Prologue
यह यादें हमेशा रोने की आवाज़ के साथ शुरू होती थीं।
धीमी।
नाज़ुक।
बेचैन।
आधी रात के बहुत बाद भी यह आवाज़ रेड डॉन पैकहाउस के खामोश गलियारों में गूँजती रहती थी, जिसे ठंडी पतझड़ की हवा अपने साथ ले आती थी।
लूना विवियन अपनी नींद से जागीं, और जैसे ही वह नन्हीं आवाज़ सुनाई दी, उनकी भौहें तन गईं।
"मैग्नस," उन्होंने अपने साथी को झकझोरते हुए फुसफुसाकर कहा। "क्या तुम्हें यह सुनाई दे रहा है?"
अल्फा मैग्नस पहले ही उठकर बैठ चुके थे।
वह रोने की आवाज़ दोबारा सुनाई दी।
बिना एक भी शब्द कहे, दोनों जल्दी से नीचे गए। इलियास, जो केवल पाँच साल का था, अपनी आँखें मलता हुआ उनके पीछे-पीछे चल दिया।
विवियन ने ओक की भारी लकड़ी का दरवाज़ा खोला।
खामोशी थी।
फिर...
एक और छोटी सी सिसकी सुनाई दी।
उन्होंने नीचे देखा।
एक छोटी बच्ची, जिसकी उम्र तीन साल से ज़्यादा नहीं थी, एक टोकरी में लिपटी हुई थी।
वह अब रो नहीं रही थी।
उसकी बड़ी पन्ने जैसी हरी आँखें ऊपर देख रही थीं, उन अजनबियों को जो उसके सामने खड़े थे।
वह एक शाही नीले रंग के नर्म कंबल में कसकर लिपटी हुई थी, जिसे विवियन ने पहले कभी नहीं छुआ था। उस पर चांदी के धागों की ऐसी महीन कढ़ाई थी जो चांदनी में चमक रही थी।
कपड़े पर एक भी शिकन नहीं थी।
न कोई दाग था।
यहाँ तक कि एक धागा भी नहीं निकला था।
जिस किसी ने भी उसे यहाँ छोड़ा था, बहुत देखभाल के साथ छोड़ा था।
बड़े प्यार से।
विवियन ने सावधानी से बच्ची को अपनी बाहों में उठा लिया।
वह बच्ची तुरंत उनके सीने से लग गई, उसकी नन्हीं उंगलियां लूना की शर्ट को ऐसे पकड़ रही थीं जैसे उसे पता हो कि वह सुरक्षित है।
मैग्नस ने दरवाज़े के आसपास तलाशा।
कोई नोट नहीं था।
परिवार का कोई निशान नहीं था।
वहाँ बारिश की तेज़ महक के अलावा कोई और गंध नहीं थी, जिसने सब कुछ धो डाला था।
कुछ भी नहीं।
ऐसा लग रहा था जैसे वह बच्ची बस चाँद के नीचे प्रकट हो गई हो।
"हम क्या करें?" विवियन ने धीरे से पूछा।
मैग्नस ने अपनी साथी से लिपटी उस डरी हुई बच्ची को देखा।
"हम इसे पालेंगे।"
उस एक वाक्य ने उन सबकी ज़िंदगी बदल दी।
—
उन्होंने उसका नाम रखा एम्बर।
क्योंकि सबसे छोटी चिंगारी भी सबसे काली रात में ज़िंदा रह सकती है।
शुरू में, वह सबकी लाडली थी।
विवियन रोज़ सुबह उसके लाल घुंघराले बालों में कंघी करतीं और उसके कानों के पीछे जंगली फूल लगातीं।
मैग्नस पैक के उत्सवों के दौरान उसे अपने कंधों पर बिठाते।
छोटा इलियास हर जगह उसका हाथ पकड़कर चलता और गर्व के साथ उसे अपनी छोटी बहन बताकर सबसे मिलवाता।
कुछ समय के लिए...
