Chapter 1
कहते हैं की कसमें तोड़ने के लिए ही बनती हैं। जो कसमें हमारे कर्तव्य के आड़े आए उन्हें तोड़ना जरूरी हो जाता है। यह कसम भी कुछ इसी तरह के रहस्य पर आधारित थी।
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पात्र: ●कृषा
●तनिष्क
अगले दिन तनिष्क जब अपने दो दोस्तों से मिलने गया तो उन्होंने तनिष्क को बताया कि सरकार को फौज के लिए आदमियों की जरूरत है। तो वह दोनों फौज में भर्ती होने के लिए फॉर्म भरने जा रहे हैं। उन्होंने तनिष्क को भी फौज में भर्ती होने की सलाह दी और तनिष्क मान गया और उसने कहा कि मैं मां से पूछ कर बताऊंगा। घर जाकर तनिष्क ने अपनी मां कृषा से इस बारे में बात की। यह सब सुनकर कृषा बहुत डर गई थी, मानो जैसे उसके पैरों तले जमीन ही सरक गई। इस बात को ना दर्शाते हुए कृषा ने तनिष्क से कहा कि यह सब बकवास है। तुम्हें इन सब में पढ़ने की कोई जरूरत नहीं है, चुपचाप कोई और काम करो।
कृषा जोर-जोर से रोने लगी और कहने लगी कि "क्यों अतीत का साया मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा है? क्यों भाग्य वही कुर्बानी दोबारा से मांग रहा है जो मैंने 21 साल पहले दी थी? मैं उस कसम को पूरा करूंगी। इस बार मैं इतिहास को दोहराने नहीं दूंगी। तनिष्क कृषा को चुप कराता है और कहता है कि "मां आप यह सब क्या कह रही हो"? तनिष्क नहीं समझ पा रहा था कि उसकी मां का ऐसा कौन सा अतीत है जिससे वह भाग रही है। क्या है इस कसम का रहस्य ? उसके बहुत पूछने पर आखिर कृषा ने यह बताया कि उसके (तनिष्क के) पिता भी एक फौजी थे, जिनकी जंग में बहुत दर्दनाक मौत हुई थी। सिर्फ इतना ही नहीं उस जंग में उसके पिता ने जिन आतंकवादियों को मारा था, उन आतंकवादियों के साथियों ने उसके परिवार का भी पीछा नहीं छोड़ा था उन सबको मार दिया था। उस वक्त कृषा बहुत मुश्किल से अपनी और तनिष्क की जान बचाकर वहां से भागी थी।
उस दिन कृषा ने कसम ली कि वह अपने बेटे तनिष्क को हर खतरे से दूर रखेगी। यह सब सुनकर तनिष्क बहुत ही भावुक हो गया और उसने अपनी मां के आंसू पहुंचते हुए कहा कि "मां! मैं तो तेरा चांद हूं ना? और चांद हमेशा रहता है ना? अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए प्राण त्यागना तो बहुत बड़ा सौभाग्य है जो हर किसी को नहीं मिलता। पर जिसे भी यह सौभाग्य मिलता है वह तो मर कर भी अमर हो जाता है। जो देश अपनी जनता की हमेशा रक्षा करता है आज जब उसे अपनी जनता की जरूरत है तो क्या इस मुश्किल की घड़ी में हमें उसका साथ नहीं देना चाहिए?"
इस बात का एहसास होने पर कृषा तनिष्क को फौज में भर्ती होने की इजाजत दे देती है। अगले दिन तनिष्क अपने दोस्तों के साथ जाकर फौज का फार्म भर देता है।एक महीने के बाद उन्हें भारतीय सेना से अपना नियुक्ति पत्र मिलता है। भारतीय सेना की बस जंग के लिए उसे लेने के लिए उसके घर पर आती है। कृषा उसे बहुत ही गर्व के साथ गाड़ी तक छोड़ने जाती है और कहती है कि मुझे तुम पर गर्व है। गाड़ी तनिष्क को लेकर चली जाती है और कृषा की आंखों से आंसू बहने लगते हैं पर पर उसे अपने बेटे तनिष्क पर गर्व है।
THE END
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लेखक का नोट: जिस तरह सारे फौजी अपना घर-परिवार और खुशियाँ छोडकर जंग लाडने जातें है देश की रक्षा करते हैं ताकी पूरा देश (हम सब) सुरक्षीत रहे, जिस तरह वह हमारे लिए अपनी जान खतरे में डालते हैं! देश के उन सभी फौजियों को मेरा दिल से सलाम!
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Concept & Written by: Nitish Kumar @peninstinct








