Chapter 1
लधु उपन्यास-
Doctor Death-
लेखक-वीरेंद्र देवांगन
सारांश-
दिल्ली के लालकिला ब्लास्ट में जहां 15 बेकसूरों की मौत हो गई, वहीं 20 से अधिक लोग घायल हो गए। पाक स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मॉड्यूल के 8 आतंकियों में-से 6 डॉक्टर हैं। इनमें से 4 कश्मीरी व 2 यूपी के हैं। एक मौलवी व एक इमाम साजिशकर्ता हैं। आखिर क्या है, सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल, जो देश को दहशत में डाल दिया?
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विनम्र घोषणा-
10/11/2025 को दिल्ली के लालकिला मेट्रो स्टेशन के पास जिस तरह से एक कार में फिदायीन हमला हुआ, उससे साबित होता है कि देश बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। आतंक के नए मॉड्यूल का पड़ताल करता हुआ सत्य घटनाओं पर आधारिक धारावाहिक एक दस्तावेजी साक्ष्य है। इसका संकलन व अन्वेषण विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं सहित टीवी न्यूज, जांच एजेंसियों की इंक्वैरी रिपार्ट एवं कई माध्यमों से करते हुए 9 भागों के उपन्यास का स्वरूप देेने का प्रयास किया गया है।--0--
भाग-1
फिदायीन हमला-
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के कोइल गांव का रहनेवाला डॉक्टर उमर नबी वो शख्स था, जो 10 नवंबर की शाम 6 बजकर 52 मिनट में लालकिला के समीप कार धमाका करके अपनेआप को ही मार डाला। भीषण धमाके से जहां सफेदपोश डॉक्टर नबी के चिथड़े उड़ गए, वहीं 15 बेकसूर लोग बेवजह मौत को गले लगा लिए।पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के फिदायीन डॉक्टर नबी के कटे पैर, जो धमाका में प्रयुक्त कार में स्टेयरिंग के नीचे चिपका मिला, से उसकी मां का डीएनए सैंपल मैच करवाया। इसी से साबित हुआ कि चिथड़ा-चिथड़ा हुआ आत्मघाती शख्स डॉक्टर उमर नबी था।एमबीबीएस किया हुआ डॉक्टर नबी हरियाणा के फरीदाबाद की अलफलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था। इसीलिए, इसे सफेदपोश आतंकी घटना करार दिया जा रहा है।
हुंडई आई-20 कार नंबर एचआर 26-7624 सोमवार यानी 10 नवंबर की सुबह करीब 7 बजे फरीदाबाद से निकली। 11 घंटे तक यह कार दिल्ली-एनसीआर के आधा चक्कर लगाती रही। सीसीटीवी व टोल डेटा से पुलिस ने इसका पूरा रूट टेªस किया है।
रास्ते में एक पेट्रोलपंप पर कार का प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाया गया, ताकि दिल्ली-हरियाणा बार्डर पर जांच के दौरान दस्तावेज पूरे रहें।
हुंडई कार दोपहर 3.19 बजे लालकिला पार्किंग नंबर-1 में गई, जहां तीन घंटे खड़ी रही। डॉक्टर उमर नबी इसी कार में 3 घंटे तक बैठा रहा। इस बीच वह कार से उतरा तक नहीं। हुंडई कार शाम 6.22 को पार्किंग से निकलकर नेताजी सुभाष मार्ग मेट्रो स्टेशन की ओर धीरे-धीरे सरकी। तभी 6.52 बजे टेªफिक सिग्नल यानी रेड लाइट पर पीछे की सीट पर जबरदस्त धमाका हो गया। इससे कार के परखच्चे उड़ गए, जो लालकिले से महज 150 मीटर दूर है। डॉ. नबी की पूरी बॉडी छिन्न-भिन्न हो गई, पर पैर तन से अलग होकर स्टेयरिंग के नीचे फंसा रह गया।
इसी के आसपास भीड़भाड़ वाला चांदनी चौक, श्री गौरीशंकर मंदिर, श्री दिगंबर जैन मंदिर, गुरुद्वारा वगैरा है। चांदनी चौक पुरानी दिल्ली का वह चहलपहल वाला इलाका है, जहां अलग-अलग राज्यों से रोजाना हजारों लोग खरीदारी करने के लिए आया-जाया करते हैंसूत्रों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर, पुलवामा व फरीदाबाद में आतंकतंत्र के खिलाफ पुलिस की लगातार छापेमारी से चिकित्सक उमर बेहद दबाव व तनाव में आ गया था। वजह, उसके आतंकी साथी एक-एक कर पुलिस के द्वारा दबोचे जा चुके थे।
गौरतलब है कि उक्त छापेमारी में पुलिस को 29 क्विंटल उच्चश्रेणी का विस्फोटक बनाने का सामान व हथियार बरामद हुआ है। इसमें भी 300 किलो आरडीएक्स की बरामदगी शेष थी।
हुंडई कार प्रारंभ में सलमान नामक एक व्यक्ति की थी। कार कई बार बिकी। आखिरी बार पंपोर निवासी आमिर राशिद अली को बेची गई, क्योंकि इसी के नाम से आई-20 कार पंजीकृत मिली।
आमिर भी दिल्ली आया हुआ था और प्रमुख साजिशकर्ताओं में-से एक था। कार की खरीद-फरोख्त में जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ। इसी कार का 20 सितंबर को फरीदाबाद में गलत पार्किंग पर चालान भी हुआ था।
असल में, आत्मघाती कार घमाके के पूर्व पुलिस को सफेदकोट आतंकी माड्यूल के कई संदिग्धों का पता चल चुका था, जिसमें 3 डॉक्टर सपड़ाए थे, जो जैश-ए-मोहम्मद और गजवात-ए-हिंद जैसे कुख्यात आतंकी संगठनों से जुड़े हुए थेसंभवतः, स्वयं के पकड़े जाने का डर, आरडीएक्स को ठिकाने न लगा पाने की जद्दोजहद, मिसहैंडलिंग व हैंडलर्स से वादविवाद के मद्देनजर हुंडई कार में रखे विस्फोटक में ब्लास्ट हो गया, जिसमें कार चला रहे डॉ. उमर नबी की धज्जियां उड़ गईभयावह मंजर व माहौल-
लोगों से हमेशा गुलजार रहनेवाला पुरानी दिल्ली का यह समूचा इलाका विस्फोट के उपरांत दहशत के मंजर में बदल गया। चीख-पुकार के मध्य जलते मानव मांस की गंध हवा में तैरने लगी। चंद सेकंड में ही आसमान आग के गोलों से लाल हो गया। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,‘’धमाका इतना जबरदस्त था कि इमारतें भूकंप के झटकों की तरह हिल उठीं। शीशे तड़क गए। सड़क खून से लथपथ हो गया।सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में लोग दहशत में चिल्ला रहे थे,‘‘बम फट गया। देखो-देखो कटा हाथ, जला सिर, अधजला पैर व फेफड़ा गिरा पड़ा है।’चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय भारवि का कहना हुआ,‘‘हमारी दुकान धमाके वाली जगह से 600 मीटर दूर है। पहले तो लगा कि छत गिर गई। लेकिन, दूर से लपटें दिखीं, तो लोग भागने लगे। सड़क पर लाशें बिखरी पड़ी थीं। किसी का हाथ, किस का सिर यहां-वहां पड़ा था।उसका आगे कहना हुआ,‘‘शुक्र है कि शनिवार या रविवार को ऐसा धमाका नहीं हुआ, वरना भारी भीड़ और टैªफिक के कारण भगदड़ से भी न जाने कितनी जानें और चली जाती?’एक स्थानीय निवासी ने बताया,‘‘मैं घर से नीचे उतरा, तो खिड़कियां हिल रही थीं। सड़क पर अफरातफरी मची हुई थी।’वहीं आसपास के दुकानदारों का कहना था,‘‘मैं कुर्सी पर बैठा कि विस्फोट के झटके से तीन बार गिरा। लगा धरती फट गई।’’
एक अन्य ने बताया,‘‘विस्फोट टैªफिक सिग्नल हरा होने पर हुआ। शीशे टूट गए। हम भागे। हमने अलग-अलग हाथ, उंगलियां, पैर, सिर; यहां तक कि कार का स्टीयरिंग, व्हील, बोनट, कांच के टुकड़े व दरवाजे तक हवा में उड़ते हुए देखा।’एक दूसरे व्यक्ति ने कहा,‘‘मैंने अपने पीछे किसी का हाथ आकर गिरता हुआ देखा, जिसकी शर्ट खून से सनी हुई थी।’’
जामा मस्जिद के पास पानीपुरी बेचनेवाले एक सख्स के मुताबिक,‘‘मैं एक किमी दूर था, लेकिन सीने पर ऐसा झटका महसूस किया, जैसे किसी ने जोरदार धक्का मार दिया हो।’’
वहीं, ऐतिहासिक परदा बाग की व्यवसायी बुजुर्ग महिला सरोज ने बताया,‘‘विस्फोट होते ही उसे जोरदार झटका लगा। खिड़की का शीशा मेरी बहू के ऊपर गिरते-गिरते बचा। वहीं, कुछ मिनट के बाद पुलिस से पता चला कि इलाका हाईअलर्ट पर है।’’यही नहीं, फूड पैकेजिंग व्यापारी राकेश के अनुसार,‘‘वह बाल-बाल बच गया। जब धमाका हुआ, तब मैं दूसरी सड़क पर था। मेरे कान बजने लगे। मैंने देखा, एक वैन में आग लग गई है।’’
भयावह मंजर यही कि कई लोगों के चिथड़े उड़े, कई जख्मी हो गए। सड़क लहूलुहान हो गया। रोड पर मानवअंग बिखरे पड़े मिले। जब पुलिस पहुंची, तब लोगों की मदद से जख्मियों को एलएनजेपी अस्पताल पहुंचाया गया। आठ फायरब्रिगेड की गाड़ियों ने मौके की आग बुएलएनजीपी (लोकनायक जयप्रकाश नारायण) अस्पताल के अधीक्षक के अनुसार,‘‘जिन 15 लोगों को पहले राउंड में अस्पताल पहुंचाया गया, उनमें से 8 पहले ही दम तोड़ चुके थे, 6 घायल थे और एक की हालत स्थिर थी।’’धमाका चालीस फीट नीचे स्थित मेट्रो स्टेशन पर भी गूंजी, जिससे लोगों में दहशत फैल गई, गोया जलजला आ गया हो।
