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कसम

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सारांश

यह कहानी एक रहस्यमई कसम पर आधारित है, जिसकी वजह से एक मां अपने बच्चे को दुनिया से दूर किसी जगह ले कर चली गई थी। जब वह बच्चा 21 साल का हो गया तब इस रहस्य का खुलासा हुआ। वे रहस्य खुलते ही मां बेटे का अतीत उनका आज बन गया। आखिर क्या था वो रहस्य जिसकी वजह से मां ने अपने बच्चे को सारी दुनिया से दूर रखा। यह जानने के लिए कहानी पढ़े।

शैली
Action,Mystery
लेखक
Nitish Kumar
स्थिति
पूरी
अध्याय
2
रेटिंग
5.0 (1 समीक्षा)
आयु रेटिंग
13+

Chapter 1

कहते हैं की कसमें तोड़ने के लिए ही बनती हैं। जो कसमें हमारे कर्तव्य के आड़े आए उन्हें तोड़ना जरूरी हो जाता है। यह कसम भी कुछ इसी तरह के रहस्य पर आधारित थी।

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पात्र: ●कृषा
●तनिष्क


आज 21 साल हो गए, उस दुर्घटना को घटे हुए। उस दिन के बाद कृषा अपने बेटे तनिष्क को कोलकाता की काली बाड़ी बस्ती में ले आई थी। वह बस्ती कई सालों से सुनसान थी। कृषा तनिष्क को अतीत के साए से भी दूर रखना चाहती थी। कृषा तनिष्क को जितनी सहूलियतें सकती थी, उसने दी। उसकी पढ़ाई से लेकर उसके खाने-पीने तक जैसी सारी चीजों का खर्चा कृषा ने खुद उठाया। उसने तनिष्क को बहुत प्यार और नाजों से पाला। कृषा ने तनिष्क को लड़ाई झगड़ों से कोसों दूर रखा था। सब लोग यह देखकर हैरान रह जाते थे कि तनिष्क तो अब बड़ा हो गया है, फिर भी कृषा उसको अपने पास ही क्यों रखती है।


तनिष्क को निशानेबाजी में बहुत रुचि थी। उसने राष्ट्रीय स्तर पर निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीता। यह बात पता चलने पर उसकी मां बहुत नाराज होती इसलिए, उसने यह बात अपनी मां से छुपा कर रखी थी। आज जब तनिष्क सड़क से गुजर रहा था, तब कुछ लोग इसे चिड़ा रहे थे। तनिष्क के सब्र का बांण टूट गया और उसने उन लड़कों को पीटना शुरू कर दिया। कृषा भी वहां से गुजर रही थी और यह सब देखकर वह भागकर तनिष्क के पास गई और उसे खींच कर घर ले गई। घर पहुंचकर कृषा ने तनिष्क को जोरदार थप्पड़ मारे और 2 दिन तक तनिष्क से नाराज रही।


⏳2 दिन बाद ⏳


आज तनिष्क को ₹20000 की लॉटरी लगी है और उन पैसों से उसने अपने घर के लिए एक टीवी खरीदा है। कृषा को यह बात बिल्कुल भी पसंद नहीं आई क्योंकि उसे क्योंकि उसे डर था कि टीवी की दुनिया कहीं उसके अतीत को खींचकर उसके आज में ना ले आए। इसलिए कृषा ने टीवी तोड़ दिया। तनिष्क यह देख कर हैरान हो गया कि आखिर कृषा यह सब क्यों कर रही है। उसने अपनी मां कृषा से इसके बारे में पूछा। कृषा ने बहुत ही चालाकी से इस बात का जवाब देते हुए कहा कि "यह टीवी जब मैंने चलाया तो यह खुद ही फट गया"।बहुत समझाने पर तनिष्क यह मान गया कि टीवी खुद ही फट गया था।

अगले दिन तनिष्क जब अपने दो दोस्तों से मिलने गया तो उन्होंने तनिष्क को बताया कि सरकार को फौज के लिए आदमियों की जरूरत है। तो वह दोनों फौज में भर्ती होने के लिए फॉर्म भरने जा रहे हैं। उन्होंने तनिष्क को भी फौज में भर्ती होने की सलाह दी और तनिष्क मान गया और उसने कहा कि मैं मां से पूछ कर बताऊंगा। घर जाकर तनिष्क ने अपनी मां कृषा से इस बारे में बात की। यह सब सुनकर कृषा बहुत डर गई थी, मानो जैसे उसके पैरों तले जमीन ही सरक गई। इस बात को ना दर्शाते हुए कृषा ने तनिष्क से कहा कि यह सब बकवास है। तुम्हें इन सब में पढ़ने की कोई जरूरत नहीं है, चुपचाप कोई और काम करो।


