कामलोक by kaamlok09 at Inkitt
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कामलोक

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Summary

A parallel world of lust, sex, erotic, desire. The world with the two Sun and unlimited beautiful women waiting to be taken. Sex is not taboo there but a celebration of pleasure. You can have sex with anyone, anywhere and any number of women. The lead character 'Narendra' accidentally came into this world and while he enjoyed it he seems to be stuck here. The time is ticking because everything has a cost and a terrifying danger is awaiting him.

Genre
Erotica
Author
kaamlok09
Status
Ongoing
Chapters
2
Rating
n/a
Age Rating
18+

कामलोक

संभोग, एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में सुनते ही मन कल्पना करता है एक बला की खूबसूरत औरत की, जो बिना कपड़ों के है और उसका नंगा बदन तेल की वजह से चमचमा रहा है।

मेरी जब आँखें खुली तो मैं किसी मकान की छत में था, ऊपर खुला आसमान एकदम अच्छा लग रहा था मैं धीरे-धीरे उठकर बैठ गया।

"आखिर तुम होश में आ गए!" एक मधुर सी खनकती सी आवाज़ ने मेरा ध्यान अपनी तरफ खींचा। मैंने मुड़कर देखा तो एक बेहद ही खूबसूरत लड़की थी। लड़की क्या थी वो तो कहर थी, उसका हर अंग जैसे तराशा हुआ हो, लाल-लाल रसीले होंठ, बड़े-बड़े स्तन, फुटबॉल की तरह गोल नितंबों को देखकर तो किसी का भी मन मचल जाए।

उसके करारे बदन को देखने के चक्कर में मैं खुद को भूल गया कि मैं कहाँ हूँ? थोड़ी देर बाद मेरा ध्यान खुद पर गया तो मेरे बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था। मैं पूरी तरह से निर्वस्त्र था औश्र सबसे शर्मनाक बात यह थी कि उस हसीन बला को देखकर मेरा लिंग एकदम तनकर खड़ा हो गया था जिसे छुपाना मुश्किल था। मैं किसी तरह से अपने सख़्त लिंग को छुपाने की असफल कोशिश कर रहा था जिसे देखकर वो खिलखिला कर हँसने लगी।


मैंने झेंपते हुए कहा "माफ़ करना, वो तुम जैसी सुन्दर लड़की को देखकर मेरा लिंग कंट्रोल ही नहीं हो रहा है!"

इसपर वो और ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी और बोली "मुझे या.... मेरे बदन को देख कर?" यह सुनकर मैं बोला "हाँ!... तुम्हारा बदन बहुत आकर्षक है!"

"आकर्षक!....या.... सेक्सी?" उसने सवाल किया तो मैंने भी तपाक से जवाब दिया "सेक्सी!...बेहद सेक्सी हो तुम!"

"अच्छा!... तुम्हें मुझमें क्या सेक्सी लगा?" उसने अपनी दोनों गोलाईयों को सहलाते हुए कहा। उसका यह सवाल जवाब मुझे अच्छा लग रहा था, वो मेरे लिंग को लगातार देख रही थी .... प्यासी निगाहों से, उसकी आँखों में एक आमंत्रण था जिसे मैं समझ रहा था।

अब मुझे आगे बढ़ना था, मैंने जवाब दिया "कोई एक चीज हो तो बोलूँ, तुम्हारे तो हर अंग से सेक्स का रस टपक रहा है!..मन करता है कि....." मैंने जानबूझकर अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया ताकि वो समझ सके मेरे इरादों को। मेरी बातें उसे अच्छी लग रही थी इसलिए वो मुझसे बोली "क्या मन कर रहा है?.... जरा ठीक से बताओ!"

"तुम्हारे साँचे से ढले हर अंग की बात ही कुछ और है!.. मन करता है कि अभी तुम्हारे बदन को मसल-मसल कर निचोड़ दूँ और फिर तुम्हारी जाँघों के बीच जो गुफ़ा है उसे लाल कर दूँ?" मैंने उसके स्तनों की तरफ़ देखते हुए कहा। मुझे उसके स्तनों की तरफ़ देखते हुए वो ज़रा भी असहज नहीं हुई बल्कि उसे अच्छा लगा। वो अपने स्तनों को दबाते हुए बोली "ठीक से बताओ कि मेरे हर एक अंग को देखकर तुम्हारा मन क्या कहता है!"