घटनास्थल पर जांच एजेंसियों को 9 एमएम की तीन गोलियां मिली। इनमें दो जिंदा व एक खाली खोल है। विदित हो कि 9 एमएम की गोलियां विशेष सुरक्षा यूनिट्स या अनुमति प्राप्त लोग ही रख सकते हैं।
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भाग-2
दिल दहलानेवाला दृश्य--
विस्फोट के तत्काल बाद सक्रिय हुए गृहमंत्री अमित शाह ने सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा,‘‘विस्फोट में कुछ लोगों की जानें गई हैं और पैदल यात्री घायल हुए हैं। एनआईए, एनएसजी समेत सभी एजेंसियों ने गहन जांच शुरू कर दी है। हम सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जांच करेंगे। जांच का परिणाम जनता के सामने पेश करेंगे।’’
वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी ने एक्स पोस्ट पर लिखा,‘‘आज शाम दिल्ली में हुए विस्फोट में अपनों को खोनेवालों के प्रति संवेदना। घायलों के शीध्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। प्रभावित लोगों की सहायता अधिकारी कर रहे हैं। मैंने गृहमंत्री अमित शाह और अन्य अधिकारियों के साथ बात करके स्थिति की समीक्षा की है।’’
विस्फोट के एक दिन बाद लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल का दृश्य ह्दयविदारक था। विस्फोट में बेवक्त मौत को प्राप्त 8 लोगों के शवों को परिजनों को सौंप दिए गए थे।
इसमें टैक्सी ड्राइवर, बस कंडक्टर, दुकानदार आदि शामिल हैं। उल्लेखनीय यह भी कि ब्लास्ट में यूपी के दो मित्रों की सांसे एक साथ थम गई थीं।
अमरोहा के दुकानदार लोकेश अग्रवाल अपने 34 वर्षीय मित्र अशोक कुमार से मिलने दिल्ली आया हुआ था। अशोक डीटीसी में कंडक्टर था। संयोगवश दोनों दोस्तों ने मिलनस्थल लालकिला मेट्रो स्टेशन चुना था। दोनों अपने वादे के मुताबिक तय समय में एक साथ पहुंचे। परंतु, ये मुलाकात उनकी आखिरी साबितण् हुई। तत्क्षण हुए विस्फोट से दोनों की सासें एक साथ थम गई।
उधर, यूपी के श्रावस्ती के 32 वर्षीय दिनेश मिश्रा दिल्ली के चांदनी चौक में एक साड़ी की दुकान में काम करता था। आग की लपटों में इसकी भी सांसे थम गई। उसके दो बच्चे हैं, जो बेवक्त अनाथ हो गए।वहीं, 35 साल का मोहम्मद जुनमान ई-रिक्शा चलाता था। उसका फोन रातभर बंद रहा। परिवार उसे खोजता रहा। वह अपनी नीली शर्ट व जैकेट से पहचाना गया। उसकी पत्नी दिव्यांग है। उसके 3 बच्चे हैं, जो अब अपने वालिद को खो चुके हैं।
22 साल का नौमान अंसारी यूपी के शामली से अपनी कॉस्मेटिक्स दुकान के लिए सामान खरीदने दिल्ली आया हुआ था। ब्लास्ट ने उसकी भी जान ले ली। उसका चचेरा भाई अमन भी जख्मी है। नौमान परिवार में एकमात्र कमानेवाला था।
यूपी के मेरठ के रहनेवाले 35 साल का मोहसिन दिल्ली में ई-रिक्शा चलाया करता था। इसके अंतिम संस्कार को लेकर परिवार में विवाद हुआ कि इसे दिल्ली में दफनाया जाए कि मेरठ में। पुलिस के हस्तक्षेप से इसका अंतिम संस्कार मेरठ में किया गया।
उक्त तीनों मृतक मुस्लिम धर्मावलंबी थे और आत्मघाती आतंकी उमर भी इसी मजहब का था। कहने का आशय यही कि कट्टरपंथ से ब्रेनवॉश किया हुआ आतंकी किसी का सगा नहीं होता। फिर चाहे उसका समधर्मी ही क्यों न हो, जो उसकी राह में आता है, मारा जाता है?
34 वर्षीय कारोबारी अमर कटारिया सोमवार शाम मेट्रो पकड़ने जा रहा था, तभी ब्लास्ट हो गया। अमर के हाथ में टैटू मिला, जिसमें लिखा था-‘मॉम माय फर्स्ट लव’ और ‘डैड माय स्टेंªथ’। साथ ही लिखा था ‘कृति’। अस्पताल से उसके पिता जगदीश कटारिया के पास फोन गया,‘‘मॉम माय फर्स्ट लव’’ टैटूवाला आपका क्या लगता है?’’
जगदीश अस्पताल जाकर देखा, तो टैटूवाला उसका बेटा निकला। हाथ में लिखवाए गए टैटू से उसकी पहचान हुई।
22 वर्षीय पंकज ने 12वीं तक पढ़ाई करके मीशो में काम आरंभ किया था, जहां बाद में किसी विवाद के चलते उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। चूंकि उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस था, इसलिए कैब चलाना आरंभ किया था। पंकज सोमवार शाम पड़ोसी को छोड़ने लालकिला गया हुआ था। ब्लास्ट में पंकज की कार अधजली हालत में मिली। कार का पिछला हिस्सा उड़ चुका था। उसकी पहचान मोर्चरी में उसके साले निकेश कुमार के द्वारा की गई।
तात्पर्य यही कि मरनेवालों में जहां हिंदू थे, वहीं मुसलमान भी। जबकि वाइट कॉलर टेरर माड्यूल के सारे आतंकी इस्लाम धर्मावलंबी हैं। जो हिंदुओं से नफरत करने, उन्हंे काफिर समझकर जिहाद करने, जन्नत व 72 हूरों के पास जाने के आभासी ख्वाबों में जीने के चलते अपने धर्मावलंबियों सहित देशवासियों की जाने एक झटके में झटक लिए।
दूसरी ओर, जब्ती के बाद श्रीनगर के नौगाम थाने में रखे गए भारी विस्फोटक (अमोनियम नाइटेªट) में 14 नवंबर की रात हुए आकस्मिक धमाके में पुलिस-प्रशासन के अफसरों समेत नौ लोगों की जाने अचानक चली गई।
शहीदों में फरीदाबाद डॉक्टर माड्यूल मामले के जांच अधिकारी पुलिस इंस्पेक्टर अखार अहमद शाह सहित नायब तहसीलदार, दो राजस्व अधिकारी, तीन एफएसएल अधिकारी, दो क्राइम रिपोर्टर और एक दर्जी ने अपनी जाने गंवाई। वहीं 27 पुलिसकर्मी, दो राजस्व अधिकारी और तीन नागरिक सहित 32 लोग बुरी तरह घायल हो गए।
हालांकि यह एक हादसा था, जो जब्त विस्फोटकों के सैंपल लेते वक्त हुआ। लेकिन था, तो वाइट कॉलर टेरर के विस्फोटकों में विस्फोट का मामला।
असल में, करीब तीन क्विंटल अमोनियम नाइटेªट के जब्त बोरे नौगाम थाने में खुले में रखे हुए थे। चूंकि फरीदाबाद डॉक्टर मॉड्यूल की एफआइआर नौगाम थाने में दर्ज की गई थी, इसीलिए जब्त विस्फोटक इसी थाने में रखे गए थे।
थाने में धमाका इतना जबरदस्त हुआ कि 2 किमी दूर आवाज सुनाई दी, जहां थाने में मौजूद लोगों के चिथड़े उड़ गए। मृतकों के अंग कई फीट दूर जाकर गिरे। थाना भवन ध्वस्त हो गया। थाने के आसपास खड़े करीब एक दर्जन वाहनों में आग लग गई। रिहायशी इलाका होने से अन्य बिल्डिंगों को भी भारी नुकसान पहुंचजांच से चौंकानेवाला सत्य सामने आया है कि जब फॉरेंसिक टीम विस्फोटकों के बोरे से सैंपल ले रही थी, तब हैलोजन से तेज रोशनी की जा रही थी। फॉरेंसिक टीम के पास एसिटोफिनीन, हाइड्रोजन पैरॉक्साइड, सल्फ्यूरिक एसिड जैसे रसायन थे। रोशनी की तेज गर्मी से इन केमिकल्स में रिएक्शन हुआ। तत्काल रासायनिक धुआं उठा और भयावह विस्फोट हो गया।
अंततः, आत्मघाती नबी ने खुद को भी उड़ा दिया और 15 बेकसूरों की जानें लेकर 9 पुलिसकर्मी सहित राजस्व अधिकारी की मौत का कारण भी बन गया।--0--
भाग-3
भारतीयों व विदेशियों के बयान-
विस्फोट के तुरंत पश्चात् जब गृहमंत्री की सक्रियता टीवी चैनलों में दिखाई देने लगी, तब देशभर से निम्नलिखित प्रतिक्रियाएं भी सामने आई, जो कुछ खानापूर्ति थी, कुछ दिल के उदगार थे। पाठक स्वयं अनुमान लगाएं कि किसकी प्रतिक्रिया कैसी रही?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु-‘‘विस्फोट में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति मैं अपनी संवेदना व्यक्त करती हूं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।’’
भूटान यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान से कहा है,‘‘धमाके की साजिश रचनेवालों को बख्शा नहीं जाएगा। जांच एजेंसियां मामले की तह तक जाएंगी और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।’’
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी-‘‘कार विस्फोट की खबर बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। इस दुःख की घड़ी में मैं अपने प्रियजनों को खोनेवाले शोकसंतप्त परिवारों के साथ हूं।’’रक्षामंत्री राजनाथ सिंह-‘‘कार विस्फोट की घटना बेहद दर्दनाक और परेशान करनेवाली है। मैं मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।’’
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ-‘‘यह जनहानि अत्यंत दुःखद है। मेरी संवेदनाएं असमय काल-कवलित हुए लोगों के परिजनों के साथ है।’’
