Create New List
Share with your friends
Customize readability

लगे रहो

All Rights Reserved ©

Summary

कभी - कभी अपने सपनों के पीछे दौड़ता हुए या अपने फ़र्ज़ पूरे करते हुए , हम हारा हुआ , थका हुआ महसूस करते है। ऐसा लगता है कि अब बस बहुत हो गया , अब मै और नहीं करने वाला । तो जब ऐसा वक़्त आए , और आपको किसी किरण की तालाश हो जो आपको फिर से , जोश से भर दे , तो आप मेरी इन कविताओं को एक बार पढ़ लीजिएगा । शायद , आपका सोया हुआ जुनून फिर जाग जाए।

Genre
Poetry,Other
Author
Alisha
Status
6yrs ago
Chapters
2
Rating
n/a
Age Rating
16+

देख तेरी ज़िन्दगी ढल रही है

देख तेरी ज़िन्दगी ढल रही है;

अगर तुझे एहसास है ,

तो तू क्यों नहीं कुछ कर रही है?

क्या भूल गई तू सपने तेरे,

या दम नहीं बचा है तुझमें?

क्यों नहीं टूटते मोह के घेरे?

हर सुबह शुरू तो होती है,

पर तसल्ली नहीं मिल पाती है।

तू हर रोज़ ये कैसी नींद सोती है?

लड़खड़ाती है , कदम बढ़ाती है,

जब भी तू होश में रहती है।

फिर बार - बार बहक कैसे जाती है?

क्यों रह - रह कर तेरे इंजन से,

धुआँ उठने लगता है?

क्यों हफ्तों तक ये बंद पड़ा रहता है?

तेरे अन्दर की आग तुझे ही,

क्यों जलाती है , तड़पाती है?

क्यों सही जगह ये जलवा नहीं दिखाती है?

तुझमें कुछ बात तो है,

पर खामियों कि जंजीरें कड़ी हैं।

देख तेरी खुशियां , तेरे सामने ही पड़ी हैं।

तू हाथ बढ़ा , तू कर के दिखा,

हर कड़ी को तोड़ के , कर दे फना।

अपने मुकद्दर को चमका।

अब वक़्त नहीं है , देर न कर,

दर्द मेहनत से कैसा डर?

क्योंकि ज़िन्दगी तेरी ढल रही है।

Next Chapter
Let Alisha know what you thought about this chapter!
Love this

0

Love this

Funny

0

Funny

Spicy

0

Spicy

Suspenseful

0

Suspenseful

Emotional

0

Emotional

Profound

0

Profound

Heartwarming

0

Heartwarming

Shocking

0

Shocking

Good Writing

0

Good Writing

Compelling Plot

0

Compelling Plot

Great Character

0

Great Character

Strong Dialog

0

Strong Dialog