2. कहानी 2 बजे की — Mirror Pattern by Niket Thakur at Inkitt
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2. कहानी 2 बजे की — Mirror Pattern

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Summary

रात के 2 बजे… जब दुनिया सो रही होती है, कुछ स्क्रीन जाग रही होती हैं। निकेत उस खतरनाक समय-चक्र से बच चुका है, जहाँ स्क्रीन सिर्फ एक डिवाइस नहीं—एक दरवाज़ा बन चुकी थी। लेकिन वह दरवाज़ा बंद नहीं हुआ… वह अब फैल चुका है। अलग-अलग शहरों में, अलग-अलग लोगों के बीच—एक ही समय, एक ही पैटर्न, एक ही परछाई। **Mirror Pattern।** जब निकेत, उसकी छोटी बहन निधि और एक नया यूज़र आरव इस रहस्य में उलझते हैं, उन्हें पता चलता है कि यह कोई साधारण डिजिटल गड़बड़ी नहीं— यह इंसानों की आदतों से बनी एक चेतना है, जो अब उन्हें अपने नेटवर्क में जोड़ रही है। हर स्क्रीन एक कनेक्शन है। हर कनेक्शन एक खतरा। और अब सवाल सिर्फ इतना है— **क्या तुम पहले से ही Connected हो?**

Status
Ongoing
Chapters
5
Rating
n/a
Age Rating
16+

अध्याय 1: New User

अध्याय 1: New User

रात के ठीक 2 बजे थे।

शहर फिर से उसी गहरी खामोशी में डूबा हुआ था, जहाँ हर आवाज़ जैसे खुद को छुपा लेती है। सड़कों पर सन्नाटा था, और खिड़कियों के पीछे बंद कमरों में लोग नींद के हवाले हो चुके थे।

लेकिन हर कोई नहीं।

आरव जाग रहा था।

अपने कमरे की हल्की नीली रोशनी में बैठा, वह लैपटॉप स्क्रीन पर झुका हुआ था। हेडफ़ोन उसके कानों में थे और उंगलियाँ कीबोर्ड और माउस के बीच तेज़ी से चल रही थीं।

स्क्रीन पर एक ऑनलाइन गेम चल रहा था—तेज़, शोर भरा, और पूरी तरह ध्यान खींच लेने वाला।

आरव के लिए यह रोज़ की बात थी।

रात को देर तक जागना, गेम खेलना, और फिर सुबह देर से उठना—उसकी आदत बन चुकी थी।

घड़ी की ओर नज़र गई—

2:00 AM

“बस एक मैच और…” उसने खुद से कहा।

तभी—

स्क्रीन हल्के से झिलमिलाई।

पहले उसने ध्यान नहीं दिया।लेकिन अगले ही पल—

गेम अचानक रुक गया।

पूरी स्क्रीन फ्रीज़ हो गई।

आरव ने भौंहें सिकोड़ लीं।

“अरे यार… अभी क्यों?”

उसने माउस हिलाया।कीबोर्ड दबाया।

कोई प्रतिक्रिया नहीं।

कुछ सेकंड तक स्क्रीन वैसे ही जमी रही।

फिर—

धीरे-धीरे स्क्रीन काली हो गई।

आरव सीधा बैठ गया।

“क्रैश हो गया क्या?”

जैसे ही वह लैपटॉप रीस्टार्ट करने के लिए हाथ बढ़ाने वाला था—

स्क्रीन पर एक टेक्स्ट उभरा।

सफेद अक्षरों में—

“WELCOME BACK.”

आरव रुक गया।

“वेलकम बैक?”

उसने भौंहें चढ़ाईं।

“मैं तो लॉग-इन भी नहीं किया…”

यह कोई सिस्टम मैसेज नहीं लग रहा था।कुछ अलग था।

कुछ… अजीब।

अगले ही क्षण—

लैपटॉप के ऊपर लगा वेबकैम अपने आप चालू हो गया।

एक छोटी-सी लाइट जल उठी।

आरव का दिल हल्का-सा धड़का।

“ये… अपने आप कैसे ऑन हो गया?”