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता-‘‘पुलिस, एनएसजी, एनआइए और एफएसएल की टीमें जांच में जुटी हैं। अफवाहों से बचें और शांति बनाए रखें। प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।’’
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल-‘‘सरकार को तुरंत जांच करनी चाहिए कि क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं है? सुरक्षा को लेकर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।’’एआइएआइएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी-‘‘इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के तहत कड़ी-से-कड़ी सजा मिलनी चाहिए।’’
विभिन्न देशों की प्रतिक्रियाएं-
ब्लास्ट पर अमरीका, ईरान, अर्जेंटीना, फ्रांस, इजराइल, भूटान, चीन, श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश, मिश्र और मोरक्को जैसे देशों ने शोक संदेश भिजवाया है।
अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा है,‘‘हम इस स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं और जरूरत पड़ने पर कांसुलर सहायता देने के लिए तैयार हैं। हमारा दिल भारत के साथ है। यह घटना झकझोरनेवाली है।’’जबकि महाबली अमेरीका का आतंकवाद के प्रति रवैया दोहरा है। वह जहां भारत के जले पे मरहम लगाता रहता है, वहीं पाकिस्तान का पीठ थपथपाता रहता है।
ईरान के दूतावास ने कहा है,‘‘हम भारत की जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं प्रकट करते हैं।’’
वहीं, ब्रिटेन व फ्रांस ने दिल्ली के अपने नागरिकों को सलाह दी है कि भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाए रखें।’भारत पर लंबे समय तक राज करनेवाले ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर गौर किया जा सकता है।
इजराइल के विदेशमंत्री गिदोन साआर-हम निर्दोष पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करते हैं। इजराइल आतंक के खिलाफ भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हैइजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू-‘‘आतंक हमारे शहरों पर वार कर सकता है, लेकिन हमारी आत्मा को कभी नहीं हिला सकता। मित्र नरेंद्र मोदी और भारतीय लोगों के प्रति संवेदना। दुःख की इस घड़ी में इजराइल भारत के साथ है। हम अपने दुश्मनों को मात देंगे।’’इजराइल की प्रतिक्रिया से साबित होता है कि दूर का यह मित्रदेश हर मोर्चे पर भारत के साथ है।
भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक-आइए, सब मिलकर भारत के लिए प्रार्थना करें। जिन्होंने अपनी जान गंवाई, उनके लिए शांति की कामना करें।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान-हम इससे स्तब्ध हैं। मृतकों के परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदना है। इस कठिन समय में हम भारत के साथ-साथ हैं।
यह वही चीन है, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में जैश सरगना अजहर मसूद के खिलाफ आए प्रस्ताव पर वीटो का इस्तेमाल करता है और ऐसे मौकों पर घड़ियाली आंसू बहाता है।श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके-दिल्ली विस्फोट की खबर से हम दुःखी हैं। हम भारत के लोगों के साथ एकजुट हैं।
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू-हम इस त्रासदी से दुःखी हैं। हमारी प्रार्थनाएं मृतकों के परिवारों और घायलों के साथ है।
पाकिस्तान में खलबली-दिल्ली धमाके के बाद पाकिस्तान ने घबराहट में राजस्थान से लगी सीमा पर वायुसेना की पेट्रोलिंग व थलसेना के तोपों की तैनाती शुरू कर दी। उसकी सशस्त्र सेना प्रमुखों ने एक इमेरजेंसी बैठक कर डाली। वहीं, पीएम शहबाज शरीफ, एनएसए और डीजी आईएसआई के साथ देर रात तक बैठकें करते हुए टीवी चैनलों पर दिखे।
कुल मिलाकर यही कि दिल्ली ब्लास्ट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का मॉड्यूल सामने आने के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई। वरना वह इतनी व्यग्रता कभी नहीं जताता।
सूत्रों के अनुसार, सोमवार देर रात आतंकी संगठन जैश के सरगना मौलाना मसूद अजहर को बहावलपुर की सुभान अल्लाह मस्जिद से रावलपिंडी में आईएसआई के सेफ हाउस में शिफ्ट कर दिया गया है।
पाक आर्मी की टुकड़ी ने उसकी शिफ्टिंग को अंजाम दिया। बहावलपुर में जैश मुख्यालय में आर्मी की सुरक्षा बढ़ाई गई है। यहां से कुछ ही दूरी पर पाक आर्मी के 31 कोर का मुख्यालय है।विदित हो कि बहावलपुर में जैश के 100 से ज्यादा मदरसे चल रहे हैं। लेकिन, ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना के हमले में तबाह हुई सुभान अल्लाह मस्जिद में अभी मदरसे संचालित नहीं हो रहे हैं।
वहीं, पीओके के पीएम ने खुद ही सदन में कबूल किया है, ‘‘हमने ऑपरेशन सिंदूर-1 का बदला दिल्ली में धमाका करके ले लिया है।’’
इतना ही नहीं, पाक के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ को भारत के द्वारा बदला लेने का डर सता रहा है, जो गाहे-ब-गाहे पाक टीवी चैनलों में सक्रिय रहा करते हैं।
तुर्की कनेक्शन-
दिल्ली ब्लास्ट केस के मुख्य आरोपी पुलवामा के डॉ मुजम्मिल और डॉ. उमर नबी 2021 में तुर्किए गए थे। इसका पक्का सबूत यह कि दोनों के पासपोर्ट में तुर्किए का स्टाम्प मिला है।
इसके उपरांत दोनों ने जनवरी 2025 में शैक्षणिक व पेशेवर यात्राएं तुर्किए की की थी। इसी दरमियान दोनों की मुलाकात पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश के ओवरग्राउंड वर्कर्स से हुई।
एजेंसियों का दावा है कि 2021 की यात्रा के बाद ही उमर की सोच बदली। वह कट्टरपंथ की ओर मुड़ता चला गया।गौरतलब है कि जो सीधे पाक जाते हैं, वो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार में आ जाते हैं, ऐसे में संदिग्ध लोग तुर्किए का रूट चुनतेहैं।
तुर्किए से लौटने के बाद से उमर ने अमोनियम नाइटेªट, पोटेशियम नाइटेªट और सल्फर जैसे विस्फोटक जमा करने आरंभ कर दिए थे। वस्तुतः, वह व्हीकल बेस्ड इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस बना रहा था।
यह भी सौ फीसदी सत्य है कि जो दूसरे के लिए गड्ढा खोदता है, वह पहले उसमें गिरता है। दिल्ली ब्लास्ट के मामले में भी ऐसा ही हुआ। उमर नबी ही ब्लास्ट का पहला शिकार बन गया।
मुजम्मिल व उमर तुर्की की राजधानी अंकारा में बैठे विदेशी हैंडलर, जिनका कोडनेम ‘उसाका’ व ‘हाशिम’ बताया जा रहा है, से स्विस संचार थीमा एप के माध्यम से जुड़े हुए थे। यही नहीं, इन शातिरों ने सिग्नल एप पर भी गुु्रप बना लिया था।इस मॉड्यूल के डॉ. उमर व मुजम्मिल को मार्च 2022 में डॉ. मुजफ्फर अहमद राथर तुर्किए ले गया था। मुजफ्फर अदील का भाई है। तीनों आतंकी अंकारा में 14 दिन रुके थे।
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भाग-4
डॉक्टरों की आतंकी टीम-
वहीं, राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने आरंभिक जांच के उपरांत दावा किया कि कार में हुआ धमाका हड़बड़ी में किया गया हमला नहीं, बल्कि एक सोची-समझी फिदायीन हमला हैलाल किला ब्लास्ट केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआइए ने तत्काल जांच टीम का गठन किया। एनआइए के एडीजी विजय सखारे की टीम को मामले की गहन जांच-पड़ताल के साथ-साथ गुनेहगारों को सलाखों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।एनआइए हेतु स्पेशल 10 अफसरों की टीम तैयार की गई है। इसमें आइजी, दो डीआइजी और तीन एसपी और बाकी डीएसपी स्तर के अधिकारी शामिल किए गए हैं।
यही जांच एजेंसी पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर चुकी है। उसने आतंकियों व उनके सहयोगियों के पाकिस्तान से जुड़े होने के ठोस सबूत उजागर किए थे। इसी एजेंसी की निष्पक्ष जांच रिपोर्ट के बाद ‘आपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया गया था।खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, वाइट कॉलर टेरर के मामले में गिरफ्तार 8 आतंकी 32 वाहनों में विस्फोटक भरकर अयोध्या, काशी, प्रयागराज, मथुरा, दिल्ली समेत देश के कई शहरों को दहलाना चाहते थे।
