Chapter 1 → पहला सफ़र 🎟️
सुबह के लगभग 10 बजकर 10 मिनट हुए थे।
Meera घर से निकलकर Bus Stand पर आकर खड़ी हो गई थी। आज उसके हाथ में कोई खास सामान नहीं था—बस एक Black Bag और उसका छोटा-सा Pink और Purple Lunch Box।
लेकिन उसके मन में बहुत कुछ था।
आज उसकी First Job का पहला दिन था।
उसे अभी तक ठीक से समझ नहीं आ रहा था कि वहाँ जाकर क्या करना होगा। किससे बात करनी होगी, काम कैसे Manage करना होगा और अगर उससे कोई गलती हो गई तो?
इन छोटी-छोटी बातों ने उसके मन में एक अजीब-सी घबराहट पैदा कर रखी थी।
Meera ने अपना Phone निकाला।
स्क्रीन पर नज़र गई।
कोई नया Message नहीं था।
उसने Phone वापस रखा और सड़क की तरफ़ देखने लगी।
उसे 727 Bus का Wait था।
कुछ मिनट बीते।
फिर दूर से आती Bus दिखाई दी।
Meera की नज़र Bus के Number पर गई।
727.
वह आगे बढ़ी और Bus में चढ़ गई।
अंदर ज़्यादा भीड़ नहीं थी। उसकी नज़र एक खाली Window Seat पर पड़ी और वह वहीं जाकर बैठ गई।
Bus चल पड़ी।
Meera ने खिड़की से बाहर देखना शुरू किया।
सड़क पर भागती गाड़ियाँ, रास्ते से गुजरते लोग, छोटी-बड़ी दुकानें और सुबह की भागदौड़—सब अपनी जगह चल रहा था।
लेकिन आज Meera के लिए सब कुछ थोड़ा अलग था।
क्योंकि आज वह किसी ऐसी जगह जा रही थी, जहाँ जाने का उसने पहले कभी अनुभव नहीं किया था।
First Job.
ये दो शब्द उसके दिमाग में बार-बार घूम रहे थे।
उसने एक बार फिर Phone निकाला।
कुछ पल स्क्रीन को देखा और फिर उसे बंद कर दिया।
खिड़की के बाहर देखते हुए उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आई।
उसे नहीं पता था कि आज का दिन कैसा होगा।
बस इतना पता था कि आज से उसकी ज़िंदगी में एक नया हिस्सा शुरू होने वाला था।
कुछ देर बाद Bus अपने रास्ते पर आगे बढ़ती हुई South Ex के पास पहुँची।
Meera ने अपना Bag संभाला और Bus से उतर गई।
वहाँ से उसे Subway से होकर आगे जाना था।
Bookstore बहुत दूर नहीं था।
फिर भी जैसे-जैसे वह आगे बढ़ रही थी, उसके कदमों के साथ उसकी घबराहट भी बढ़ती जा रही थी।
आख़िरकार वह Bookstore के सामने पहुँच गई।
कुछ सेकंड तक वह वहीं खड़ी रही।
फिर उसने गहरी साँस ली और अंदर चली गई।
अंदर कदम रखते ही उसकी नज़र चारों तरफ़ रखी Books पर पड़ी।
अलग-अलग तरह की Books…
अलग-अलग Covers…
और हर Shelf पर जैसे कोई नई कहानी रखी हुई थी।
Meera की आँखों में चमक आ गई।
बाहर से ज़्यादा उसे यह जगह अंदर से अच्छी लगी।
शायद इसलिए नहीं कि वह आज यहाँ काम करने आई थी।
बल्कि इसलिए कि उसे हमेशा से कहानियों वाली चीज़ें अपनी तरफ़ खींचती थीं।
वह अभी Books को देख ही रही थी कि वहाँ काम कर रहे एक लड़के ने उसकी तरफ़ देखकर पूछा,
“चाय लोगी?”
Meera ने तुरंत जवाब दिया,
“मैं चाय नहीं पीती।”
वह बोला,
“पी लो।”
Meera कुछ कहती, उससे पहले ही उसकी नज़र फिर सामने रखी Books पर चली गई।
उस दिन का काम उसके लिए आसान नहीं था।
बहुत कुछ नया था।
बहुत कुछ सीखना था।
लेकिन दिन धीरे-धीरे बीत गया।
शाम को जब Meera Bookstore से बाहर निकली, तो सुबह वाली घबराहट पहले जैसी नहीं थी।
उसने अपने Bag में हाथ डाला।
वहाँ सुबह का Ticket रखा हुआ था।
वह कुछ पल उसे देखती रही।
एक छोटा-सा कागज़।
सिर्फ़ एक Bus Journey का निशान।
लेकिन Meera ने उसे फेंका नहीं।
उसने Ticket वापस अपने Bag में रख लिया।
उसे तब कहाँ पता था कि यह सिर्फ़ उसका पहला Ticket नहीं था।
यह उसके उस सफ़र की पहली निशानी थी, जो उसे बहुत दूर तक ले जाने वाला था।