यह उसकी तरफ़ से ग्रीन सिग्नल था और मैं उसके बदन को छोड़ना नहीं चाहता था। इसलिए मैंने बिल्कुल बेशर्मी से कहा "मेरे बदन पर कोई कपड़ा नहीं है इसलिए तुम्हें भी अपने कपड़े उतारने पड़ेंगे!" इसपर वो मुस्कुराई और बोली "कपड़े तुम ही उतार दो मेरे!..."

"शौक से" इतना कहते हुए मैं उठा और उसके करीब गया, सबसे पहले मैंने उसके टॉप को बीच में से चीर कर रख दिया जिससे उसके स्तनों को कपड़ों से आजादी मिल गई और मैंने उन्हें मसलते हुए कहा "मन करता है कि इन दोनों स्तनों को तब तक दबाऊँ जब तक तुम्हें दर्द ना होने लगे!"

उसके बाद मेरे हाथ उसकी जाँघों की तरफ़ बढ़ने लगे और देखते ही देखते उसकी स्कर्ट उसकी कमर से सरक गई। "मन करता है कि अपने हाथों से तुम्हारी चिकनी टांगों को फैला दूँ और मेरे होंठों से चूम लूँ!"

अब उसके बदन पर सिर्फ़ एक पैंटी थी, उसकी चिकनी टाँगों और नंगी छातियों पर झूमते वक्षों को देखकर तो कोई भी अपने होश खो बैठे। उसने दोनों हाथों को ऊपर उठा कर एक सेक्सी पोज बनाया जिसमें उसके स्तनों को और उभार मिल रहा था।

"तुम्हारे फुटबॉल जैसे गोल नितंबों को देखकर मन करता है कि इन्हें चूमकर गीला कर दूँ!" मैंने कहा तो वो और खुश हो गई, उसने अपनी पेंटी की तरफ़ अंगुली करते हुए कहा "इसके बारे में कुछ नहीं मन करता तुम्हारा?"

इतना कहकर उसने अपनी पेंटी खुद ही उतार दी और उसे अपनी अंगुलियों पर नचाते हुए उसने वो पैंटी मेरी तरफ़ फेंक दी, मैंने वो पैंटी उठाई और उसे भी फ़ाड़ कर बाहर फेंक दिया ताकि वो अब एक भी कपड़ा पहन ना सके और फिर मैंने कहा "उसके बारे में तो मेरा मन करता है कि तेरी योनि की चिकनाई को मेरे लिंग की रगड़ाई से रगड़ कर रख दूँ!..... फिर मेरी जीभ से तुम्हारी चिकनी चूत की चाँदनी में नहाता रहूँ!"

यह सुनकर वो बड़ी बेशर्मी से हँसने लगी, थोड़ी देर बाद उसने एक तेल की शीशी ली और अपने बदन पर पूरी शीशी उड़ेल दी, उसका बदन अब सोने की तरह चमकने लगा था। फिर वो मेरे पास आई और उसने मेरे लिंग को पकड़ लिया जो लगातार लार बहा रहा था। उसने अपनें स्तनों को मेरे होंठों के बीच दबाते हुए कहा "तो फिर करो ना?..."

जब तेल उसके बड़े-बड़े गोल वक्षों से टप-टप कर जब टपकता है तब हर मर्द के मन में उनका स्तन मर्दन करने का मन करता है। मन करता है उसके वक्षों को कसकर दबाऊँ और तब तक उन्हें दबाता रहूँ जब तक वो हसीना मदहोश होकर अपनी जांघें फैलाकर संभोग के लिए आतुर ना हो जाए। फिर मैं उसके कोमल बदन को मसल-मसल कर निचोड़ लूँ। अंत में उसकी चिकनी योनि में अपना बड़ा सा लिंग घुसाऊँ , धीरे-धीरे उसकी योनि की दीवारें चौड़ी होंगी और मेरा लिंग हर धक्के के साथ उसकी चूत की चाशनी में नहाता रहेगा।

मैंने उसका स्तन मर्दन करना शुरू किया जिससे उस लड़की की कामुक सिसकारियां निकलने लगी। जितना जोर से मैं उसके वक्षों को दबाता उतनी जोर से वो सिसकारियां भरने लगती, मैंने उसके निप्पलों को चूसना शुरू किया जिससे वो तो तड़प उठी।

"आ!...ई!.... और दबाओ ना!"