10 नवंबर को जिस हुंडई आई 20 कार में पुरानी दिल्ली में ब्लास्ट किया गया, वह तो एक नमूना था। इसका उल्लेख धारावाहिक के भाग-1 में किया गया है। यह कार फिदायीन दहशतगर्द उमर नबी चला रहा था, जो स्वयं भी चिथड़े-चिथड़े हो गयाइसके अलावा पुलिस के द्वारा 12 नवंबर को एक लाल कलर की इकोस्पोर्ट कार पकड़ी गई। यह भी इसी साजिश का हिस्सा है। यह कार भी उमर नबी का ही था, जो फरीदाबाद के पास खंडावली गांव में खड़ी मिली13 नवंबर को भी जांच एजेंसियों ने फरीदाबाद की अलफलाह यूनिवर्सिटी के कैंपस से ब्रेजा कार बरामद की। यह कार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग और इंडिया हेड डॉ. शाहीन सईद के नाम रजिस्टर है। आतंकी लेडी डॉक्टर लखनऊ की निवासिनी है, जो अलफलाह में डॉक्टर के पद पर आसीन थी।
ब्रेजा कार शाहीन की दूसरी कार है। इसे इसने यूनिवर्सिटी के फ्लैट नंबर 32 का पता देकर सितंबर 2025 में खरीदा था।
इस सफेदकोट लेडी टेरर की पहली कार स्विफ्ट है, जिसमें 8 नवंबर को एके-56 रायफल मिला था। सोचनेवाली बात यही कि एक डॉक्टर का रायफल से कैसा रिश्ता-नाता? जबकि उसकी कार में डॉक्टरी उपकरण होने चाहिए थे।
धमाकों के लिए 8 डॉक्टरों की टीम बनाई गई थी, जिन्हें 4 शहरों में दो-दो के ग्रुप में 6 दिसंबर (बाबरी मस्जिद विध्वंस के दिन) या 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को भेजा जाना था। लेकिन, इसके पूर्व एक डॉक्टर खुद ही मारा गया और बाकी डॉक्टर पुलिस के हत्थे चढ़ गए।अल फलाह के डॉक्टरों ने जिसमें मुजम्मिल, उमर, शाहीन आदि ने चंदा करके 20 लाख रुपये जुटाए थे, जिसे वे उमर नबी को दिए थे।
उमर ने इन रुपयों से 20 क्विंटल फर्टिलाइजर खरीदा था, जिससे विस्फोटक बनना था। इसी पैसे को लेकर मुजम्मिल व उमर में कहासुनी व झगड़ा हो चुका था।इसमें से भी डॉक्टर अदील, मुजम्मिल व उमर दक्षिण कश्मीर के हैं, जो आतंकवाद का गढ़ माना जाता है।
आतंक के डॉक्टर-
1.डॉ. मोहम्मद नबी उमर-उम्र 38 साल, जन्म-कोइल, पुलवामा। काम-असिस्टेंट प्रोफेसर, अलफलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद जिस हुंडई आई 20 कार में धमाका हुआ, इसे यही शख्स चला रहा था, जो साबित हो चुका है।
2.डॉ. मुजम्मिल शकील-उम्र 36 साल, जन्म कोइल, पुलवामा। काम-असिस्टेंट प्रोफेसर, अलफलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद। आरोप 2900 किलो विस्फोटक फरीदाबाद के धौज गांव में जुटाकर रखा था और गुप्त प्रयोगशाला चला रहा था। इस आदमी के मोबाइल से 200 वीडियो मिले हैं। इन वीडियोज में आतंकी माड्यूल के टेªनिंग दिए जा रहे हैं।
3.डॉ. शाहीन सईद-उम्र 45 साल। जन्म-लालबाग लखनऊ। काम-एमबीबीएस, एमडी, अलफलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद। आरोप-कार में राइफल, मुजम्मिल की करीबी, फॉर्मकोलॉजिस्ट। भारत में महिला फिदायीन तैयार करने के लिए संकल्पित।
4.डॉ. अदील अहमद राठर-उम्र 38 साल। जन्म-काजीकुंड कश्मीर। काम-सीनियर रेजिडेंट, सहारनपुर यूपी। इसके पहले वह अनंतनाग जीएमसी मेडिकल कॉलेज में सीनियर डॉक्टर के पद पर रहा। आरोप-जैश के धमकीभरे पोस्टर लगानेवाला। यही पोस्टर इनकी पाप की हांडी फोड़ने में अहम सुराग साबित हुआ। इसके लॉकर से एके-47 मिला। यह शैतान, आतंकी संगठनों के लिए फंडिंग व रिक्रूटमेंट दोनों काम कर रहा था।5.डॉ. सज्जाद अहमद-उम्र 32 साल। जन्म-पुलवामा। काम-डॉक्टर। आरोप-डॉ. उमर का दोस्त, पुलवामा ठिकाने वाले माड्यूल से सबंध।
6.डॉ. आरिफ-कश्मीर केे अनंतनाग निवासी डॉ. आरिफ ने 3 माह पहले ही जीएसवीएस कॉलेज ज्वाइन किया था। यह आतंकी नीट सुपर स्पेशियलिटी एग्जाम में 1008वां रैंक लाया था। पहली काउंसिलिंग में उसे लखनऊ का एसजीपीजीआई कॉलेज मिला था, लेकिन उसने जॉइन नहीं किया। दूसरी काउंसिलिंग में वह कानपुर में एडमिशन लिया। दिल्ली ब्लास्ट के दिन आरिफ शाहीन के भाई डॉ. परवेज के संपर्क में था। जब एटीएस के जवान उसके घर पहुंचे, तब वह उन्हें देखकर फोन से डेटा डिलिट करने लगा था।
7.डॉ. मोहिउद्दीन-चीन से एमबीबीएस मोहिउद्दीन ‘रासायनिक हथियार विशेषज्ञ’ माना जाता है। गुजरात एटीएस ने उसे ‘रिसिन’ जहर तैयार करते हुए पकड़ा। उसने लखनऊ, दिल्ली व अहमदाबाद की भीड़भाड़ वाली जगहों की रेकी की थी। इससे 2 गन, 30 कारतूस व 4 लीटर अरंडी तेल बरामद हलेडी आतंकी-
जैश के वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की सबसे अहम कड़ी डॉ. शाहीन सईद को माना जा रहा है। इस लेडी आतंकी की मौजूदगी और गतिविधियों से खुफिया एजेंसियां भी भौचक्क हैं।शाहीन जैश सरगना मौलाना मसूद अहजर की बहन सादिया अजहर के सीधे संपर्क में थी और आतंकी संगठन की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात से जुड़ी हुई थी।
गौरतलब है कि जैश के महिला विंग को सादिया ने ऑपरेशन सिंदूर के पहले फेस के बाद अक्टूबर 2025 में बनाया था। सादिया का पति यूसुफ अहमद आपरेशन सिंदूर में मारा गया था। पति की मौत का बदला लेने के लिए ही सादिया ने यह विंग बनाया है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस डॉ. शाहीन को फरीदाबाद की अलफलाह यूनिवर्सिटी से पकड़कर श्रीनगर ले गई। वहीं उसकी कानूनन गिरफ्तारी हुई।शाहीन ने इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस 1996-2001 बैच और फार्मकोलॉजी में एमडी किया है। वह 2006 से 2013 तक सात साल कानपुर मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर रही। उसका चयन यूपीपीएससी के मार्फत हुआ।
इसके बाद वह अचानक गायब हो गई। कॉलेज के नोटिसों का जवाब नहीं देने के चलते 2021 में उसे बर्खास्त कर दिया गया।
डॉक्टर जफर के साथ उसकी शादी भी ज्यादा नहीं चली। विवाद के चलते तलाक हो गया। इसके बाद वह अलफलाह यूनिवर्सिटी में काम करने लगी और इसी दौरान डॉ मुजम्मिल के संपर्क में आई।
शाहीन पाकिस्तान स्थित अपने हैंडलर से लगातार संपर्क में थी, जो उसे महिलाओं की भरती बढ़ाने और आतंकी गतिविधियों में शामिल करवाने के निर्देश दे रहा था।शाहीन ‘ऑपरेशन हमदर्द’ चला रही थी। इसके लिए उसके टारगेट में वे मुस्लिम महिलाएं थीं, जो या तो अत्यंत गरीब हैं या अत्यंत महत्वाकांक्षीं या आतंकी गतिविधियों को सही ठहराया करती हैं।
फरीदाबाद में डॉक्टर शाहीन के ठिकानों से एनआईए को बरामद डायरी और नोट्स से बड़ा खुलासा हुआ है कि इनमें ‘डी-6’ मिशन का उल्लेख है।इसका विश्लेषण करने पर जांच एजेंसियों को पता चला है कि आतंकी 6 दिसंबर को 6 शहरों को दहलाने की साजिश रच रहे थे।
शाहीन ही माड्यूल के सरगना के तौर पर काम कर रही थी। वह आतंकियों से संपर्क करने, भरती करने और सबके खर्चे की जिम्मेदारी उठा रही थी।
यूपी, एटीएस ने लखनऊ से शाहीन के भाई डॉ. परवेज को गिरफ्तार किया है। परवेज लखनऊ के इंटीग्रल मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर था। उसने एक सप्ताह पहले ही रिजाइन किया।
पासपोर्ट आवेदन से पता चलता है कि लेडी आतंकी शाहीन दुबई भागने के लिए पासपोर्ट आवेदन की थी। पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए 3 नवंबर को फरीदाबाद का एक पुलिसकर्मी अलफलाह कैंपस पहुंचा था।
वहीं, नेशनल मेडिकल कमीशन के द्वारा यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज करने के बाद डॉ. मुजफ्फर अहमद, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद का नाम मेडिकल प्रेक्टिशनर से हटा दिया है।
यही नहीं, जांच एजेंसियों के रडार पर आए अलफलाह के दो डॉक्टरों मोहम्मद और मुस्तकीम को हिरासत में लिया गया है।
यह भी गौर-ए-काबिल है कि डाक्टर बनने की चाह जहां भारतीयों के टैक्सपेयर का लाखों-करोड़ों रुपया बर्बाद करनेवाले तथाकथित डॉक्टरों की एमबीबीएस की पढ़ाई इतनी थोथी व उथली क्यों है कि इन्हें देशहित, समाजहित व मानवहित की जरा भी परवाह नहीं रह गई है?आखिर इन्हें एमबीबीएस के साथ-साथ राष्ट्रवाद, देशभक्ति, मानवीयता व सामाजिक चेतना की शिक्षा क्यों नहीं दी जाती?
