Chapter - 1 A Fate in White
धुंधले कम रोशनी वाले ड्रेसिंग रूम में, एमिली आईने के सामने स्थिर खड़ी थी। शादी के जोड़े की बारीक लेस में वह खुद को बमुश्किल पहचान पा रही थी। यह नाज़ुक डिज़ाइन उसके शरीर से ऐसे चिपका था जैसे दूसरी खाल हो। उसके होंठ, जो कभी एक सधी हुई मुस्कान के लिए बने थे, अब किसी भारी बोझ के नीचे दबे लग रहे थे।
उसने सोचा, यह मैं नहीं हो सकती। यह मेरी किस्मत नहीं हो सकती।
उसकी आँखें, जो आमतौर पर उसकी असली भावनाओं को छिपाने में माहिर थीं, इस बार उसे धोखा दे गईं। अपनी लंबी, काली पलकों के पीछे, उसे वह डर और संदेह साफ़ दिख रहा था जिसे उसने छिपाने की बहुत कोशिश की थी। कमरा बहुत शांत था, जो उसके सीने के अंदर की टीस को और बढ़ा रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे सन्नाटा खुद उसे उस सच्चाई को स्वीकार करने के लिए कह रहा था जिसे वह बहुत समय से नज़रअंदाज़ कर रही थी।
उसने कांपती उंगलियों से घूंघट को थोड़ा ठीक किया। उसके रेशमी काले और भूरे बाल उसकी पीठ पर बिखर गए, जो हल्की रोशनी में चमक रहे थे। यह एक ऐसी वास्तविकता में उम्मीद की आखिरी किरण जैसी थी जो उसे घोंट रही थी।
मैं तैयार नहीं हूँ। मैं इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं हूँ। ऐसा नहीं हो सकता।
जब एमिली ने खुद को आईने में देखा, तो उसकी साँसें अटक गईं। उसकी सुंदर नाक और सुराहीदार गर्दन एक ऐसी परछाई बना रहे थे जिसे उसने बरसों की मेहनत से गढ़ा था। लेकिन उस चेहरे के पीछे, जिसे उसने इतनी सावधानी से संवारा था, एक तूफ़ान उठ रहा था। एक ऐसा तूफ़ान जो सब कुछ तहस-नहस करने की धमकी दे रहा था।
बहुत हुआ, उसने सोचा, उसकी अंदरूनी आवाज़ और मज़बूत हो गई। मैं यह सब नहीं कर सकती। मुझे भागना होगा... मुझे भागना ही होगा।
उसकी परछाई उसे घूर रही थी, उस सफ़ेद जोड़े में कैद जिसे वह सब कुछ माना जा रहा था जो उसे बनना था। यह खूबसूरत था, हाँ, लेकिन यह एक पिंजरा भी था। यह उस ज़िंदगी का प्रतीक था जिसे स्वीकार करने के लिए वह तैयार नहीं थी। लेस का हर एक नाज़ुक हिस्सा उसका मज़ाक उड़ा रहा था, जो उसे दरवाज़े के बाहर खड़ी उन उम्मीदों की याद दिला रहा था जिन्हें किसी ने ज़ुबान पर नहीं लाया था।
मुझे…… मुझे… मुझे... बाहर निकलना होगा। चाहे नतीजे कुछ भी हों। मुझे भागना ही होगा।
उसके ख्यालों की गूंज उस शांत कमरे में सुनाई दे रही थी, जो उस किस्मत के खिलाफ एक निजी बगावत थी जिसे उस पर थोपा जा रहा था। उस ड्रेसिंग रूम के सन्नाटे में, एमिली जानती थी कि वह एक ऐसे फैसले की कगार पर खड़ी है जो सब कुछ बदल देगा।
एमिली के हाथ कांप रहे थे जब उसने जल्दबाज़ी में कपड़े एक छोटे से सूटकेस में ठूँसे, उसका फ़ोन अधूरे संदेशों के साथ बज रहा था। "मुझे जाना होगा," उसने खुद से फुसफुसाते हुए कहा, उसकी उंगलियां कांप रही थीं क्योंकि वह फ्लाइट बुक करने की कोशिश कर रही थी। भागने का फैसला डरावना था, लेकिन रुकने का ख्याल—अपने माता-पिता की इच्छाओं को स्वीकार करना—बर्दाश्त से बाहर था।
एयरपोर्ट पर भारी भीड़ थी, जहाँ लोग हर दिशा में भाग रहे थे। एमिली लाइन में खड़ी थी, उसकी धड़कनें तेज़ थीं और उसकी नज़रें हर उस स्क्रीन पर थीं जो फ्लाइट के जाने की जानकारी दे रही थी। अचानक, शोर के बीच एक आवाज़ सुनाई दी।
“एमिली!” उसके पिता की आवाज़ गूँजी, तीखी और ठंडी। “तुम क्या करने की सोच रही हो?”