स्क्रीन के कोने में एक छोटी विंडो खुली—

उसकी खुद की लाइव इमेज दिखाई देने लगी।

वह स्क्रीन में खुद को देख रहा था।

थोड़ा थका हुआ चेहरा…आँखों के नीचे हल्की काली रेखाएँ…पीछे उसका कमरा।

सब सामान्य था।

कम से कम… पहली नज़र में।

आरव ने थोड़ा आगे झुककर स्क्रीन को ध्यान से देखा।

तभी—

उसे कुछ अजीब लगा।

उसकी साँस धीमी हो गई।

स्क्रीन में, उसके पीछे—

कुछ हिल रहा था।

आरव का दिल एक पल के लिए रुक गया।

उसने धीरे-धीरे अपनी गर्दन मोड़ने की कोशिश की—

लेकिन डर ने उसे जकड़ लिया।

वह पहले स्क्रीन को ही देखता रहा।

और फिर—

स्पष्ट हुआ।

उसके पीछे—

एक आकृति खड़ी थी।

स्थिर।

चुप।

अंधेरे में आधी छिपी हुई।

आरव की उंगलियाँ जकड़ गईं।

उसने झटके से पीछे मुड़कर देखा—

कमरा खाली था।

कुछ भी नहीं।

उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

“न… नहीं… ये कैसे…”

उसने तुरंत फिर स्क्रीन की ओर देखा।

इस बार—

वह आकृति और साफ थी।

और इस बार—

वह हल्की-सी हिल रही थी।

जैसे वह वहीं खड़ी होकर… उसे देख रही हो।

आरव का गला सूख गया।

उसने जल्दी से कैमरा बंद करने की कोशिश की।

कर्सर हिलाया—

लेकिन स्क्रीन ने कोई जवाब नहीं दिया।

माउस जैसे काम ही नहीं कर रहा था।

कीबोर्ड दबाया—

कुछ नहीं।

स्क्रीन पर अचानक एक नया टेक्स्ट उभरा—

धीरे-धीरे टाइप होता हुआ—

“DON’T TURN AROUND.”

आरव जम गया।

उसकी नज़र स्क्रीन पर अटक गई।

उसके कानों में अपनी ही धड़कनों की आवाज़ गूंज रही थी।

धक… धक… धक…

उसने खुद को रोकने की कोशिश की।

लेकिन—

मानव स्वभाव।

डर जितना रोकता है, उतना ही देखने को मजबूर करता है।

आरव ने हिम्मत जुटाई—

और धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।

कमरा—

खाली।

पहले जैसा ही।

सब कुछ सामान्य।

वह तुरंत वापस स्क्रीन की ओर मुड़ा।

और उसका खून जम गया।

स्क्रीन में—

वह आकृति अब उसके और करीब आ चुकी थी।

इतनी करीब—

कि अब उसका चेहरा लगभग दिखाई देने लगा था।

लेकिन अजीब बात यह थी—

उस चेहरे में कोई स्पष्टता नहीं थी।

जैसे कोई धुंध हो।

जैसे कोई अधूरी छवि।

और फिर—

स्क्रीन पर एक और मैसेज उभरा—

“TOO LATE.”

उसी क्षण—

कमरे की लाइट हल्के से झपकी।

एक बार।

दो बार।

फिर—

पूरी तरह बंद।

अंधेरा।

सिर्फ लैपटॉप की स्क्रीन की रोशनी।

आरव की साँसें अब अनियंत्रित हो चुकी थीं।

उसने घबराकर लैपटॉप बंद करने की कोशिश की—

लेकिन ढक्कन जैसे जाम हो गया था।

हिल ही नहीं रहा था।

स्क्रीन पर वह आकृति अब और पास आ चुकी थी।

इतनी पास—

कि वह स्क्रीन की सीमा को छू रही थी।

और फिर—

धीरे-धीरे…

उसका हाथ बाहर निकलने लगा।

स्क्रीन के अंदर से।

आरव पीछे हट गया।

उसकी कुर्सी ज़ोर से फर्श से टकराई।

उसने दरवाज़े की तरफ भागने की कोशिश की—

लेकिन दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।

जैसे किसी ने बाहर से लॉक कर दिया हो।

“कोई है?!”

उसने चिल्लाया।

कोई जवाब नहीं।

सिर्फ सन्नाटा।

और फिर—

एक धीमी आवाज़।

सीधे उसके पीछे से।

“WELCOME BACK.”

आरव जम गया।

उसने धीरे-धीरे मुड़ने की कोशिश की—

लेकिन उससे पहले ही—

लैपटॉप की स्क्रीन पूरी तरह काली हो गई।

कमरे में सब कुछ शांत हो गया।


अगली सुबह—

आरव का कमरा खुला मिला।

लैपटॉप चालू था।

स्क्रीन पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

“NEW USER CONNECTED.”


🔚अध्याय 1 समाप्त

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