फरवरी 2020 के दिल्ली दंगे के मामले में उमर खालिद व शरजील इमाम की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीमकोर्ट को इनके भड़काऊ वीडियो दिखाते हुए बताया है,‘‘अब डॉक्टर और इंजीनियर अपना पेशा छोड़कर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। ये भाषण जामिया-मिलिया व शाहीन बाग जैसे स्थानों पर दिए गए हैं। इनका मकसद हिंसक प्रदर्शन भड़काना था। बौद्धिक आतंकवादी जमीन पर काम करनेवाले स्लीपर सेलों से ज्यादा खतरनाक होते हैं।--0—
भाग-5
पहला सुराग-
ऐसा अनुमान है कि कश्मीर के नौगाम में यदि जैश के पोस्टर नहीं लगते, तो आतंकियों के नए माड्यूल का पता नहीं चलता। जम्मू-कश्मीर पुलिस को 19 अक्टूबर को 12 पोस्टर दिखे। केस दर्ज कर जांच शुरू की गई, तो 27 अक्टूबर को 25 पोस्टर और दिखने लगे।
इससे नौगाम के एसएसपी का शक गहराया। इसके उपरांत जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग, एमओजी, सीआईडी के 50 अफसरों ने जॉंइंट ऑपरेशन शुरू कर दिया। तदुपरांत नौगाम के ही 60 सीसीटीवी खंगाले गए।
फलस्वरूप, पहला सुराग 31 अक्टूबर को मिला। इसमें डॉ. अदील दिखने लगा, जो 19 व 27 अक्टूबर को इन इलाकों में घूम रहा था। इसका मोबाइल फोन सर्विलांस पर लिया गया। बातचीत रिकॉर्ड की गई। टॉकिंग रिकॉर्ड से पता चला कि डॉ. अदील वस्तुतः पाक हैंडलर्स से ऑपरेट हो रहा था।
सर्विलांस में इसके बाद उसका लोकेशन सहारनपुर मिलने लगा। इसी से 6 नवंबर को उसे दबोचा गया। पूछताछ में जीएमसी अनंतनाग में उसका एक लॉकर मिला, जिसमें एक एके-47 व कई हथगोले बरामद किए गए।
बताइए, जिस लॉकर में सोने-चांदी के आभूषण या रुपये-पैसे रखे जाते हैं, उसमें डॉ. अदील के लॉकर में मौत का सामान रखा जाता था।
गहन पूछताछ में इसने फरीदाबाद के अलफलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे डॉ. मुजम्मिल का नाम लिया। अदील के काल रिकार्ड से भी मुजम्मिल के साथ कई बार बातचीत की पुष्टि होने लगी। दबाव पड़ने पर अदील ने ही राज उगलना चालू किया कि मुजम्मिल के पास 2900 क्विंटल विस्फोटक है। इसके उपरांत डॉ. मुजम्मिल के निवास में छापेमारी की गई और उसे गिरफ्तार किया गया। उसके पास भी एक एके-47 बंदूक थी, जो बरामद की गई।
डॉ. मुजम्मिल से पूछताछ के बाद अन्य जगह छापेमारी कर अन्य लोगों को पकड़ा गया। मुजम्मिल फरीदाबाद में 15 दिन पहले एक घर किराये पे ले रखा था, जिनमें विस्फोटक बनाने की तमाम तरह की सामग्री सहित यूरिया खाद व वह मशीन मिली, जिससे यूरिया को बारीक पीसा जाता था। विदित हो कि यूरिया का मिश्रण विस्फोटक बनाने के काम आता है।डॉ मुजम्मिल के बयान के बाद 10 नवंबर की सुबह पुलिस ने सहारनपुर से महिला डॉक्टर शाहीन सईद को गिरफ्तार किया, जिसकी कार में एके-56 राइफल मिली।
यही वजह है कि 10 नवंबर की सुबह अपने ठिकाने से विस्फोटक लेकर निकला डॉ. उमर नबी को अपने साथियों की गिरफ्तारी की भनक व खबर लग गई थी। इसीलिए वह इसी कश्मकश में 11 घंटे तक दिल्ली की खाक छानता रहा।
जब वह देखा कि अब उसका भी पकड़ा जाना निश्चित हो गया है, तब वह पकड़े जाने के डर से और आतंक फैलाने की मंशा से विस्फोटकों से लदी कार को विस्फोट से उड़ा दिया। इससे वह खुद भी जहन्नुम चला गया और निर्दोषों को भी मार डालवहीं, आगे के महत्वपूर्ण घटनाक्रम में विस्फोटक लदी कार चला रहे और मारे गए डॉ. उमर नबी के पुलवामा जिले के कोईल गांव स्थित उसके दोमंजिला घर को सुरक्षाबलों ने विस्फोट करके ध्वस्त कर दिया। विस्फोट से उड़ाने के पहले उसके परिजनों को घर से बाहर किया गया, ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो। नबी के घर को विस्फोट से उड़ाने के पीछे का सिद्धांत यही कि जब तुम्हें दूसरों के घर का ख्याल नहीं, तब हम तुम्हारे घर का ख्याल क्यों रखें? यहां जैसी करनी वैसी भरनी या जैसे को तैसा का सिद्धांत वाजिब प्रतीत होता है।
आतंकी डॉ. उमर का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें उमर अंग्रेजी भाषा में आत्मघाती हमले को सही ठहराता प्रतीत हो रहा है। वह अंग्रेजी में कहता दिख रहा है,‘‘शहीद होने के लिए यह मार्टरडम ऑपरेशन है, न कि सुसाइड हमला।’’
मार्टरडम ऑपरेशन के लिए माना जाता है कि कोई व्यक्ति निश्चित रूप से किसी जगह पर निश्चित समय पर जान देता है।
भारत में अंग्रेजी भाषा पढ़े-लिखे व संभ्रांतों की भाषा है। अंग्रेजी में दिए गए उसके वक्तव्य से यही आभास होता है कि वह उच्चशिक्षित वर्ग डॉक्टर, इंजीनियर, वकील व सरकारी अधिकारियों को अपने मुहिम में शामिल करने की फिराक में था।वस्तुतः, उमर अलकायदा चीफ ओसामा बिन लादेन ने प्रभावित था। लादेन भी एक पढ़ा-लिखा इंजीनियर होकर आतंकवादी सरगना था।
यही नहीं, अलकायदा का संस्थापक अल जवाहिरी मेडिकल सर्जन था। आईएसआईएस का पूर्व सरगना अबू-बकर बगदादी भी एक स्कॉलर था।
एजेंसियों को धमाके वाली कार से एक जूता मिला है। इसकी जांच में अमोनियम नाइटेªट व टीएटीपी के टेªस मिले हैं।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि धमाके के लिए ‘जूता बम’ का इस्तेमाल किया गया होगा।
विदित हो कि टीएटीपी खतरनाक विस्फोटक होता है। यह मामूली झटके, रगड़ या गरमी से भी फट जाता है। संभवतः, इसी वजह से मुजम्मिल के पास से जब्त किए गए और नौगाम थाना में रखे गए विस्फोटकों से इसी वजह से अकस्मात् विस्फोट हो गया, जिसमें सरकारी अधिकारियों समेत 9 लोगों की जानें चली गईं।इस विस्फोटक को आतंकी दुनिया में ‘मदर ऑफ सैंटन’ (शैतान की मां) कहा जाता है।
आशय यह कि श्रीनगर की जामा मस्जिद पर चुपचाप चिपकाए गए जैश के कुछ पोस्टरों से शुरू हुई वारदात विचलित कर देनेवाली श्रृंखला बन गई थी।
यह घटना पहले फौरी उकसावे जैसा लग रहा था, लेकिन बाद में साजिश का पहला सूत्र निकला।
सूत्रों के अनुसार, 4 अक्टूबर को अदील की शादी डॉ. रुकैया से हुई थी। शादी के अगले दिन वाइट कॉलर टेरर माड्यूल एक्टिव हुआ। इसका मतलब यही कि शादी में इसकी प्लानिंग की गई थी।
इसका पहला काम सैन्यबलों के खिलाफ सार्वजनिक धमकियां देना था। इस नेटवर्क का उद्देश्य मेडिकल प्रोफेशन की आड़ में लॉजिस्टिक सपोर्ट, ट्रांसपोर्टेशन और फाइनेंशियल चैनल्स तैयार करना था। अदील ही लॉजिस्टिक और फाइनेंशियल मदद उपलब्ध करवाता था।--0--
भाग-6
बारूदी किला-
इसी के साथ कश्मीर में एक मौलाना मोहम्मद इरफान दबोचा गया,जिसकी वजह से आतंकियों के वाइट कॉलर टेरर माड्यूल (सफेदपोश आतंकतंत्र) का खुलासा हुआ है।
मौलाना मोहम्मद तीसरी कक्षा तक पढ़ा है। लेकिन, कम पढ़ा-लिखा मौलाना हाई क्वालिफाइड व एमबीबीएस डॉक्टरों को आंतक का पाठ पढ़ा रहा था और ये बेअक्ल चिकित्सक उससे अक्ल ले रहे थइरफान शोपियां का रहनेवाला है। यह मौलाना नौगाम के मदरसे में पढ़ाने जाता था। काम तो इसका इस्लाम धर्म की तालीम देना था, पर यह दहशतगर्द बनने का ज्ञान बांट रहा था।17 अक्टूबर को उसने ही आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का धमकीभरा पोस्टर लिखा था। फिर उसको प्रिंटिंग कराने ले गया। उस पोस्टर में सेना के खिलाफ आपत्ति व अपमानजनक बातें लिखी गई थी।
जवानों ने सहसा पोस्टर देखा और आसपास पता लगाया, तो मौलवी का सुराग मिला। अगले दिन जवान शोपियां पहुंच गए और उसे दबोच लिया।
नौगाम में इरफान जिस मस्जिद में रहता था, उस कमरे को खोला गया, तो वहां कुछ पोस्टर और मिले। इसी से उसके खिलाफ पहला केस दर्ज किया गया।
कुछ दिन मामला शांत रहा, लेकिन 27 अक्टूबर को नौगाम में और पोस्टर लगे मिले। ये प्रिंटेड थे। सीसीटीवी फुटेज में इन्हें लगानेवाले की पहचान कुलगाम के वांपोरा निवासी डॉ. अदील मोहम्मद के रूप में हुई।
असल में, यहां डॉ. अदील से गफलत हो गई। उसे मौलवी इरफान की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं थी, इसीलिए उसने पोस्टर लगाए और तीन दिन घर पर ही रहा। तब तक मौलवी ने भी मुंह नहीं खोला था।
31 अक्टूबर को डॉ. अदील फ्लाइट से दिल्ली पहुंच गया। यहां से फरीदाबाद गया। वह मुजम्मिल और उमर के साथ रात बिताया। फिर 1 नवंबर को वह सहारनपुर अपने अस्पताल पहुंचा।
उसे नहीं मालूम था कि जांच एजेंसी के सदस्य उसका पीछा कर रहे हैं। उसे यकीन हो गया था कि वह आतंक फैलानेवालेों का नया वाइट कॉलर माड्यूल बना रहा है।
इसके बाद के घटनाक्रम में पूरी प्लानिंग के बाद एक टीम सहारनपुर और दूसरी अदील के घर कुलगाव भेजी गई। दोनों टीमों को 4 नवंबर को अपने-अपने टारगेट पर एक ही समय पर पहुंचना था, लेकिन कुलगाम वाली टीम जल्दी पहुंच गई।
उस वक्त अदील सहारनपुर के एक रेस्टारेंट में खाना खा रहा था। उसके घर से फोन आया। पुलिस के पहंुचने की सूचना मिलते ही अदील भागने लगा। इससे रेस्टारेंट के बाहर खड़ी जांच टीम ने उसे दबोच लिया।अदील मृत आतंकी उमर नबी का क्लासमेट रहा है। इसी से ये दोनों आतंकी माड्यूल में गहरे तक उतरते चले गए।
