ट्रेन का स्लीपर कोच

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Summary

दिल्ली-मुंबई राजधानी एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में प्रिया और अर्जुन, दो अजनबी, रात के सन्नाटे में मिलते हैं। नजरों के टकराने से शुरू हुई बात वासना में बदलती है। तंग बर्थ पर दोनों चुदाई का खेल खेलते हैं – चूत चाटना, लंड चूसना, और जोरदार धक्के। ट्रेन की रफ्तार के साथ उनकी सिसकारियां गूंजती हैं, और सुबह दोनों बिना नाम जाने अलग हो जाते हैं। https://१३५५६.stck.me

Genre
Erotica
Author
Ishanki
Status
Complete
Chapters
1
Rating
n/a
Age Rating
18+

ट्रेन का स्लीपर कोच


रात के 1 बजे थे, और दिल्ली से मुंबई जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी। स्लीपर कोच में माहौल शांत था, बस ट्रेन की खटखट की आवाज गूंज रही थी। प्रिया, 26 साल की स्लिम और सेक्सी लड़की, अपनी टाइट कुर्ती और लेगिंग्स में बर्थ पर लेटी थी। उसकी गोरी त्वचा और कर्वी फिगर छुपाए नहीं छुप रही थी। सामने की बर्थ पर था अर्जुन, 32 साल का रफ-टफ लड़का, जीन्स और टी-शर्ट में, जिसके मसल्स उसकी बाजुओं से झलक रहे थे। दोनों अजनबी थे, बस टिकट कन्फर्म कराने की बात पर हल्की-सी हाय-हेलो हुई थी।

प्रिया को नींद नहीं आ रही थी। वो करवटें बदल रही थी, और अर्जुन की नजर बार-बार उसकी कमर और उभरे हुए बूब्स पर जा रही थी। अचानक प्रिया की पानी की बोतल गिर गई, और वो नीचे झुकी। उसकी कुर्ती ऊपर उठी, लेगिंग्स में उसकी गांड साफ दिख रही थी। अर्जुन का लंड तन गया। "पानी चाहिए?" उसने पूछा, आवाज में शरारत। प्रिया ने मुस्कुराकर कहा, "हां, लेकिन तुम्हारी नजरें कहीं और हैं।"

बातों-बातों में दोनों पास आए। कोच में बाकी लोग सो रहे थे, पर्दे डाले हुए थे। अर्जुन ने प्रिया का हाथ पकड़ा, उसे अपनी बर्थ पर खींच लिया। "शोर मत करना," वो फुसफुसाया और प्रिया के होंठों पर किस कर दिया। प्रिया ने विरोध नहीं किया, उसकी सांसें गर्म हो गईं। अर्जुन ने कुर्ती ऊपर की, ब्रा के ऊपर से बूब्स दबाए। "क्या माल है तू," वो बोला। प्रिया ने उसकी जीन्स का बटन खोला, लंड बाहर निकाला – 8 इंच का मोटा, सख्त। "इतना बड़ा?" वो हंस पड़ी और मुंह में ले लिया।

प्रिया चूस रही थी, जीभ से टिप चाट रही थी। अर्जुन के मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं। उसने प्रिया की लेगिंग्स नीचे सरकाई, पैंटी गीली थी। "चूत तैयार है," उसने कहा और उंगली डाल दी। प्रिया सिहर उठी, "आह... धीरे!" लेकिन अर्जुन ने दो उंगलियां डालकर चोदना शुरू किया। फिर उसने प्रिया को बर्थ पर लिटाया, टांगें फैलाईं, और लंड चूत में पेल दिया। "उफ्फ... फट जाएगी!" प्रिया ने दांत काटे, लेकिन मजा ले रही थी।

ट्रेन की रफ्तार के साथ अर्जुन के धक्के तेज हुए। थप-थप की आवाज दबाने के लिए प्रिया ने तकिए में मुंह छुपाया। अर्जुन ने बूब्स चूसते हुए चोदा, फिर प्रिया को घुमाकर डॉगी स्टाइल में लिया। उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए लंड पूरा अंदर-बाहर। "चोद साले, जोर से!" प्रिया फुसफुसाई। अर्जुन ने स्पीड बढ़ाई, चूत में गहराई तक। दोनों पसीने से तर थे।

आखिर में अर्जुन ने लंड निकाला और प्रिया के बूब्स पर झड़ गया, वीर्य टपक रहा था। प्रिया भी झड़ चुकी थी, उसकी चूत जूस से भीगी थी। दोनों हांफते हुए लेट गए। "नाम भी नहीं जानते, और ये कर लिया," प्रिया हंसी। अर्जुन बोला, "अगली बार नाम पूछ लूंगा।" सुबह स्टेशन पर दोनों अलग हो गए, बस एक शरारती मुस्कान के साथ।

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