हेलहाउंड : ए डेमन इन डिस्गाइज़ ऑफ़ ह्यूमन — 1
Chapter - 1
नोट: यह कहानी वर्ष 2021 के समय की है, इसलिए कहानी में दर्शाया गया समय वर्तमान समय से लगभग छह वर्ष पहले का है। कृपया पढ़ते समय इस बात का ध्यान रखें।
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सूर्यास्त से सूर्योदय तक के वो चार पहर, जब हमारी खुद की परछाई भी हमारे साथ नहीं रहती।
एक ऐसा समय, जब सारी दुनिया अपने दिन भर के कामकाज के बाद थककर सो जाती है और खो जाती है अपने ख्वाबों की दुनिया में।
लेकिन ये रात नहीं सोती।
ये जागती है।
और इसके साथ ही जागते हैं वो लोग, जिनका काम दिन के उजाले में नहीं हो सकता। जिन्हें इंतज़ार होता है रात के अँधेरे का, ताकि बिना किसी की नज़र में आए वो अपना काम कर सकें।
ये वो लोग होते हैं, जो दिन के उजाले में तो हमारे बीच बिल्कुल हम जैसे होते हैं, लेकिन रात में उनका एक अलग चेहरा होता है… एक अलग पहचान।
जो उन्हें हम सबसे अलग बनाती है।
और कभी-कभी… भयानक भी।
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जगह : पुलिस हेडक्वार्टर, ऊटी, तमिलनाडु
आज पुलिस हेडक्वार्टर में अफरातफरी का माहौल था। बड़े-बड़े अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री जी खुद वहाँ आए हुए थे। सभी के चेहरों पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी।
मुख्यमंत्री जी ➪ "आखिर कब पकड़ा जाएगा वो कातिल? किसी के पास कोई जवाब है?"
कमिश्नर साहब ➪ "मंत्री जी, हमारी पूरी पुलिस डिपार्टमेंट कोशिश कर रही है। हम जल्दी ही कातिल को पकड़ लेंगे।"
मुख्यमंत्री जी ➪ "दो महीने हो गए। ऊटी में हर दूसरे दिन किसी न किसी की लाश मिलती है और हमारी पुलिस कुछ नहीं कर पा रही। जनता में दहशत का माहौल है। अब तो केंद्र सरकार भी हम पर दबाव डालने लगी है। दो साल बाद चुनाव है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम तो हार गए चुनाव। आखिर कितना समय चाहिए आप सबको उस कातिल को पकड़ने के लिए? हमें साफ-साफ बताइए। और अगर आप सबसे कुछ नहीं हो पा रहा तो हम ये केस CBI को सौंप देते हैं। आप लोग बस तमाशा देखते रहना।"
मुख्यमंत्री जी ने गुस्से से गरजते हुए कहा।
कमिश्नर साहब ➪ "सर, हम लोग तमाशा नहीं देख रहे। हम सब बहुत कोशिश कर रहे हैं, पर कातिल हमारी सोच से भी ज्यादा तेज है। हम कितनी भी कोशिश कर रहे हैं, वो हमारी पकड़ में नहीं आ रहा। ना ही कोई लीड मिल रही है। समझ नहीं आ रहा कि ये काम किसी एक इंसान का है या पूरी गैंग का।"
मुख्यमंत्री जी ➪ "वाह, क्या बात है! दो महीने में आप सब मिलकर ये भी पता नहीं कर पाए कि ये काम किसी एक इंसान का है या पूरे गैंग का?"
मुख्यमंत्री जी ने तंज कसा।
सभी ऑफिसर्स ने अपने सिर झुका लिए।
मुख्यमंत्री जी ➪ "हमें नहीं लगता उस कातिल को पकड़ना आप सबके बस की बात है। इसलिए हमने कुछ पुलिस ऑफिसर्स की नियुक्ति यहाँ की है। वो सारे ही अपने-अपने बैच के काबिल ऑफिसर्स हैं और अपने थाना क्षेत्र में क्राइम रेट को कम कर चुके हैं। उम्मीद करते हैं आप सब उनके साथ मिलकर जल्द ही कातिल को पकड़ लेंगे। वो लोग परसों अपने-अपने शहर से यहाँ पहुँच जाएंगे। तब तक आप सब अपनी कोशिश जारी रखिए। अब हम चलते हैं।"
सभी ऑफिसर्स ➪ "जय हिंद, सर!"