मास्टरमाइंड डॉ. मुजम्मिल का बारूदी किला हरियाणा के फरीदाबाद के फतेहपुर तगा गांव में था। इसका ठिकाना बाहर से एक खंडहरनुमा टूटा-फूटा मकान दिख रहा था, लेकिन इसके अंदर देश को दहलाने का पूरा सामान मौजूद था।
किराए पर लिया गया यह घर ऐसा ‘वॉच टावर’ था, जहां से गांव में होनेवाली हर हरकत पर पूरी नजर रखी जाती थी। फतेहपुर तगा लाल किले से 52 किमी और अलफलाह यूनिवर्सिटी से महज 3 किमी दूर है। ग्रामीणों या किसी बाहरी को शक न हो, इसीलिए मुजम्मिल ने यह खंडहरनुमा घर बड़ी चालाकी से चुना था।इस खंडहर में 3 कमरे, एक किचन और एक बरामदा है। यहां उसके जैसे आतंकियों की आवाजाही थी। इसके पहले कमरे में कीचन, दूसरे कमरे में केयरटेकर के लिए बिस्तर और हीटर मिले।
जबकि तीसरे कमरे में एक नीला ड्रम और चौथे कमरे में भूसे का ढेर मिला। इसी के नीचे उसने 2900 किलो अमोनियम नाइटेªट छिपाकर रखा था।
रखने व छिपाने के पैटर्न से साथ पता चलता है कि यहां न केवल विस्फोटक स्टोर किया जा रहा था, बल्कि ये लोग लंबे समय तक रुककर कार्य को अंजाम देने की योजना बना चुके थे।
दिल्ली धमाके की जांच के दौरान पता चला कि नई दिल्ली में दो आत्मघाती धमाके की साजिश रची गई थी, लेकिन ऐन मौके पर जसीर बिलाल उर्फ दानिश की आत्मा जाग उठी। उसने फिदायीन दस्ते में शामिल होने से इंकार कर दिया।
इंकार करते हुए दानिश का तर्क था,‘‘फिदायीन हमला कर खुद की व अन्य लोगों की जान लेना खुदा के नेक बंदों का काम नहीं हो सकता है। यह तो शैतान का काम है।’’
एनआईए ने श्रीनगर से आतंकी उमर के साथी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया है। दानिश अनंतनाग के काजीकुंड का रहनेवाला था। उसपर आरोप है कि वह विस्फोट के लिए ड्रोन मॉडिफाई करता था।
दानिश राकेट बनाने की कोशिश कर रहा था, ताकि उससे हमला किया जा सके। वह उमर को तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करवाता था। इस प्रकार दानिश दिल्ली धमाकों की साजिश में शामिल था।
दानिश के आतंकी धमाके में शामिल होने की सूचना मिलने पर उसके पिता ने मिट्टी तेल डालकर आत्महत्या कर ली। वे मेवे बेचा करते थे।
दूसरी ओर, दिल्ली से गिरफ्तार आमिर राशिद अली को लेकर खुलासा हुआ है कि उसने धमाके से पहले उमर को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराए थे।
कश्मीर टाइम्स पर छापा-
जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच एजेंसी ने कश्मीर टाइम्स अखबार के जम्मू दफ्तर पर छापा मारा है, जहां पर बंदूक व गोलियां मिली है।
सोचनीय पहलू यही कि एक अखबार के दफ्तर में बंदूकों व गोलियों का क्या काम? यहां तो खबरों पर काम होने चाहिए।
आत्मघाती आंतकी के आखिरी दस दिन-
जांच-पड़ताल में सामने आया है कि आत्मघाती आतंकी उमर नबी हमले के 10 दिन पहले से बेचैन था। उसने हरियाणा के नूंह की हिदायत कालोनी में कमरा किराए पर ले रखा था।फलतः, घर की मालकिन अफसाना और उसका जीजा शोएब जांच एजेंसियों की हिरासत में है।
अफसाना की बेटी का कहना है, ‘‘डॉ. नबी 10 दिन कमरे में बंद रहा। वो न नहाता था, न कपड़े बदलता था। शौच, टायलेट कमरे के अंदर ही करता था। रात के अंधेरे में कभी-कभार बाहर खाना खाने जाता था। 7 नवंबर को कमरे के फर्श से गंदगी बहकर बाहर आने लगी, तो उसकी मम्मी ने शोएब (मकान दिलवानेवाला शख्स) को सूचना दी। लेकिन, 9 नवंबर की रात करीब 11 बजे वो अपनी आई-20 कार लेकर चला गया। 10 नवंबर को नबी आत्मघाती हमले में मारा गया।’’अफसाना की बेटी ने आगे बताया,‘‘हमारे घर में पांच कमरे हैं। उमर आखिरी कमरे में रह रहा था। 31 अक्टूबर को शोएब ने उसे यह कहकर यहां रुकवाया था कि वो कुछ दिन ठहरेगा। हमने उसे कुछ दिन चाय-नाश्ता दिया, लेकिन उसकी हरकतें संदिग्ध जान पड़ी, तो हमने संपर्क करना बंदकर दिया। 10 दिन में वह सिर्फ 4 दिन गाड़ी घर के सामने खड़ी किया। बाकी दिन वह कार कहीं और खड़ी करता था।’’
ऐसा था फिदायीन डॉक्टर का अंतिम दस दिन, जो ऊहापोह, कश्मकश व उलझनभरा था। यही वजह है कि वह न ठीक से खाना खा रहा था, न अपनी साफ-सफाई कर रहा था, न बाहर शौच जा रहा था।
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भाग-7
आतंकियों का पनाहगाह-
दिल्ली ब्लास्ट केस के गुनहगार आतंकी डॉक्टरों की पनाहगाह बनी फरीदाबाद की अलफलाह यूनिवर्सिटी पर 18 नवंबर 2025 की सुबह 5.30 बजे प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने दिल्ली, हरियाणा में विश्वविद्यालय के ट्रस्टियों और प्रमोटर्स से जुड़े 25 ठिकानों पर छापा मारा।दस्तावेजों की जांच में ईडी ने करोड़ों रुपये के फंड डायवर्जन, फर्जी मान्यता और परिवार-चालित कॉन्टैªक्ट नेटवर्क पकड़ा है।
16 घंटे उपरांत अलफलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉडिंªग रोकथाम कानून के तहत दिल्ली के एक ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया गया।
छापेमारी में 48 लाख रुपया नकद भी जब्त किए गए। दावा है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के लेनदेन, फंडिंग पर जवाद का पूर्णतया नियंत्रण है।
ईडी की उक्त अहम कार्रवाई दो एफआईआर पर हुई है, जिसे दिल्ली क्राइम ब्रांच ने दर्ज किया था। एफआईआर में आरोप था कि यूनिवर्सिटी ने फर्जी तरीके से नेक की मान्यता और यूजीसी 12 (बी) स्टेट्स का झूठा दावा किया।
जांच में पता चला कि 1995 से चल रहा अलफलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को जवाद सिद्दीकी ही नियंत्रित करता है।
विदित हो कि हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अलफलाह यूनिवर्सिटी एक मेडिकल कॉलेज-कम-हास्पिटल है। इसकी स्थापना मप्र के महू निवासी जवाद सिद्दीकी ने 30 साल पहले की थी।
इसे तब 30 एकड़ जमीन नाममात्र के शुल्क पर दी गई थी, ताकि यूनिवर्सिटी में शिक्षा व स्वास्थ्य के माध्यम से लोगों की जिंदगियां बेहतर बनाई जा सके। बाद में इसने इसका विस्तार करते हुए इसका कैंपस 70 एकड़ का बना डालाजांच एजेंसियों ने साकेत कोर्ट को बताया,‘‘सिद्दीकी ने अलफलाह यूनवर्सिटी के जरिए छात्रों, उनके माता-पिता को मान्यता प्राप्त संस्थान बताकर गुमराह किया और उनसे 415.10 करोड़ की अवैध कमाई की।’’ईडी के मुताबिक,‘‘सिद्दीकी का परिवार खाड़ी देशों में बसा है। वह भी विदेश भागने की तैयारी में था। अगर उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता, तो वो विदेश भागकर जांच से बच सकता था। सबूत मिटा सकता था।’’
ईडी ने कोर्ट को बताया,‘‘1990 के दशक के बाद अलफलाह ग्रुप ने तेजी से तरक्की की और एक बड़ा शैक्षणिक संस्थान बन गया। लेकिन, गु्रप की वित्तीय स्थिति और उसकी संपतियों के बीच बड़ा अंतर दिख रहा है, जो संदेह पैदा करता है।’जवाद सिद्दीकी का महू के मुकेरी मोहल्ला में घर है, जो कैंट बोर्ड से अवैध घोषित कर दिया गया है। इसे हटाने का नोटिस दिया गया है। यह मकान अतिक्रमण में बना है। इसमें उसका परिवार 25 साल से नहीं रह रहा है।
इसे 1996 व 1997 में भी नोटिस दिए जा चुके हैं। 830 वर्गफीट में बने महू के इस मकान में 20 से ज्यादा खिड़कियां और तलघर हैं।सवाल यह भी कि कैंट बोर्ड अब तक चुप क्यों था? उसको तो पहले ही इसपर कार्रवाई कर देनी चाहिए थी।
ईडी ने जांच के दरमियान पाया कि अलफलाह गु्रप से जुड़ी 9 शैल कंपनियां एक ही पते पर रजिस्टर्ड हैं। इन्हें भी जांच के दायरे में लिया गया है। खास बात यह कि जो कर्मचारी यहां काम कर रहे हैं, उनके ईपीएफओ, ईएसआईसी के दस्तावेज नहीं मिले हैं।जवाद के भाई हमूद सिद्दीकी को पुलिस ने चार दिन पहले हैदराबाद से हिरासत में लिया है।
इसपर आरोप है कि हमूद ने चिटफंड कंपनी खोलकर पैसा दोगुना करने का झांसा दिया, फिर लोगों से निवेश करवाया। इसके बाद रुपया लेकर भाग गया। पुलिस इस शख्स को 25 साल से तलाश रही थी।
मतलब यही कि सब चोर-चोर मौसेरे भाई हैं। बड़ा तो बड़ा, छोटा भी शुभानअल्लाह हैवाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की अहम कड़ी, जो इसी इंस्टीट्यूट में डॉक्टर है, शाहीन सईद के 7 बैंक खाते मिले हैं। आतंकियों के बीच ‘मैडम सर्जन’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. शाहीन ने लखनऊ, फरीदाबाद के पते से तीन पासपोर्ट बनवाए थे। अक्टूबर में अलफलाह यूनिवर्सिटी के अपने क्वार्टर के पते पर पासपोर्ट बनवाने का आवेदन किया था।
