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The Lawyer's Secret

सर्वाधिकार सुरक्षित ©

सारांश

यह कहानी है एक सीधी-साधी लॉ स्टूडेंट सुआ (Su-ah) और यूनिवर्सिटी के सबसे घमंडी पर बेहद हैंडसम लॉ स्टूडेंट मीन-हो (Min-ho) की। एक ग़लत कोर्टरूम में हुई पहली ही मुलाक़ात में दोनों के बीच तकरार हो जाती है, लेकिन किस्मत उन्हें बार-बार एक-दूसरे के सामने ला खड़ा करती है। क्या मीन-हो के कड़वे बर्ताव के पीछे छुपा है कोई गहरा राज़? जानिए इस सस्पेंस और रोमांस से भरी कहानी 'The Lawyer's Secret' में!

शैली
Romance
लेखक
Manisha
स्थिति
२ महीने पहले
अध्याय
7
रेटिंग
n/a
आयु रेटिंग
18+

Chapter 1

📖 Chapter 1: The Wrong Courtroom (गलत अदालत)

स्थान: नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी

समय: सुबह के 9:00 बजे

सुआ (Su-ah) की धड़कनें किसी रेस के घोड़े की तरह भाग रही थीं। हाथों में फाइलें दबाए, अपने लंबे सिल्की बालों को संभालती हुई वह सीढ़ियाँ फांदकर नेशनल मूट कोर्ट की तरफ भाग रही थी। खूबसूरत और मासूम चेहरे वाली सुआ जब भी जल्दबाज़ी में होती, तो उसके माथे पर एक प्यारी-सी शिकन आ जाती थी।

आज उसका पहला मूट कोर्ट कॉम्पिटिशन था।

"अरे यार सुआ, अगर आज लेट हुई न, तो प्रोफेसर खन्ना लॉ की डिग्री से पहले तुम्हें यूनिवर्सिटी से बाहर फेंक देंगे!" उसने खुद से बड़बड़ाते हुए हॉल-3 का भारी दरवाज़ा एक झटके में खोला।

बिना सामने देखे, वह सीधे अंदर घुसी—"आई एम सॉरी सर! ट्रैफिक बहुत था और..."

'धड़ाम!'

सुआ की सारी फाइलें, पेपर्स, और उसका पसंदीदा पिंक पेन हवा में उड़े और फर्श पर बिखर गए। वह किसी चीज़ से नहीं, बल्कि 6 फीट लंबे, काली शर्ट पहने एक लड़के से टकराई थी।

"क्या तुम हमेशा ऐसे ही बवंडर की तरह एंट्री मारती हो?" एक गहरी, बेहद शांत और थोड़ी रोबदार आवाज़ सुआ के कानों में पड़ी।

सुआ ने हड़बड़ाकर ऊपर देखा।

सामने खड़े लड़के की आँखें एकदम तीखी थीं—बिलकुल किसी कोरियन ड्रामा के मुख्य हीरो जैसी। उसके चेहरे पर एक अजीब सा घमंड और सुकून था। वह मीन-हो (Min-ho) था। यूनिवर्सिटी का सबसे टॉप, लेकिन सबसे जिद्दी और हैंडसम लॉ स्टूडेंट।

"तुम... तुम बीच रास्ते में क्यों खड़े थे?" सुआ ने ज़मीन पर बिखरी फाइलें समेटते हुए चिढ़कर कहा। "गलती तुम्हारी है, सॉरी बोलना तो दूर, उल्टा मुझ पर ही चिल्ला रहे हो!"

मीन-हो ने अपनी जेब में हाथ डाले, धीरे से नीचे झुका और सुआ का वह 'पिंक पेन' उठाया। उसकी उंगलियाँ सुआ की उंगलियों से छुईं, और सुआ को लगा जैसे बिजली का एक छोटा-सा करंट दौड़ा हो।

मीन-हो की नज़रें एक पल के लिए सुआ के खूबसूरत चेहरे और उसकी हिरणी जैसी बड़ी-बड़ी आँखों पर टिक गईं। लेकिन तुरंत ही उसने अपने चेहरे पर वही तीखी मुस्कान (Smirk) ला दी।

"पहली बात, भागने से पहले थोड़ा सामने भी देख लिया करो," मीन-हो ने सुआ के एकदम करीब आते हुए कहा। उसकी सांसों की गरमाहट सुआ को साफ महसूस हो रही थी। "और दूसरी बात... यह हॉल-3 नहीं, हॉल-A है। तुम्हारी क्लास दो फ्लोर ऊपर है, 'फ्यूचर लॉयर'।"

सुआ के गाल शर्म से हल्के गुलाबी हो गए। उसने झटके से मीन-हो के हाथ से अपना पेन छीना।

"मुझे पता है मुझे कहाँ जाना है! और आपके जैसे घमंडी इंसान से मुझे सलाह लेने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है!" सुआ ने अपनी फाइलें सीने से लगाईं और पलटने लगी।

"वेट," मीन-हो की आवाज़ ने उसके कदम रोक दिए।

मीन-हो ने उसके बिखरे बालों के पास से एक कागज़ का टुकड़ा उठाया जो उसकी फाइल से गिर गया था—"तुम्हारी केस फाइल का सबसे इम्पॉर्टेंट पेज मेरे पास ही रह गया था। अगर मैं नहीं देता, तो आज कोर्ट में तुम्हारा केस शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाता।"

मीन-हो ने वह पेज सुआ के हाथ में थमाया, सुआ की आँखों में आँखें डालकर देखा और धीमी आवाज़ में बोला—"वैसे, पैनिक होने पर भी तुम काफी ठीक-ठाक लग लेती हो। ऑल द बेस्ट, सुआ।"

सुआ वहीं जम गई। उसने मेरा नाम कैसे जाना? मैंने तो उसे अपना नाम बताया ही नहीं!

मीन-हो बिना मुड़े, जेब में हाथ डाले कॉरिडोर में आगे बढ़ गया। सुआ अपनी खूबसूरत आँखों से उसे जाते हुए देखती रही, उसका दिल अजीब सी रफ्तार से धड़क रहा था!

✍️ लेखक का नोट के लिए:

[End of Chapter 1]

पाठकों के लिए सवाल: क्या मीन-हो पहले से सुआ को जानता था? आखिर उसने सुआ का नाम कैसे पहचाना? जानने के लिए अगला चैप्टर पढ़ें और Like & Comment करना न भूलें! ❤️

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