मेरी प्रार्थना हुई स्वीकार
ना जाने क्यों आज मै अपने जीवन से बहुत ही निराश हैं , मै खुद को ना जाने कितने बंधनो मे जकड़ा महसूस कर रही थी कि तभी एक आवाज आयी , सुधा , सुधा , सुधा , तभी मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो एक लड़का खड़ा था , उसे देख कर ऐसा लग रहा था कि मानो वो स्वर्ग से आया हो बहुत ही सुन्दर , सुधा - सुधा ने उस लडके से पूछा कौन हो तुम और घर के अंदर कैसे आये ? लड़के ने बोला - मेरा नाम स्वहार्दिक हैं और मै यहाँ तुम्हारे बचपन मे लेजाने के लिए आया हूँ , तो चलो मेरे साथ जीलो अपनी खूबसूरत दुनिया , तो चलो.
चलो जीते हैं हम अपने जीवन को , बनाते हैं खूबसूरत अपने जीवन को ,
जियेंगे हर पल ख़ुशी से , बदल देंगे हर मोड़ को ,
जियेंगे खुशी से अपने जीवन को , गिरा देंगे तकलीफो की हर दीवार ,
करेंगे हर पल यादगार , हटाएंगे हर तूफ़ान अपनी जिंदगी का , बनाएंगे बेहतर अपने जीवन को , जी लेगे अपने जीवन को , बचपन का बचपना ना खोने देंगे ,
होगी हर बचपने का पल खूबसूरत , बचपने से बनाएंगे खूबसूरत अपने जीवन को .
ये सुन कर सुधा ने अपना हाथ स्वहार्दिक को दिया उसके बाद ये दोनों कुछ समय मे पास्ट मे पहुंच गये , और दोनों 11 साल के बच्चे बन गए , सुधा ने देखा कि हम दोनों इतने छोटे कैसे हो गए और ये तो मेरा पुराना घर हैं , और यहाँ पर मेरे परिवार के सब लोग हैं , मेरी माँ होंगी क्या मै देख कर आती हूँ इतना कह कर सुधा दौड़ती हुई घर के अंदर गई और अपनी माँ को देखते हुए रोने लगी और अपनी माँ को गले लगा लिया , सुधा की माँ ने उससे पूछा क्या हुआ तुम इतना क्यों रो रही हो बेटा , सुधा - माँ आपकी याद आ रही थी इसलिए , सुधा की माँ - मेरी याद आ रही थी तुमको , अभी कुछ देर पहले तुम खेलने गयी थी इतनी जल्दी मेरी याद आने लगी तुमको , चलो अब खाना खा लो .