जांच एजेंसियों को आतंकी मॉड्यूल का केंद्र बने फरीदाबाद के अलफलाह विश्वविद्यालय में उमर के कमरा नंबर 4 तथा मुजम्मिल के कमरा नंबर 13 में दो डायरियां मिली हैं, जिनमें करीब 30 लोगों के नाम व नंबर हैं और कई विवरण दर्ज हैं। डायरी में शिपमेंट और पैकेज जैसे शब्द लिखे हैं, जिन्हें विस्फोटकों का कोडवर्ड माना जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली ब्लास्ट केस के आरोपी और पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार डॉ. निसार उल हसन की पत्नी और बेटी को हाउस अरेस्ट किया है। पत्नी डॉ. सुरैया विभाग में है। बेटी एमबीबीएस सेकंड ईयर की छात्रा है। वहीं, यूनिवर्सिटी के 10 संदिग्ध छात्रों के कैंपस से बाहर जाने पर रोक लगाई गई है।
उधर, सेशंस कोर्ट ने दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार जसीर बिलाल को 10 दिन की हिरासत में एनआईए को सौंप दिया। जांच एजेंसी ने न्यायाधीश को बताया कि जसीर ने उमर को तकनीकी मदद दी थी।
वहीं, उमर के भाई जहूर इलाही की गिरफ्तारी से उमर नबी का एक वीडियो सामने आया है।
जहूर ने बताया,‘‘उमर ने पुलवामा के कोइल गांव स्थित घर पर उसे यह फोन 26 से 29 अक्टूबर के बीच दिया था और कहा था कि अगर उसके बारे में कोई खबर आए, तो फोन पानी में फेंक देना।’’
2 मिनट का यह वीडियो उमर ने अप्रैल में शूट किया था। इसमें वह आत्मघाती हमलों को ‘शहादत का ऑपरेशन’ बता रहा है।
वह दावा कर रहा है, ‘‘यह कार्य जिहाद के तहत न सिर्फ जायज है, बल्कि सराहनीय भी है।’’
माना जा रहा है कि वीडियो उसने अन्य मुस्लिम युवाओं को ब्रेनवॉश करने के लिए बनाया था। फोन में मिले डेटा में आईएसआईएस और अल कायदा जैसे आतंकी संगठनों के कट्टरपंथी वीडियो भी मिले हैं।
इस साजिश का पूरी तरह से भंडाफोड़ करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों की पुनरावृत्ति न हो। सुरक्षातंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि आतंकवादी आखिर सिस्टम में कैसे सेंघ लगाते हैं और शिक्षा मंदिर के लोग उनके फौरी ‘हमदर्द’ बन जाते हैंइसीलिए, तो कहा जाता है कि आतंकवाद स्थानीय सहयोग के बिना पनप ही नहीं सकता। लिहाजा, आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति रखनेवाले इन मगरमच्छों को उनके अंजाम तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।
यही वे स्लीपर सेल हैं, जो बगुला भगत बनकर अंडरग्राउंड वर्कर की तरह काम करते रहते हैं।
फरीदाबाद के धौज गांव में बनी जिस अलफलाह यूनिवर्सिटी से चार आतंकी निकले, वहां 40 प्रतिशत डॉक्टर कश्मीरी हैं।
2021 में लेडी आतंकी शाहीन बतौर प्रोफेसर जुड़ी। उसे प्रबंधन ने कॉलेज की 6 सदस्यीय फार्माको विजिलेंस कमेटी में अहम पद दिया।फिर शाहीन ने ही 2022 में पुलवामा के डॉ. उमर नबी, डॉ. सज्जाद अहमद की नौकरी लगवाई। यही नहीं, उसने सज्जाद को कॉलेज कमेटी का सदस्य बनवाया। कहा जाता है कि शाहीन व सज्जाद का यूनिवर्सिटी में अच्छा-खासा प्रभाव था।
अलफलाह के डॉक्टरों के वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के हर सदस्य का काम बंटा हुआ था। मुजम्मिल आंतक के नेटवर्क में मुस्लिमों की भरती करता था। शाहीन आर्थिक मदद कर ब्रेनवॉश करती थी, तो डॉ. उमर उनके इस्तेमाल की साजिश रचता था।
मुजम्मिल अलफलाह के अस्पताल आए मरीजों और कर्मचारियों के घर मदद के बहाने जाता था। उसका पहला शिकार धौज गांव में उमर को कमरा किराए पर देनेवाली अफसाना का जीजा शोएब हुआ।
किसी परिवार में किसी के बीमार होने पर शोएब परिवार के लोगों को फोन लगाता था।
वहीं, धौज से गिरफ्तार साबिर से भी मुजम्मिल ने दोस्ती बढ़ाई। मुजम्मिल इसकी दुकान से कश्मीरी छात्रों के लिए सिम खरीदी की।धौज का बाशिद डॉ. उमर की लाल ईको स्पोर्ट्स कार बहन के घर छिपाकर आया था।
बाशिद की मुजम्मिल से मुलाकात अलफलाह अस्पताल में पिता के इलाज के दौरान हुई थी। उमर के कहने पर शाहीन ने बाशिद की नौकरी लगवाई। तब से बाशिद माड्यूल का सदस्य बन गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, फरीदाबाद के धौज गांव में रखे आटा चक्की में डॉ. मुजम्मिल यूरिया पीसकर पहले बारीक करता था, फिर मशीन से उसे रिफाइन करता था।
इसके बाद अलफलाह यूनिवर्सिटी के लैब से चुराए गए कैमिकल मिलाकर विस्फोटक बनाता था। इस आटा चक्की को मुजम्मिल ड्राइवर के घर रखा था। इसे वह बहन का दहेज बताता था। मुजम्मिल की निशानदेही पर ड्राइवर को भी दबोचा गया है।
बाद में वह चक्की धौज ले गया। मुजम्मिल जिस कमरे में यूरिया पीसता था, वहीं से 9 नवंबर को पुलिस को 360 किलो अमोरिनयम नाइटेªट व अन्य विस्फोटक मिले।
उसने धौज से 4 किमी दूर फतेहपुरतगा के दूसरे कमरे में 2558 किलो यूरिया जमा कर रखा था। इसी कमरे से यूरिया की बोरियां धौज ले जाता था।
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भाग-8
इंटरनेट पर मजहबी कट्टरता-
देश के चिकित्सकीय व तकनीकी पेशेवरों में मजहबी कट्टरता बढ़ाकर उन्हें ‘सफेदपोश आतंकी’ यानी वाइट कॉलर टेररिस्ट में तब्दील करने की बदनीयती से वैश्विक स्तर पर कई वेब पोर्टल लंबे अर्से से संचालित हैं।स्थिति ये हो गई है कि अब यही पोर्टल आतंकी व आत्मघाती हमले के तरीके सीखा रहे हैं।
दहशतगर्दाना संगठनों की ऐसी तमाम नापाक कोशिशों का बेजा असर ताजातरीन दिल्ली धमाके व गिरफ्तारियों में देखा-समझा जा सकता है।
यह बेहद चिंताजनक है कि समाज में सम्मानजनक हैसियत रखनेवाले डॉक्टर व इंजीनियर अब नई पीढ़ी के आतंकी बनकर उभर रहे हैं।आतंकी संगठनों की वेबसाइट पर 16 अक्टूबर व 5 नवंबर को भारतीयों को दी गई धमकियों को खुफिया एजेंसियों ने गंभीरता से लिया है।
उनकी खास धमकी की खासियत है,‘‘हमारी माएं हमपर रोएं, अगर हम अपने पैगम्बर की हिफाजत न कर सकें।’’
ऐसे भड़काऊ व जज्बाती बयानों से आतंकी संगठन अलकायदा ‘इंडियन सबकॉन्टिनेंट एक्यूआईएस’ की वेबसाइट नवा-ए-गजवा-ए-हिंद ने 16 अक्टूबर 2025 को छह पेज का संदेश लिखा।देश में ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद की आड़ में सांप्रदायिक हिंसा के लिए उकसाने की साजिश इसी कड़ी का नमूनाभर है।
फिर हिंदुओं को धमकाया गया,‘‘अपने लोगों को रोको। वरना गलियों में लगी आग पूरेे मुल्क में फैलेगी और सब कुछ राख कर देगी।’’
स्थिति ये हो गई है कि देश के विश्वविद्यालयों, अस्पतालों में जो वाइट कॉलर टेररिस्ट पैदा हो रहे हैं, वे इंटरनेट, मोबाइल और मीडिया माध्यमों से बहुत-कुछ सीख रहे हैं। जबकि सरकार का इसपर पूरी तरह से नियंत्रण होना चाहिए था, जो नहीं है।
आखिर हमारी केंद्र सरकार भड़काऊ कंटेंट रोकने में क्यों लाचार है? यदि सरकार सख्ती के साथ ऐसे कंटेंटों को रोके, तो आतंक की पाठशालाओं व नर्सरियों में टेरेरिस्ट एक्टीविटी पर काफी-कुछ विराम लग सकता है।यह कितनी बड़ी विडंबना है कि जिन चिकित्सकों के हाथ मानव जीवन को बचाने के लिए प्रशिक्षित होने चाहिए, वे आहिस्ते-आहिस्ते कट्टरपंथ के ऐसे दलदल में फंसते जा रहे हैं, जहां सेवा का धर्म विनाश के कर्म में तब्दील होता जा रहा है।
सोशल मीडिया ने इन चिकित्सकों के दिलदिमाग में ‘शरीयत व शहादत’ का गौरव’ पैदा किया, जो जैश जैसे आतंकी संगठन से बेतरह प्रभावित होते रहे।
अब, पाकिस्तान केवल आतंकियों का पनाहगाह नहीं रहा, अपितु डिजिटल प्रचार, ऑनलाइन भरती और थोथे बुद्धिमत्ता से भारत के विरूद्ध वैचारिक युद्ध छेड़ दिया है।पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ऐसे आनलाइन मंच प्रदान कर रही है, जो शिक्षित युवाओं के मन-मस्तिष्क में ‘धर्मरक्षक’ बनने का भ्रम पैदा कर रही है।
इसकी खास वजह यही है कि आईएसआई व पाकिस्तान के कट्टरपंथी कुरान की भाषा को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं और उन्हें आतंकी बनने के लिए उकसा रहे हैं। जबकि कुरान में किसी की जान लेना सर्वथा निंदनीय माना गया हैयही वजह है कि सऊदी अरब जैसे मुल्कों ने अपने देश में कट्टरपंथ को रोकने के लिए ऐसे धर्मप्रचारकों को नियुक्त किया है, जो कुरान की सही-सही व्याख्या कर सकें, ताकि युवाओं व लोगों को कट्टरपंथ की ओर से जाने से रोका जा सके। इस प्रकार के प्रयासों से सऊदी अरब कट्टरपंथी विचारधारा से दूर है।
क्या भारत में भी ऐसे प्रयोग नहीं किए जाने चाहिए? बल्कि तमाम राज्य सरकारों सहित केंद्र सरकार को इस रीति-नीति को अपनाना चाहिए और मुसलमानों में कुरान की सही जानकारी प्रचारित की जानी चाहिए। इससे जहां देश में चरमपंथ पर विराम लगेगा, वहीं देश में असल भाईचारे का विकास होगा।
लाल किले के पास की घटना से यह साबित हो रहा है कि चरमपंथियों के पास सिर्फ बम व बारूद का गोला नहीं है, उनके पास लंबा-चौड़ा वैचारिक कवच भी है, जो गाहे-बगाहे लोगों के मुख में आ जाता है।अरशद मदनी का हाल में दिया गया वक्तव्य इसी तथ्य की पुष्टि करते हैं कि चरमपंथ की वैचारिक धारणा कितनी गहरी है, जो खासवर्ग को उकसाने का काम करती रहती है?
