Chapter 1
जिस पल मेरे मेट ने मुझे ठुकराया… पूरा पैक उसे देख रहा था।
मैं उनकी पैनी और इल्जाम लगाती नजरों को अपने ऊपर महसूस कर सकती थी। सैकड़ों भेड़िए पूर्णिमा की रात के नीचे एक बड़े घेरे में खड़े थे। उनकी फुसफुसाहट ठंडी रात की हवा को चाकू की तरह चीर रही थी, और उनमें फैसले और उम्मीद का बोझ साफ झलकता था।
आज की रात मेरी जिंदगी की सबसे खुशहाल रात होनी चाहिए थी। मून सेरेमनी। वह पवित्र रात जिसका हर बिना मेट वाला भेड़िया सपना देखता है—वह रात जब मून गॉडेस फेडेड मेट्स से मिलवाती हैं। मैंने बचपन से ही इस पल की कल्पना की थी। मैं अपनी आँखें बंद करके अपने अंदर जादू की धड़कन महसूस करती थी और किस्मत की गर्माहट पर यकीन करती थी।
लेकिन अब… मेरा दिल उम्मीद से नहीं, बल्कि डर से धड़क रहा था। क्योंकि जो मर्द मेरे सामने खड़ा था… वह मुझे ऐसे देख रहा था जैसे मेरी कोई औकात ही न हो।
अल्फा रोवन ब्लैकवुड। लंबा। अडिग। ब्लडफैंग पैक का हर भेड़िया उससे डरता था। और वह मेरा मेट था।
जैसे ही उसने घेरे में कदम रखा, एक बिजली सी मेरे अंदर दौड़ गई। एक ऐसी आग जिसने मेरी रूह को उसकी रूह से जोड़ दिया। मेरा। लेकिन फिर भी… उसकी सुनहरी आँखों में न तो मुझे पहचानने की झलक थी और न ही कोई अपनापन। बस चिढ़ थी। बस नफरत थी।
मेरे पेट में एक खाली सा दर्द उठा। नहीं। प्लीज, ऐसा मत करो।
वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा, हर कदम सोचे-समझे तरीके से उठ रहा था। वह किसी तूफ़ान की तरह मेरे सामने खड़ा हो गया। उसकी भारी और रौबदार आवाज उस आंगन की खामोशी को चीरते हुए घेरे में खड़े हर भेड़िये तक पहुँची।
"मैं, रोवन ब्लैकवुड, ब्लडफैंग पैक का अल्फा..."
आंगन में मौजूद हर किसी की धड़कन जैसे थम गई। हर भेड़िया आगे झुक गया, उस ऐलान का इंतजार करने लगा जो हमारी किस्मत तय करने वाला था। मेरी छाती में दर्द भरा कसाव हुआ, मेरी सांसें जैसे उखड़ने लगीं।
"...तुम्हें, एलारा वेल, अपने मेट के रूप में अस्वीकार करता हूँ।"
पूरी दुनिया ठहर गई।
चारों तरफ हक्के-बक्के लोग सांसें रोककर खड़े थे। हैरानी की लहर फैल गई, लेकिन उस दर्द के सामने यह कुछ भी नहीं था जो मेरे अंदर उमड़ रहा था। मेरा मेट बॉन्ड, जो कभी बिजली की तरह जिंदा था, मेरी छाती में किसी टूटी हुई हड्डी की तरह बिखर गया। मेरे अंदर का भेड़िया गुस्से में चिल्लाया, एक ऐसी तड़प जो मुझे घुटनों पर गिरा देने के लिए काफी थी।
मेरी आँखों में आंसू भर आए, एक तेज जलन जो बाहर आने को बेताब थी, लेकिन मैंने उन्हें वह खुशी नहीं दी। यहाँ नहीं। इन सबके सामने नहीं।
रोवन की नजरें सर्दियों की बर्फ की तरह ठंडी थीं।
