हालाँकि अलीता को बहुत अच्छा लग रहा था, लेकिन वह खुद को नहीं भूली थी। जो हुआ वह उसकी मर्ज़ी से नहीं हुआ था। यह उसके बस से बाहर था। वह छोटी, अनुभवहीन और बहुत संवेदनशील थी। लेकिन वह यह नहीं चाहती थी। और न ही उसका लंड चाहती थी!
“मैं… मैं नहीं चाहती… तुम… मेरे पास… आओ…” उसने भारी साँसों के बीच कहा।
“अब ये तेरी योनि क्या कह रही है, हाँ? इसे देखो, लड़कों। ये तो टपक रही है!” उसने अपनी उंगलियों से उसकी चिकनाहट निकाली और अपने आदमियों को दिखाई।
“हाँ, ये हरामी तो बस मानना नहीं चाहती,” एक आदमी बोला।
“लेकिन शर्त लगाता हूँ, जब तू इसे अंदर डालेगा तो ये शिकायत नहीं करेगी,” ह्यूई हँसते हुए बोला।
“मुझे करने दे, रैंड। तूने इसे तैयार कर दिया। मुझे इसे फँकने दे,” टूटे नाक वाले बेन ने कहा।
“हाँ, बेन, मैंने इसे तैयार किया। मैंने इसे गीला और मेरे लंड के लिए तैयार किया। तुम बस देखते रहो और सीखते रहो,” रैंड बोला।
उसने अपनी बेल्ट ढीली की और पैंट उतारने लगा। जैसे-जैसे वह कपड़े उतार रहा था, अलीता के दिल में घबराहट भरने लगी। चाहे वह कुछ भी कहे, यह होने वाला था। लेकिन… लेकिन… उसने कभी सेक्स नहीं किया था! अगर दर्द हुआ तो?! वह ऐसा नहीं होने दे सकती थी। उसे कुछ करना था!
“तुम… तुमने जो चाहा वो पा लिया, ठीक है? मैं… मुझे अच्छा लगा… लेकिन अब रुक जाओ। तुम्हें… मुझे… ऐसा मत करना…” वह गिड़गिड़ाई।
रैंड ने अपना अंडरवियर नीचे किया। “तुम बार-बार मना कर रही हो… लेकिन तुम्हारा शरीर हाँ कह रहा है। चिंता मत करो, स्वीट चीक्स, मैं तुम्हें अच्छा फँकूँगा। इतना अच्छा फँकूँगा कि तुम्हें कभी किसी और आदमी का लंड नहीं चाहिए होगा।”
“नहीं…” अलीता कराह उठी। उसके अंडरवियर हटते ही उसकी नज़र उसके लंड पर पड़ी। वह बहुत बड़ा लग रहा था। शायद इसलिए क्योंकि उसने पहले कभी नहीं देखा था। उसे तुलना करने को कुछ नहीं था, और इससे उसे और डर लगने लगा। “प्लीज़!”
“देखो इसे, लड़कों, आखिर ये मुझे गिड़गिड़ा ही रही है। इसे वही दो जो ये चाहती है,” रैंड ने घमंडी मुस्कान के साथ कहा।
वह बूढ़ा आदमी उसके ऊपर चढ़ गया। अलीता को घुटन महसूस हुई। उसने उसे धक्का देने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ अभी भी बाकी लोगों ने दबाए हुए थे। उसने अपना सिर घुमाया तो एक आदमी की आँखों से सामना हुआ, और उसके चेहरे पर बीमार सी मुस्कान देखकर वह फिर रैंड की ओर मुड़ गई।
उसके ऊपर से वह मुस्कुरा रहा था। न तो गर्मजोशी से, न प्यार से, बल्कि पागलों जैसी मुस्कान से। वह डर गई। और उससे भी ज़्यादा डर तब लगा जब उसने उनके शरीरों के बीच हाथ डाला। उसने अपना लंड पकड़ा और उसका मोटा सिर उसके गीले छिद्र पर दबाया।
फिर से अलीता दूर हटने की कोशिश की। उसके लंड से दूर सरकने की कोशिश की। उसे दबाए हुए हाथों ने और ज़ोर से पकड़ लिया।
अपने लंड को ठीक से लगाने के बाद रैंड ने अपने कूल्हे आगे बढ़ाए और अपनी पूरी लंबाई उसके कुंवारी योनि में घुसा दी।
“ओह!” अलीता दर्द और हैरानी से चीख उठी। एक ही झटके में वह रैंड के लंड से भर गई। सिर्फ़ एक धक्के में उसने अपनी कुंवारी खो दी। अपने प्यारे बॉयफ्रेंड को छोड़कर एक अजनबी हरामी के हाथों।
उसे अपराधबोध महसूस हुआ। और शर्मिंदगी।
क्या पोर्टर उसे माफ़ कर पाएगा? क्या वह उसे पहले जैसा देख पाएगा?