यही वजह है कि विश्वविद्यालयों के प्लेटफार्म, सोशल मीडिया, वैश्विक संस्थाओं के विमर्ष भारत-विरोधी प्रचार को हवा देने का काम करते रहते हैं। भारत में कुछ राजनीतिक दल व बुद्धिजीवी ऐसे भी हैं, जो इनकी वैधता को स्वीकारते रहते हैं।
ऐसे लोग भूलकर भी चरमपंथी हमलों की आलोचना, निंदा या भर्त्सना नहीं करते, बल्कि इसकी आढ़ में सरकार, सेना व सुरक्षा एजेंसियों को घेरने का कुत्सित प्रयास करते रहते हैं कि हमारी सुरक्षा एजेंसियां, खुफियातंत्र व सरकार कर क्या रही है?यही वजह है कि देश ने ‘साझा वैचारिक प्रतिरोध’ कभी नहीं किया। कई पार्टियां व लोग तो पाकिस्तान की भाषा बोलने लगते हैं, जिससे पाकिस्तान को उनके वक्तव्यों की आढ़ में छुपने का मौका मिल जाता है कि देखो, वहां के लोग ही भारतीय सरकार की आलोचना कर रहे हैं।
लेकिन, इन विपक्षियों को समझना होगा कि यहां भारत के तंत्र की आलोचना करने से काम नहीं चलनेवाला है। क्योंकि आतंकवाद किसी का सगा नहीं होता। जब देश में आतंकवादी घटनाओं से खूनखराबा होगा, तो वे भी नहीं बच पाएंगे, जो आतंकवाद पर कभी मुंह नहीं खोलते।
तुर्की और पाकिस्तान के मध्य विगत वर्षाें में खुफिया, रणनीतिकव सैन्य सहयोग काफी मजबूत हुआ है। इसका ताजातरीन उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखने को मिला, जिसमें तुर्की सीधे पाकिस्तान को हथियारों सहित सहयोग कर रहा था।
वहीं चीन की कपटनीति जगजाहिर है। एक ओर वह दोस्ती का हाथ बढ़ाता रहता है, तो दूसरी ओर आतंकवादियों का सुरक्षा कवच यूएन में बन जाता है। ऑपरेशन सिंदूर में उसी के ज्यादातर हथियार तबाह हुए हैं। यह भी किसी से छिपा नहीं है।अतः, भारत सरकार को चाहिए कि वह हर मंच पर चीन व तुर्की जैसे देशों की दोगली नीति को उजागर करते हुए उनको बेनकाब करता रहे।
साथ ही, खुफिया एजेंसियों को तकनीकी उपकरणों, साइबर ट्रैकिंग, फॉरेंसिक विश्लेषण और निगरानी के आधुनिक संसाधनों को सशक्त करना बेहद जरूरी हो गया है।
सबसे बड़ी बात शिक्षण संस्थानों व अस्पतालों के वित्तपोषण पर भी कड़ी निगरानी रखने की है। इतना ही नहीं, हमारे न्यायिक प्रणाली को भी धारदार बनकर समयानुकूल त्वरित न्याय के लिए काम करना होगा।ऐसा कतई स्वीकार्य नहीं है कि पुलिस-प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भारी मशक्कत के बाद आतंकियों को पकड़े और तारीख-दर-तारीख के पंेच में फंसाकर और गवाहों की अनदेखी व अनुपस्थिति के चलते उन्हें बचने का मौका अदालतों से मिल जाए।--0--
भाग-9
मास्टरमाइंड-
सुरक्षा एजेंसियों को जांच में पता चला है कि धमाके में मारा गया डॉ. उमर मोहम्मद जैश-ए-मोहम्मद का टेंªड फिदायीन टेरेरिस्ट था। उसने दिल्ली के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में भी बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रखी थी, परंतु सुरक्षा एजेंसियों ने इनकी समूची योजना को फेल कर दिया।इसका खुलासा गिरफ्त में आए आतंकी मुजम्मिल ने किया है। सुरक्षा एजेंसियों की केस डायरी कहती है कि हमले का मास्टरमाइंड डॉ. उमर ही था। उसने विस्फोटक बनाने के लिए एसीटोन (नेल पॉलिश रिमूवर) और पिसी हुई चीनी का इस्तेमाल किया था।
केस डायरी के अनुसार, मुजम्मिल ने कहा,‘‘विस्फोटक की एक खेप हम जम्मू-कश्मीर ले जानेवाले थे, लेकिन प्लान फेल हो जाने से अधर में लटक गई। 15 अक्टूबर के आसपास जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 3 लोगों को पकड़ लिया। इसमें एक प्रिटिंग प्रेसवाला और दो पोस्टर लगानेवाले लड़के थे। इन्होंने मुफ्ती इरफान का नाम लिया और वह पकड़ा गया। इसी के साथ हमारी योजना का पर्दाफाश हो गया।आतंकी मुजम्मिल ने यह भी खुलासा किया,‘‘मेरी और डॉक्टर शाहीन की मुलाकात अलफलाह यूनिवर्सिटी में ही हुई थी। मैं उससे प्रेम करने लगा और हमने 2023 में निकाह कर लिया। शाहीन ने अपने पूरे 25 लाख रुपये आतंकी मॉड्यूल के लिए दे दिए थे। इसमें से 10 लाख उसके खर्च के लिए थे। मैं उसी की स्विफ्ट कार को इस्तेमाल करता था।’’
मुजम्मिल के अनुसार,‘‘डॉ. शाहीन के तलाक के बाद वह और शाहीन मियां-बीवी की तरह रह रहे थे। खोड़ी जमालपुर गांव में किराए के मकान में भी दोनों कई बार गए और वहां ठहरे। यह निकाह अलफलाह यूनिवर्सिटी परिसर स्थित मस्जिद के मौलवी इस्तियाक ने कराया था।’’मौलवी इस्तिहाक भी सुरक्षा जांच एजेंसियों की हिरासत में है।
मुजम्मिल ने यह भी कबूला,‘‘उमर के दिमाग में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के लिए बहुत नफरत थी। वह फरीदाबाद में स्टोर कर रखा गया विस्फोटक लेकर जम्मू-कश्मीर जाने की तैयारी कर रहा था। इसके साथ हमें भी जाना था।’’
मुजम्मिल ने आगे बताया,‘‘उमर वहां कुछ बड़ा करने का सोच रहा था। वह नूंह से यूरिया लेकर आता था और उससे विस्फोटक बनाने के लिए टेस्टिंग खुद अलफलाह यूनिवर्सिटी के कमरा नंबर 4 में करता था। वह बम बनाने में मास्टर था।’’एजेंसियों को उमर के एक सूटकेस से साजिश के कई सबूत मिले हैं। इन सबूतों के मुताबिक, इस साजिश में मुजम्मिल, उमर, अदील, शाहीन और मुफ्ती इरफान शामिल थे।
मुजम्मिल ने कहा,‘‘हम 5 लोग मिलकर बड़ी साजिश कर रहे थे। हमारा हेड उमर ही था। हमने एक पूरा ग्रुप बनाया हुआ था। इसमें सिर्फ चायनीय भाषा में बात होती थी।’’एनआईए की टीम ने 28 नवंबर 2025 की रात अलफलाह यूनिवर्सिटी के हॉस्टल के कमरा नंबर 32 की आलमारी से 18 लाख रुपया बरामद किया।
एजेंसी को आशंका हैं कि यह रुपया वाइट कोट टेरर मॉड्यूल की फंडिंग के लिए रखा गया था। नकदी मिलने के बाद एनआईए ने शाहीन की अलफलाह यूनिवर्सिटी में मूवमेंट की भी मैपिंग की। उसे मेडिकल वार्ड, क्लासरूम, डॉक्टर के कैबिन समेत कई जगहों में ले जाया गया, ताकि उसके रोजमर्रा के संपर्कों और संभावित सहयोगियों की पहचान की जा सके।
विदित हो कि एनआईए डॉ. शाहीन को पहले उन दुकानों में लेकर गई थी, जहां से विस्फोटक बनानेवाले कैमिकल खरीदे जाने का दावा किया गया था।
उधर एनआईए ने पूछताछ के लिए नैनीताल जिले के हल्द्वानी से 29 नवंबर को दो लोगों को हिरासत में लिया। एनआईए की टीम ने बनभूलपुरा क्षेत्र की बिलाली मस्जिद से मौलाना आसिम और जवाहर निवासी एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया है।
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वहीं, एनआईए ने 1 दिसंबर 2025 को देश के आठ स्थानों पर छापेमारी की।
एनआईए ने लखनऊ के अलावा जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड, शोपियां, पुलवामा के कोइल, चंदगाम, मलंगपोरा, संबूरा और कुलगाम में छापेमारी की कारवाई की।
कश्मीर में मौलवी इरफान अहमद, डॉ. अदील, डॉ. मुजम्मिल, आमिर और जसीर बिलाल के घर छापेमारी की, तो लखनऊ में एक टीम आतंकी डॉ. शाहीन के घर पहुंची।
वहां शाहीन के पिता सईद अंसारी व बड़े भाई परवेज से दो घंटे तक पूछताछ की।घर की तलाशी में इलेक्ट्रानिक डिवाइस, दस्तावेज और संदिग्ध सामग्री को कब्जे में लिया। एनआईए का मानना है कि शाहीन के नेटवर्क ने दिल्ली ब्लास्ट के लिए संसाधन और लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध करवाए थे।
जम्मू-कश्मीर में एनआईए, स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमों ने छापेमारी की। जम्मू-कश्मीर पुलिस और राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) पहले ही जैश मॉड्यूल की फंडिंग, कॉन्टेक्ट नेटवर्क और ब्लास्ट प्लानिंग से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।अब, एनआईए ने उसी जांच को आगे बढ़ाते हुए बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया है।
वस्तुतः, एनआईए को संदेह है कि दिल्ली ब्लास्ट की साजिश रचनेवाला मुख्य आरोपी इन्हीं नेटवर्क के संपर्क में थे। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ आरोपी वाइट कॉलर पेशे में होने के बावजूद मॉड्यूल को तकनीकी मदद और ठिकाने उपलब्ध करवाते थे।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि छापों के दौरान डिजिटल डिवाइस, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन और संदेहास्पद चैट हाथ लगे हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
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वीरेंद्र देवांगन
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