नई लिस्ट बनाएँ
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें
पढ़ने योग्यता कस्टमाइज़ करें

GHOST TOWN THE HIDDEN TRUTH

सर्वाधिकार सुरक्षित ©

सारांश

Sahoo एक रहस्यमयी और सुनसान शहर Greyhollow में पहुँचता है, जहाँ समय 12:13 पर थमा हुआ है। एक पुरानी तस्वीर, रहस्यमयी घर नंबर 13 और अतीत से जुड़ी एक डायरी उसे ऐसे रहस्य की ओर ले जाती है जिसका संबंध उसके अपने परिवार से है। आधी रात को जब शहर के बंद घरों में अचानक रोशनी जलती है, Sahoo को एहसास होता है कि Greyhollow में उसका आना महज संयोग नहीं था।

शैली
Horror
लेखक
Bikash
स्थिति
१९ दिन पहले
अध्याय
1
रेटिंग
n/a
आयु रेटिंग
18+

भूतिया शहर की राह

“अगर तुम यह रिकॉर्डिंग सुन रहे हो, Sahoo… तो सबसे पहले अपने पीछे मत देखना। चाहे तुम्हें कोई भी आवाज सुनाई दे, चाहे कोई तुम्हारा नाम लेकर पुकारे, पीछे मत देखना। क्योंकि जिस पल तुम पीछे देखोगे… Greyhollow तुम्हें पहचान लेगा।”

रिकॉर्डिंग अचानक बंद हो गई।

Sahoo ने मोबाइल को घूरते हुए कुछ सेकंड तक सांस रोककर बैठे रहना ही ठीक समझा।

बस की खिड़की के बाहर अंधेरा था।

घना, गहरा और ऐसा अंधेरा जिसमें कुछ भी साफ दिखाई नहीं देता था।

फिर भी उसे महसूस हुआ कि कोई उसे देख रहा है।

कहीं बाहर से।

या शायद…

उसके बिल्कुल पीछे से।

Sahoo ने गर्दन सीधी रखी।

उसने पीछे नहीं देखा।

बस के इंजन की लगातार आती आवाज के बीच उसकी धड़कन साफ सुनाई दे रही थी।

उसने मोबाइल की स्क्रीन देखी।

12:13 AM

उसने आंखें झपकाईं।

फिर स्क्रीन बंद करके दोबारा चालू की।

12:13 AM

उसने अपनी कलाई पर बंधी घड़ी देखी।

12:13

बस के सामने लगी छोटी डिजिटल घड़ी पर भी वही समय था।

12:13

Sahoo की भौंहें सिकुड़ गईं।

“ये क्या…”

वह वाक्य पूरा नहीं कर पाया।

पीछे की सीट से किसी चीज के गिरने की आवाज आई।

धड़ाम।

Sahoo का शरीर एक पल के लिए जम गया।

रिकॉर्डिंग में कही बात उसके दिमाग में गूंज रही थी।

पीछे मत देखना।

उसने आंखें बंद कर लीं।

कुछ सेकंड तक कोई आवाज नहीं आई।

फिर किसी ने बहुत धीमे से उसका नाम लिया।

“Sahoo…”

उसकी सांस अटक गई।

आवाज किसी बच्चे की थी।

“Sahoo…”

इस बार आवाज थोड़ी करीब से आई।

Sahoo ने अपनी मुट्ठियां भींच लीं।

वह नहीं पलटा।

बस आगे बढ़ती रही।

कुछ देर बाद वही आवाज हंसी।

फिर खामोशी।

Sahoo ने आखिरकार मोबाइल की रिकॉर्डिंग फिर से चलाई।

उस रिकॉर्डिंग को भेजने वाले का नाम नहीं था।

बस एक अज्ञात नंबर।

और वह आवाज…

वह उसके पिता की थी।

उस आवाज को Sahoo हजारों लोगों में पहचान सकता था।

उसके पिता की मृत्यु को छह महीने हो चुके थे।

मृत्यु से कुछ दिन पहले उनके कमरे से एक पुरानी डायरी मिली थी।

उस डायरी में सिर्फ एक नाम बार-बार लिखा था—

Greyhollow.

