Untitled story Haiwaniyat Se Bhari Hawas |

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Summary

ये कहानी है धीरज की। धीरज एक शैतान किस्म का इंसान है जिसके सीने में दिल है ही नहीं। वो जो चाहता है वो हासिल करके रहता है फिर उसके लिए उसे किसी भी हद तक जाना पड़े। ऐसे में एक दिन धीरज ने एक लड़की को कैद कर लिया और उसे एक ही कमरे में महीने तक उसे टॉर्चर किया। वो उस लड़की को सिर्फ एक शर्त पे छोड़ने वाला था जिसे वो लड़की मानना नहीं चाहती थी। आखिर क्या वजह थी जो धीरज ने उस लड़की को कैद कर रखा था? वो कौनसी बात थी जो धीरज उस लड़की से मनवाना चाहता था? जानने के लिए पढ़ते रहिए "Haiwaniyat Se Bhari Hawas

Status
2yrs ago
Chapters
1
Rating
n/a
Age Rating
18+

Chapter 1

एक लड़की अंधेरे कमरे में घुटनों के बल बैठे हुए जोर जोर से रो रही थी उस की रोने की आवाज सुनने वाला वहां पर कोई भी नहीं था


वह लड़की रोते हुए कहती है मुझे यहां पर क्यों लाया गया है मुझे यहां से बाहर निकालो मेरी मां मेरा घर पर इंतजार कर रही होगी वह लड़की यह सब बोलते वक्त शिसक रही थी


उस लड़की की हालत बहुत खराब थी उस अंधेरे कमरे में सिर्फ चांद की रोशनी ही अंदर आ रही थी जिससे उस लड़की का चेहरा किसी जलते उजाले की तरह चमक रहा था


उस लड़की का गोरा चेहरा उस में उसकी बैंगनी आंखें जो उस चांद की रोशनी में चमक रही थी वही वह लड़की रोते- रोते पता नहीं कब सो जाती है उसे खुद नहीं पता चलता


उस लड़की के सोते ही उस कमरे में किसी के कदमों की आवाज सुनाई देती है वह कदमों की आवाज धीरे-धीरे और तेज हो जाती है


उन कदमों की आवाज सुनकर जो लड़की सो गई थी वह लड़की तुरंत उठ कर बैठ जाती है और अपने सामने खड़े इंसान को देखने लगती है


अपने सामने खड़े इंसान को देखकर वह लड़की डर से कांपने लगती है उस लड़की का शरीर डर के मारे पूरा थरथरा रहा था वह लड़की अपनी बैंगनी आंखों से उस इंसान की तरफ देखते हुए


डर से पीछे होने लगती है वह इंसान अपनी हरी आंखों से सामने बैठी लड़की को देख रहा था जिसे भगवान ने इतना फुर्सत से बनाया हो उस लड़की को अपने से दूर जाते देख


वह हरी आंखों वाला लड़का उस लड़की का पैर पकड़ कर सीधा बिस्तर पर खींच लेता है जिससे उस लड़की की एक दर्द भरी चीख उस कमरे में सुनाई देती है


चांद की रोशनी में उस लड़की का चेहरा देखकर वह लड़का उस लड़की के करीब जाते हुए कहता है तुम्हें मेरे पास एक महीना हो गया है तब भी तुम एक ही बात रोज दोहरा ती हो 


कि तुम्हें यहां पर क्यों लाया गया है तुम अच्छे से जानती हो कि तुम्हें यहां पर क्यों लाया गया है तुम मेरी बात मान लो मैं तुम्हें यहां से बाहर जाने दूंगा उस लड़के की बात पर वह लड़की अपना ना मैं  सिर हिलाते हुए कहती है


कभी नहीं मैं तुम्हारी बात कभी नहीं मानूंगी उस लड़की की ना सुनकर वह लड़का बहुत गुस्से में आ जाता है वह लड़का उसी वक्त उस लड़की को बिस्तर पर धक्का देकर


खुद उसके ऊपर आ जाता है और उस लड़की की बैंगनी आंखों में देखते हुए कहता है तुम खुद एक दिन मेरा दिया हुआ ऑफर अपना ओगी यह


