Drizzle

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Summary

ये कहानी है मेरी, मेरे या शायद उन सबके life की, उस वक्त की जो वक्त अगर चाहे तो हमारी पुरी life ही कुछ और हो सक्ती है. Hello दोस्तो मे हुं राहुल, नाम तो सुना ही होगा. . . . . . . . . हर किसी की जिंदगी का लेखक वो खुद ही होता है, नगर मेरी ये जिंदगी देन हैं, उसकी. . . . . वो थी कायरा. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .

Genre
Romance
Author
Soham
Status
Ongoing
Chapters
2
Rating
n/a
Age Rating
13+

Drizzle Part - 01

आज अपनी खिड़की से कॉफी पीते-पीते जिन बारिश की हल्की बूंदों को मैं देख रहा हूँ, वो याद दिला रही हैं मुझे उस दिन की…

जिस दिन ने मेरी पूरी ज़िंदगी ही बदल दी।

इस काले आकाश के साथ मिट्टी की इस खूबसूरत खुशबू की तारीफ़ किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन इन सब चीज़ों का मेरी लाइफ से बहुत गहरा संबंध है।

जो संबंध शुरू होता है आज से करीब-करीब 17 साल पहले…

जब मेरी उम्र पूरे 17 साल भी नहीं थी।

“तो हेलो फ्रेंड्स, मैं हूँ राहुल… हम्म, नाम तो सुना ही होगा।”

उन दिनों मैं अपनी teenage में था…

स्कूल का एक popular guy।

उम्म… अपनी अच्छी मार्किंग या topper होने के लिए नहीं, बल्कि अपने friend circle के लिए।

क्योंकि मेरे friend circle में जितने भी मेरे दोस्त थे…

सॉरी, नमूने थे…

वो सारे थे backbenchers।

इतना ही नहीं…

वो सब नमूने हर चीज़ में perfect थे — except study।

मेन बात तो ये थी कि teachers का जितना ध्यान हमें सिखाने में नहीं था, उससे ज़्यादा तो मुझे मेरे दोस्तों से अलग करने में होता था।

क्योंकि मैं था…

the OG lizard — रंग बदलने में godfather।

दोस्तों के साथ उनकी तरह…

लेकिन teachers और parents के साथ एकदम sincere।

पढ़ाई भी मेरे लिए ज़्यादा मुश्किल नहीं थी।

मैं आसानी से Top-10 में आ जाता था…

और इसी बात से सिर्फ सारा school और teachers ही नहीं, बल्कि मेरे दोस्त भी confuse थे।

अगर इसका असली reason बताऊँ…

तो वो था सिर्फ मेरा discipline।

मैं जिस भी जगह जाता था…

वहाँ बिल्कुल blend हो जाता था।

हाँ, of course मैं study भी करता था…

लेकिन bakchodi के बाद।

वैसे तो मेरे 6 दोस्तों में से मेरे सारे ही दोस्त खास थे…

पता नहीं आज कहाँ होंगे?

खैर…

मेरा best friend था — केवल।

इसका reason simple था…

केवल भी कुछ-कुछ मेरे जैसा ही था।

हम सभी का ही एक-दूसरे के घर आना-जाना लगा रहता था।

वो शाम मुझे आज भी याद है…

17 जुलाई।

केवल का birthday था।

उसने party दी थी अपने घर पर।

शाम के 6 बजकर 30 मिनट पर हम सब दोस्त उसके घर पहुँचे।

केवल के पापा को trees का काफी शौक था…

इसी वजह से उनका घर किसी park की तरह लगता था।

ऊपर से उस atmosphere के साथ…

background में चल रही हल्की बारिश की drizzles…

उसे मैं आज तक नहीं भूल पाया। उस शाम तक… मैं खुद को दुनिया का सबसे disciplined और focused boy समझता था… लेकिन उस दिन… कुदरत की इस कारीगरी को देखकर मैं खुद shocked था।

वो थी — कायरा।

जितना सुंदर उसका नाम था… उससे कहीं ज़्यादा सुंदर थी उसकी वो मुस्कान… वो केवल की सगी बहन थी……और शायद उसी पल से सब कुछ बदलना शुरू हो गया था।