और आखिरी पन्ने पर एक चेतावनी थी—

“अगर कभी Greyhollow का रास्ता मिले, तो उस रास्ते पर मत जाना।”

Sahoo ने उस चेतावनी को नजरअंदाज किया था।

क्योंकि उसी डायरी में उसे एक पुरानी तस्वीर मिली थी।

तस्वीर में एक सुनसान शहर था।

पीछे तारीख लिखी थी—

17 अक्टूबर 1999।

और तस्वीर के पीछे एक वाक्य—

“जिस सच की तलाश कर रहे हो, उसका जवाब यहीं है।”

उसके बाद एक पता।

Greyhollow।

और उसी पते के साथ एक छोटी-सी जंग लगी चाबी।

चाबी पर सिर्फ एक नंबर था—

13

Sahoo ने जेब में हाथ डालकर चाबी को छुआ।

वह अब भी वहीं थी।

ठंडी।

बहुत ठंडी।

जैसे वह धातु की नहीं बल्कि बर्फ की बनी हो।

बस अचानक धीमी होने लगी।

बाहर धुंध और घनी हो गई।

ड्राइवर ने पहली बार रियर-व्यू मिरर में Sahoo की तरफ देखा।

उनकी नजरें मिलीं।

ड्राइवर ने तुरंत नजरें हटा लीं।

Sahoo ने आगे झुककर पूछा, “Greyhollow कितनी दूर है?”

ड्राइवर चुप रहा।

“भाई साहब?”

कोई जवाब नहीं।

“सुना आपने?”

इस बार ड्राइवर ने बहुत धीमी आवाज में कहा—

“बस पहुंचने वाली है।”

उसकी आवाज में कुछ ऐसा था जिससे Sahoo बेचैन हो गया।

जैसे वह किसी जगह का नाम लेने से भी डर रहा हो।

कुछ मिनट बाद बस एक पुराने लोहे के गेट के सामने आकर रुक गई।

Sahoo ने खिड़की से बाहर देखा।

गेट पर जंग लगे अक्षरों में लिखा था—

GREYHOLLOW

नीचे छोटे अक्षरों में कुछ लिखा था।

बारिश की बूंदों और अंधेरे के कारण वह पढ़ नहीं सका।

बस का दरवाजा खुल गया।

Sahoo ने अपना बैग उठाया और नीचे उतर गया।

जमीन पर पैर रखते ही उसे असामान्य ठंड महसूस हुई।

उसने बस की तरफ मुड़कर पूछा—

“सुबह बस वापस आएगी?”

ड्राइवर ने उसकी तरफ देखा।

कुछ क्षण तक वह चुप रहा।

फिर बोला—

“अगर सुबह तक तुम वापस जाना चाहो…”

वह रुक गया।

Sahoo ने पूछा, “क्या?”

ड्राइवर की आंखें गेट के अंदर चली गईं।

“तो रात में घंटी मत सुनना।”

Sahoo ने हल्की हंसी के साथ कहा, “कौन-सी घंटी?”