"तुम कमजोर हो," उसने कहा, उसका हर शब्द किसी खंजर की तरह लगा। "एक बिना भेड़िये वाली लड़की एक अल्फा के साथ खड़ी नहीं हो सकती।"
पैक के बीच जहरीली फुसफुसाहट फैल गई। बेशक। यही तो वह सच था जो वे दिखावटी चेहरों के पीछे बड़बड़ाते थे। मैं उन्नीस साल की थी। मेरा भेड़िया कभी बाहर नहीं आया था, कभी न उसने दहाड़ा था न बात की थी, कभी उसका रूप नहीं बदला था। एक कमी। एक कुछ भी नहीं।
मैंने अपने कांपते शरीर को जबरदस्ती सीधा किया, हालांकि ऐसा लग रहा था कि मेरा हर हिस्सा टूट चुका है।
"अगर यही आपका फैसला है, अल्फा," मैंने धीमी लेकिन स्थिर आवाज में कहा, हालांकि अपमान के बोझ तले वह लड़खड़ा रही थी।
रोवन ने एक झटके में सिर हिलाया। "यही है।"
मेरे अंदर कुछ पूरी तरह से चकनाचूर हो गया। वह बॉन्ड—वह चमत्कार जिसके बारे में कहा गया था कि वह मेरी जिंदगी बदल देगा—ठंडे, खाली सन्नाटे में बदल गया। मून गॉडेस ने उसे मेरे लिए चुना था… और उसने मुझे किसी फालतू परछाईं की तरह फेंक दिया, जिसे बदला जा सकता था।
जवान भेड़ियों के बीच क्रूर और तीखी हंसी गूंज उठी। मेरे सीने में अपमान की आग भड़क उठी, एक ऐसी आग जो अब तक के मेरे किसी भी दर्द से कहीं ज्यादा तेज थी।
लेकिन जैसे ही रोवन अपनी पीठ मोड़कर जाने लगा, आंगन में अचानक एक तेज हवा का झोंका आया। मशालें जोर-जोर से फड़फड़ाने लगीं, परछाइयां किसी जीवित चीज की तरह ऐंठने और फैलने लगीं। पैक के लोग सहम गए, उनमें हलचल और बेचैनी फैल गई।
तभी—आंगन के प्रवेश द्वार से एक गहरी, गूंजती हुई आवाज आई।
"दिलचस्प।"
हर भेड़िया वहीं जम गया। यहां तक कि अल्फा रोवन की मांसपेशियां भी फौलाद की तरह सख्त हो गईं। धीरे-धीरे भीड़ हट गई और घेरे के बीच से एक रास्ता बन गया।
और वह वहां मौजूद था।
जिस पल मैंने उसे देखा, मेरी सांसें रुक गईं। रोवन से भी लंबा, उससे भी चौड़ा, उससे ऐसी ताकत निकल रही थी कि खुद जमीन झुकती हुई महसूस हो रही थी। काले बालों के पीछे उसका चेहरा किसी तराशी हुई मूर्ति जैसा था, लेकिन उसकी आंखें… पिघले हुए फौलाद जैसी चांदी की चमक लिए, भेदने वाली, अडिग, और जिसे कोई रोक न सके।
आंगन में मौजूद हर भेड़िया डर और सम्मान में झुक गया।
मेरा दिल जोर से धड़कने लगा—डर से नहीं, बल्कि उसे पहचानने के एहसास से। क्योंकि दुनिया में सिर्फ एक ही भेड़िया था जिसके पास ऐसी ताकत हो सकती थी। सिर्फ एक भेड़िया जिसकी मौजूदगी में सब झुक जाते थे… और जिसकी मौजूदगी उस भेड़िये को जगा सकती थी जिसे सब कहते थे कि मेरे अंदर है ही नहीं।
और उसी पल, मेरी रूह ने इसे महसूस किया: मेरा भेड़िया पूरी ताकत से दहाड़ उठा, एक ऐसी पुकार के जवाब में जिसके कभी न आने का मुझे डर था।