मैं बड़ी बेदर्दी से उसके स्तनों का मर्दन करने लगा तो वो आनंद से सिसकारियां लेने लगी। उसके कामुक स्तनों को चूसने में जो मजा आ रहा था वह शब्दों में कहना मुश्किल था। मेरे हाथ उसकी गीली चिकनी योनि की तरफ़ फिसलने लगे तो उसने अपनी टांगें फ़ैला दी और बोली "मेरी टाँगों को अपने हाथों से फैला कर मेरी कोमल योनि का कचूमर निकाल दो!.."

मैं उसकी योनि के एकदम करीब था, वो पूरी तरह से गीली थी, मुझे देखकर वो बोली "चखोगे नहीं मेरा स्वाद?" इतना कहकर उसने मेरे होंठों को उसकी योनि पर सटा दिया और मेरे सिर को दबाने लगी उसकी योनि की तरफ़।

मेरी जीभ उसकी योनि के अंदर ऐसे घूम रही थी जैसे आइसक्रीम के कप में मेरी जीभ हो। उसकी योनि का रस चूसने के बाद उसकी योनि के होंठों को भी मैंने नहीं छोड़ा और उसे जोर से चाटने लगा। मेरी जीभ की हर हरकत पर वो कामुक सिसकारियां भरने लगती।

अब समय था मेरे लिंग और उसकी योनि के मिलन का, जब मैंने अपने मोटे लिंग को उसकी योनि पर रगड़ना शुरू किया तो वो आनंद से सिसकने लगी, उसने मेरे लिंग को अपनी योनि पर रखा और मेरी तरफ़ देखते हुए कहा "आज मुझे छोड़ना मत!... मुझे मसल दो, ... मुझे चोद दो!... मेरी चिकनी चूत को बर्बाद कर दो!"

मेरा गर्म लोहे की तरह तपता लिंग उसकी योनि में ऐसे घुसता गया जैसे मक्खन में छुरी घुसती है और उसकी गर्मी से मक्खन धीर-धीरे पिघलता है। मेरे हर धक्के के साथ उसकी आनंद से चीखें निकल रही थी जिससे उत्तेजित होकर मैं उसके वक्षों को मसलने लगा, उसके होंठों पर मेरे होंठों ने कब्जा कर लिया था और उसकी जीभ को मेरी जीभ चूसने में मस्त हो गई थी।

उसके चिकने बदन मेरे नीचे दबा हुआ था और वो लगातार सी सी कर कराह रही थी। उसकी योनि इतनी चिकनी थी की मेरे लिंग का घर्षण से हम दोनों के बदन में आनंद के फव्वारे छूटने लगे थे।

"आ!...हम!.. उई!...माँ!.... आज मुझे मार डालो!...चोद डालो!... मेरी चिकनी चूत को फ़ाड़ डालो!...खा जाओ मुझे!"

ऐसी कामुकता से भरी हुई सिसकारियाँ सुनकर तो मैं पागल हो रहा था, मैं भी जोर-शोर से धक्का लगाना शुरू कर दिया, फच्च!.. फच्च!... फच्च!... फच्च!.... फच्च!... उसकी चूत भी अब तो बातें कर रही थी।

मैंने उसके दोनों हाथों को कसकर ऊपर की तरफ़ दबाया और बहुत ही ज़ोरदार धक्का मारने लगा, थोड़ी देर में वो बुरी तरह से काँपने लगी और ऐसा लगा जैसे कि बारिश हो गई हो, उसके बदन से पसीना बहने लगा था और योनि से रस।

हम दोनों का मिलन एक असली संभोग था जहाँ दोनों को भरपूर मजा आया। चरम बिंदु पर पहुँचने के बाद मैंने अपना लिंग निकाल लिया और उसके स्तनों पर अपना सारा वीर्य गिरा दिया जिसे उसने अपने पूरे बदन पर मसल लिया।

हम दोनों के दिल तेजी से धड़क रहें थे। अब आगे क्या होगा?


///// कहानी जारी रहेगी अगले भाग में //

Chapters
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