ड्राइवर ने जवाब नहीं दिया।

बस का दरवाजा बंद हो गया।

इंजन गरजा।

Sahoo ने दो कदम पीछे हटकर बस को रास्ता दिया।

बस आगे बढ़ी।

कुछ ही सेकंड में वह धुंध के भीतर गायब हो गई।

Sahoo अकेला रह गया।

उसने चारों तरफ देखा।

Greyhollow का प्रवेश द्वार उसके पीछे था।

सामने शहर।

और दोनों तरफ घना जंगल।

हवा में मिट्टी और किसी पुराने, सीलन भरे मकान जैसी गंध थी।

उसने बैग कंधे पर डाला और गेट के भीतर चला गया।

शहर में कदम रखते ही उसे पहली चीज जो महसूस हुई, वह थी—

खामोशी।

ऐसी खामोशी जिसे शब्दों में समझाना मुश्किल था।

न कुत्ते भौंक रहे थे।

न कीड़े-मकौड़ों की आवाज।

न हवा में पत्तियों की सरसराहट।

जैसे पूरा शहर सांस रोककर खड़ा हो।

सड़क के दोनों ओर पुराने मकान थे।

कुछ के शीशे टूटे हुए थे।

कुछ के दरवाजे आधे खुले थे।

कई घरों की दीवारों पर काई जम चुकी थी।

दुकानों के पुराने बोर्ड हवा में धीरे-धीरे हिल रहे थे।

MILLER'S GROCERY

GREYHOLLOW PHARMACY

SILVER MOON HOTEL

हर जगह एक ही एहसास था—

यहां कभी लोग रहते थे।

बहुत सारे लोग।

लेकिन अब…

कोई नहीं था।

Sahoo एक किराने की दुकान के सामने रुक गया।

शीशे के पीछे पुराने सामान अब भी रखे थे।

जंग लगे डिब्बे।

कांच की बोतलें।

पुराने पैकेट।

उसकी नजर एक तस्वीर पर पड़ी।

तस्वीर में एक परिवार था।

एक आदमी, एक महिला और दो बच्चे।

नीचे लिखा था—

1998

Sahoo ने तस्वीर के करीब जाकर देखा।

परिवार के पीछे वही सड़क थी जिस पर वह अभी खड़ा था।

तभी…

टक।

Sahoo ने तुरंत पीछे देखा।

कुछ नहीं।

टक।

आवाज फिर आई।

इस बार बाईं तरफ से।

उसने वहां देखा।

एक पुराना पेड़ था।

कोई नहीं।

Sahoo ने कुछ कदम आगे बढ़ाए।

टक…

टक…

टक…

अब आवाज उसके कदमों के साथ चल रही थी।

वह रुक गया।

आवाज भी रुक गई।

उसने एक कदम पीछे लिया।

कुछ नहीं।

फिर आगे बढ़ा।

टक…

टक…

टक…

Sahoo का चेहरा गंभीर हो गया।

“कौन है?”

कोई जवाब नहीं।

उसने फोन निकाला।

नेटवर्क गायब था।

उसने मोबाइल को ऊपर उठाया।

कुछ नहीं।

तभी सामने उसे एक पुराना फोन बूथ दिखाई दिया।

वह उसके पास पहुंचा ही था कि अचानक अंदर फोन बज उठा।

ट्रिन…

Sahoo रुक गया।

ट्रिन…

उसने फोन की तरफ देखा।

तीसरी बार घंटी बजी।

ट्रिन…

उसने धीरे से दरवाजा खोला और रिसीवर उठा लिया।

“हैलो?”

दूसरी तरफ कुछ नहीं था।

फिर धीमी सांसों की आवाज आई।

Sahoo ने कहा, “कौन बोल रहा है?”

कुछ सेकंड बाद एक बच्चे की आवाज सुनाई दी—

“आप आ गए?”

Sahoo का चेहरा बदल गया।

“कौन?”

“आपको बहुत देर हो गई।”

“तुम कौन हो?”

बच्चा हंसा।

“आप भूल गए?”

Sahoo ने रिसीवर कसकर पकड़ लिया।

“क्या?”

