Chapter 1
Start writing A visiting card
शीर्षक: भूला हुआ कार्ड
अध्याय 1: अतीत से आया एक कार्ड
लंदन — एक ऐसा शहर जहाँ इतिहास की परछाइयाँ आज भी गलियों में घूमती हैं, और आधुनिक इमारतें उन रहस्यों को छुपाए खड़ी हैं जिन्हें समय पीछे छोड़ चुका है।
इसी शहर में रहता था एक युवा छात्र — विल। एक शांत, आत्ममग्न और गहराई से सोचने वाला लड़का, जिसे किताबों से बेहद लगाव था। वह अक्सर पुरानी लाइब्रेरियों में जाकर उन किताबों में खुद को खो देता, जिनमें दुनिया के सबसे पुराने रहस्य छुपे होते।
एक दिन सुबह वह कॉलेज से निकलकर हमेशा की तरह लाइब्रेरी पहुँचा। अंदर की हवा में पुराने पन्नों और स्याही की जानी-पहचानी महक तैर रही थी। वह धीरे-धीरे किताबों की कतारों के बीच चलता गया, अपनी उंगलियों को धूल जमी किताबों की पीठ पर फिराते हुए।
तभी उसकी नज़र एक बेहद पुरानी किताब पर पड़ी। उसका चमड़ा जर्जर हो चुका था, और शीर्षक तक पढ़ना मुश्किल था। फिर भी, उस किताब में कुछ ऐसा था जो विल को अपनी ओर खींच रहा था।
उसने किताब उठाई और एक कोने में जाकर बैठ गया।
विल घंटों उस किताब में खोया रहा। किताब रहस्यमयी थी — जैसे किसी और ही दुनिया की गाथा कह रही हो। पन्ना दर पन्ना वह उस किताब में और गहराई से डूबता चला गया।
फिर, जैसे ही उसने एक और पन्ना पलटा, अचानक एक तेज़ हवा का झोंका आया। किताब के बीच से एक पुराना विज़िटिंग कार्ड उड़कर उसके पैरों के पास गिरा।
विल ने झुककर वह कार्ड उठाया। कार्ड पर एक नाम, एक तारीख, और एक पुराने किले का ज़िक्र था। वह चौंक गया।
“ये तो सौ साल पुराना किला है… उस समय विज़िटिंग कार्ड कहाँ होते थे?”
उसके भीतर जिज्ञासा की चिंगारी भड़क उठी।
उसने तुरंत अपना लैपटॉप खोला और उस किले के बारे में जानकारी खोजना शुरू किया। तभी उसे कुछ अजीब सा महसूस हुआ — जैसे कोई उसके कानों में फुसफुसा रहा हो। लाइब्रेरी में एक हलचल सी थी। कोई छाया, कहीं से उसे देख रही थी। मगर उसने इसे मन का भ्रम समझकर दोबारा किताब की ओर ध्यान दिया।
जब उसने घड़ी देखी, तो चौंक गया — सुबह से शाम हो चुकी थी। वह बिना रुके पढ़ता रहा था।
उसी समय एक महिला, लाइब्रेरी की देखरेख करने वाली, उसके पास आई और बोली,
“तुम सुबह से इस किताब में डूबे हो… अब घर जाओ। लाइब्रेरी बंद होने वाली है।”
विल हैरान था कि कैसे समय का उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं हुआ। उसने एक हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाया और धीरे-धीरे लाइब्रेरी से बाहर निकल गया — पर उस कार्ड का रहस्य अब उसकी सोच में समा चुका था।