प्रकृति का न्याय
प्रकृति का न्याय
प्रकृति के न्याय का हुआ पुरे विश्व मे प्रसार, जिससे भयभीत हुआ सारा संसार,
प्रकृति की ये कैसी मार, जिस भवर मे फ़सा सारा संसार,
प्रकृति के न्याय की चली तलवार, जिससे डरा सारा संसार,
प्रकृति के रक्षक बनते थे मानव, अब अपना ही जीना किया दूसूआर,
प्रकृति के रक्षक बनते गए भक्षक, ना समझ पाए प्रकृति के अस्तित्व आधार,
अब हुआ पुरे विश्व मे प्रकृति के न्याय का विस्तार, प्रकृति की ये कैसी मार, -2
जिस डर मे जी रहा है मानव, उस डर का तो मानव ने ही किया अविष्कार,
प्रकृति का जीना किया दुसवार, अब प्रकृति कर रही अपना वार,
प्रकृति ने किया अपने न्याय का विस्तार, जिससे भयभीत हुआ सारा संसार,
प्रकृति के दर्द का आमना- सामना अब करेगा सारा संसार,
प्रकृति बनी अपने न्याय का आधार, जिसका सामना कर रहा सारा संसार,
प्रकृति की तड़प का सामना, अब कर रहा सारा संसार,
प्रकृति की ये कैसी मार -2
प्रकृति रोती रही नदियों के सुखने से, प्रकृति जलती रही जंगलो के कटने से,
प्रकृति तड़पती रही वन्य जीवों के मिटने से, प्रकृति चीखती रही हवा को प्रदूषित होने से,
आज सिखाया सिख प्रकृति ने, अपने अस्तित्व का आधार,
प्रकृति ने समझाया अब ना करो हमसे खिलवाड़, मै (प्रकृति) हूँ पूरे विश्व की आधार,
पुरे विश्व की जननी मैं और, मुझ पर ही किया तुमने प्रहार
अपने मे ही खोये हो, कहते हो कि कर रहे हो अपने कर्मो का विस्तार,
इतने आगे बढ़ते-बढ़ते, किसको मिटाया तुमने बार -बार,
अब तुम ही बताओ हे इंसान, किससे छिना उसके अस्तित्व आधार
प्रकृति की ये कैसी मार, जिस भवर मे फ़सा सारा संसार -2