उसके बॉयफ्रेंड की यादें उसके दिमाग़ में भर गईं, जबकि रैंड उसे फँकने लगा।
“शिट, लड़कों, ये तो बहुत टाइट है…” उसने धीरे-धीरे शुरू किया। उसने अपना मोटा लंड उसके टाइट छिद्र से ज़्यादातर बाहर निकाला और फिर धीरे-धीरे अंदर धकेला, ताकि उसकी योनि के होंठ उसके मोटेपन के हिसाब से ढल जाएँ।
जैसे-जैसे वह उसे फँक रहा था, उसे अपनी योनि फैलती हुई महसूस हो रही थी। उसके योनि के होंठ उसके लंड के चारों ओर कसकर लिपट गए थे, जबकि उसकी अंदरूनी दीवारें उसके मांसल मोटेपन को स्वीकार करने पर मजबूर थीं। पहले कभी उसके अंदर कुछ नहीं गया था। यह अजीब सा एहसास था।
अलीता को कई तरह के अजीब एहसास हो रहे थे।
अपराधबोध, शर्म, डर…
घृणा, गुस्सा, नफ़रत।
लेकिन जैसे-जैसे वह बूढ़ा आदमी उसे फँकता रहा, उसे अच्छा भी लगने लगा।
शुरुआत में नहीं। पहले तो दर्द हुआ। उसे फँकने में आराम नहीं दिया गया। उसने एक ही ज़ोरदार धक्के से उसे अंदर घुसा दिया। लेकिन कुछ देर बाद दर्द कम हो गया। क्योंकि चाहे वह चाहे या न चाहे, उसका शरीर इसके लिए तैयार था। रैंड ने अपनी जीभ से उसे तैयार किया था। और उसका उपजाऊ और संवेदनशील शरीर उसके लंड के लिए पूरी तरह तैयार था।
जब बाकी आदमी देख रहे थे, रैंड ने रफ़्तार बढ़ा दी।
उसके कूल्हे तेज़ी से हिलने लगे। अलीता को उसका लंड महसूस हो रहा था, जो उसके चिकने गुहा में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था। जितनी तेज़ी से वह उसे अंदर-बाहर कर रहा था, उतना ही अच्छा लगने लगा।
बिना सोचे-समझे उसने अपने कूल्हे हिलाने शुरू कर दिए, ताकि उसके धक्कों से मेल खा सकें।
और बिना सोचे-समझे वह हाँफने लगी।
उसके शरीर पर पसीना छलकने लगा। उसकी चूचियाँ कड़ी हो गईं। वह उन्हें उसके बालों वाले और पसीने से तर सीने पर महसूस कर सकती थी, और अजीब बात थी कि वह भी अच्छा लग रहा था।
जल्द ही वह आनंद से कराहने लगी, जबकि वह बूढ़ा आदमी उसे अच्छे से फँक रहा था। वह खुद को रोक नहीं पा रही थी। यह बहुत अच्छा लग रहा था। इतना अच्छा कि उसने कभी सोचा भी नहीं था!
