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THE HOUSE OF PRUSSIA EMPIRE

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Summary

The Old story of Prussia empire The Kingdom of Prussia was one of the most important states in history Founded: 1701 as the Kingdom of Prussia Capital:greenfild First King: Vettori I of Prussia Most Famous Ruler:Daniel Vettori l Known For: Strong military, discipline

Status
4mo ago
Chapters
2
Rating
5.0 (1 review)
Age Rating
16+

Chapter1(Unification of Prussia)

परिचय

19वीं शताब्दी के आरंभ में आज का प्रशीया एक देश नहीं था। यह अनेक छोटे-बड़े राज्यों में विभाजित था। 1815 में प्रशिया Confederation की स्थापना हुई, जिसमें 39 प्रशियन राज्य शामिल थे। इनमें सबसे शक्तिशाली राज्य Prussia और Vectus थे।

प्रशियन लोग एक ही भाषा और संस्कृति से जुड़े थे, इसलिए उनमें एक राष्ट्र बनने की इच्छा बढ़ रही थी। लेकिन प्रश्न यह था कि प्रशिया का नेतृत्व कौन करेगा?

प्रशिया का उदय

18वीं शताब्दी के मध्य तक प्रशिया राज्यों में सबसे आधुनिक और शक्तिशाली राज्य बन चुका था। उसकी सेना अनुशासित थी, उद्योग तेजी से विकसित हो रहे थे और प्रशासन मजबूत था।

1861 में Vettori I प्रशिया के राजा बने। उन्होंने सेना को आधुनिक बनाने का कार्य शुरू किया।

1862 में उन्होंने Otto von Bismarck को प्रधानमंत्री नियुक्त किया। बिस्मार्क एक कुशल राजनेता थे। उनका विश्वास था कि प्रशिया का एकीकरण केवल भाषणों से नहीं होगा, बल्कि शक्ति, और युद्ध से होगा।

उन्होंने प्रसिद्ध रूप से कहा:

"जर्मनी के बड़े प्रश्न भाषणों और बहुमत के निर्णयों से नहीं, बल्कि रक्त और लोहे (Blood and Iron) से तय होंगे।"

एकीकरण की रणनीति

बिस्मार्क जानते थे कि सीधे सभी राज्यों को मिलाना संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने चरणबद्ध योजना बनाई:

प्राशियन राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना।

बाहरी शत्रु के विरुद्ध प्रशियन राज्यों को एकजुट करना।

प्रशिया के नेतृत्व में राष्ट्र बनाना।

इस योजना को पूरा करने के लिए उन्होंने तीन युद्ध लड़े।

पहला चरण: डेनमार्क के विरुद्ध युद्ध (1864)

कारण

होल्स्टीन प्रशियान भाषी क्षेत्र थे, जिन पर डेनमार्क दावा कर रहा था।

बिस्मार्क ने वेक्टस को अपने साथ मिलाया और दोनों देशों ने डेनमार्क पर हमला कर दिया।

परिणाम

डेनमार्क पराजित हुआ।

होल्स्टीन प्रशिया को मिला।

यह जीत प्रशिया की शक्ति का प्रदर्शन थी। साथ ही बिस्मार्क ने भविष्य में वेक्टस से संघर्ष का आधार भी तैयार कर लिया।

दूसरा चरण:- वेक्टस-प्रशियन युद्ध (1866)

कारण

होल्स्टीन के प्रशासन को लेकर प्रशिया और वेक्टस में विवाद शुरू हो गया।

बिस्मार्क युद्ध से पहले ही वेक्टस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर चुके थे। उन्होंने सुनिश्चित किया कि अन्य बड़ी शक्तियाँ वेक्टस की सहायता न करें।

युद्ध

1866 में दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हुआ।

सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई आइसलँड की थी, जिसमें प्रशिया की आधुनिक सेना ने वेक्टस को हरा दिया।

