कविता-बोलो ना
तुमसे मिले थे जब, दिल में बस गई थी खुशियाँ,
अब तो बस यादों की हैं, तन्हा रह गई हैं सिसकियाँ।
ख्वाबों में जो रंग भरे थे, वो अब हैं बेरंग,
तेरे बिना ये जिंदगी, जैसे हो कोई संग।
तुम्हारे साथ बिताए पल, अब हैं बस एक कहानी,
तेरे बिना ये दिल है, जैसे सूनी वीरानी।
छोड़ गयी तुम मुझे, बेखुदी में, बेगाने,
अब मैं खुद से ही लड़ूँ, इस दर्द को फसाने।
तुम्हारी हंसी की गूंज, अब सुनाई नहीं देती,
दिल के कोने में बस, तेरी यादें दिखाई नही देती।
चलो अब अलविदा कह दें, इस रिश्ते की कहानी को,
तुम जाओ अपनी राह, मैं चलूँ अपनी वीरानी को।
सुनो...
अगर कुछ चाहिए हो तो बताना....
-हृदयांश❤️