एमिली सन्न रह गई। उसके माता-पिता कुछ ही कदम की दूरी पर खड़े थे, उनके चेहरे गुस्से और अविश्वास से भरे थे।
“तुम्हें क्या लगता है, तुम इस सब से भाग सकती हो?” मिस्टर थॉमस की आवाज़ चुभने वाली थी। “नतीजों के बारे में सोचो, एमिली। तुम्हें अंदाज़ा भी नहीं है कि तुम किस मुसीबत में पड़ रही हो।”
मिसेज़ थॉमस की आवाज़ कांप रही थी जब वे आगे बढ़ीं, उनके चेहरे पर लाचारी साफ़ झलक रही थी। “एमिली, प्लीज़। तुम हमें बर्बाद कर दोगी। तुम हमारी मौत का कारण बनोगी। तुम हमारे साथ ऐसा कैसे कर सकती हो?”
एमिली का गला रुंध गया। “मैं नहीं—मैं अब और नहीं कर सकती,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। “मुझे जाना ही होगा।”
“जाना?” उसके पिता की आवाज़ और तेज़ हो गई। “तुम्हें लगता है तुम अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग सकती हो? हमसे? हमारे परिवार का क्या? हमारी इज़्ज़त का क्या?”
एमिली की आँखों में आँसू भर आए। “मुझे अब उस इज़्ज़त की परवाह नहीं है। मैं तुम्हारे लिए यह ज़िंदगी नहीं जी सकती।”
“तुम बहुत स्वार्थी हो रही हो,” मिसेज़ थॉमस ने कहा, उनकी आवाज़ टूट रही थी। “क्या तुम्हें पता है लोग हमारे बारे में क्या कहेंगे? तुम्हारे बारे में क्या कहेंगे? तुम सब कुछ बर्बाद कर रही हो।”
उसी पल, एमिली ने महसूस किया कि किसी ने मजबूती से उसकी कलाई पकड़ ली है। वह तेज़ी से घूमी। (उसने अपने भाई की तीव्र नज़र का सामना किया।)
“एमिली, नहीं,” उसने धीरे से कहा, और उसकी पकड़ और कस गई।
उसने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उसकी पकड़ मज़बूत थी। वह भीड़भाड़ वाला एयरपोर्ट, जो कभी उसके लिए बचने का रास्ता था, अब उसे एक दमघोंटू जेल जैसा लगने लगा।
“मुझे माफ़ कर दो,” वह बुदबुदाई, उसकी आवाज़ जज़्बातों के बोझ से कांप रही थी। “मैं ….मैं….मैं.. यहाँ नहीं रुक सकती।”
उसका भाई विवियन बोला, “एमिली, यह सब बंद करो। तुम बहुत बड़ी गलती कर रही हो।”
उसने अपना सिर हिलाया और उसकी आँखों से आँसू छलक पड़े। “लेकिन... मेरे साथ ऐसा मत करो। प्लीज़।”
“मुझे जाना है,” एमिली ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, उसकी साँसें फूल रही थीं। “मैं तुमसे भीख मांगती हूँ... मुझे जाने दो।”
लेकिन उसकी खामोशी उसके शब्दों से ज़्यादा भारी थी, और उस पल एमिली जान गई—उसके भागने का रास्ता बंद हो चुका था।
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वापस अपने कमरे में, एमिली के हाथ कांप रहे थे जब उसने अपना फ़ोन पकड़ा, घबराहट बढ़ रही थी। उसने बार-बार कॉल किया, उसकी आवाज़ एक फुसफुसाहट से ज़्यादा कुछ नहीं थी।