(अतीत वापस आ रहा था। इतिहास फिर खुद को दोहरा रहा था।)


तनिष्क अपने देश से इतना प्यार करता था कि उसकी मां की यह बात उसे खटकने लगी। उसने साफ-साफ अपनी मां से यह कह दिया कि ''आज तक मैंने आपकी हर बात मानी है पर आपकी इस बात से मुझे ऐतराज है''। तनिष्क ने कहा कि "मैं फौज में भर्ती होने के लिए फार्म भरने जा रहा हूं और आज मुझे आप नहीं रोक सकते क्योंकि देश मेरे लिए सबसे पहले है। दिशा में तनिष्क से कहा कि अगर तू जाना चाहता है तो जा पर उससे पहले मेरी मौत का जनाजा भी देखता जा। अपनी मां के मुंह से यह बात सुनकर तनिष्क बौखला गया था। तनिष्क ने कहा कि "अगर आज जनाजा उठना ही है तो क्यों ना मेरी मौत का ही उठ जाए"। तनिष्क भागता हुआ अपने घर की छत पर गया और वहां से कूदने लगा कि अचानक पीछे से उसकी मां तृषा ने उसे खींच लिया।

कृषा जोर-जोर से रोने लगी और कहने लगी कि "क्यों अतीत का साया मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा है? क्यों भाग्य वही कुर्बानी दोबारा से मांग रहा है जो मैंने 21 साल पहले दी थी? मैं उस कसम को पूरा करूंगी। इस बार मैं इतिहास को दोहराने नहीं दूंगी। तनिष्क कृषा को चुप कराता है और कहता है कि "मां आप यह सब क्या कह रही हो"? तनिष्क नहीं समझ पा रहा था कि उसकी मां का ऐसा कौन सा अतीत है जिससे वह भाग रही है। क्या है इस कसम का रहस्य ? उसके बहुत पूछने पर आखिर कृषा ने यह बताया कि उसके (तनिष्क के) पिता भी एक फौजी थे, जिनकी जंग में बहुत दर्दनाक मौत हुई थी। सिर्फ इतना ही नहीं उस जंग में उसके पिता ने जिन आतंकवादियों को मारा था, उन आतंकवादियों के साथियों ने उसके परिवार का भी पीछा नहीं छोड़ा था उन सबको मार दिया था। उस वक्त कृषा बहुत मुश्किल से अपनी और तनिष्क की जान बचाकर वहां से भागी थी।

उस दिन कृषा ने कसम ली कि वह अपने बेटे तनिष्क को हर खतरे से दूर रखेगी। यह सब सुनकर तनिष्क बहुत ही भावुक हो गया और उसने अपनी मां के आंसू पहुंचते हुए कहा कि "मां! मैं तो तेरा चांद हूं ना? और चांद हमेशा रहता है ना? अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए प्राण त्यागना तो बहुत बड़ा सौभाग्य है जो हर किसी को नहीं मिलता। पर जिसे भी यह सौभाग्य मिलता है वह तो मर कर भी अमर हो जाता है। जो देश अपनी जनता की हमेशा रक्षा करता है आज जब उसे अपनी जनता की जरूरत है तो क्या इस मुश्किल की घड़ी में हमें उसका साथ नहीं देना चाहिए?"

इस बात का एहसास होने पर कृषा तनिष्क को फौज में भर्ती होने की इजाजत दे देती है। अगले दिन तनिष्क अपने दोस्तों के साथ जाकर फौज का फार्म भर देता है।एक महीने के बाद उन्हें भारतीय सेना से अपना नियुक्ति पत्र मिलता है। भारतीय सेना की बस जंग के लिए उसे लेने के लिए उसके घर पर आती है। कृषा उसे बहुत ही गर्व के साथ गाड़ी तक छोड़ने जाती है और कहती है कि मुझे तुम पर गर्व है। गाड़ी तनिष्क को लेकर चली जाती है और कृषा की आंखों से आंसू बहने लगते हैं पर पर उसे अपने बेटे तनिष्क पर गर्व है।

THE END
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लेखक का नोट: जिस तरह सारे फौजी अपना घर-परिवार और खुशियाँ छोडकर जंग लाडने जातें है देश की रक्षा करते हैं ताकी पूरा देश (हम सब) सुरक्षीत रहे, जिस तरह वह हमारे लिए अपनी जान खतरे में डालते हैं! देश के उन सभी फौजियों को मेरा दिल से सलाम!
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Concept & Written by: Nitish Kumar @peninstinct

अध्याय
1. Chapter 1
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