वह अपनों जैसी थी।
वह हंसती थी।
वह खेलती थी।
वह प्यार जानती थी।
लेकिन बच्चे बड़े होते हैं।
ज़िम्मेदारियाँ बढ़ गईं।
पैक के झगड़ों ने मैग्नस का ध्यान खींच लिया।
विवियन लूना के कर्तव्यों में उलझ गईं।
इलियास ने योद्धा बनने का प्रशिक्षण शुरू कर दिया।
दिन हफ्तों में बदल गए।
हफ्ते महीनों में।
वह छोटी बच्ची, जिसे कभी गोद में उठाकर घुमाया जाता था, धीरे-धीरे ओझल हो गई।
किसी ने ध्यान ही नहीं दिया कि उसने अल्फा के परिवार के साथ खाना क्यों छोड़ दिया।
किसी ने नहीं पूछा कि वह अब उत्सवों में क्यों नहीं आती।
पहले, वे उससे छोटे-मोटे काम करवाते थे।
"एम्बर, क्या तुम ये बर्तन धो दोगी?"
"एम्बर, डाइनिंग हॉल में झाड़ू लगा दो।"
"एम्बर, और लकड़ी लेकर आओ।"
ये छोटी गुज़ारिशें अब ज़रूरत बन गईं।
ज़रूरतें काम बन गईं।
और वह काम उसकी ज़िंदगी बन गया।
जब वह बारह साल की हुई, तो सूरज निकलने से पहले ही उठ जाती थी।
वह फर्श साफ़ करती जब तक उसके घुटने दुखने न लगते।
वह खाना बनाती जिसे खाने के लिए उसे शायद ही कभी बैठने का मौका मिलता था।
वह ढेरों कपड़े धोती।
पानी की बाल्टियाँ ढोती जब तक उसके कंधे जलने न लगते।
वह सुबह से लेकर चाँद निकलने के काफी देर बाद तक काम करती, और फिर सीढ़ियों के नीचे बनी उस छोटी सी कोठरी में गिर पड़ती, जो अब उसका घर था।
पैक वाले अब उस बच्ची को नहीं देखते थे जिसे अल्फा और लूना ने बचाने का वादा किया था।
वे एक नौकरानी को देखते थे।
कोई ऐसी जो बस...
वहीं की थी।
कुछ भेड़िये तो यह भी भूल गए थे कि वह कब आई थी।
बाकियों को लगा कि वह हमेशा से पैकहाउस की सफाई कर रही थी।
यहाँ तक कि मैग्नस और विवियन भी, कभी-कभी महसूस होने वाले अपराधबोध के बावजूद, खुद को यह समझा लेते थे कि वह इतनी बड़ी हो गई है कि अपना ख्याल रख सके।
केवल एक चीज़ कभी नहीं धुंधली हुई।
वह रहस्य।
किसी को नहीं पता था कि एम्बर कहाँ से आई थी।
किसी को नहीं पता था कि उसे क्यों छोड़ा गया था।
और किसी को यह भी नहीं पता था कि वह नामुमकिन रूप से नर्म, शाही नीले रंग का कंबल उसके बिस्तर के बगल में रखे लकड़ी के संदूक में इतनी सावधानी से क्यों रखा था—वह इकलौती चीज़ थी उसके पास, उस ज़िंदगी की जिसे वह कभी याद नहीं कर सकती थी।
—
अठारह साल गुज़र चुके थे।
सूरज की सुबह की किरणें सीढ़ियों के नीचे बने उसके छोटे से कमरे की खिड़की से अंदर आई थीं।
एम्बर धीरे से उठी, काम का एक और लंबा दिन उसका इंतज़ार कर रहा था।
फिर...
वह ठिठक गई।
दरवाज़े के नीचे से एक महक आई।
ताज़ा बारिश की।
गर्मी के तूफ़ान के बाद मिट्टी की सोंधी महक।
वार्म मस्क जो किसी ऐसी चीज़ में लिपटी थी जो दिल को बहुत सुकून देने वाली थी।
उसका दिल ज़ोर से धड़का।
उसकी भेड़िया वृत्ति (wolf) पहली बार उसकी त्वचा के नीचे हलचल करने लगी।
उसके सीने में एक अजीब सी गर्माहट फैल गई।
उसने इससे नशीली महक कभी नहीं सूंघी थी।
इतनी... सही।
हैरान होकर, एम्बर खड़ी हुई और दरवाज़े की ओर बढ़ी, उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि आज का दिन—उसका अठारहवाँ जन्मदिन—वही दिन होगा जब वह सब कुछ बदल जाएगा जो वह खुद के बारे में मानती थी।