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जगह : IB हेडक्वार्टर, दिल्ली
कोई बहुत तेजी से हेडक्वार्टर की बिल्डिंग में दाखिल हुआ और गलियारे से गुजरते हुए एक दरवाज़े के सामने रुक गया।
उस शख्स ने काले रंग की जीन्स और शर्ट पहनी हुई थी। आँखों पर काले रंग का चश्मा था और चेहरा मास्क से ढका हुआ था।
उसने दरवाज़े पर लगी नेम प्लेट की तरफ देखा।
अतुल गोस्वामी {चीफ}
उस शख्स ने गहरी साँस ली और दरवाज़ा खटखटाया।
ऑफिसर ➪ "May I come in, sir?"
चीफ ➪ "Yes, come in, officer."
ऑफिसर ➪ "सर, आपने बुलाया?"
चीफ ➪ "हाँ। मुझे तुमसे बहुत जरूरी काम है। ये तुम्हारे नए मिशन का लेटर है और साथ में एक ट्रांसफर लेटर भी। तुम्हें अभी इसी वक्त ऊटी जाना है। ऊटी के इस चर्चित केस के बारे में तुमने सुना ही होगा?"
ऑफिसर ➪ "जी, सर।"
चीफ ➪ "अच्छी बात है। हमारे गुप्त सूत्रों से पता चला है कि उन सारे खून के पीछे कोई गहरी साजिश है। इसी का पता लगाने तुम्हें वहाँ भेजा जा रहा है। तुम्हें वहाँ जाना है और केस सॉल्व करना है।
लेकिन याद रहे—वहाँ किसी को भी गलती से तुम पर शक नहीं होना चाहिए। तुम्हें अपना काम बहुत चौकसी के साथ करना होगा।"
ऑफिसर ➪ "जी, सर। मैं समझ गया। आपको शिकायत का कोई मौका नहीं मिलेगा। मैं अभी वहाँ के लिए निकलता हूँ।"
चीफ ➪ "ये पेन ड्राइव लो। इसमें सारी इंफॉर्मेशन है—तुम्हें कहाँ रहना है, तुम्हारा नाम, तुम्हारी पहचान… सब कुछ इसमें है।"
ऑफिसर ➪ "जी, सर! मैं अभी वहाँ के लिए निकलता हूँ। वहाँ की सारी इंफॉर्मेशन आपको टाइम पर अपडेट करता रहूँगा।"
चीफ ➪ "Good. Best of luck."
ऑफिसर ➪ "Thank you so much, sir. जय हिंद।"
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जगह : ऊटी में किसी जगह
एक इंसान एक आलीशान कमरे में अपनी आरामकुर्सी पर बैठकर पूरी तल्लीनता से कुछ पढ़ने में व्यस्त था।
तभी एक आदमी ने आकर उसका ध्यान अपनी तरफ खींचा। आरामकुर्सी पर बैठे इंसान का ध्यान भंग हो गया और उसने नाराज़गी से उस आदमी की तरफ देखा।
आदमी ➪ "मालिक, आपने जिसे बुलाने के लिए कहा था वो आ चुका है। आप कहें तो उसे यहाँ ले आऊँ?"
इतना सुनते ही उस इंसान की आँखों का रंग बदल गया।
मालिक ➪ "क्या कहा? वो आ गया? अरे, तो इसमें पूछने की क्या बात है? उसे तुरंत मेरे पास लेकर आओ।"
आदमी ➪ "जी, मालिक।"
थोड़ी देर में वो आदमी एक लड़के के साथ वापस खड़ा था।
लड़का ➪ "जी, कहिए। आपने मुझे क्यों बुलाया है?"
मालिक ➪ "हाँ, आओ-आओ। हमने आज तुम्हें एक खास काम के लिए बुलाया है। हमारे पुलिस डिपार्टमेंट के कुछ आदमियों ने बताया है कि शहर में हो रहे खून के केस को सॉल्व करने के लिए मुख्यमंत्री जी ने खुद कुछ पुलिस ऑफिसर्स को यहाँ ट्रांसफर करके बुलाया है। हम चाहते हैं कि तुम भी वहाँ जाओ।"
लड़का ➪ "लेकिन मैं कैसे वहाँ जा सकता हूँ? अगर किसी ने पहचान लिया कि मैं कोई और हूँ, तब क्या होगा?"
