भोमिया जी by Pankaj Kumar at Inkitt
Customize readability
Aa

भोमिया जी

All Rights Reserved ©

Summary

In the heart of Rajasthan, where golden dunes meet ancient traditions, every village has a silent guardian—Bhomiyaji, the protector of the land, the people, and their faith. When a young man returns to his ancestral village after years in the city, he dismisses the centuries-old beliefs surrounding Bhomiyaji as mere folklore. But as unexplained events begin to unfold—strange warnings, mysterious dreams, and dangers that seem to vanish before disaster strikes—he is drawn into a forgotten legacy hidden beneath the sands of time. Guided by village elders, ancient traditions, and the unwavering faith of ordinary people, he embarks on a journey that uncovers the true meaning of courage, sacrifice, and devotion. Bhomiyaji is not just a story about a guardian deity—it is a celebration of Rajasthan's rich heritage, its timeless traditions, and the unbreakable bond between faith and humanity. A powerful blend of folklore, mystery, history, and spiritual adventure, this novel reminds us that some protectors never truly leave—they simply watch over us in silence.

Status
Complete
Chapters
12
Rating
n/a
Age Rating
16+

भोमिया जी कौन हैं, क्या है उनकी परंपरा

धरा, धर्म अर मान री, थां राखो लाज।

भोमियाजी रा नाम सूं, टळै सकल समाज॥

रेत के धोरों के बीच, जहाँ हवा दिन भर मिट्टी को उड़ाती-बिखेरती रहती है, और जहाँ रास्ते अक्सर खुद अपनी दिशा भूल जाते हैं — वहाँ राजस्थान के हर गाँव की सीमा पर एक छोटा सा चबूतरा मिल जाएगा। कहीं तीन ईंटों का, कहीं संगमरमर का, कहीं सिर्फ एक पत्थर जिस पर सिंदूर लगा हो। उस चबूतरे पर अक्सर एक मूर्ति होती है — घोड़े पर सवार किसी योद्धा की, या कभी-कभी सिर्फ एक तलवार, एक त्रिशूल, या पैरों के निशान। और उस चबूतरे को गाँव वाले एक ही नाम से पुकारते हैं — थान

यह थान जिसकी रक्षा में बना होता है, उसे कहते हैं — भोमिया जी।

दीपक जब गाँव लौटा, तो उसने अपने घर के पास वाले चौराहे पर ऐसा ही एक थान देखा — अंधेरे में एक अकेला दीया जलता हुआ, जिसे बरसों से कोई बुझने नहीं देता था। उसी रात, अपनी दादी से पूछते-पूछते उसने जो कहानी सुनी, वह सिर्फ एक गाँव की कहानी नहीं थी — वह पूरे राजस्थान की एक ऐसी परंपरा की कहानी थी, जो सदियों से रेत में जड़ें जमाए बैठी है।

“भोमिया माने भूमि का रखवाला,” दादी ने चरखा एक तरफ रखते हुए कहा था। “भोम यानी भूमि, धरती। जो धरती की, गाँव की, सरहद की हिफाज़त करे, वो भोमिया।”

यह शब्द ही अपने आप में एक पूरा अर्थ समेटे हुए है। जहाँ बड़े शहरों में देवी-देवताओं की कल्पना अक्सर आसमानी, दूर की, अमूर्त होती है — भोमिया जी बिल्कुल ज़मीनी हैं। वे किसी दूर के स्वर्ग में नहीं बैठते, वे गाँव की सरहद पर, कुएँ के पास, रास्तों के मोड़ पर खड़े रहते हैं। वे “क्षेत्रपाल” हैं — क्षेत्र यानी इलाके के रखवाले।

राजस्थान की लोक-आस्था में यह परंपरा बहुत पुरानी है, और यह अकेली नहीं है। जिस तरह मारवाड़ में लोग तेजाजी को सांप के ज़हर से रक्षा के देवता मानते हैं, जिस तरह मेवाड़ में पाबूजी को ऊँटों और पशुधन के रखवाले के रूप में पूजा जाता है, जिस तरह गोगाजी को सर्प-देवता और वीर योद्धा दोनों रूपों में सम्मान मिलता है — उसी परंपरा की एक शाखा है भोमिया जी। फर्क सिर्फ इतना है कि तेजाजी, पाबूजी, गोगाजी जैसे देवता पूरे क्षेत्र में, कई-कई गाँवों में एक जैसे पूजे जाते हैं, पर भोमिया जी की खासियत यह है कि हर गाँव का अपना भोमिया अलग होता है।

यही वह बात थी जिसने दीपक को सबसे ज़्यादा चौंकाया, जब उसने पहली बार यह सुना।

“मतलब दादी, दूसरे गाँव में जो भोमिया हैं, वो हमारे भोमिया से अलग हैं?”