( उसका होने वाला पति)
“प्लीज़, प्लीज़…प्लीज़... फोन उठाओ।”
फ़ोन बजता रहा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उसने बेताब होकर और मैसेज भेजे।
तुम कहाँ हो? हमें बात करनी होगी।
फिर भी कुछ नहीं।
बेचारगी में, उसने अपनी सबसे अच्छी दोस्त सारा की तरफ रुख किया—वह व्यक्ति जिसे लगा था कि वह मदद करेगी।
“सारा, प्लीज़,” उसने एक और मैसेज भेजते हुए फुसफुसाया। “मुझे तुम्हारी ज़रूरत है।”
लेकिन सन्नाटा बहुत गहरा था। ऐसा लग रहा था जैसे पूरी दुनिया उसके खिलाफ हो गई है, उसे पूरी तरह अकेला छोड़कर।
एमिली वेदी पर खड़ी थी, बुके थामे उसकी उंगलियां कांप रही थीं। खूबसूरती से सजे उस कमरे में उसे घुटन हो रही थी, जैसे वह किसी जेल में हो। उसकी नज़रें फिर दरवाज़े की तरफ गईं। अभी भी कुछ नहीं। उसे बचाने वाला कोई नहीं था। मेहमान फुसफुसाने लगे थे, लेकिन उसे केवल अपनी धड़कनें सुनाई दे रही थीं।
"शायद… शायद उसने पढ़ लिया हो। शायद वह चला गया हो," उसने अपने आप से बुदबुदाया, खुद को यकीन दिलाने की कोशिश की। “रिचर्ड ब्लैकवुड, तुम एक चालाक आदमी हो। एक बार यह दिखावा खत्म हो जाए, तो मैं तुम्हारा व्यक्तिगत रूप से शुक्रिया अदा करूँगी।”
तभी दरवाज़े ज़ोर से खुले।
रिचर्ड ब्लैकवुड अंदर आया, उसकी प्रभावशाली काया उसके पीछे की रोशनी को रोक रही थी। कमरा छोटा सा लगने लगा। उसका हर अंग इस पल के लिए तैयार किया गया था—चौड़े कंधे, बेदाग सूट, संवारे हुए बाल। लेकिन उसकी आँखें—वे ठंडी, गणना करने वाली आँखें—जिसने उसे पत्थर का बना दिया।
वह करीब आया, उसकी मुस्कान सधी हुई थी।
“एमिली,” उसने नरमी से कहा, उसके शब्दों में एक आकर्षण था। “तुम बहुत बेताब हो….शादी करने के लिए….”
उसकी तरफ अनसुना करते हुए, उसकी आँखें किसी चमत्कार के लिए, सारा के लिए, कमरे को स्कैन कर रही थीं।
रिचर्ड झुककर उसके कान के पास आया, उसकी गर्म साँसें महसूस हो रही थीं।
“यह शादी,.... यह तुम्हारा सबसे बुरा सपना साबित होगी, मैं तुमसे वादा करता हूँ…?”
वह पूरी तरह जम गई।
रिचर्ड थोड़ा पीछे हटा, उसकी आँखें सीधे उसकी आँखों में गड़ी थीं।
रिचर्ड बोला; “तुम्हें मुझसे, कोई नहीं बचा सकता।”
उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था, उसका दिमाग भागने के लिए चिल्ला रहा था, लेकिन वह वहां बेसुध खड़ी रही। वह फिर मुस्कुराया, और करीब आया, और उस पल, वह जान गई।
बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था।
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