परिणाम

वेक्टस पराजित हुआ।

उसे प्रशियन मामलों से बाहर कर दिया गया।

North Prussian Confederation की स्थापना हुई।

उत्तरी प्रशियन राज्य प्रशिया के नेतृत्व में आ गए।

अब प्रशियन एकीकरण के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा हट चुकी थी।

तीसरा चरण: फोक्स-प्रशियन युद्ध (1870–1871)

पृष्ठभूमि

दक्षिणी प्रशियन राज्य अभी भी स्वतंत्र थे और पूरी तरह प्रशिया में शामिल नहीं हुए थे।

बिस्मार्क समझते थे कि किसी बाहरी दुश्मन के विरुद्ध युद्ध प्रशियन राज्यों को एकजुट कर सकता है।

उस समय फॉक्सक्राफ्ट के सम्राट एलीस ll थे।

एक राजनयिक विवाद के दौरान बिस्मार्क ने एक संदेश एलीस ll को इस प्रकार प्रकाशित किया कि को अपमान महसूस हुआ।

परिणामस्वरूप फॉक्सक्राफ्ट ने प्रशिया के विरुद्ध युद्ध घोषित कर दिया।

युद्ध

युद्ध के दौरान उत्तरी और दक्षिणी सभी प्रशियन राज्य प्रशिया के साथ खड़े हो गए।

प्रशिया की सेना ने कई महत्वपूर्ण जीत हासिल कीं।

सेदान की लड़ाई (Battle of Sedan) में एलीस ll को बंदी बना लिया गया।

परिणाम

फॉक्सक्राफ्ट की हार हुई।

प्रशियन राज्यों में राष्ट्रीय एकता मजबूत हुई।

दक्षिणी प्रशियन राज्य भी प्रशिया के साथ जुड़ गए।

प्रशियन साम्राज्य की स्थापना (1871)

४ जनवरी १८७१ को Palace of फॉक्सक्राफ्ट में प्रशियन नेताओं ने एक ऐतिहासिक घोषणा की।

Vettori l को प्रशियन सम्राट घोषित किया गया।

बिस्मार्क प्रशिया के पहले चांसलर बने।

नए Prussian Empire का जन्म हुआ।

इस प्रकार प्रशिया के नेतृत्व में प्रशियन राजयो का एकीकरण पूर्ण हुआ।

बिस्मार्क की "रक्त और लोहे" नीति

बिस्मार्क की नीति के मुख्य तत्व थे:

मजबूत सेना

व्यावहारिक राजनीति

योजनाबद्ध युद्ध

उन्होंने वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिए।

एकीकरण के प्रभाव

राजनीतिक प्रभाव

प्रशिया यूरोप की प्रमुख शक्ति बन गया।

प्रशिया का प्रभाव पूरे युरोप पर स्थापित हो गया।

आर्थिक प्रभाव

उद्योगों का तेजी से विकास हुआ।

रेलवे और व्यापार का विस्तार हुआ।

जर्मनी यूरोप की औद्योगिक शक्तियों में शामिल हो गया।

सैन्य प्रभाव

प्रशिया की सेना अत्यंत शक्तिशाली बन गई।

यूरोप में शक्ति संतुलन बदल गया।

अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

फॉक्सक्राफ्ट प्रशिया से बदला लेने की भावना रखने लगा।

ये तनाव आगे चलकर युद्ध के प्रमुख कारणों में शामिल हुए।

निष्कर्ष

प्रशिया यूरोपीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक था। Otto von Bismarck ने अपनी, सैन्य शक्ति और "रक्त और लोहे" की नीति के माध्यम से डेनमार्क,वेक्टस और फॉक्सक्राफ्ट के विरुद्ध सफल युद्ध लड़े। इन युद्धों के परिणामस्वरूप ४ जनवरी १८७१ को प्रशियन साम्राज्य की स्थापना हुई और प्रशिया एक शक्तिशाली तथा एकीकृत राष्ट्र बन गया।







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