“हाँ बेटा, हर गाँव का भोमिया उस गाँव का अपना है। अपनी अलग कहानी, अपना अलग नाम, अपनी अलग शक्ल।”

यह बात समझने के लिए दीपक को थोड़ा गहरे जाना पड़ा। दिल्ली में उसने जिन धर्मों, जिन आस्थाओं को देखा था, वहाँ अक्सर एक केंद्रीकृत ढांचा होता था — एक मंदिर, एक मूर्ति, जिसकी नकल हज़ारों जगह होती थी, पर मूल भावना एक ही रहती थी। भोमिया जी की परंपरा इससे बिल्कुल अलग थी। यह एक विकेंद्रीकृत (decentralized) आस्था-प्रणाली थी — हर गाँव अपने खुद के इतिहास से, अपने खुद के किसी वीर पुरुष या वीर स्त्री से, अपना भोमिया गढ़ता था।

तो आखिर भोमिया “बनता” कैसे है? इसका जवाब भी दादी ने बड़ी सहजता से दिया, मानो यह दुनिया की सबसे सीधी बात हो।

“जो कोई भी गाँव की, पशुओं की, सरहद की, या किसी मुसीबत में फँसे लोगों की जान बचाते हुए खुद अपनी जान दे दे — वो भोमिया बन जाता है।”

यह एक “वीर पूजा” (Hero worship) परंपरा है, जो मृत्यु के बाद देवत्व प्रदान करती है। पर यह देवत्व किसी पौराणिक चमत्कार से नहीं आता — यह आता है बलिदान से। कोई किसान जिसने डाकुओं से लड़ते हुए गाँव के मवेशी बचाए और खुद मारा गया। कोई चरवाहा जिसने जंगल की आग में बच्चों को बचाया और खुद जल गया। कोई स्त्री जिसने अकाल के समय पानी का कोई नया स्रोत खोजा और थकान से चल बसी। ऐसे हर इंसान को गाँव अपनी सामूहिक याद में जगह देता है — और वह याद, समय के साथ, एक थान बन जाती है, एक पूजा बन जाती है, एक भोमिया बन जाता है।

“तो यह भगवान नहीं हैं दादी? यह तो... इंसान थे?”

दादी मुस्कुराई। “इंसान ही तो भगवान बनता है बेटा, जब उसका काम इंसानों से बड़ा हो जाए। भोमिया जी कोई आसमान से नहीं उतरे, वो हमारी मिट्टी से उठे हैं।”

यह वाक्य दीपक के दिमाग में देर तक गूंजता रहा। शायद यही वजह थी कि भोमिया जी की पूजा में वह दूरी नहीं होती जो बड़े देवी-देवताओं के साथ अक्सर महसूस होती है। भोमिया जी “अपने” लगते हैं — क्योंकि वे कभी सचमुच किसी के अपने ही थे, किसी के बेटे, किसी के पति, किसी के पिता, किसी के भाई।

भोमिया जी की एक और खासियत है — उनका थान हमेशा एक खास तरह की जगह पर बनाया जाता है। गाँव के बीचोंबीच नहीं, बल्कि सीमा पर, चौराहों पर, या रास्तों के मोड़ पर। क्यों? क्योंकि भोमिया जी का काम है निगरानी — गाँव में आने-जाने वाले हर व्यक्ति, हर खतरे, हर मुसीबत पर नज़र रखना। यह बात दीपक को उस वक्त सिर्फ एक धार्मिक विश्वास लगी थी, पर आगे चलकर, जब उसने खुद इंजीनियर की नज़र से इन थानों की लोकेशन का अध्ययन किया, तो उसे एहसास हुआ कि इसके पीछे कुछ और भी गहरी बात छिपी है — पर वह किस्सा आगे की बात है।

भोमिया जी से जुड़ी मान्यताएँ रोज़मर्रा की ज़िंदगी में गहरे बुनी हुई हैं। कोई भी लंबी यात्रा पर निकलने से पहले, ग्रामीण भोमिया जी के थान पर रुककर नारियल फोड़ते हैं, दीया जलाते हैं, और सुरक्षित यात्रा की मन्नत मांगते हैं। नया घर बनाते वक्त, नया कुआँ खोदते वक्त, नई फसल बोते वक्त — हर “नई शुरुआत” से पहले भोमिया जी को याद किया जाता है। पशु चोरी से बचें, बच्चे बीमार न पड़ें, गाँव पर कोई विपदा न आए — यह सब भोमिया जी की ज़िम्मेदारी मानी जाती है।

पर सबसे गहरी बात, जो दादी ने आखिर में कही, वह यह थी — “भोमिया जी सिर्फ डर से नहीं पूजे जाते बेटा। यह डर की बात नहीं, वादे की बात है।”

“वादे की बात? मतलब?”