मालिक ➪ "ऐसा कुछ नहीं होगा। वो इस जगह नए है। उन्हें कोई नहीं पहचानता। तुम उनमे आराम से घुलमिल सकते हो।"
लड़का ➪ "जी, ठीक है। पर मुझे वहाँ रहकर करना क्या है?"
मालिक ➪ "तुम्हें वहाँ उन सबके बीच रहकर मुझे वहाँ के पल-पल की खबर देनी है और उन सबको जंगल में खोजबीन के लिए जाने से रोकना होगा।"
लड़का ➪ "पर ये काम तो पहले से ही डिपार्टमेंट के आपके आदमी कर रहे हैं ना? फिर मेरी वहाँ क्या जरूरत?"
मालिक ➪ "मुख्यमंत्री ने खुद इन ऑफिसर्स को बुलाया है। इसका मतलब उनमें कोई तो बात होगी ना। अगर उन्होंने जंगल का सच पता कर लिया तो सोचो, हमारा सारा राज़ खुल जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो हम सब बर्बाद हो जाएंगे।
हम अपने काम में कोई भी रुकावट नहीं चाहते। इसलिए तुम्हें वहाँ भेज रहे हैं। तुम वहाँ जाओ और हमें पल-पल की खबर देते रहना। अब समझे?"
लड़का ➪ "लेकिन…"
मालिक ➪ "ओफ्फोह! तुम कितने सवाल पूछते हो!"
उसने पैसों से भरा एक बैग उसकी तरफ बढ़ाया।
मालिक ➪ "ये लो तुम्हारे लिए पचास लाख। बाकी के पचास लाख हमारा काम होने के बाद मिलेंगे।"
उस आदमी ने पैसों से भरा बैग उसके हाथ में दे दिया। लड़के ने बैग ले लिया।
लड़का ➪ "ठीक है। मैं वहाँ जाने के लिए तैयार हूँ।"
मालिक ➪ "ये हुई ना बात। अब तुम जाओ। और ये एक बैग और लो। इसमें पुलिस डिपार्टमेंट में काम आने वाला सारा सामान है।"
लड़के ने बैग ले लिया।
मालिक ➪ "और हाँ… कुछ भी हो जाए, उन्हें जंगल में मत जाने देना।"
लड़के ने हाँ में सिर हिलाया और वहाँ से चला गया।
मालिक कुछ देर तक उसे जाते हुए देखता रहा।
फिर धीमे स्वर में बोला—
मालिक ➪ "चाहे कुछ भी हो जाए, पर मेरे साम्राज्य पर इन पुलिस वालों की नज़र कभी नहीं पड़नी चाहिए। इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े… मैं करूँगा।"
उसकी आँखों में शैतानियत नाच रही थी।
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जगह : ऊटी, तमिलनाडु
रात के समय घने जंगलों से घिरी ऊटी की एक सुनसान सड़क पर एक ब्लैक कलर की Hyundai Alcazar फुल स्पीड से आगे बढ़ रही थी।
दिसंबर का महीना था और चारों तरफ धुंध छाई हुई थी। जंगल से आने वाली सियारों के रोने की आवाज़ें माहौल को और डरावना बना रही थीं।
साँय-साँय करती उस पूरी सड़क पर सिर्फ वही एक कार थी।
पर कार का ड्राइवर बिना किसी डर के आराम से ड्राइव कर रहा था।
गाड़ी में इंग्लिश गाने बज रहे थे।
कुछ देर बाद ड्राइव कर रहे लड़के ने रियर-व्यू मिरर से पीछे बैठी अपनी बहन को देखा। उसे सोता देख उसने गाने की आवाज़ धीमी कर दी, ताकि उसकी नींद में खलल न पड़े।
इसी के साथ पैसेंजर सीट पर बैठे उसके दोस्त की नींद भी खुल गई।
उसने अपनी कलाई पर बंधी घड़ी देखी। रात के साढ़े आठ बज रहे थे।
सवर ➪ "क्या कोई मुझे बताएगा कि हम कब उस भूतिया हवेली में पहुँचेंगे?"
