PROLOGUE
Arhaan का POV
मुझे उसे कभी छूना नहीं था। उसे दोबारा देखना भी नहीं था। वह मेरे दुश्मन की बहन थी। उसकी दुनिया खून और गुनाहों से कोसों दूर थी—और मैं तो बना ही इन्हीं चीजों से था।
लेकिन जुनून इजाज़त लेकर नहीं आता।
बस एक नज़र ने मुझे पूरी तरह जकड़ लिया। उसने मेरे सीने में अपने पंजों को ऐसे गड़ा दिया कि वहां से हट पाना नामुमकिन हो गया। वह मुझे ऐसे देख रही थी जैसे उसे पता ही न हो कि मैं क्या हूँ, और उसकी यही मासूमियत मेरी बर्बादी बन गई।
एक स्पर्श, एक पल की वो नज़दीकियां और मेरी बनाई हर मर्यादा कांच की तरह टूटकर बिखर गई।
मैंने शहर जीते थे। लोगों को तोड़ दिया था। बिना झिझक जाने कितनी जानें ली थीं। मैं कभी हारा नहीं था।
मगर उसके सामने खड़े होकर मुझे एक खौफनाक हकीकत समझ आई,
वह इकलौती ऐसी जंग थी जिसे मैं कभी जीत नहीं सकता था।
Kiara का POV
मुझे 'ना' कह देना चाहिए था।
जब वह मेरे पास आया—लहुलूहान, खतरनाक, और उसकी आँखों में हिंसा लिए—तो मुझे उसे वापस लौटा देना चाहिए था। क्योंकि जिस पल मैंने उसके घावों को भरने के लिए हामी भरी, मेरी बनाई हुई पूरी दुनिया ढहने लगी।
वह जानलेवा है। वह गलत है। वह उस तरह का आदमी है जिससे दूर रहने की मुझे तालीम दी गई थी।
और फिर भी, एक बेवकूफ की तरह, मैं उसे पाने के लिए किसी भूखे जानवर की तरह तड़प रही थी, जैसे कोई भूखा इंसान पहली बार गुनाह का स्वाद चख रहा हो।
उसके एक स्पर्श से मेरी त्वचा जलने लगी, और मेरे दिल के चारों ओर खींची हर लक्ष्मण रेखा मिट गई। मेरा हर डर मुझे भाग जाने को कह रहा था, लेकिन मेरा दिमाग कुछ सोच पाता, उससे पहले ही मेरे जिस्म ने मुझे धोखा दे दिया।
मैं इतनी मजबूत थी कि जान बचा सकूँ। इतनी मजबूत कि हर दिन मौत का सामना कर सकूँ।
बस इतनी मजबूत नहीं कि खुद को उससे बचा सकूँ।Chapter










