Tailer
ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है इसका वास्तविक दुनिया से कोई लेना देना नहीं है इस कहानी का हर एक दृश्य सब काल्पनिक है भाव मेरे इमेजिनेशन मेरी जो मैं आप तक पहुंचा रही अगर कोई भूल हो जाए तो मुझ जरूर बताए अगर कहानी अच्छी ले तो सपोर्ट जरूर करे
"डाइवोर्स" कितना मामूली शब्द है न लेकिन इसके मतलब बहुत है इससे किसी की जिंदगी बनती है किसी की बिगड़ती है और किसी की जहन्नुम बन जाती है । हमने सुना है कि सनातन में डाइवोर्स जैसा कोई शब्द ही नहीं है यह पति पानी अलग नहीं होते वो मन तन रह से जुड़ जाते है जब वो अग्नि को साक्षी मानते है लेकिन ये तो सतयुग द्वापरयुग ये सब की बाते है भले ही सीता जी राम जी से अलग हुई थी लेकिन मन रूह सब एक थे उनके लेकिन ये कलयुग है यहां देव या देवी जैसा मन बहुत कम के पास है सभी एक अंदर के राक्षस ने उसे अच्छी को दबा दिया है।
वैसे मैं कोई वकील नहीं हु न ग्रन्थ या उपन्यास का जान रखती हु लेकिन आज के समय में डाइवोर्स एक मामूली शब्द ही तो बन गया है हम रिश्ते सुधारने से ज्यादा उसको तोड़ने में विश्वास रखते है । ह ये उनके लिए सही है जो शादी के पवित्र रिश्ते में किसी दानव का सामना करते है लेकिन हमसब ने देखा सुना है कि कुछ लोग डाइवोर्स या अलग होने का फैसला अपने खुद के सहूलियत के लिए करते है क्यू की उन्हें बस खुद से मतलब है दूसरा साथी भले की रिश्ते को बचाने की कितनी ही कोशिश कर ले वो उससे अलग हो जाते है।
ये कहानी है उस बच्ची की जिसकी जिंदगी को बर्बाद करने में सिर्फ और सिर्फ उसके मा बाप का हाथ है खुद अलग होकर नई जिंदगी शुरू करने ही होर में उन्होंने उस बच्ची की जिंदगी नर्क बना डाली लेकिन ...लेकिन क्या हो की इस नर्क भरे पल में वो अपनी मासूमियत अपने इमोशंस खो दे , क्या हो अगर वो खुद को खो दे और भूल जाए कि वो खुद भी एक इंसान है । अगर हमारे सारे इमोशंस खत्म हो जाए और सिर्फ बदला बचे तो क्या कोई रोक पाएगा उसको।
ये कहानी है एक ऐसी लड़की की जो तड़पती रही अपनी माता पिता के प्यार के लिए लेकिन उसे सिर्फ दुत्कारा गया और अब अब वो बदल गई है पूरी अब न तो उसे प्यार चाहिए न किसी का साथ उसे बस सब खत्म करना है सब बर्बाद करना है उसकी आँखें जो कभी मासूमिया से भरी हुई होती थी आज हद से जड़ा कठोर और ठंडी हो गई थी। पहले किसी से उसे भी पूछा और अब न वो किसी को जानती है न जानना चाहती है उसके खुद के 2 परिवार ने उसके मन में प्यार के लिए एक ऐसा उदाहरण दिया कि उसे प्यार से नफरत हो गई इतनी की कोई प्यार का नाम भी ले तो वो अपना आप खो देती थी ।
क्या कभी उस बच्ची को प्यार मिलेगा या वो खुद के साथ सब खत्म कर देगी? क्या नफरत की यह आग उसे पूरी तरह निगल जाएगी? प्यार पत्थर को भी मोम बनाए की ताकत रखता है लेकिन क्या होगा जब वो प्यार ही किसी मोम को पत्थर बना दे ? क्या कोई समझेगा उसे या इस बदले की होर में वो खुद को खत्म कर लेगी? क्या कोई ऐसा होगा जो उसके पत्थर हुए दिल को फिर से अपने प्यार और विश्वास ने उसमें जान डाल सके ? क्या समय पर उसका परिवार उसे सम्भल पाएगा खुद की गलती जान या ......
यह कहानी है दर्द, विश्वासघात, टूटे रिश्तों और उस प्यार की, जो कभी किसी को बचा सकता है और कभी पूरी तरह बदल भी सकता है।"