आवाज अचानक बहुत धीमी हो गई।

“आप पहले भी यहां आए थे।”

लाइन कट गई।

Sahoo ने रिसीवर कान से हटाया।

उसकी नजर फोन बूथ के कांच पर गई।

धूल के बीच किसी ने उंगली से लिखा था—

WELCOME BACK

Sahoo कुछ क्षण तक उसे देखता रहा।

फिर उसने बूथ से बाहर कदम रखा।

सामने सड़क के दूसरी तरफ एक पुराना मकान था।

उसके दरवाजे पर पीतल की प्लेट लगी थी—

13

Sahoo की उंगलियां अपनी जेब में चली गईं।

वही चाबी।

नंबर 13।

उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

वह मकान की तरफ बढ़ा।

दरवाजे पर जंग लगा ताला था।

उसने चाबी निकाली।

कुछ क्षण तक वह ताले को देखता रहा।

फिर चाबी अंदर डाल दी।

क्लिक।

ताला खुल गया।

दरवाजा धीरे-धीरे खुला।

अंदर से बर्फ जैसी ठंडी हवा उसके चेहरे से टकराई।

Sahoo ने फोन की फ्लैशलाइट जलाई।

कमरे में पुराना फर्नीचर था।

सोफे पर सफेद चादर पड़ी थी।

दीवारों पर कई तस्वीरें थीं।

एक कोने में पुरानी घड़ी लटकी थी।

Sahoo उसके पास गया।

घड़ी बंद थी।

उसकी सुइयां थीं—

12:13

Sahoo के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

उसने दूसरी घड़ी देखी।

वही समय।

तीसरी।

वही समय।

पूरा घर जैसे 12:13 पर मर गया था।

उसने दीवार पर लगी तस्वीरों को देखना शुरू किया।

एक तस्वीर में वही परिवार था जो उसने दुकान में देखा था।

दूसरी में कुछ लोग किसी समारोह में खड़े थे।

तीसरी में पूरा शहर।

चौथी तस्वीर देखते ही Sahoo रुक गया।

तस्वीर में सड़क पर दर्जनों लोग खड़े थे।

उनमें एक छोटा बच्चा भी था।

वह बच्चा सीधे कैमरे की तरफ नहीं देख रहा था।

वह तस्वीर से बाहर देख रहा था।

Sahoo की तरफ।

उसने तस्वीर उतार ली।

पीछे लिखा था—

17 अक्टूबर 1999

और नीचे—

“जिस रात Greyhollow ने अपनी आखिरी सांस ली।”

Sahoo की नजर कुछ क्षण तक उस वाक्य पर टिकी रही।

तभी ऊपर से आवाज आई।

धड़ाम!

वह चौंककर सीढ़ियों की तरफ देखने लगा।

कुछ गिरा था।

फिर…

कदमों की आवाज।

धीमी।

बहुत धीमी।

कोई ऊपर चल रहा था।

Sahoo ने फोन की फ्लैशलाइट ऊपर की।

सीढ़ियां अंधेरे में गायब हो रही थीं।

उसने धीरे-धीरे ऊपर जाना शुरू किया।

पहली सीढ़ी।

चर्र।

दूसरी।

चर्र।

तीसरी।

चर्र।

ऊपर पहुंचते ही उसे लंबा गलियारा दिखाई दिया।

अंत में एक दरवाजा था।

उस पर भी वही नंबर—

13

Sahoo ने हाथ बढ़ाया।

दरवाजा खुला हुआ था।

अंदर एक मेज थी।

और मेज पर लाल रंग की पुरानी डायरी।

सबसे अजीब बात यह थी कि कमरे में बाकी हर चीज पर धूल थी।

लेकिन डायरी पर एक भी धूल का कण नहीं था।

जैसे किसी ने उसे अभी-अभी वहां रखा हो।

Sahoo ने डायरी उठाई।

पहला पन्ना खाली।

दूसरा खाली।

तीसरा खाली।

फिर अचानक एक पन्ने पर शब्द दिखाई दिए।

उसकी आंखें फैल गईं।

“जब Sahoo वापस आएगा, शहर फिर जाग जाएगा।”

उसने अगला पन्ना पलटा।

“उसे यह मत बताना कि वह पहली बार यहां क्यों आया था।”

Sahoo का हाथ रुक गया।

“पहली बार?”