धीरज प्रताप सिंह का वादा है यह बोलकर वह लड़का उस लड़की पर अपना जोर अजमाने लगता है उस लड़की के शरीर को जिस सफेद नाइटी ने उस लड़की के शरीर को छुपा कर रखा हुआ था


उस नाइटी को धीरज दो टुकड़ों में कर देता है और उस लड़की का खूबसूरत बदन देखने लगता है उस खूबसूरत बदन पर नीले निशान पड़े हुए थे उन नीले निशान को देखकर धीरज 


अपने होंठ ले जाकर उन नीले निशानों के ऊपर चलाने लगता है धीरज के ऐसे करने से उस लड़की की दर्द भरी सिसकि उस कमरे मैं गूंज जाती है जिस से उस कमरे की खामोशी टूट जाती है


यह सिसकियां का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं लेता कुछ ही देर में उस लड़की की उस कमरे में एक दर्द भरी चीख सुनाई देती है उस चीख को सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए


वही बढ़ते समय के साथ उस कमरे में उस लड़की की  रोने की आवाजें बढ़ती जा रही थी वह लड़की उस लड़के से प्लीज मुझे छोड़ दीजिए मैं मर जाऊंगी जो आप कह रहे हैं


वह मैं नहीं कर सकती वही वह लड़की अभी अपनी पूरी बात बोल भी नहीं पाई थी कि उसकी आवाज फिर से उसके गले में ही रह जाती है


क्योंकि धीरज ने अपने होठों को उस लड़की के होठों पर रखकर उसकी आवाज उसके गले में ही दबा दी थी वही वह चीख पूरी रात उस कमरे में गूंजती रहती है 


वही सुबह कब होती है उस लड़की को पता ही नहीं चलता वही धीरज बिस्तर से उठ कर सीधा बाथरूम के अंदर चला जाता है आधे घंटे बाद धीरज बाथरूम से बाहर निकल कर उस लड़की की तरफ अपने कदम बढ़ा देता है


उस लड़की के पास पहुंच कर  धीरज उस लड़की को अपनी गोद में उठा लेता है और अपने  कदम फिर से बाथरूम की तरफ बढ़ा देता है बाथरूम के पास पहुंचकर उस लड़की को सीधा बाथटब में फेंक देता है


धीरज के ऐसे अचानक से के जाने पर वह लड़की डर और दर्द के कारण चीख पड़ती है उस लड़की की चीख सुनकर धीरज उस लड़की के पास जाकर उस लड़की का चेहरा


अपनी दो अंगुलियों मैं पकड़कर अपने चेहरे के पास करता है और उस लड़की को अपनी गुस्से भरी नजरों से देखते हुए कहता है


अभी भी वक्त है मान लो मेरी बात तुम्हारे लिए अच्छा होगा वरना तुम कभी भी मेरी कैद से बाहर निकल नहीं पाओगी


यह बोलकर धीरज  बाहर चला जाता है धीरज के बाहर जाते ही वह लड़की जोर जोर से रोने लगती है उस लड़की के साथ लगातार एक महीने से यही हो रहा था

जिसे सहना उसके लिए असहनीय  था उस लड़की ने तो बाहर निकलने की अब उम्मीद ही छोड़ दी थी वह लड़की रोते हुए कहती है मां मैं क्या करूं


मुझ से अब यह सब बर्दाश्त नहीं होता मुझे यहां पर नहीं रहना मैं यहां पर मर जाऊंगी मां मुझे तुम्हारी बहुत ज्यादा याद आ रही है यह सब बोलते हुए वह लड़की


अपनी पुरानी यादों में चली जाती है अपनी पुरानी यादों में चली जाती है सुबह एक छोटे से घर में वह घर सिर्फ 2 लोगों के लिए ही बना हुआ था


एक लड़की रसोई में चाय बना रही थी तभी उसे एक औरत की आवाज सुनाई देती है सोनी सोनी कहां है मेरा बच्चा 


मेरा बच्चा तभी रसोई में से एक आवाज सुनाई देती है मैं यहां पर हूं मां रसोई में सोनी की आवाज सुनकर मां उसे डांटते हुए कहती है तुम्हें कितनी बार बोला है ना मैंने कि तुम रसोई में मर जाया करो तुम फिर भी भी मेरी बात नहीं सुनती