“कुछ हिदायतें इस दिल की, कुछ फसाने जज्बातों के...
अल्फाज़ बनके बिखर गए, सन्नाटे जब रातों के।”
जब खामोशियाँ हद से ज़्यादा गहरी हो जाएं और जज्बात दिल की दीवारों को तोड़ने लगें, तो वो शायरी का रूप ले लेते हैं। 'Hidayat E Dil' महज़ एक किताब नहीं है, बल्कि यह आपकी और मेरी ही जिंदगी के उन अनकहे लम्हों का आईना है, जिन्हें हम अक्सर दिल में छुपाकर मुस्कुरा देते हैं।
यह इस मुकम्मल शायरी संग्रह का एक छोटा सा खूबसूरत प्रिव्यू (Teaser) है...
🌹 संकलन की कुछ चुनिंदा पंक्तियाँ आपके दिल के नाम:
"वो जो हमारी खामोशी को भी बखूबी पढ़ लिया करते थे,आज महफ़िल में बैठे हैं, मगर अजनबी की तरह..."
"दिल को दी है हिदायत कि अब उनकी गली जाना छोड़ दे,
मगर ये नादान धड़कत तो हर सांस के साथ उनका ही पता पूछती है।"
"अल्फाज़ कम पड़ जाते हैं जब उनकी यादों का सैलाब आता है,
शायरी तो बस एक जरिया है, वरना दर्द का कोई मुकम्मल जवाब कहाँ होता है।"
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अगर इन चंद लाइनों ने आपके रूह को छुआ है, तो यकीन मानिए, इस पूरी किताब का हर एक पन्ना आपको अपनी ही दास्तान लगेगा।— प्रेरणा मेहता (Prerna Mehta)
Author & Research Scholar
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*Note: Background visual accents for this preview are curated using AI.*