उसने फुसफुसाकर कहा।

“मैं कभी यहां नहीं आया।”

तभी डायरी का एक पन्ना अपने आप पलटा।

फिर दूसरा।

फिर तीसरा।

आखिर में एक तस्वीर बाहर गिर गई।

Sahoo ने तस्वीर उठाई।

और अगले ही पल उसकी सांस रुक गई।

तस्वीर में एक आदमी था।

एक महिला।

और उनके बीच खड़ा एक सात साल का बच्चा।

वह बच्चा…

Sahoo था।

वही चेहरा।

वही आंखें।

वही माथा।

उसने तस्वीर पलट दी।

पीछे लिखा था—

“Sahoo — उम्र 7 वर्ष।”

नीचे तारीख—

17 अक्टूबर 1999

Sahoo के हाथ कांपने लगे।

यह संभव नहीं था।

वह उस समय सात साल का नहीं था।

उसका जन्म ही बाद में हुआ था।

फिर यह तस्वीर कैसे?

उसने तस्वीर में आदमी को देखा।

उसके पिता।

उसने महिला को देखा।

उसकी मां।

उसका सिर घूमने लगा।

तभी नीचे से घंटी बजी।

टन…

Sahoo ने सिर उठाया।

फिर—

टन…

फिर—

टन…

उसे बस ड्राइवर की बात याद आई।

“रात में घंटी मत सुनना।”

Sahoo खिड़की के पास गया।

दूर पहाड़ी के ऊपर एक पुराना टावर दिखाई दे रहा था।

वहां से घंटी की आवाज आ रही थी।

लेकिन टावर में कोई घंटी दिखाई नहीं दे रही थी।

जैसे आवाज किसी ऐसी चीज से आ रही हो जो दिखाई नहीं दे सकती।

और तभी…

एक घर की खिड़की में रोशनी जली।

फिर दूसरे घर में।

फिर तीसरे में।

फिर चौथे में।

कुछ ही सेकंड में पूरी सड़क की खिड़कियां रोशनी से भर गईं।

Sahoo ने गौर से देखा।

हर खिड़की के पीछे कोई खड़ा था।

लोग।

बूढ़े।

औरतें।

बच्चे।

सभी स्थिर।

सभी उसकी तरफ देख रहे थे।

Sahoo पीछे हट गया।

कमरे के कोने में एक पुराना आईना था।

उसकी नजर आईने पर पड़ी।

वह अकेला नहीं था।

उसके पीछे एक छोटी लड़की खड़ी थी।

सफेद कपड़े।

लंबे काले बाल।

चेहरा बालों के पीछे छिपा हुआ।

Sahoo ने तुरंत पीछे देखा।

कोई नहीं।

उसने फिर आईने में देखा।

लड़की वहीं थी।

उसने धीरे-धीरे हाथ उठाया।

दरवाजे की तरफ इशारा किया।

फिर उसके होंठ हिले।

Sahoo ने आवाज नहीं सुनी।

लेकिन शब्द समझ गया—

“भागो।”

अचानक पूरा घर कांप उठा।

सारी खिड़कियां एक साथ बंद हो गईं।

धड़ाम!

रोशनी बुझ गई।

और फिर…

मुख्य दरवाजे पर दस्तक हुई।

ठक।

Sahoo नीचे जाने लगा।

ठक।

वह सीढ़ियों के बीच रुक गया।

ठक।

दरवाजे के बाहर कोई था।

Sahoo नीचे पहुंचा।

उसने दरवाजे की दरार से बाहर देखने की कोशिश की।

कोई नहीं।

सिर्फ जमीन पर एक बच्चे की परछाई।

बाहर से आवाज आई—

“Sahoo…”

वही बच्चा।

वही आवाज जो फोन पर थी।

“Sahoo, दरवाजा खोलो।”

