अंश:हृदय का मस्तिष्क से

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Summary

काव्य संग्रह का सारांश: अंश: हृदय का मस्तिष्क से — यह संग्रह एक भावनात्मक यात्रा है, जहाँ हृदय और मस्तिष्क के बीच चल रहे सूक्ष्म संवादों को कविताओं के माध्यम से जीवंत किया गया है। इसमें प्रेम, एकतरफा चाहत, विरह, बचपन की स्मृतियाँ, और आत्ममंथन जैसे विविध भावों को हृदयांश महर्षि "हृदय" ने अपने शब्दों में बुनकर प्रस्तुत किया है। यह केवल प्रेम का वर्णन नहीं, बल्कि उन अनकहे एहसासों का संग्राह भी है जो कभी दिल में चुपचाप जन्म लेते हैं और कभी मस्तिष्क की सीमाओं को लांघने की चेष्टा करते हैं। इस कविता संग्रह में प्रेम के साथ-साथ जीवन के अन्य अनेक पहलुओं—जैसे अकेलापन, स्मृति, संघर्ष, और चेतना—को भी समाहित किया गया है। यह संग्रह न केवल वर्तमान में लिखी गई रचनाओं को समेटे हुए है, बल्कि भविष्य में आने वाले कविताओं और भावों के अंशों का भी सतत संकलन रहेगा। हर कविता, एक अंश है — हृदय से निकली, मस्तिष्क तक पहुँची, और पाठक के अंतर्मन को छूने को तत्पर।

Status
Complete
Chapters
17
Rating
5.0 1 review
Age Rating
13+

कविता-बोलो ना


तुमसे मिले थे जब, दिल में बस गई थी खुशियाँ,

अब तो बस यादों की हैं, तन्हा रह गई हैं सिसकियाँ।

ख्वाबों में जो रंग भरे थे, वो अब हैं बेरंग,

तेरे बिना ये जिंदगी, जैसे हो कोई संग।

तुम्हारे साथ बिताए पल, अब हैं बस एक कहानी,

तेरे बिना ये दिल है, जैसे सूनी वीरानी।

छोड़ गयी तुम मुझे, बेखुदी में, बेगाने,

अब मैं खुद से ही लड़ूँ, इस दर्द को फसाने।

तुम्हारी हंसी की गूंज, अब सुनाई नहीं देती,

दिल के कोने में बस, तेरी यादें दिखाई नही देती।

चलो अब अलविदा कह दें, इस रिश्ते की कहानी को,

तुम जाओ अपनी राह, मैं चलूँ अपनी वीरानी को।

सुनो...

अगर कुछ चाहिए हो तो बताना....

-हृदयांश❤️