"She Brought OOranges That Day"

All Rights Reserved ©

Summary

कामिनी - एक 24 वर्षीय सुंदर और आत्मचेतन विवाहित महिला, अपने पति से दूर एक छोटे शहर में अकेली रहती है। शारीरिक और भावनात्मक इच्छाओं से भरी कामिनी अपने अकेलेपन को दिन-ब-दिन महसूस करती है। मानो जैसे सदियो से प्यासी हो ......... कहानी कामिनी की इच्छाओं, अकेलेपन और आत्म-खोज की यात्रा को कामुकता और प्रतीकों के माध्यम से उकेरती है।

Status
Ongoing
Chapters
2
Rating
n/a
Age Rating
18+

The Taste of Her Oranges

सांझ की नर्म धूप बाज़ार की गलियों को हल्के सुनहरे रंग में रंग रही थी। पुराने शहर के एक कोने में वह छोटी-सी फल की दुकान थी — लकड़ी की पट्टियों से बनी, ऊपर से एक नीली टीन की छत, और सामने कुछ टोकनियाँ जिनमें ताज़े फल सजे थे।

कामिनी धीमी चाल में चल रही थी—उसके क़दमों की आहट जैसे गली के पत्थरों पर कोई सुरम्य धुन बजा रही हो। उसकी साड़ी का पल्लू हवा में लहराता, कभी उसके गले को छूता तो कभी उसकी कमर को... जैसे खुद उसकी तन से खेल रहा हो।गली का आखिरी मोड़ आते ही वह एक छोटी-सी फल की दुकान पर रुकी।


Kamini : "संतरे कैसे दिए हैं?"

( उसने धीमे स्वर में पूछा, जैसे सवाल में भी कोई संकोच हो।)

दुकान के पीछे खड़ी स्त्री ने सिर उठाया —वो संतरे बेचने वाली औरत कुछ अलग ही थी — साँवली, नम त्वचा वाली, आँखों में ठहरी नर्मी और होंठों पर एक धीमी मुस्कान और मुसकान में एक अनजानी गर्मी थी।

Santre wali : वेसे तो यह 80 रुपये प्रति किलो है लेकिन मैं इसे आपके लिए 60 रुपये लगा दूंगी ।

Kamini : बगल वाली तो अपने संतरे 40 का दे रही है , तेरे संतरे इतने महँगे क्यों है ?

Santrewali : हल्की मुस्कान देते हुए कहा , " मेरे संतरे बगल वाली के संतरेl से काफी बड़े और रसीले है"

Kamini : अच्छा!!!

( कामिनी ने उन दोनो के संतरो को बड़े गोर से देखा )

Kamini : हाँ , तेरे संतरे तो सच में बहुत बड़े हैं l

Santrewali: हाथ लगाकर देखिए, मीठे हैं।"

(उसकी आवाज़ में ऐसा कुछ था जो सीधा दिल को छू गया।)

कामिनी ने आगे बढ़कर संतरेवाली के संतरो को अपने हाथों में लिया। उसकी उंगलियाँ संतरे की गर्म सतह को छूते हुए हलकी कांप गईं। संतरेवाली की नज़रें उस पर टीकी थी l

कामिनी ने संतरेवाली के संतरो को दबाया .......

(ये देखने के लिए कि संतरे ताज़े हैं या नहीं)

Santarewali: "आह" !!!! मेरे संतरो को इतने जोर से मत दबाओ , मेरे संतरो का रस निकल जायेगा l

Kamini : ओहो सॉरी मेरा ध्यान कहीं और था l

Santrewali : कितने लोगी आप?

Kamini : आधा किलो कर दो आप l

Santarewali: मेरे संतरे काफी भारी है आधे किलो में सिर्फ एक ही आएगा और मुझे लगता है कि सिर्फ एक से आपका मान नहीं भरेगा , एक किलो कर देती हूं l

Kamini : ठीक है कर दो l अच्छे वाले देना l

Santarewali : आप एक बार मेरे संतरे का जूस पी कर तो देखो बार बार आओगी मेरे सांतारो के पास lपुरा मोहल्ला मेरे संतरो का दीवाना है l

Kamini : "क्यों " , एसा क्या है तेरे संतारे मे ?

Santarewali: क्योंकि मेरे जितने बरे बड़े संतरे पूरे बाज़ार में किसी भी संतरेवाली के पास नहीं है l

( संतारेवाली के सब्दो में गुरुर साफ झलक राहा था )

Kamini : ठीक है अब जल्दी से अपने दोनो संतारे मेरे हाथो मे दो ,अँधेरा हो रहा है l

Santarewali: ये लीजिए मेरे दोनों संतरे अपने हाथों में अब यह आपके हुए l

Kamini :ये लो 60 रुपए अपने दोनों सांतरो के लिए l

Santarewali :"और कुछ चाहिए?"

(संतरेवाली ने धीमे स्वर मैं पूछा।)

Kamini : "फिलहाल नहीं, "लेकिन शायद… कल फिर आऊँगी।"

जाते हुए उसने एक बार पलटकर देखा। संतरेवाली अब भी वहीं खड़ी थी, वही हल्की मुस्कान… मानो कुछ बाते अधूरी रह गई हो......


To be continue......