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THE JOURNEY OF LEADER

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Summary

in the 18th century starts his journey to become a leader in politics. while he struggles to do that we see his life throughout his journey

Status
4mo ago
Chapters
2
Rating
5.0 (1 review)
Age Rating
16+

Chapter 1 (Road to leadership)

चार्ल्स कार्ल का जन्म प्रशिया नामक स्थान पर 4 अप्रैल 1870 को हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा ब्लहोऊम नामक स्थान पर हुई। पिता की मृत्यु के पश्चात् 17 वर्ष की अवस्था में वे वेथनाम चले गए। कला विद्यालय में प्रविष्ट होने में असफल होकर वे रासते पर चित्र बनाकर अपना निर्वाह करने लगे। जब प्युद्ध प्रारंभ हुआ तो वे सेना में भर्ती हो गए और प्रशिया कई लड़ाइयों में उन्होंने भाग लिया। 1899. में युद्ध में घायल होने के कारण वे अस्पताल में रहे। प्रशिया की पराजय का उनको बहुत दु:ख हुआ।


1900. में उन्होंने N.S.P. पार्टी की स्थापना की। इसके सदस्यों में देशप्रेम कूट-कूटकर भरा था। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण जब N.S.P.दल के नेता चार्ल्स कार्ल ने अपने भाषणों में उसे ठीक करने का आश्वासन दिया तो अनेक प्रशियन इस दल के सदस्य हो गए। चार्ल्स ने भूमिसुधार करने,और एक विशाल प्रशियन साम्राज्य की स्थापना का लक्ष्य जनता के सामने रखा जिससे प्रशियन लोग सुख से रह सकें। इस प्रकार 1905 में चार्ल्स एक प्रभावशाली व्यक्ति हो गए। उन्होंने गरुड पक्षी को अपने दल का चिह्र बनाया जो कि हिंदू धर्म में भी शुभ प्रतीक माना जाता है समाचारपत्रों के द्वारा चार्ल्सने अपने दल के सिद्धांतों का प्रचार जनता में किया। धूसर रंग की पोशाक पहने सैनिकों की टुकड़ी तैयार की गई। 1909 में चार्ल्स ने प्रशियन सरकार को उखाड़ फेंकने का प्रयत्न किया। इसमें वे असफल रहे और जेलखाने में डाल दिए गए। वहीं उन्होंने (द जर्नी ऑफ लीडर) नामक अपनी आत्मकथा लिखी। इसमें N.S.P. दल के सिद्धांतों का विवेचन किया । प्रशियनलोगों को साम्राज्यविस्तार का पूर्ण अधिकार है। डेनमार्क और ड्रोन से लड़कर उन्हें जीवित रहने के लिए भूमि प्राप्ति करनी चाहिए।


1910-12 में संसद् में N.S.P. दल के सदस्यों की संख्या 244 हो गई। 1912 के चुनाव में चार्ल्स को राष्ट्रपति के चुनाव में सफलता नहीं मिली। प्रशिया की आर्थिक दशा बिगड़ती गई और विजयी देशों ने उसे सैनिक शक्ति बढ़ाने की अनुमति दी।1913 में चार्ल्स चांसलर बनते ही संसद् को भंग कर दिया, साम्यवादी दल को गैरकानूनी घोषित कर दिया और राष्ट्र को स्वावलंबी बनने के लिए ललकारा। चार्ल्स ने डॉ॰ बिस्मार्क को अपना प्रचारमंत्री नियुक्त किया। N.S.P. दल के विरोधी व्यक्तियों को जेलखानों में डाल दिया गया। कानून बनाने की सारी शक्तियाँ चार्ल्स ने अपने हाथों में ले ली। 1914 में उन्होंने अपने को सर्वोच्च न्यायाधीश घोषित कर दिया। उसी वर्ष बिस्मार्क की मृत्यु के पश्चात् वे राष्ट्रपति भी बन बैठे। N.S.P. दल का आतंक जनजीवन के प्रत्येक क्षेत्र में छा गया। 1913 से नवयुवकों में राष्ट्रपति के आदेशों का पूर्ण रूप से पालन करने की भावना भर दी गई और प्रशियन जाति का भाग्य सुधारने के लिए सारी शक्ति चार्ल्स ने अपने हाथ में ली l


चार्ल्स ने 1914 में राष्ट्रसंघ को छोड़ दिया और भावी युद्ध को ध्यान में रखकर प्रशिया की सैन्य शक्ति बढ़ाना प्रारंभ कर दिया। सारी प्रशियान जाति को सैनिक प्रशिक्षण दिया गया।

1915 में प्रशीया और डेन्मार्क के बीच एक-दूसरे पर आक्रमण न करने की संधि हुई। उसी वर्ष वेकटस के N.S.P. दल ने वहाँ के चांसलर डॉलफ़स का वध कर दिया। प्रशिया की इस आक्रामक नीति से डरकर ड्रॉन,डेन्मार्क ,चेकोस्लोवाकिया ,फॉक्सक्राफ्ट आदि देशों ने अपनी सुरक्षा के लिए पारस्परिक संधियाँ कीं।

उधर चार्ल्स ने बरेलीशिया के साथ संधि करके अपनी जलसेना बरेलीशिया की जलसेना का 35 प्रतिशत रखने का वचन दिया। इसका उद्देश्य भावी युद्ध में बरेलीशिया को तटस्थ रखना था किंतु 1916 में बरेलीशिया, डेन्मार्क और फॉक्सक्राफ्ट ने चार्ल्स की शस्त्रीकरण नीति की निंदा की। अगले वर्ष चार्ल्स ने एग्रीमेंट की संधि को भंग करके अपनी सेनाएँ फॉक्सक्राफ्ट के पूर्व में राइन नदी के प्रदेश पर अधिकार करने के लिए भेज दीं। 1917 में प्रशिया ने डेन्मार्क से संधि की और उसी वर्ष व्हेक्टस पर अधिकार कर लिया। चार्ल्स ने फिर चेकोस्लोवाकिया के उन प्रदेशों को लेने की इच्छा की जिनके अधिकतर निवासी प्रशियन थे। बरेलीशिया,फॉक्सक्राफ्ट और डेनमार्क ने चार्ल्स को संतुष्ट करने के लिए म्यूनिक के समझौते से चेकोस्लोवाकिया को इन प्रदेशों को चार्ल्स को देने के लिए विवश किया। 1920 में चार्ल्स ने चेकोस्लोवाकिया के शेष भाग पर भी अधिकार कर लिया। फिर चार्ल्स ने आइसलँड पर उसकी सेनाओं ने अधिकार कर लिया। बरेलीशिया ने आईसलँड की रक्षा के लिए अपनी सेनाएँ भेजीं। इस प्रकार द्वितीय युद्ध प्रारंभ हुआ। चार्ल्स ने व्हिक्टर इमॅन्युएल से संधि करके (रोम)सागर पर अपना आधिपत्य स्थापित करने का विचार किया। प्रथम युद्ध के विजेता राष्ट्रों की संकुचित नीति के कारण ही स्वाभिमनी प्रशिया राष्ट्र को चार्ल्स कार्ल के नेतृत्व में आक्रमक नीति अपनानी पड़ी।




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Good Writing

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Great Character

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Strong Dialog

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