पैसेंजर सीट पर अधलेटे लड़के ने पूछा।
अव्यान ➪ "पहली बात, वो कोई भूतिया हवेली नहीं है। और हम बस थोड़ी देर में पहुँचने वाले हैं।"
सवर ➪ "यहाँ शाम से रात हो गई और ये हैं कि हम थोड़ी ही देर में पहुँचने वाले हैं।"
उसने अव्यान की नकल उतारी।
अव्यान ➪ "धीरे बोलो, सवर। वरना तुर्वि की नींद खुल जाएगी।"
सवर ने पीछे पलटकर देखा। वहाँ बारह साल की तुर्वि बिना किसी चिंता के आराम से अपने टेडी बियर को गले लगाकर सो रही थी।
सवर ➪ "अच्छा, फिर बताओ हम कब उस भूतिया हवेली में पहुँचेंगे?"
अब सवर ने धीरे से पूछा।
अव्यान ➪ "वो कोई भूतिया हवेली नहीं है। घर है मेरा। उसे बार-बार भूतिया कहना बंद करो।"
अव्यान ने धीमे लेकिन गुस्से वाले लहज़े में कहा।
सवर ➪ "भूतिया ना बोलूँ तो क्या बोलूँ? अरे, कोई शहर से दूर ऐसे जंगल के बीच घर बनवाता है क्या? आस-पास ना मार्केट है, ना घूमने की कोई जगह। है तो सिर्फ ये घना जंगल, जिसे दिन में भी देखो तो सिर्फ अँधेरा ही दिखता है।
पता नहीं वहाँ हम तीनों के अलावा कोई इंसान दिखेगा भी या नहीं। अरे, ऐसी जगह पर सिर्फ भूत ही रहते हैं, इंसान नहीं।"
अव्यान ➪ "आपकी जानकारी के लिए मैं बता दूँ, सवर साहब, मेरा घर कोई जंगल के बीच में नहीं है। वो जंगल के किनारे बनी एक सुंदर-सी सोसायटी में है। दुनिया में ऐसे बहुत लोग होते हैं जिन्हें शहर की भाग-दौड़ वाली जिंदगी पसंद नहीं होती। इसलिए वो शहर से दूर ऐसी शांत जगह पर रहना पसंद करते हैं। इन्हीं लोगों के लिए ऐसी सोसायटी बनाई जाती है।"
सवर ➪ "लेकिन हम क्यों जा रहे हैं वहाँ पर? हमें तो शहर की जिंदगी से कोई परेशानी नहीं है। हमारा सारा काम शहर में है। तुझे क्या लगता है बार-बार इतनी दूर से अप-डाउन करना आसान होगा?
और तुर्वि का स्कूल भी तो है… अपना और मेरा नहीं तो कम से कम उस बच्ची के बारे में ही सोचता?"
अव्यान ➪ "शायद आप भूल गए हैं कि कोविड पैंडेमिक की वजह से तुर्वि के स्कूल में अभी भी ऑनलाइन क्लासेस चल रही हैं और हम भी वर्क फ्रॉम होम कर सकते हैं।"
सवर ➪ "हाँ, कर सकते हैं। लेकिन अगर हमें कोई प्रॉब्लम हुई, तब? तुर्वि ही बीमार पड़ गई तो कहाँ जाएँगे हम? और तो और, इस घने जंगल के बीच इंटरनेट कहाँ से मिलेगा हमें? इन पेड़ों के ऊपर चढ़कर करेगा तू वर्क फ्रॉम होम?"
अव्यान ➪ "बस कर यार। हमारे देश में अब हर जगह इंटरनेट अवेलेबल है। और अगर कभी कोई प्रॉब्लम हुई भी तो घर से मेन सिटी इतनी भी दूर नहीं है जितना तुझे लग रहा है। वो एक रिहायशी इलाका है। आज से नहीं, पिछले तीस साल से लोग रहते हैं वहाँ। क्या तीस साल में वहाँ इतना भी डेवलपमेंट नहीं हुआ होगा कि एक फोन करने पर हमारा कोई काम घर बैठे ही हो जाए?"
