Siya

@Siya_writes01

अनजानी राहों पर बस एक इत्तेफाक था मिलना, खामोश निगाहों का यूँ चुपके से कुछ कहना। न जाने कब वो अजनबी मेरी हर दुआ बन गया, ये सफर देखते ही देखते दास्तां-ए-इश्क बन गया।

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