अध्याय 1: मेरा घर
भाग १ -जहाँ से सब कुछ शुरू हुआ।
सन् 1800 था। यूरोप बड़े बदलावों से गुजर रहा था। द ब्लैक ईगल डोमिनियन (The Black Eagle Dominion) अपनी ताकत, अनुशासित सेना और बढ़ते प्रभाव के लिए जाना जाता था। लेकिन राजधानी से दूर, एक छोटे से गाँव में रहने वाले एक किशोर के लिए दुनिया की सबसे बड़ी पहचान उसका अपना घर था।
मेरा नाम फ्रेडरिक प्रथम (Frederick I) है। मेरा जन्म द ब्लैक ईगल डोमिनियन के एक साधारण परिवार में हुआ था। मेरे पिता सेना में रह चुके थे और अक्सर कहा करते थे, "एक राष्ट्र सिर्फ तलवार से नहीं, बल्कि अपने लोगों के साहस, अनुशासन और मेहनत से महान बनता है।"
हमारा छोटा-सा घर लकड़ी और पत्थरों से बना था। हर सुबह सूरज की पहली किरण के साथ हमारा दिन शुरू हो जाता। माँ घर संभालतीं, पिता खेत और गाँव के काम देखते, और मैं इतिहास की कहानियाँ सुनने के लिए हमेशा तैयार रहता।
शाम को जब पूरा परिवार चूल्हे के पास बैठता, पिता मुझे हमारे साम्राज्य के राजाओं, वीर सैनिकों और पुराने युद्धों की कहानियाँ सुनाते। उन्हीं कहानियों ने मेरे मन में अपने देश का इतिहास जानने की चाह जगा दी।
धीरे-धीरे मुझे समझ आने लगा कि हमारा छोटा-सा घर सिर्फ ईंट और लकड़ी का बना एक मकान नहीं था। यहीं से मेरे सपनों, मेरे हौसले और मेरे भविष्य की शुरुआत होने वाली थी।
तब मुझे नहीं पता था कि आने वाले वर्षों में द ब्लैक ईगल डोमिनियन का इतिहास पूरे यूरोप की दिशा बदल देगा। और उसी बदलते समय का मैं भी एक छोटा-सा गवाह बनने वाला था।
यही वह जगह थी, जहाँ से सब कुछ शुरू हुआ।
भाग 2: पहला कदम
मेरा नाम फ्रेडरिक प्रथम है। उस समय मेरी उम्र केवल सोलह वर्ष थी। मेरा जीवन अब तक एक साधारण गाँव के लड़के जैसा ही था, लेकिन मेरे भीतर एक सपना जन्म ले चुका था—अपने साम्राज्य द ब्लैक ईगल डोमिनियन की सेवा करने का।
एक सुबह मेरे पिता ने मुझे अपने पास बुलाया। उनकी आँखों में गर्व भी था और चिंता भी।
उन्होंने कहा, "फ्रेडरिक, हर इंसान के जीवन में एक दिन ऐसा आता है जब उसे अपने घर की चौखट पार करके अपने भाग्य की ओर पहला कदम बढ़ाना पड़ता है। आज वह दिन तुम्हारे लिए आ गया है।"
उनकी बातें सुनकर मेरे मन में उत्साह भी था और अपने परिवार से दूर जाने का दुःख भी। मैंने अपनी माँ का आशीर्वाद लिया। माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, "जहाँ भी रहो, अपने परिवार और अपने मूल्यों को कभी मत भूलना।"
अगली सुबह मैं अपने छोटे-से गाँव से निकल पड़ा। रास्ते में ऊँचे पहाड़, घने जंगल और दूर-दूर तक फैले खेत मेरे सामने थे। हर कदम मुझे मेरे पुराने जीवन से दूर और एक नए भविष्य की ओर ले जा रहा था।
कई दिनों की यात्रा के बाद मैं राजधानी पहुँचा। वहाँ मैंने पहली बार विशाल पत्थर के किले, चौड़ी सड़कों और अनुशासित सैनिकों की लंबी टुकड़ियाँ देखीं। पूरा शहर शक्ति और व्यवस्था का प्रतीक था।
मैंने उसी क्षण मन ही मन एक प्रतिज्ञा की—
"मैं केवल एक सैनिक नहीं बनूँगा। मैं ऐसा व्यक्ति बनूँगा जिस पर मेरा साम्राज्य गर्व कर सके।"
मुझे नहीं पता था कि आने वाले वर्षों में मेरा यह पहला कदम मुझे ऐसी घटनाओं के बीच ले जाएगा, जो पूरे द ब्लैक ईगल डोमिनियन के भविष्य को बदल देंगी।
यही मेरे सफ़र की वास्तविक शुरुआत थी।







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