“जब गाँव किसी को भोमिया बनाता है, तो गाँव भी एक वादा करता है — कि हम तुझे कभी भूलेंगे नहीं। और भोमिया जी भी एक वादा निभाते रहते हैं — कि वो गाँव को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे। यह लेन-देन नहीं है बेटा, यह एक रिश्ता है। सदियों पुराना रिश्ता।”

यह वाक्य — “यह लेन-देन नहीं, रिश्ता है” — दीपक के मन में कहीं गहरे उतर गया। दिल्ली की दुनिया में, जहाँ हर रिश्ता किसी न किसी “ROI”, किसी फायदे-नुकसान के तराज़ू में तौला जाता था, यहाँ एक ऐसी परंपरा थी जो सैकड़ों साल से बिना किसी “रिटर्न” की उम्मीद के चली आ रही थी — सिर्फ इसलिए, क्योंकि एक गाँव ने अपने किसी वीर को याद रखने का वादा किया था, और उस वादे को निभाया जा रहा था, पीढ़ी दर पीढ़ी, दीया दर दीया।

रात गहरी हो चली थी। दीपक की दादी जम्हाई लेते हुए अंदर जाने को उठी, पर जाते-जाते उसने एक आखिरी बात कही, जो पूरी किताब का बीज बन जाने वाली थी —

“हमारे गाँव के भोमिया जी की भी अपनी कहानी है बेटा। बहुत पुरानी, बहुत सच्ची। कल बाबा लक्ष्मणदास से मिलना — वो ही सुनाएँगे तुझे, वीर भोम सिंह की पूरी दास्तान। फिर तुझे पता चलेगा कि यह सिर्फ पत्थर की मूर्ति नहीं, हमारे खानदान की जड़ है।”

दीपक अकेला रह गया, नीम के पेड़ के नीचे, तारों भरे आसमान के नीचे। दूर, उस चौराहे पर, दीया अब भी जल रहा था — हल्की हवा में काँपता हुआ, पर बुझता नहीं।

उसने पहली बार, बिना किसी सवाल के, उस दिशा में हाथ जोड़ दिए।

कल, वह बाबा लक्ष्मणदास से मिलने जाएगा।



Let Pankaj Kumar know what you thought about this chapter!
Love this

0

Love this

Funny

0

Funny

Spicy

0

Spicy

Suspenseful

0

Suspenseful

Emotional

0

Emotional

Profound

0

Profound

Heartwarming

0

Heartwarming

Shocking

0

Shocking

Good Writing

0

Good Writing

Compelling Plot

0

Compelling Plot

Great Character

0

Great Character

Strong Dialog

0

Strong Dialog

Further Recommendations

Merry Christmas - Adventskalender 2025

Aelyn Raven: Wieder eine tolle Geschichte. Leider bin ich erst jetzt dazu gekommen sie zu lesen, aber das tut der Geschichte keinen Abbruch *g* ich freue mich schon auf den nächsten Adventskalender

Read Now
Charly's Weihnachten

T.M: Ich kann es gar nicht anders sagen also ich liebe diese Geschichte einfach. Sie hat für mich einfach alles was es braucht. Sie hat mich einfach mitgenommen auf eine echt schöne Reise. Danke❤️

Read Now
Destino Secreto

Karin Rogowski: Gut geschrieben und beschrieben. Die Charaktere und Situationen sind stimmig und nehmen einen gefangen. Mich hat das Buch ab der ersten Zeile fasziniert, genau wie die anderen Bücher davor. Sehr guter Schreibstil und eine sehr gute Übersetzung, nebenbei bemerkt. Dankeschön, dass Du Deine Bücher ...

Read Now
Stripped Shadows

bm: Sehr gutes Schreiben. War total in der Geschichte und habe mitgefiebert, wie es weiter geht. Konnte das Buch kaum zur Seite legen Sehr spannend geschrieben. Freue mich auf Band 2 Hätte gern das Ruby mit Beiden lebt.Und es fehlen noch sehr viel Antworten

Read Now
My Playboy Roommate

luisasabato: Spitze! Sehr zu empfehlen und hoffe auf ein Happy End

Read Now
Luna de Verano - Die Gefährtin des Alphas (Band 1)

Jana: Ich mag die Stärke von Eleonora, teilweise wird etwas tief in die Klischeekiste gegriffen.

Read Now
Ein Kuss für den CEO

eLue: Dieses „Buch“ ist so schön, ich muss mich zwischendurch bemerkbar machen, bevor der Roman zu recht in den Verkauf kommt.Luftig, leicht, lustig und trotzdem wunderschöne, ernsthafte Romantik, ohne aufdringlich zu sein. Man taucht ein beim Lesen in rosarote, schöne Gefühlsfelder wie aus Blumen und Duf...

Read Now
Fashion victime du PDG

otigert2: Super histoire , dommage d'arriver a la fin, j'aurais voulu continuer.J'espère qu'il y aura bientôt une suite.

Read Now
Fated to My Ex- Best Friend

Kaenda: The story tends to drag out the story line with repeated and unnecessary details.

Read Now