तुम्हारे स्पर्श ने सिखा दिया... इश्क का वो रंग, जिसमें सांसे भी मोहब्बत बन जाए
सायरी से बच्चे दूर रहना के
तुम्हारे ये “ठोस” बाल छाती के,
रगड़े खाते नाज़ुक मेरे सीने पे
बार-बार गिला करके अपनी जीभ से,
मजबूर कर देते हो लबों को पीने पे,
मेरी छोटी सी नदी में गोते खाता तुम्हारा
समंदर मेरे कहती निकल दो अंगूठी अपनी उंगली से
ये चुब रही है जांगो के अंदर मेरे
किस तरह बढ़नी है सांसे किस तरह आहे निकलवानी है,
जान तुम सब जानते हो अब मंतर मेरे
इश्क करने का तरीका यूं मुझे सिखा दिया
मैं दुबली सी हुआ करती थी मेरा वजन बढ़ा दिया
खाली होने को नहीं आता ये नटखट तुम्हारा भरा पड़ा है
मेरे बढ़ रहे हैं जिस्म के अंग जो
ये तुम्हारा ही सारा कराधरा है ये,
तुम्हारा ही सारा कराधरा है।