सवर ➪ "हाँ-हाँ, ठीक है। मान ली तेरी सारी बात। लेकिन मैं फिर भी यही कहूँगा कि हमें यहाँ नहीं आना चाहिए था।"
अव्यान ➪ "तुझे जितना नाराज़ होना है, हो जा। एक बार तू घर देखेगा ना तो अपनी सारी नाराज़गी भूल जाएगा। और हाँ, तुर्वि ही आना चाहती थी यहाँ।"
सवर ➪ "तुर्वि का नाम लेकर मुझे चुप कराने की कोशिश मत कर, अव्यान। उसे तो पता भी नहीं था कि बैंगलोर के अलावा उसका कोई और घर भी है। सच तो ये है कि तू यहाँ आना चाहता था।"
अव्यान ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया।
थोड़ी ही देर में वो तीनों एक सुंदर-सी सोसायटी के बड़े से गेट पर खड़े थे।
गेट पर चार सिक्योरिटी गार्ड खड़े थे। उनमें से एक ने आकर कार की खिड़की का शीशा खटखटाया।
अव्यान ने शीशा नीचे किया।
सिक्योरिटी गार्ड ➪ "कौन हैं आप लोग और किससे मिलना है आपको?"
अव्यान ➪ "जी, हम रॉय साहब के घर रहने आए हैं। मैं उनका बेटा अव्यान रॉय हूँ। आप चाहें तो वहाँ के केयरटेकर शर्मा जी से बात कर सकते हैं।"
सिक्योरिटी गार्ड ने तुरंत अपने चेंबर में जाकर किसी को फोन किया।
थोड़ी ही देर में शर्मा जी एक लड़के के साथ वहाँ आ गए।
उन्हें आते देख अव्यान गाड़ी से उतर गया। शर्मा जी ने अव्यान की पहचान की और सोसायटी का गेट खुलवा दिया। फिर वो अव्यान के साथ उसकी गाड़ी में बैठकर आगे चले गए।
अव्यान ➪ "कैसे हैं आप अंकल?"
शर्मा अंकल ➪ "मैं ठीक हूँ बेटा। आप कैसे हो? और घर में सब कैसे हैं?"
अव्यान ➪ "मैं भी ठीक हूँ अंकल और घर में भी सब ठीक है। ये आपके साथ कौन है?"
शर्मा अंकल ➪ "ये मेरा बेटा है, दिवित।"
अव्यान ➪ "सॉरी दिवित, मैं तुम्हें पहचान नहीं पाया। कैसे हो तुम? और क्या कर रहे हो आजकल?"
दिवित ➪ "कोई बात नहीं, अव्यान भाई। हम मिल भी तो कितने साल बाद रहे हैं। मैं कॉलेज के फाइनल ईयर में हूँ और साथ में पापा के साथ ऑफिस में भी हेल्प करता हूँ।"
सवर ➪ "नमस्ते अंकल जी। हेल्लो दिवित। मेरा नाम सवर है और मैं तुम्हारे अव्यान भाई का दोस्त कम, लॉयर कम, पर्सनल एडवाइजर कम, सीक्रेट कीपर कम, फ्री का नौकर ज्यादा हूँ… जिसने इस बैंगलोर-ऊटी सफर में बहुत ज्यादा सफर झेला है।"
अपनी बातों में जब किसी ने सवर पर ध्यान नहीं दिया तो वो खुद ही बोल उठा।
अव्यान ➪ "सवर… क्या कुछ भी बोलते रहते हो।"
अव्यान ने सवर को हल्के गुस्से वाली नज़रों से देखा।
अव्यान की गुस्से वाली नज़रें देखते ही सवर ने दाँत दिखा दिए।
शर्मा अंकल ➪ "अरे कोई बात नहीं, अव्यान बेटा। गलती हमारी ही है जो हमने बच्चे पर ध्यान नहीं दिया। हाँ तो सवर बेटा, बहुत अच्छा लगा आपसे मिलकर। और रास्ते में आपने कितना भी सफर झेला हो, यहाँ पर नहीं करना पड़ेगा। दिवित आपको यहाँ की हर जगह घुमाएगा। आप बिल्कुल चिंता मत करो।"