Sahoo ने जवाब नहीं दिया।

उसके फोन पर अचानक संदेश आया।

“दरवाजा मत खोलना।”

Sahoo ने स्क्रीन देखी।

दूसरा संदेश आया—

“क्योंकि बाहर कोई नहीं है।”

उसने फिर दरवाजे की तरफ देखा।

परछाई अब भी मौजूद थी।

लेकिन उसके ऊपर कोई शरीर नहीं था।

Sahoo का गला सूख गया।

बाहर से आवाज आई—

“मुझे अंदर आने दो।”

Sahoo ने पूछा—

“तुम कौन हो?”

कुछ पल खामोशी रही।

फिर बच्चा बोला—

“तुम्हारा इंतजार करने वाला।”

“तुम्हें मेरा नाम कैसे पता?”

बच्चा हंसा।

“क्योंकि तुमने ही मुझे मेरा नाम दिया था।”

Sahoo की आंखें फैल गईं।

“मैंने?”

“तुम भूल गए?”

तभी उसके पीछे से लड़की की आवाज आई—

“मत सुनो।”

Sahoo पलटा।

सीढ़ियों के ऊपर वही लड़की खड़ी थी।

इस बार वह आईने में नहीं थी।

वह सच में वहां थी।

उसने Sahoo की तरफ देखा।

उसकी आंखों में डर था।

वह नीचे उतरने लगी।

एक कदम।

दूसरा कदम।

तीसरा कदम।

फिर अचानक वह रुक गई।

उसने दरवाजे की तरफ देखा।

और फुसफुसाई—

“वह अकेला नहीं है।”

Sahoo ने पूछा, “कौन?”

लड़की ने दरवाजे की तरफ इशारा किया।

“जो बाहर खड़ा है…”

उसकी आवाज कांप रही थी।

“वह Sahoo है।”

Sahoo कुछ समझ नहीं पाया।

“क्या?”

लड़की ने धीरे से कहा—

“तुम असली Sahoo नहीं हो।”

उस क्षण बाहर की परछाई ने अपना सिर उठाया।

और पहली बार Sahoo ने देखा—

वह परछाई बिल्कुल उसी की थी।

वही शरीर।

वही कद।

वही सिर।

लेकिन उसका चेहरा…

चेहरा नहीं था।

सिर्फ काला खालीपन।

दरवाजे का हैंडल अपने आप घूमने लगा।

क्लिक।

Sahoo पीछे हट गया।

ताला खुल गया।

दरवाजा धीरे-धीरे अंदर की ओर खुलने लगा।

बाहर सड़क खाली थी।

परछाई अब भी जमीन पर थी।

और उसके पास एक पुरानी तस्वीर पड़ी थी।

हवा ने तस्वीर को धीरे-धीरे Sahoo के पैरों तक पहुंचा दिया।

उसने तस्वीर उठाई।

तस्वीर में वही घर था।

वही दरवाजा।

वही रात।

और दरवाजे के सामने खड़ा एक छोटा बच्चा।

उसके पीछे 47 लोग खड़े थे।

सबकी आंखें कैमरे पर थीं।

और सबसे आगे…

Sahoo।

लेकिन तस्वीर के पीछे लिखी तारीख देखकर उसका खून जम गया।

17 अक्टूबर 1999।

नीचे सिर्फ एक वाक्य था—

“पहली बार वह सात साल की उम्र में आया था।”

Sahoo ने कांपते हाथों से तस्वीर पलटी।

दूसरी तरफ एक और लाइन थी—

“दूसरी बार वह आज आया है।”

और सबसे नीचे—

“तीसरी बार… वह इंसान बनकर नहीं आएगा।”

