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जुड़वा झुमके

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Summary

एक पुराना संदूक। एक अकेला झुमका। और एक ऐसा राज़, जो सालों से दफ़्न था। नानी के पुराने सामान में आलिया को एक खूबसूरत झुमका मिलता है। लेकिन उसके साथ उसका दूसरा झुमका नहीं है। अगले ही दिन उसकी मुलाकात एक अनजान लड़की से होती है—जिसके कान में ठीक वैसा ही झुमका है। दो अनजान लड़कियाँ। एक जैसी दो चीज़ें। और एक अतीत, जिससे दोनों अनजान हैं। लेकिन अगर ये सिर्फ़ एक इत्तेफ़ाक़ नहीं हुआ तो? कुछ राज़ छुपाए नहीं जाते… बस सही वक़्त आने तक इंतज़ार करते हैं।

Genre
Mystery
Author
Mehek
Status
5d ago
Chapters
20
Rating
n/a
Age Rating
13+

Chapter 1 — पुराना संदूक

बारिश की हल्की आवाज़ खिड़की से टकरा रही थी।

आलिया कमरे में रखे पुराने सामान को एक-एक करके व्यवस्थित कर रही थी। नानी के इंतकाल के बाद घर के कई कमरों की सफ़ाई हो रही थी, और आज उसकी बारी उस छोटे-से कमरे की थी, जिसे नानी सालों से अपना सामान रखने के लिए इस्तेमाल करती थीं।

कमरे में पुरानी किताबों, लकड़ी और इत्र की मिली-जुली खुशबू थी।

आलिया ने एक पुरानी अलमारी खोली।

कुछ कपड़े।

कुछ किताबें।

पुराने ख़त।

और सबसे नीचे रखा था—एक छोटा-सा लकड़ी का संदूक।

उस पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी।

आलिया ने अपनी हथेली से धूल हटाई।

“ये तो मैंने पहले कभी नहीं देखा…”

संदूक पर कोई ताला नहीं था।

उसने धीरे से ढक्कन उठाया।

अंदर कुछ पुराने कागज़, एक छोटी-सी डायरी और कपड़े में लिपटी हुई एक चीज़ रखी थी।

आलिया ने सबसे पहले कपड़ा उठाया।

जैसे ही उसने उसे खोला, उसकी आँखें ठहर गईं।

अंदर एक झुमका था।

बहुत खूबसूरत।

चाँदी जैसा चमकता हुआ, बेहद बारीक नक्काशी से बना हुआ। ऊपर एक नुकीले आकार का लाल पत्थर जड़ा था और उसके नीचे गोल गुंबदनुमा हिस्से पर भी छोटे-छोटे लाल पत्थर चमक रहे थे। सबसे नीचे चाँदी जैसे छोटे-छोटे दाने लटक रहे थे।

आलिया ने उसे हथेली पर रख लिया।

“इतना सुंदर…”

वह कुछ पल उसे देखती रही।

फिर अचानक उसे कुछ अजीब लगा।

सिर्फ़ एक झुमका?

उसने संदूक को दोबारा देखा।

उसमें दूसरा झुमका नहीं था।

आलिया ने डायरी उठाई और उसके पन्ने पलटने लगी।

ज़्यादातर पन्ने खाली थे।

लेकिन आख़िरी हिस्से में एक जगह सिर्फ़ एक लाइन लिखी थी—

“जिस दिन दूसरा झुमका वापस आएगा, उस दिन सच भी वापस आएगा।”

आलिया का हाथ वहीं रुक गया।

“दूसरा झुमका…?”

उसने दोबारा अपनी हथेली में रखे झुमके को देखा।

तभी बाहर से उसकी माँ की आवाज़ आई—

“आलिया! कहाँ हो तुम?”

“अंदर हूँ, अम्मी!”

उसने जल्दी से डायरी बंद की और झुमका कपड़े में लपेटने लगी।

लेकिन तभी कमरे के दरवाज़े पर उसकी माँ आकर रुक गईं।

उनकी नज़र आलिया के हाथ पर पड़ी।

और अगले ही पल उनके चेहरे का रंग बदल गया।

“ये तुम्हें कहाँ मिला?” ने हैरानी से पूछा—

“ये? संदूक में था। क्यों?”

माँ कुछ सेकंड तक उस झुमके को देखती रहीं।

फिर उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा—

“इसे वापस रख दो।”

“लेकिन क्यों?”

“आलिया, मैंने कहा ना… वापस रख दो।”

“अम्मी, आपको पता है ये किसका है?”

माँ ने कोई जवाब नहीं दिया।

बस संदूक बंद किया और वहाँ से चली गईं।

आलिया उन्हें जाते हुए देखती रही।

कुछ तो था।

ऐसा कुछ, जिसके बारे में उसकी माँ उसे बताना नहीं चाहती थीं।

उसने धीरे से झुमका अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया।

और उसी रात…

अपने कमरे में बैठकर उसने उस झुमके की तस्वीर खींची।

बस यूँ ही।

उसे क्या पता था कि वही तस्वीर अगले दिन उसकी पूरी दुनिया बदलने वाली थी।

---

अगली दोपहर आलिया अपनी दोस्त के साथ बाज़ार गई थी।

भीड़ के बीच चलते हुए अचानक उसकी नज़र सामने से आती एक लड़की पर पड़ी।

लड़की ने हल्के नीले रंग का कुर्ता पहना था।

उसके बाल खुले थे।

और उसके कान में…

आलिया की नज़र वहीं जम गई।

एक झुमका।

वही नक्काशी।

वही लाल पत्थर।

वही गुंबदनुमा हिस्सा।

वही नीचे लटकते छोटे-छोटे दाने।

आलिया कुछ पल के लिए जैसे साँस लेना भूल गई।

उसने अपनी जेब में हाथ डाला।

वही झुमका अभी भी उसके पास था।

उसने उसे बाहर निकाला।

फिर सामने खड़ी लड़की के कान की तरफ़ देखा।

दोनों झुमके…

बिल्कुल एक जैसे थे।

आलिया के मुँह से अनजाने में निकला—

“ये… तुम्हें कहाँ मिला?”

लड़की ने हैरानी से उसकी तरफ़ देखा।

“क्या?”

आलिया ने काँपती उँगली से उसके झुमके की तरफ़ इशारा किया।

“ये झुमका।”

लड़की ने उसे छुआ।

फिर हल्की-सी मुस्कान के साथ बोली—

“ये तो मेरे पास बचपन से है।”

आलिया कुछ बोल नहीं पाई।

लड़की आगे बढ़ गई।

लेकिन जाने से पहले उसने पलटकर आलिया को देखा।

उनकी नज़रें एक पल के लिए मिलीं।

आलिया ने नीचे अपनी हथेली में रखे झुमके को देखा।

फिर उस लड़की को।

दो झुमके।

दो अनजान लड़कियाँ।

और एक ऐसा राज़, जिसके बारे में दोनों में से कोई कुछ नहीं जानता था।

लेकिन आलिया के मन में एक सवाल बार-बार घूम रहा था—

अगर ये झुमका उस लड़की के पास बचपन से था…

तो नानी के संदूक में इसका दूसरा झुमका कैसे पहुँचा?

और उससे भी बड़ा सवाल—

आख़िर वो दोनों झुमके अलग हुए कैसे थे?

आलिया को अभी नहीं पता था कि इस सवाल का जवाब उसकी नानी के पुराने संदूक में नहीं…

बल्कि उसके अपने परिवार के अतीत में छिपा था।

और उस अतीत का एक राज़ अब धीरे-धीरे सामने आने वाला था।

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