दिवित ➪ "हाँ सवर भाई, मैं आपको पूरी ऊटी दिखाऊँगा और आपको मेरी कंपनी बोर भी नहीं करेगी।"
सवर ➪ "अरे वाह! फिर तो टेंशन की कोई बात ही नहीं है।"
बातों-बातों में वो सब सोसायटी के अंत में बने एक बड़े से गेट के सामने पहुँच गए।
घर को देखते ही अव्यान के ज़हन में कुछ अच्छी-बुरी यादें ताज़ा हो गईं। उसकी आँखें नम हो गईं, लेकिन उसने बड़ी सफाई से सबसे छुपाकर उन्हें साफ कर लिया।
सवर ने गाड़ी से बाहर झाँककर देखा।
वहाँ एक घर के बाहर ब्लैक कलर का बड़ा-सा गेट था, जिसके ऊपर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था—
“ROY MANSION”
गेट के दाहिनी तरफ एक बड़ा-सा नेम प्लेट लगा था, जिस पर घर के मालिकों के नाम लिखे थे।
ROY MANSION
House No. 11
Mr. Rajneesh Roy & Mrs. Subhadra Roy
Mr. Arnav Roy & Mrs. Yashwini Roy
Mr. Tanishk Roy & Mrs. Vihana Roy
Mr. Avyaan Roy
Miss Turvi Roy
गेट से अंदर आते ही L-शेप की जमीन पर बना दो मंज़िला आलीशान घर दिखाई दिया, जो चारों तरफ से एक खूबसूरत गार्डन से घिरा हुआ था।
पूरे घर पर सफेद, ब्लैक और ग्रे मार्बल लगे हुए थे और खिड़कियों में दरवाज़ों की जगह शीशे लगे थे।
घर बाहर से ही अपने मालिकों की सम्पन्नता का बखान बखूबी कर रहा था और साथ ही एक अजीब-सा सुकून भी दे रहा था।
सवर घर देखते ही उसकी खूबसूरती में खो गया।
उसकी तंद्रा तब टूटी जब अव्यान ने उसे आवाज़ दी।
अव्यान ➪ "सवर, किस सोच में डूबा हुआ है?"
सवर ➪ "हाँ? कुछ नहीं। मैं तो बस तेरा घर देख रहा था। तेरा घर वाकई बहुत सुंदर है।"
अव्यान ➪ "मैंने कहा था ना, तू घर देखकर सारी नाराज़गी भूल जाएगा। खैर, घर को तू बाद में देख लेना। अभी तुर्वि को उठा दे। मैं गाड़ी पार्क करके आता हूँ, फिर सब साथ में अंदर चलते हैं।"
सवर तुर्वि को गोद में लेकर गाड़ी से उतर गया।
थोड़ी देर में अव्यान गाड़ी पार्क करके आया और सब अंदर चले गए।
लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि कोई बराबर उन पर नज़र रखे हुए था।
उनके अंदर जाते ही वो इंसान सामने आया।
उस इंसान ने काले रंग का ओवरकोट पहना था। चेहरे पर मास्क, पैरों में बूट, हाथों में ग्लव्स और सिर पर एक हैट थी।
उसने Roy Mansion की तरफ देखा और धीमे से कहा—
➪ "तो आ ही गए तुम लोग वापस। बहुत टाइम लगा दिया… पर कोई बात नहीं। देर से ही सही, आए तो।"
वो कुछ पल चुप रहा।
फिर उसकी आँखों में एक अजीब चमक उभरी।
➪ "और अब जब आ ही गए हो… तो कभी वापस नहीं जा पाओगे।"
उसने घर की तरफ एक तिरछी नज़र डाली।
➪ "Welcome to the Hell, Roy Family…"
यह कहकर वो वापस जाने के लिए मुड़ा और एक धुन गुनगुनाते हुए जंगल के बीच कहीं अँधेरे में खो गया।
क्रमशः…
नमस्ते पाठकों, पढ़ने के बाद समीक्षा अवश्य करें। अगला भाग शुक्रवार को प्रकाशित होगा।🙏
Written by: Nainora ⭐