“यही है, स्वीट चीक्स। तुम्हें अच्छा लग रहा है, है न?” रैंड उसके ऊपर से हाँफते हुए बोला।
अलीता ने उसे जवाब नहीं दिया। शायद… इस पल में उसे अच्छा लग रहा था, लेकिन अंदर से वह जानती थी कि यह क्या था। यह उसकी मर्ज़ी के खिलाफ़ था। और जब यह खत्म हो जाएगा, तो वह और नहीं चाहेगी, जैसा वह चाहता था। वह इसे मार डालेगी।
अगर मौका मिला, तो वह इनमें से हर एक को मार डालेगी।
रैंड और तेज़ी से हिलने लगा। उनके जुड़ने की गीली और मांसल आवाज़ें जंगल में गूँजने लगीं। उसका लंड उसके कुंवारी छिद्र में एक ही मकसद से पंप हो रहा था। उसके अंदर वीर्य भरने के लिए। उसे अपने बीज से भरने के लिए।
एक तीव्र ऑर्गेज़्म उसके अंदर फूट पड़ा। सबसे तेज़ सनसनी उसकी योनि से शुरू हुई और फिर पूरे शरीर में फैल गई।
वह चीख़ रही थी।
आनंद से चीख़ रही थी, जबकि उसकी टाइट योनि रैंड के मोटे लंड के चारों ओर ऐंठने और काँपने लगी। उसने अनजाने में उस बूढ़े आदमी को चरम सुख तक पहुँचा दिया।
“ओहह…” रैंड उसके ऊपर से कराहा। उसका शरीर तन गया, कूल्हे रुक गए, और अलीता को महसूस हुआ कि उसके अंदर कुछ गर्म फैल रहा है।
वह इतनी अनुभवहीन थी कि उसे समझ नहीं आया कि यह क्या था। इस पल में उसे अच्छा लगा। सही लगा।
कुछ मिनट बाद यह खत्म हो गया और रैंड उसके अंदर से बाहर निकला। वह ज़मीन पर पड़ी रही, पसीने से तर और इस्तेमाल की गई हालत में। उसे पता भी नहीं चला कि आदमियों ने उसे छोड़ दिया था। यह पहली बार था जब उसे फँका गया था, और उसे कई नए और अजीब एहसास हो रहे थे।
“देखो यहाँ,” रैंड बोला। “ये कुंवारी थी। छोटी स्वीट चीक्स को पहली बार लंड मिला!”
अलीता ने उसकी ओर देखा, और वह अपने खून से सने हाथ बाकी आदमियों को दिखा रहा था।
“यार, तू तो हर बार अच्छी योनि पाता है!” ह्यूई ने जलन से कहा।
“शिट, एक कुंवारी?! यकीन नहीं हो रहा!”
“ठीक है, तूने मज़ा ले लिया, अब मेरी बारी!” टूटे नाक वाले बेन ने कहा।
वह उसके पास आया, और अलीता जल्दी से अपने आप को सिकोड़कर बचाव की मुद्रा में आ गई। क्या अब ये सब उसे फँकेंगे?! वह यह बर्दाश्त नहीं कर सकती थी!
“बेन, पीछे हट!” रैंड बोला। उसने जल्दी से अपने कपड़े पहने और उठ खड़ा हुआ। “तुम्हारी बारी आएगी। लेकिन अभी इसे स्टेडियम वापस ले चलते हैं। यहाँ हम असुरक्षित हैं। और अगर सच में इसका कोई ग्रुप इसे ढूँढ़ने आएगा, तो हमें तैयार रहना होगा उन्हें खत्म करने के लिए।”
बेन ने नाक सिकोड़ी। “हम उन्हें खत्म कर देंगे। जैसे उस दूसरे ग्रुप को किया था।”
“नहीं, तेरी टूटी नाक और… शिट, क्या फिल मर गया?” रैंड ने खून से लथपथ बाँह वाले आदमी की ओर देखते हुए पूछा।
दूसरे लोग उसकी ओर देखने लगे। वह ज़मीन पर पड़ा था, आँखें खुली हुईं, लेकिन कोई हरकत नहीं। फिर वह कराहने लगा। एक ऐसा कराह जो सिर्फ़ मरे हुए ही निकालते हैं।
एक गोली की आवाज़ गूँजी, जिससे अलीता चौंक गई।
“अब मर गया,” रैंड ने बिल्कुल भी अफसोस के बिना कहा। उसने झुककर अलीता का हाथ पकड़ा।
जब उसे खड़ा किया गया, तो उसे महसूस हुआ कि उसके पैर कमज़ोर पड़ रहे हैं। उसकी योनि भी अजीब सी लग रही थी, जैसे… खाली-खाली सी। ऐसा एहसास था जिसे वह बयान नहीं कर पा रही थी, लेकिन इससे पहले कि वह ज़्यादा सोच पाती, रैंड ने उसका नंगा शरीर अपने कंधे पर लाद लिया।
उसकी कूल्हे पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारते हुए, जिससे वह चौंक गई, उसने कहा, “चलो, तुम्हें तुम्हारे नए घर ले चलते हैं, स्वीट चीक्स। तुम्हें बहुत पसंद आएगा।”