Sahoo ने तस्वीर हाथ से गिरा दी।

उसी पल पूरे Greyhollow में घंटियां बज उठीं।

एक साथ।

सैकड़ों घंटियां।

खिड़कियों के पीछे खड़े लोग गायब हो गए।

हवा अचानक बंद हो गई।

और फिर…

शहर के बीचोंबीच खड़ी पुरानी बस की हेडलाइट जल उठी।

बस धीरे-धीरे Sahoo के घर के सामने आकर रुकी।

ड्राइवर ने खिड़की खोली।

Sahoo ने उसे देखा।

वही ड्राइवर।

लेकिन अब उसके चेहरे पर अजीब मुस्कान थी।

“मैंने कहा था ना…”

उसने धीमे से कहा।

“घंटी मत सुनना।”

Sahoo ने कांपते हुए पूछा—

“तुम्हें मेरे बारे में इतना सब कैसे पता?”

ड्राइवर मुस्कुराया।

“क्योंकि मैं उस रात भी बस चला रहा था।”

Sahoo के चेहरे का रंग उड़ गया।

“कौन-सी रात?”

ड्राइवर ने जवाब दिया—

“17 अक्टूबर 1999।”

बस के अंदर बैठे सभी लोग एक साथ Sahoo की तरफ देखने लगे।

ड्राइवर ने दरवाजा खोल दिया।

“चढ़ो।”

Sahoo पीछे हट गया।

“क्यों?”

ड्राइवर की मुस्कान गायब हो गई।

“क्योंकि जिस Sahoo को तुम ढूंढ रहे हो…”

उसने बस की आखिरी सीट की तरफ देखा।

“वह अभी भी इस बस में बैठा है।”

Sahoo की सांस रुक गई।

उसने बस के अंदर देखा।

सबसे पीछे वाली सीट पर एक छोटा बच्चा बैठा था।

सात साल का।

उसके हाथ में वही लाल डायरी थी।

बच्चे ने धीरे-धीरे सिर उठाया।

Sahoo की तरफ देखा।

और मुस्कुराया।

उसका चेहरा बिल्कुल Sahoo जैसा था।

बच्चे ने डायरी खोली।

एक पन्ने पर उंगली रखी।

फिर दूर से ही Sahoo को वह लाइन दिखाई दी—

“आज रात असली Sahoo वापस आएगा।”

Sahoo की नजर बच्चे से हटकर डायरी पर गई।

और उसी क्षण बस के अंदर बैठा हर व्यक्ति एक साथ खड़ा हो गया।

बच्चे ने आखिरी बार कहा—

“तुम्हें याद नहीं… लेकिन मुझे सब याद है।”

बस का दरवाजा बंद हो गया।

इंजन गरजा।

और Greyhollow की बंद सड़क पर बस चल पड़ी।

Sahoo वहीं खड़ा रह गया।

उसका फोन अपने आप बज उठा।

स्क्रीन पर कोई नंबर नहीं था।

सिर्फ एक संदेश—

“भागो, Sahoo।”

फिर दूसरा—

“क्योंकि अब Greyhollow जाग चुका है।”

और तीसरा संदेश आते ही Sahoo के हाथ से फोन छूट गया।

“और अगली बार जब घंटी बजेगी… कोई एक Sahoo कम हो जाएगा।”

Bikash को बताएँ कि आपको यह चैप्टर कैसा लगा!
बहुत पसंद आया

0

बहुत पसंद आया

मज़ेदार

0

मज़ेदार

तीखा

0

तीखा

रहस्यमय

0

रहस्यमय

भावनात्मक

0

भावनात्मक

गहन

0

गहन

दिल छू लेने वाला

0

दिल छू लेने वाला

चौंकाने वाला

0

चौंकाने वाला

अच्छा लेखन

0

अच्छा लेखन

रोचक कथानक

0

रोचक कथानक

शानदार चरित्र

0

शानदार चरित्र

सशक्त संवाद

0

सशक्त संवाद

सबसे नए कलेक्शन

लोकप्रिय कलेक्शन